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  "type": "article",
  "title": "अमेरिका के मध्यावधि नतीजों से इजराइल में खलबली, क्या खतरे में पड़ गए हैं दोनों देशों के दशकों पुराने रिश्ते",
  "summary": "अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों के परिणामों ने इजराइली राजनीतिक गलियारों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। ट्रंप प्रशासन द्वारा अचानक सैन्य सहायता रोकने के संकेतों और दोनों दलों में इजराइल की बढ़ती आलोचना से कूटनीतिक भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।",
  "content": "अमेरिका और इजराइल के बीच दशकों पुराना कूटनीतिक और सैन्य गठबंधन अब एक बड़े मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। जैसे-जैसे अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे सामने आए, इजराइल में लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक धारणाएं और समीकरण अचानक हिलने लगे। जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम दोनों देशों के रिश्तों में एक बहुत बड़ी पीढ़ीगत उथल-पुथल साबित हो सकता है, जिससे आने वाले समय में कूटनीति के तौर-तरीके पूरी तरह बदल जाएंगे।\n\nइजराइल के सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार येदियोथ अहरोनोथ में एक प्रमुख पत्रकार ने अपने लेख में स्पष्ट शब्दों में लिखा कि इजराइल के लिए यह एक पीढ़ीगत बदलाव जैसा होगा। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने जैसा बोया था, आज उसे वैसा ही परिणाम भुगतना पड़ रहा है। इस बीच, देश के विपक्षी नेताओं ने भी मौजूदा प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि इन अमेरिकी नतीजों से साफ पता चलता है कि बेंजामिन नेतन्याहू डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों खेमों में कितने अवांछित और असहज हो चुके हैं।\n\nअमेरिका में चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बना इजराइल\nअमेरिकी चुनावी मैदान में विभिन्न सीटों पर इजराइल के साथ संबंध एक बड़ा और संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरे थे। डेमोक्रेटिक पार्टी के कई उम्मीदवारों ने गाजा और कब्जेदार वेस्ट बैंक में इजराइली सैन्य कार्रवाइयों की खुलकर आलोचना की। इसके अलावा, ईरान के साथ साझा युद्ध में होने वाला भारी वित्तीय खर्च भी अमेरिकी मतदाताओं के बीच बहस का एक मुख्य केंद्र बना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार ठहराया, जिसे बड़े पैमाने पर ऐसा युद्ध माना जाता है जिसे इजराइल के नेता ने ही बढ़ावा दिया था।\n\nदूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस बात का हवाला दिया कि अमेरिका और इजराइल के बीच के संबंध उन चार मुख्य वजहों में शामिल हैं जिनके कारण मतदाताओं ने पार्टी से दूरी बनाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब इजराइल के साथ इस साझेदारी को मुख्य अमेरिकी सहयोगी के भीतर एक राजनीतिक समस्या के रूप में देखा जाने लगा है। इजराइली राजनीतिक और सुरक्षा विश्लेषक याकोव काट्ज ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि डेमोक्रेट्स का रुख तो जगजाहिर था, लेकिन अब जिस तरह से उंगली उठाई जा रही है और यह कहा जा रहा है कि अमेरिकी मतदाता इजराइल पर अपना रुख बदलना चाहते हैं, उससे इजराइली अधिकारी हैरान हैं कि यह सब किस दिशा में आगे बढ़ेगा।\n\nसैन्य सहायता में कटौती और कूटनीतिक झटके\nइजराइल के भीतर अब सबसे बड़ा और डरावना सवाल यह मंडरा रहा है कि इस राजनीतिक बदलाव का देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव पर क्या असर पड़ेगा। अब तक इजराइल में यह अटूट विश्वास बना हुआ था कि अमेरिकी सैन्य और कूटनीतिक समर्थन हर हाल में अडिग रहेगा, भले ही अमेरिकी मतदाताओं में नाराजगी बढ़ रही हो, डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बेंजामिन नेतन्याहू को सार्वजनिक तौर पर तीखी बातें कही गई हों या ईरान और लेबनान में इजराइली कार्रवाइयों को लेकर मतभेद रहे हों। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार ट्रंप के साथ अपनी गहरी घनिष्ठता का दावा करते आए थे और दोनों के बीच सच्ची दोस्ती व अटूट समर्थन का जिक्र करते थे।