पश्चिम एशिया में नया टकराव, ईरान संकट के बीच सऊदी अरब और हूती विद्रोही फिर आमने-सामने आए पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव का दायरा अब यमन और सऊदी अरब तक फैल गया है, जहां रणनीतिक समुद्री रास्तों पर हूती विद्रोहियों का कब्जा वैश्विक ऊर्जा और व्यापार को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया के अशांत माहौल में जारी सैन्य टकराव अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इसी साल 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त रूप से हवाई हमले किए थे, तब से पूरे इलाके में बारूद की गंध फैली हुई है। इस सैन्य संकट के बीच ईरान ने पिछले कई महीनों से रणनीतिक रूप से संवेदनशील स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर रखा है। सामान्य शांति काल के दौरान इस समुद्री रास्ते से होकर दुनिया की कुल ईंधन खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता था। अब संकट केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका प्रभाव उन अहम समुद्री गलियारों पर भी दिखने लगा है जो सीधे तौर पर एशिया और यूरोप को जोड़ते हैं। बाब अल-मन्दब पर हूती विद्रोहियों की पकड़ मजबूत व्यापारिक और नौसैनिक दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य पर हूती विद्रोहियों का प्रभाव काफी बढ़ चुका है। यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हिंद महासागर को लाल सागर और आगे चलकर स्वेज नहर से जोड़ने का काम करता है। जमीनी हकीकत यह बन चुकी है कि ईरान के ठिकानों से शुरू हुआ यह व्यापक सैन्य संकट अब हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए यमन और सऊदी अरब की सीमाओं में तब्दील हो चुका है। दोनों पक्षों के बीच पहले से चले आ रहे पुराने तनाव ने अब सीधे सैन्य हमलों का रूप ले लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारों की सुरक्षा पूरी तरह चरमरा गई है। सना हवाई अड्डे पर हमले से भड़की नई चिंगारी यमन के हूती गुट और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक रूप से टकराव बना रहा है, परंतु ताजा तनाव 3 जुलाई की एक गंभीर घटना के बाद तेजी से बढ़ा। उस दिन यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर ईरान से वापस लौट रहे हूती प्रतिनिधिमंडल के एक विमान को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई यमन की सऊदी अरब समर्थित सरकार द्वारा अंजाम दी गई थी। यमनी सरकार का स्पष्ट कहना था कि संबंधित उड़ान ने देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन किया है। यमन का यह भी निरंतर आरोप रहा है कि ऐसी उड़ानों का उपयोग कर ईरान सीधे तौर पर हूती विद्रोहियों को आधुनिक सैन्य साजो-सामान और हथियार पहुंचाता रहा है। इस हवाई हमले के बाद हूती विद्रोही पूरी तरह आक्रोशित हो गए और उन्होंने खुले तौर पर बदला लेने की घोषणा कर दी। हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने इस घटना के बाद बयान जारी करते हुए कहा कि इस हमले ने यमन में तनाव घटाने की प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म कर दिया है। सऊदी अरब के खिलाफ हर मोर्चे पर आक्रामक नीति सना हवाई अड्डे पर अपनी उड़ान को निशाना बनाए जाने के बाद हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी सूरत में शांत नहीं बैठेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जिस तरह उनके विमान को अवरुद्ध किया गया और उस पर हमला हुआ, उसी प्रकार वे अब सऊदी अरब के सभी व्यापारिक और नागरिक मार्गों को अवरुद्ध करेंगे। हूती नेतृत्व ने जमीन से लेकर आसमान और समंदर तक सऊदी अरब के जहाजों तथा उड़ानों को निशाना बनाने की खुली घोषणा कर दी। इसके बाद हूती गुट ने सऊदी अरब के कई प्रमुख शहरों तथा समुद्री जहाजों पर सिलसिलेवार हमले शुरू कर दिए, जिसके चलते यमन के जमीनी मोर्चों पर भी व्यापक सैन्य संघर्ष