वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों पर ब्रिटेन ने लगाए सख्त प्रतिबंध, भड़के इजरायल ने बंद किया दूतावास और 11 ब्रिटिश सांसदों की एंट्री पर लगाई रोक ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक में अवैध इजरायली बस्तियों के निर्माण और फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। इस फैसले के जवाब में इजरायल ने पूर्वी यरूशलेम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने और 11 ब्रिटिश सांसदों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी है। ब्रिटेन ने कब्जा किए गए वेस्ट बैंक क्षेत्र में अवैध इजरायली बस्तियों के विस्तार और वहां जारी हिंसा के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में इस नए कूटनीतिक रुख का ऐलान करते हुए कहा कि वेस्ट बैंक के कई इलाकों में बसने वाले इजरायली चरमपंथियों द्वारा फिलिस्तीनी आबादी का सुनियोजित रूप से विस्थापन और नस्लीय सफाया किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल की सरकार इन हिंसक गतिविधियों को नजरअंदाज कर रही है और उसके कुछ मंत्री फिलिस्तीनियों को बेदखल करने वाले बयानों और कदमों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। यूके सरकार के इस कदम ने मध्य पूर्व में कूटनीतिक भूचाल ला दिया है, जिसके जवाब में इजरायल की सरकार ने सख्त जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। इजरायल का उग्र पलटवार: ब्रिटिश दूतावास बंद और सांसदों के प्रवेश पर रोक ब्रिटिश सरकार की ओर से प्रतिबंधों की घोषणा होते ही इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कड़ी आपत्ति जताई और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ब्रिटेन पर अपमानजनक झूठ फैलाने का आरोप लगाया। गिदोन सार ने कहा कि ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार इजरायल विरोधी रवैया अपना रही है, जिसने इजरायल को कड़े कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने घोषणा की कि इजरायल पूर्वी यरूशलेम में स्थित ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास को बंद कर रहा है, जो यरूशलेम, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करता था। इसके अतिरिक्त, इजरायली सरकार ने 11 ब्रिटिश सांसदों के इजरायल प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इन प्रतिबंधित नेताओं में पूर्व लेबर प्रमुख जेरेमी कॉर्बिन, सांसद डियान एबॉट और ग्रीन पार्टी के सभी पांच वर्तमान सांसद शामिल हैं। इजरायल ने इन नेताओं पर यहूदी विरोधी और इजरायल विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। इजरायली विदेश मंत्री ने ब्रिटेन के साथ अन्य प्रशासनिक व सैन्य संपर्कों को समाप्त करने की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि दक्षिणी इजरायल के किरियत गहत में स्थित इंटरनेशनल गाजा सपोर्ट सेंटर से ब्रिटिश प्रतिनिधियों को बाहर निकाला जाएगा। इसके साथ ही, वेस्ट बैंक यानी यहूदिया और सामरिया क्षेत्र में फिलिस्तीनी प्राधिकरण के सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने वाली ब्रिटिश गतिविधियों को भी तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। ब्रिटेन के नए प्रतिबंधों की रूपरेखा और समयसीमा ब्रिटेन द्वारा घोषित प्रतिबंधों की योजना केवल बसने वाले व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बस्तियों के विस्तार में सहयोग देने वाली कंपनियों और सेवा प्रदाताओं को भी शामिल किया गया है। विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने स्पष्ट किया कि आने वाले छह से नौ महीनों के भीतर ब्रिटेन एक व्यापक और सख्त प्रतिबंध ढांचा लागू करेगा। इसके तहत अवैध इजरायली बस्तियों में निर्मित सामानों के आयात और व्यापार पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी। साथ ही, यूके में अवैध वेस्ट बैंक बस्तियों के किसी भी प्रकार के विज्ञापनों पर भी बैन लगा दिया गया है। एड मिलिबैंड ने जोर देकर कहा कि यह प्रतिबंध इजरायल देश या वहां की आम जनता के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि यह केवल अवैध बस्तियों और उनके विस्तार को रोकने के उद्देश्य से लाए गए हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि ये लक्षित उपाय इजरायली नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि द्वि-राष्ट्र सिद्धांत (टू-स्टेट सॉल्यूशन) को बचाने और उसे व्यावहारिक रूप से समर्थन देने के लिए लागू किए जा रहे हैं। ब्रिटेन ने फ्रांस और कनाडा के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान भी जारी किया, जिसमें कहा गया कि यह संयुक्त कदम द्वि-राष्ट्र समाधान