\n\nमहज नौ महीने पहले ही इजराइली नागरिकों ने देखा था कि उनकी सेना ने अमेरिकी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ईरान के खिलाफ युद्ध लड़ा था। उस दौरान दोनों सहयोगियों के बीच अभूतपूर्व तालमेल को सैन्य प्रवक्ताओं और राजनेताओं द्वारा हर दिन दोहराया जाता था। ऐसे में, फॉक्स न्यूज को दिए गए एक साक्षात्कार में डोनाल्ड ट्रंप के उस अप्रत्याशित बयान ने इजराइल में सन्नाटा खींच दिया जिसमें उन्होंने घोषणा की कि वह इजराइल को दी जाने वाली 3.8 अरब डॉलर की सैन्य सहायता को योजना से दो साल पहले ही बंद कर देंगे। सहायता राशि के रुकने से ज्यादा बड़ा झटका इस बात ने दिया कि यह फैसला एक कूटनीतिक साझीदार के रूप में इजराइल की स्थिति के बारे में क्या कहता है।\n\nइजराइली नेतृत्व की प्रतिक्रिया और भविष्य की चुनौतियां\nइजराइल के राष्ट्रपति ने इस अमेरिकी घोषणा को खुले तौर पर एक अप्रत्याशित आघात करार दिया। देश के प्रमुख अखबार येदियोथ अहरोनोथ ने अपनी रिपोर्ट की सुर्खी में लिखा कि किसी को कुछ नहीं पता, क्योंकि घटना के दो दिन बाद भी अधिकारी यह समझ पाने में संघर्ष कर रहे थे कि ट्रंप की यह टिप्पणी वास्तव में कितनी गंभीर थी। हालांकि, इसके कई दिनों बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से प्रतिक्रिया आई जिसमें कहा गया कि अमेरिकी सहायता से साझीदारी की ओर यह बदलाव द्विपक्षीय संबंधों की ताकत और परिपक्वता को दर्शाता है।\n\nयह सच है कि अमेरिकी सैन्य सहायता इजराइल के कुल वार्षिक रक्षा बजट का 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा है। इसके बावजूद, रक्षा और सुरक्षा मामलों के लेखक याकोव काट्ज का मानना है कि ट्रंप का यह ऐलान भविष्य की फंडिंग, हथियारों की बिक्री और साझा सैन्य परियोजनाओं से जुड़े एक बहुत बड़े सवाल का महज़ एक संकेत भर है। डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली अमेरिकी कांग्रेस इन तमाम प्रक्रियाओं को धीमा या पूरी तरह ठप कर सकती है, भले ही इसके लिए ट्रंप के फैसले को पलटने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजराइल को अब इस नई और पेचीदा सच्चाई के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।\n\nयाकोव काट्ज ने यह भी रेखांकित किया कि इजराइल की पूरी वायुसेना अमेरिकी निर्मित सैन्य विमानों पर आधारित है और देश अमेरिकी स्पेयर पार्ट्स तथा हथियारों पर बुरी तरह निर्भर है। पिछले तीन वर्षों ने यह साबित कर दिया है कि देश अपनी मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए अमेरिकी आपूर्ति पर कितना निर्भर है। यदि ये प्रणालियाँ समय पर नहीं मिलती हैं, तो यह एक बहुत बड़ा रणनीतिक अंतर पैदा करेगा, जिससे युद्ध की स्थिति में टिके रहने की क्षमता के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। उनका मानना है कि इन मध्यावधि चुनावों के बाद गाजा और लेबनान में इजराइल की कार्रवाइयों को लेकर और अधिक कड़े दबाव देखने को मिल सकते हैं।\n\nइजराइल की घरेलू राजनीति और वाशिंगटन के साथ रिश्ते\nयह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे बेहद संवेदनशील समय पर सामने आया है जब इजराइल में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के बाद न तो सरकार और न ही विपक्ष को कोई स्पष्ट बहुमत मिल पाया है। देश के राष्ट्रपति अब यह तय करेंगे कि बेंजामिन नेतन्याहू या उनके मध्‍यमार्गी प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट में से किसे सबसे पहले गवर्निंग कोएलिशन बनाने का मौका दिया जाएगा। इस बीच विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने सोशल मीडिया पर अपने एक बयान में कहा कि उनके नेतृत्व में इस साझेदारी को और अधिक गहरा किया जाएगा तथा इसके द्विपक्षीय आधारों को मजबूत किया जाएगा।\n\nविपक्षी खेमे के एक अन्य नेता यायर लापिद ने सवाल उठाया कि इस स्थिति में क्या कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने उस नियम का जिक्र किया जिसने सत्तर वर्षों तक इजराइल के लिए काम किया था, लेकिन 2015 में उस समय टूट गया जब बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी कांग्रेस में ओबामा के खिलाफ भाषण दिया था। उन्होंने कहा कि इजराइल कभी भी अमेरिका के आंतरिक राजनीतिक मामलों में किसी एक पक्ष का चुनाव नहीं करता है, बल्कि वह सभी के साथ मिलकर काम करता है।