छिड़ गया। रणनीतिक मोखा बंदरगाह और मयून द्वीप पर कब्जा जमीनी मोर्चे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए हूती विद्रोहियों ने यमन की आधिकारिक सरकार को बड़े रणनीतिक झटके दिए हैं। विद्रोही बलों ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले मोखा बंदरगाह शहर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है और उसे यमनी सरकारी नियंत्रण से छीन लिया है। इसके अलावा बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य क्षेत्र में स्थित कई प्रमुख द्वीपों पर भी हूतियों ने अपनी सैन्य चौकियां स्थापित कर ली हैं। इन कब्जे वाले द्वीपों में सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मयून द्वीप भी शामिल है, जिससे लाल सागर के मुहाने पर उनकी सैन्य निगरानी और नियंत्रण अभूतपूर्व रूप से मजबूत हो चुका है। टकराव की जड़ में धार्मिक और भू-राजनीतिक होड़ सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच यह गहरी शत्रुता केवल हालिया घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और वैचारिक विभाजन भी मौजूद है। सऊदी अरब पारंपरिक रूप से सुन्नी बहुल प्रभाव वाला राष्ट्र है, जबकि हूती आंदोलन शिया समुदाय की पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। हूती गुट की धार्मिक और राजनीतिक विचारधारा सऊदी अरब की नीतियों से बिल्कुल मेल नहीं खाती। इसके अतिरिक्त हूतियों को ईरान से निरंतर सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक मदद प्राप्त होती रही है। पूरे पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय वर्चस्व कायम करने के लिए ईरान और सऊदी अरब के बीच दशकों से शक्ति संतुलन की प्रतिस्पर्धा चल रही है, जिसके चलते यमन लंबे समय से इन दोनों बड़ी ताकतों के बीच परोक्ष युद्ध का केंद्र बना रहा है। हूती आंदोलन की पृष्ठभूमि और यमन का गृहयुद्ध हूती आंदोलन की ऐतिहासिक शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी, जब शिया धर्मगुरु हुसैन बदरुद्दीन अल-हूती ने इस संगठन की नींव रखी थी। उन्हीं के नाम पर इस पूरे विद्रोही गुट को हूती कहा जाता है। अपने शुरुआती दौर में यह गुट यमन की तत्कालीन सरकार में फैले तथाकथित भ्रष्टाचार और उस दौर में सरकार की अमेरिका व इजरायल के साथ बढ़ती नजदीकियों के कड़े विरोध के लिए खड़ा हुआ था। समय के साथ अपनी सैन्य ताकत बढ़ाते हुए हूती विद्रोहियों ने वर्ष 2014 में यमन की राजधानी सना पर अप्रत्याशित रूप से कब्जा जमा लिया था। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। वर्ष 2014 और 2015 के दौरान सना सहित यमन के एक विशाल भूभाग पर हूतियों का आधिपत्य स्थापित हो गया, जिसके बाद यमन एक विनाशकारी गृहयुद्ध की चपेट में आ गया। सऊदी अरब अपनी दक्षिणी सीमा के ठीक पास हूती विद्रोहियों की इस मजबूत होती सैन्य मौजूदगी को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधा और गंभीर खतरा मानता है। इसका आप पर असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मन्दब जैसे प्रमुख जलमार्गों में सैन्य तनाव बढ़ने से दुनिया भर में ईंधन और समुद्री माल ढुलाई की लागत पर सीधा असर पड़ सकता है। • ईंधन की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से ईंधन के दाम बढ़ सकते हैं। शांति काल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल गुजरता था, जिसकी रुकावट वैश्विक बाजार में अस्थिरता ला सकती है। • माल ढुलाई और महंगाई: लाल सागर और स्वेज नहर के मार्ग प्रभावित होने पर जहाजों को लंबे समुद्री रास्तों का सहारा लेना पड़ता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शिपिंग लागत और आयातित वस्तुओं की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है। • सऊदी अरब जाने वाले यात्री: हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के समुद्री और हवाई रास्तों को निशाना