संघर्ष विराम प्रस्ताव पर तेहरान पहुंचा वॉशिंगटन का औपचारिक संदेश, कूटनीतिक हल की उम्मीदें बढ़ीं ईरान को युद्ध समाप्त करने की अपनी योजना पर अमेरिका का आधिकारिक प्रत्युत्तर प्राप्त हुआ है, जिस पर ईरानी कैबिनेट ने विस्तृत चर्चा शुरू कर दी है। सैन्य टकराव और गंभीर आर्थिक प्रतिबंधों के बीच तेहरान और वॉशिंगटन के कूटनीतिक संपर्कों में एक नया मोड़ सामने आया है। ईरान को संघर्ष विराम और जंग खत्म करने की अपनी हालिया योजना पर संयुक्त राज्य अमेरिका का आधिकारिक जवाब मिल गया है। हालांकि, ईरानी नेतृत्व ने अभी इस बात का खुलासा नहीं किया है कि वॉशिंगटन ने उनके सुझावों पर सहमति जताई है या उन्हें खारिज कर दिया है। तेहरान में आयोजित मंत्रिपरिषद की विशेष बैठक में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस अमेरिकी संदेश को राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और शीर्ष मंत्रियों के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके बाद सरकारी प्रवक्ता फतेमेह मोहाजेरानी ने इस कूटनीतिक प्रगति की पुष्टि की। समझौते के लिए ईरान की कूटनीतिक रणनीति अमेरिकी प्रत्युत्तर मिलने के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन राजनयिक समाधान को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा, लेकिन देश की संप्रभुता और जनता के मूलभूत अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। राष्ट्रपति के अनुसार, शांति का कोई भी टिकाऊ ढांचा तभी प्रभावी हो सकता है जब वह दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करने वाली निष्पक्ष और संतुलित व्यवस्था पर आधारित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी पक्ष बराबरी के स्तर पर बातचीत का पक्षधर है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेगा। न्यूयॉर्क में परदे के पीछे चली कूटनीतिक बातचीत इस ताजा कूटनीतिक पहल की जमीन पिछले सप्ताह तैयार हुई थी, जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों के राजनयिकों के बीच सीधे संवाद के बजाय अप्रत्यक्ष माध्यमों से विचार विमर्श हुआ। कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने दोनों विरोधी पक्षों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में अहम भूमिका निभाई। तेहरान में कैबिनेट को जानकारी देते हुए विदेश मंत्री ने न्यूयॉर्क में हुई विभिन्न दौर की बैठकों का ब्योरा दिया और बताया कि किस तरह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सामान्य करने की रूपरेखा मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाई गई थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए तेहरान की प्रमुख शर्तें ईरानी पक्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री जलडमरूमध्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही सामान्य करने के लिए ठोस शर्तें रखी हैं। अब्बास अराघची के अनुसार, यदि वॉशिंगटन ईरानी बंदरगाहों पर लागू समुद्री नाकाबंदी समाप्त कर दे, विदेशों में रोकी गई संपत्तियों पर लगी रोक हटाए और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरानी कच्चे तेल की बिक्री पर लगे व्यापारिक प्रतिबंधों में छूट प्रदान करे, तो तेहरान सात दिनों यानी एक सप्ताह के भीतर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए दोबारा खोल सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर कड़ा रुख दिखाते हुए इसे सार्वजनिक मंच पर स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि ईरान भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान झेलने के कारण जल्दबाजी में समझौते का प्रयास कर रहा है, इसलिए उसकी यह पेशकश स्वीकार योग्य नहीं है। इस तीखी सार्वजनिक बयानबाजी के बावजूद दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ लगातार सक्रिय हैं और परदे के पीछे समाधान तलाशने के प्रयास जारी रखे हुए हैं। आर्थिक दबाव और तेजी से गिरती ईरानी मुद्रा कूटनीतिक खींचतान के साथ-साथ ईरान के घरेलू मोर्चे पर आर्थिक संकट बेहद गंभीर रूप ले चुका है। लंबे समय से जारी युद्ध और नाकाबंदी के चलते राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ है। तेहरान के मुद्रा बाजार में मंगलवार को ईरानी रियाल में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, जहां एक अमेरिकी डॉलर का भाव 25 लाख रियाल के स्तर को पार कर गया। इससे पहले महीने की