\n\nदूसरी ओर, सरकार समर्थक खेमे का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय बदलाव ने देश में राजनीतिक स्थिरता की जरूरत को और बढ़ा दिया है। राइट-विंग अखबार इजराइल हायोम के एक ओपिनियन राइटर ने लिखा कि इजराइल किसी भी सूरत में अंतहीन राजनीतिक विवादों और चुनावों के दौर में खिंचने का जोखिम नहीं उठा सकता है। अब देखना यह है कि वाशिंगटन के साथ बनते नए सियासी तेवर इजराइल में अगली सरकार के गठन की प्रक्रिया को किस हद तक प्रभावित करते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिका के मध्यावधि चुनावों के बाद इजराइल के साथ रणनीतिक संबंधों में आए बदलावों का सीधा असर वैश्विक भू-राजनीति, रक्षा बाजार और कूटनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा।\n\n• वैश्विक स्तर पर: यह बदलाव अमेरिका और इजराइल के बीच पारंपरिक सैन्य और कूटनीतिक सहयोग के तरीकों को हमेशा के लिए बदल सकता है। इस घटनाक्रम के बाद दुनिया भर के रक्षा निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय साझीदारों को यह देखना होगा कि अमेरिकी सहायता में कटौती का असर मध्य पूर्व के सुरक्षा संतुलन पर क्या पड़ता है।\n• इजराइल में: इजराइली रक्षा प्रतिष्ठान और राजनीतिक नेतृत्व को अब अमेरिकी हथियारों और कलपुर्जों की आपूर्ति में संभावित देरी के लिए नए सिरे से तैयारी करनी होगी। इस राजनीतिक उथल-पुथल से देश के भीतर आगामी सरकार गठन की प्रक्रिया और सुरक्षा रणनीतियों पर सीधा असर पड़ रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेरिका और इजराइल के पारंपरिक संबंधों में आए इस तनाव के पीछे अमेरिकी घरेलू राजनीति और चुनावों में विदेशी नीतियों को लेकर बढ़ते मतभेद मुख्य वजह रहे हैं।\n\n• मध्यावधि चुनाव के नतीजे: अमेरिकी मतदाताओं के बीच गाजा संघर्ष और ईरान युद्ध से जुड़े वित्तीय तथा मानवीय मुद्दों पर गहरी नाराजगी थी। इस असंतोष ने दोनों राजनीतिक दलों के नेताओं को इजराइल के प्रति अपने पारंपरिक समर्थन पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया।\n• नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति: इजराइल के प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिकी घरेलू राजनीति में खुलकर एक पक्ष का समर्थन करने और डेमोक्रेटिक नेतृत्व की उपेक्षा करने से अविश्वास बढ़ा। पिछले कुछ वर्षों में वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में नेतन्याहू की कार्यशैली को लेकर दूरियां लगातार गहरी होती गईं।\n• सहायता में अचानक कटौती: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सैन्य सहायता को योजना से दो साल पहले ही समाप्त करने की घोषणा ने इस खाई को स्पष्ट कर दिया। इस अप्रत्याशित कदम ने यह साबित कर दिया कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समीकरण अब पूरी तरह से बदल चुके हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेरिका के मध्यावधि चुनावों का इजराइल के साथ संबंधों पर क्या असर पड़ा है?\nइन चुनावों के नतीजों ने इजराइल में यह चिंता पैदा कर दी है कि अमेरिका के साथ उसका दशकों पुराना और अटूट गठबंधन अब कमजोर हो रहा है।\n\n2. डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल की सैन्य सहायता को लेकर क्या घोषणा की थी?\nट्रंप ने घोषणा की थी कि वह इजराइल को दी जाने वाली 3.8 अरब डॉलर की सैन्य सहायता को निर्धारित समय से दो साल पहले ही बंद कर देंगे।\n\n3. इजराइल की वायुसेना किस देश के उपकरणों पर निर्भर है?\nइजराइल की पूरी वायुसेना अमेरिकी निर्मित सैन्य विमानों पर आधारित है और देश हथियारों तथा स्पेयर पार्ट्स के लिए अमेरिका पर निर्भर है।\n\n4. इजराइल के विपक्षी नेताओं का मौजूदा स्थिति पर क्या कहना है?\nविपक्षी नेताओं का मानना है कि इन नतीजों से यह साबित होता है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों के बीच असहज हो चुके हैं।\n\n5. इजराइल में वर्तमान राजनीतिक स्थिति कैसी है?\nहालिया संसदीय चुनावों में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, और राष्ट्रपति तय कर रहे हैं कि किसे सरकार बनाने का मौका मिलेगा।",
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