बनाने की चेतावनियों के चलते यात्रा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। सऊदी अरब की यात्रा करने वाले यात्रियों और एयरलाइनों को संभावित देरी या मार्ग परिवर्तनों का सामना करना पड़ सकता है। • पश्चिम एशिया में सुरक्षा: यमन और सऊदी अरब के बीच बढ़ते संघर्ष से पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता और गहरा सकती है। खाड़ी देशों में काम करने वाले विदेशी कामगारों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ यह नया सैन्य तनाव मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई, ईरान द्वारा महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने और यमन में हवाई हमले के बदले की घोषणा से उपजा है। • प्रत्यक्ष कारण: 3 जुलाई को यमन के सना हवाई अड्डे पर ईरान से लौटे हूती प्रतिनिधिमंडल के विमान पर सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने हमला किया था। इस हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने बदला लेने का ऐलान करते हुए सऊदी अरब के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई शुरू कर दी। • ईरान और खाड़ी तनाव: 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले किए थे, जिसके बाद से क्षेत्र में अशांति फैली हुई है। इसके जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कई महीनों से बंद कर रखा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया। • हथियारों की तस्करी का विवाद: यमनी सरकार का आरोप है कि ईरान से आने वाले यात्री विमानों का इस्तेमाल हूती विद्रोहियों तक अवैध हथियार पहुंचाने और देश की संप्रभुता का उल्लंघन करने के लिए किया जाता है। • ऐतिहासिक और वैचारिक प्रतिस्पर्धा: सुन्नी बहुल सऊदी अरब और शिया समर्थित हूती गुट के बीच 1990 के दशक और 2014 के यमन गृहयुद्ध से ही तीखा टकराव बना हुआ है। ईरान और सऊदी अरब के बीच क्षेत्रीय प्रभाव की होड़ ने यमन को लंबे समय से एक परोक्ष युद्ध का केंद्र बनाए रखा है। सवाल-जवाब 1. मध्य पूर्व में यह नया टकराव कब और कैसे शुरू हुआ? इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हवाई हमलों के बाद तनाव बढ़ा, जिसने बाद में यमन और सऊदी अरब के संघर्ष का रूप ले लिया। 2. हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच ताजा तनाव का मुख्य कारण क्या है? बीते 3 जुलाई को सना एयरपोर्ट पर ईरान से आ रहे हूती प्रतिनिधिमंडल के विमान पर सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने हमला किया था, जिसके बाद हूतियों ने बदले की कार्रवाई शुरू की। 3. हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने इस हमले पर क्या कहा था? याह्या सरी ने कहा था कि सना हवाई अड्डे पर हुए हमले ने यमन में तनाव घटाने की प्रक्रिया यानी डी-एस्केलेशन फेज को पूरी तरह खत्म कर दिया है। 4. हूती विद्रोहियों ने किन रणनीतिक स्थानों पर अपना नियंत्रण स्थापित किया है? हूती विद्रोही रणनीतिक रूप से अहम मोखा बंदरगाह शहर और बाब अल-मन्दब में स्थित मयून द्वीप सहित कई द्वीपों पर कब्जा कर चुके हैं। 5. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक व्यापार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? सामान्य शांति काल के दौरान दुनिया भर के ईंधन का लगभग 20 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग से होकर गुजरता था, जिसे ईरान ने महीनों से बंद कर रखा है। 6. हूती आंदोलन की स्थापना किसने और कब की थी? हूती आंदोलन की शुरुआत 1990 के दशक में शिया धर्मगुरु हुसैन बदरुद्दीन अल-हूती ने तत्कालीन यमनी सरकार के भ्रष्टाचार और विदेश नीति के विरोध में की थी। https://trendkia.com/middle-east/pashchima-eshiya-men-naya-takarava-iran-snkata-ke-bicha-saudi-arabia-aura-houthi-vidrohi-phira-amane-samane-ae-33679 TrendKia — Har trend, sabse pehle.