शुरुआत में दो सितंबर को डॉलर के मुकाबले रियाल लगभग 22 लाख के स्तर पर था, जिसका अर्थ है कि बीते कुछ ही हफ्तों में मुद्रा की क्रय शक्ति में भयानक गिरावट आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी मंगलवार को ईरानी अर्थव्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर टिप्पणी करते हुए संकेत दिया था कि जारी संकट के कारण युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। इसका आप पर असर खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक संवाद आगे बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं के दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ सकता है। • कच्चे तेल की कीमतें: यदि बातचीत से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नरमी आएगी। इससे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में स्थिरता आने से परिवहन लागत में कमी आ सकती है। • आयात-निर्यात और मालभाड़ा: समुद्री मार्ग सुरक्षित होने से मालवाहक जहाजों का बीमा और लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा। इसका फायदा आयातित वस्तुओं की अंतिम कीमतों पर देखने को मिलेगा। • खाड़ी में प्रवासी: क्षेत्र में शांति स्थापित होने से वहां कार्यरत लाखों कामगारों की सुरक्षा मजबूत होगी। इससे प्रवासियों द्वारा स्वदेश भेजी जाने वाली रकम और उनकी नौकरी पर अनिश्चितता खत्म होगी। • मुद्रास्फीति का दबाव: युद्ध लंबा खिंचने पर घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। शांति समझौते से सप्लाई चेन बहाल होने पर वैश्विक महंगाई की रफ्तार थमेगी। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम महीनों के सैन्य तनाव, समुद्री नाकाबंदी और ईरान के भीतर गंभीर आर्थिक संकट के दबाव के बीच सामने आया है। • संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कूटनीति: न्यूयॉर्क में ईरानी विदेश मंत्री की मौजूदगी ने अप्रत्यक्ष संवाद का मंच तैयार किया। कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने दोनों विरोधी देशों के बीच संदेश पहुंचाने की भूमिका निभाई। • आर्थिक नाकाबंदी का प्रभाव: अमेरिकी प्रतिबंधों और बंदरगाहों की घेराबंदी ने तेहरान की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया है। ईरानी रियाल के 25 लाख प्रति डॉलर से ऊपर गिरने के कारण तेहरान को समझौते की शर्तें रखनी पड़ीं। • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रणनीतिक महत्व: ईरान ने वैश्विक तेल मार्ग को सौदेबाजी के एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। इसके बदले वह अपनी जब्त संपत्तियों की बहाली और तेल बिक्री पर छूट हासिल करना चाहता है। सवाल-जवाब 1. ईरान को अमेरिका से किस बात पर आधिकारिक जवाब मिला है? ईरान को मौजूदा युद्ध समाप्त करने के लिए अपनी ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर अमेरिका का औपचारिक जवाब प्राप्त हुआ है। 2. क्या अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है? ईरान ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अमेरिका ने प्रस्ताव को स्वीकार किया है अथवा खारिज कर दिया है। 3. दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत में किन मध्यस्थों ने भूमिका निभाई? न्यूयॉर्क में हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं में कतर और पाकिस्तान के राजनयिकों ने मध्यस्थ के तौर पर कार्य किया। 4. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने क्या शर्तें रखी हैं? ईरान ने बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाने, जब्त संपत्तियां वापस करने और तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में छूट मिलने पर एक हफ्ते में मार्ग खोलने की बात कही है। 5. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाया? डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि ईरान युद्ध में भारी नुकसान झेलने के कारण यह पेशकश कर रहा है। 6. युद्ध के बीच ईरानी मुद्रा रियाल का क्या हाल है? ईरानी रियाल में रिकॉर्ड गिरावट आई है और तेहरान में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से अधिक के स्तर पर पहुंच गई है। https://trendkia.com/middle-east/sngharsha-virama-prastava-para-tehran-pahuncha-washington-ka-aupacharika-sndesha-kutanitika-hala-ki-ummiden-barhin-40586 TrendKia — Har trend, sabse pehle.