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  "type": "article",
  "title": "इजराइल चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू आगे, लेकिन बहुमत से अब भी दूर",
  "summary": "इजराइल में हुए आम चुनावों के शुरुआती और आंशिक नतीजों के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने प्रतिद्वंद्वी गदी एसेनकोट से आगे चल रहे हैं, हालांकि उनकी पार्टी और सहयोगी दल संसद में बहुमत के आंकड़े से पीछे हैं।",
  "content": "इजराइल के हालिया आम चुनाव के आंशिक नतीजे सामने आ चुके हैं, जिससे देश की राजनीतिक स्थिति काफी उलझन भरी नजर आ रही है। मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अनुभवी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गदी एसेनकोट से आगे चल रहे हैं, लेकिन उनकी सरकार अभी भी बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर है। इस चुनाव ने इजराइल के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता पैदा कर दी है, जहां हर एक सीट और गठबंधन का खेल सरकार के गठन की दिशा तय करेगा।\n\n \n\nवोटिंग के आंकड़े और सीटों का गणित\n\nडेटा के मुताबिक, कुल डाले गए वोटों में से 85 फीसदी मतों की गिनती पूरी हो चुकी है। इस चरण तक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिक्विड पार्टी और उनके दक्षिणपंथी तथा अति-रढ़िवादी यहूदी सहयोगियों को 120 सीटों वाली नेसेट में 53 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी तरफ, गदी एसेनकोट की यशार पार्टी और उनके खेमे के तीन अन्य यहूदी विपक्षी दलों को 48 सीटें मिलती दिख रही हैं। दोनों प्रमुख नेताओं ने चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अपनी-अपनी सरकार बनाने की कोशिश करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।\n\n \n\nअरब दलों की भूमिका और किंगमेकर का सवाल\n\nइस चुनाव में अरब नीत दलों का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है, जो रिकॉर्ड 19 सीटें जीतने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। ये दल इस सियासी मुकाबले में किंगमेकर की भूमिका में उभर सकते हैं। हालांकि, स्थिति यह है कि एक को छोड़कर बाकी सभी यहूदी दलों ने इन अरब दलों के साथ मिलकर काम करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बावजूद, विपक्षी खेमे और वामपंथी दलों के नेताओं का मानना है कि बदलाव की सरकार बनाने के लिए इन दलों का समर्थन अहम हो सकता है। डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता याइर गोलान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि देश का कोई भविष्य नहीं है जब तक डर और नस्लवाद को खत्म नहीं किया जाता।\n\n \n\nडाक मतपत्रों और सैनिकों के वोटों का इंतजार\n\nअधिकारी अभी भी सैनिकों और राजनयिकों के बीच से आए लगभग 430,000 से 480,000 अनुपस्थित मतपत्रों या एब्सेंटी बैलेट्स की गिनती का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से अंतिम आधिकारिक चुनावी परिणामों के सामने आने में अभी एक या दो दिन का और वक्त लग सकता है। जैसे ही इन वोटों की तस्वीर साफ होगी, देश की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग सभी राजनीतिक गुटों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति उस नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे, जिनके पास बहुमत या सफलता की सबसे मजबूत संभावना होगी।\n\n \n\nराष्ट्रपति की मध्यस्थता और चुनाव का रिकॉर्ड\n\nयरुशलम स्थित अपने आवास पर हुई बैठक के दौरान राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने मंगलवार को हुए मतदान में 77.7 प्रतिशत के भारी मतदान प्रतिशत की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह इजराइली समाज के लिए एक सम्मान का प्रतीक है और यह देखना उल्लेखनीय है कि देश में लोकतंत्र की इच्छा कितनी गहरी है। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अगले हफ्ते आधिकारिक नतीजे मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, जिसके बाद वह हर गुट से चर्चा करेंगे ताकि देश को दोबारा चुनाव के दौर में जाने से बचाया जा सके।\n\n \n\nनेताओं के दावे और भविष्य की राजनीतिक चालें\n\nचुनावी नतीजों और शुरुआती एग्जिट पोल्स के बाद दोनों पक्षों की तरफ से जीत के दावे किए गए। गदी एसेनकोट ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि जनता ने बदलाव के पक्ष में अपना फैसला सुना दिया है। वहीं, बेंजामिन नेतन्याहू ने यरुशलम स्थित लिक्विड मुख्यालय में पेश होकर कहा कि उनके दक्षिणपंथी गठबंधन ने भारी बहुमत हासिल किया है और देश को चलाने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय सरकार की आवश्यकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले हफ्तों में कौन सा नेता जोड़-तोड़ की इस राजनीति में बाजी मारता है।\n\nइसका आप पर असर\nइजराइल के इस खंडित चुनावी जनादेश का असर देश की नीतिगत प्राथमिकताओं, सुरक्षा बजट और क्षेत्रीय कूटनीति पर सीधा पड़ेगा।\n\n• भारत में: भारत के निवेशकों और रणनीतिकारों के लिए इस राजनीतिक स्थिरता या अस्थिरता का असर रक्षा तथा तकनीकी सहयोग समझौतों की रफ्तार पर पड़ सकता है।\n• इजराइल में: स्थानीय नागरिकों और कारोबारियों को नई सरकार के गठन में देरी के कारण कर नीतियों, सैन्य सेवा कानूनों और न्यायिक सुधारों के मोर्चे पर नीतिगत अनिश्चितता का सामना करना होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदेश के इस त्रिशंकु चुनावी परिणाम के पीछे कई अहम सामाजिक और राजनीतिक कारण छिपे हैं।\n\n• सुरक्षा संकट और विश्वास: 7 अक्टूबर 2023 के हमलों और उसके बाद के क्षेत्रीय युद्धों ने मतदाताओं को सुरक्षा और नेतृत्त्व के मुद्दे पर गहराई से विभाजित कर दिया है।\n• बढ़ता मतदान प्रतिशत: समाज के हर वर्ग, विशेषकर अरब इजराइल समुदाय और रूढ़िवादी मतदाताओं की सक्रियता ने पारंपरिक सीटों के गणित को पूरी तरह बदल दिया है।\n• गठबंधन की मजबूरियां: कई छोटे दलों और वैचारिक रूप से बंटे धड़ों के कारण किसी भी एक मोर्चे को स्पष्ट बहुमत मिलना बेहद कठिन हो गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इजराइल की संसद को क्या कहा जाता है?\nइजराइल की 120 सीटों वाली संसद को नेसेट कहा जाता है।\n\n2. वर्तमान में चुनाव में कौन आगे चल रहा है?\nआंशिक नतीजों के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का लिक्विड गठबंधन अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे है।\n\n3. मंगलवार को हुए चुनाव में मतदान प्रतिशत कितना रहा?\nइस चुनाव में 77.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो दो दशकों में सबसे अधिक है।\n\n4. अंतिम परिणाम आने में अभी कितना समय लग सकता है?\nसैनिकों और राजनयिकों के हजारों अनुपस्थित मतपत्रों की गिनती बाकी होने के कारण एक या दो दिन का वक्त लग सकता है।\n\n5. सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा क्या है?\n120 सीटों वाली नेसेट में बहुमत के लिए कम से कम 61 सीटों की आवश्यकता होती है।",
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  "category": "मध्य पूर्व",
  "publishedAt": "2026-10-29",
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