की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। इसके अलावा, फ्रांस, कनाडा, डेनमार्क, स्पेन, फिनलैंड, आयरलैंड, आइसलैंड, नार्वे, पोलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन सहित 11 अन्य देशों के साथ ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक बस्तियों के सामानों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का संकल्प जताया है। ई1 सेटलमेंट योजना और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं ब्रिटेन के इस कड़े फैसले के पीछे इजरायल द्वारा हाल ही में घोषित ई1 (E1) बस्तियों से जुड़ी विवादास्पद निर्माण योजना है। इजरायल ने पूर्वी यरूशलेम के पूर्व में स्थित रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ई1 क्षेत्र में लगभग 1,200 नए बस्तियों के मकान बनाने के लिए टेंडर खोले हैं। वैश्विक दबाव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चिंताओं के कारण इजरायल पिछले कई दशकों से इस क्षेत्र में निर्माण कार्य रोकने के लिए विवश था। हालांकि, अब इस टेंडर के खुलने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारी रोष व्याप्त हो गया है। विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने ब्रिटेन की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि ई1 क्षेत्र में निर्माण कार्य फिलिस्तीन के भौगोलिक हृदयस्थल को दो भागों में विभाजित कर देगा। इससे एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य का निर्माण असंभव हो जाएगा और द्वि-राष्ट्र समाधान पूरी तरह से निष्प्रभावी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन का आधिकारिक रुख यह है कि वेस्ट बैंक पर इजरायल का कब्जा अवैध है, क्योंकि इसका उद्देश्य स्थाई संप्रभुता का विस्तार करना और अवैध बस्तियों के माध्यम से विस्तारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाना है। इसलिए यूके को अपने आर्थिक संबंधों में भी इस वास्तविकता को प्रतिबिंबित करना होगा। युद्ध अपराध के आरोप और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हाउस ऑफ कॉमन्स में अपने संबोधन के दौरान एड मिलिबैंड ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद गाजा पट्टी में जारी इजरायली सैन्य अभियानों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गाजा में इजरायली बलों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघन किए गए हैं, जो युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार युद्ध के दौरान आम नागरिकों को भोजन और चिकित्सा आपूर्ति सुनिश्चित करना, नागरिकों के सामूहिक विस्थापन को रोकना और निर्दोष लोगों को निशाना न बनाना अनिवार्य है। ब्रिटिश विदेश मंत्री ने उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग सहित कई वैश्विक संगठनों ने गहराई से इन स्थितियों की जांच की है। इन रिपोर्टों से इस बात के बढ़ते प्रमाण मिलते हैं कि गाजा में युद्ध अपराध किए गए हैं। मिलिबैंड ने कहा कि ब्रिटेन इन आरोपों की जांच करने वाली कानूनी प्रक्रियाओं का पूर्ण समर्थन करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्या इजरायल गाजा में जनसंहार (जेनोसाइड) का दोषी है, इसका अंतिम निर्णय अंतरराष्ट्रीय अदालतों को ही करना होगा। दूसरी ओर, इजरायल के शीर्ष नेतृत्व ने युद्ध अपराधों और जनसंहार के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी सेना अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है। ब्रिटेन के भीतर राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं प्रतिबंधों की घोषणा के समय एड मिलिबैंड ने अपनी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने अपनी यहूदी जड़ों, बचपन की इजरायल यात्राओं और ब्रिटेन में हाल ही में बढ़े यहूदी विरोधी हमलों का जिक्र करते हुए खुद को एक गौरवान्वित ब्रिटिश यहूदी बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल के अस्तित्व के अधिकार को चुनौती देने वालों का ब्रिटेन हमेशा विरोध करेगा। हालांकि, ब्रिटेन के मुख्य रब्बी सर एफ्रैम मिरविस ने इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए इसे ब्रिटिश यहूदियों के लिए एक बेहद निराशाजनक दिन करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम केवल राजनीतिक बयानबाजी है जो यहूदियों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले तत्वों को बढ़ावा देगा। ब्रिटिश यहूदियों के प्रतिनिधि संगठन 'बोर्ड ऑफ डिप्टीज ऑफ ब्रिटिश ज्यूज' ने भी इस फैसले पर गहरा अफसोस जताया और ब्रिटेन तथा इजरायल दोनों सरकारों से दलीय हितों के बजाय राष्ट्रीय हितों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। संसद में विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के शैडो विदेश मंत्री टॉम तुगेंडहाट ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय ऐसे नीतियां लागू कर रहा है जिनके विफल होने की बात वह खुद जानता है। उन्होंने माना कि अवैध बस्तियां गलत हैं, लेकिन सरकार पूरे क्षेत्र की जटिलता को एकतरफा फैसलों में समेटने की गलती कर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं और अमेरिकी रुख इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग ने ब्रिटिश फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय इतिहास के गलत पन्ने पर दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि यह एक संप्रभु राष्ट्र के लोकतांत्रिक चुनावों में अनुचित हस्तक्षेप के समान है और इससे फिलिस्तीनी नागरिकों को भी सीधा नुकसान पहुंचेगा। हर्ज़ोग ने प्रतिबंधों को समाधान मानने से इनकार करते हुए रचनात्मक बातचीत का आह्वान किया। दूसरी ओर, अमेरिका ने ब्रिटेन के इस कदम से दूरी बना ली है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि व्हाइट हाउस इस संयुक्त बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा और अमेरिका ब्रिटेन जैसी कार्रवाई बिल्कुल नहीं करने जा रहा है। इजरायल में डोनाल्ड ट्रंप के मनोनीत राजदूत माइक हकाबी ने चेतावनी दी कि ब्रिटेन के इस फैसले का ब्रिटिश कारोबारों पर भारी आर्थिक असर पड़ेगा और अमेरिका केंद्रीय तथा राज्य स्तर पर इसका कड़ा जवाब दे सकता है। इसके विपरीत, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने ब्रिटेन के फैसले का स्वागत करते हुए इसे इजरायल के औपनिवेशिक ढांचे और फिलिस्तीनियों के खिलाफ हो रहे उल्लंघनों का मुकाबला करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। हिज्बुल्लाह, ईरान पर नए प्रतिबंध और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वेस्ट बैंक बस्तियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ ब्रिटेन ने मध्य पूर्व में अन्य तनाव क्षेत्रों पर भी कदम उठाए हैं। ब्रिटिश सरकार ने लेबनान के सशस्त्र समूह हिज्बुल्लाह के वित्तीय विंग पर नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ तालमेल बिठाते हुए ईरान के खिलाफ भी नए प्रतिबंध लागू किए गए हैं। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर की सरकार द्वारा फिलिस्तीन राज्य को आधिकारिक मान्यता देने के लगभग एक साल बाद आई है। गौरतलब है कि 1967 के मध्य पूर्व युद्ध के दौरान इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम पर कब्जा किए जाने के बाद से अब तक लगभग 160 अवैध बस्तियां बनाई जा चुकी हैं, जिनमें 7,000,000 इजरायली यहूदी रहते हैं। इनके साथ ही इस क्षेत्र में लगभग 33,00,000 फिलिस्तीनी नागरिक निवास करते हैं। 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद से बस्तियों में रहने वाले चरमपंथियों द्वारा फिलिस्तीनियों और उनकी संपत्तियों पर हमलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। इजरायल सरकार द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को खारिज करती है और उसका मानना है कि कोई भी समाधान सीधे वार्ता के माध्यम से ही संभव होना चाहिए। इसका आप पर असर ब्रिटेन द्वारा वेस्ट बैंक बस्तियों पर लगाए गए नए प्रतिबंधों और इजरायल के पलटवार से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति पर सीधा असर पड़ने वाला है। • व्यापारिक प्रतिबंध: अगले 6 से 9 महीनों में वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों में बने सामानों के आयात पर ब्रिटेन में पूरी तरह रोक लग जाएगी। इससे इन बस्तियों में कारोबार करने वाली कंपनियों को अपना बाजार खोना पड़ेगा। • विज्ञापन और विज्ञापनदाता: यूके में अवैध बस्तियों से जुड़ी जमीनों या संपत्तियों के विज्ञापनों पर बैन लागू कर दिया गया है। इससे ब्रिटेन में काम करने वाली रियल एस्टेट एजेंसियों को अपनी लिस्टिंग हटानी होगी। • सुरक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम: वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी प्राधिकरण को दी जाने वाली यूके की सुरक्षा ट्रेनिंग इजरायल द्वारा रोक दी गई है। इससे स्थानीय सुरक्षा अभियानों और समन्वय पर असर पड़ेगा। • कूटनीतिक संबंध: पूर्वी यरूशलेम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद होने से वहां रहने वाले ब्रिटिश नागरिकों और स्थानीय लोगों को वीजा तथा राजनयिक सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। • ब्रिटिश सांसदों पर बैन: जेरेमी कॉर्बिन समेत 11 ब्रिटिश सांसदों के इजरायल प्रवेश पर रोक लगने से अंतरराष्ट्रीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की यात्राएं प्रभावित होंगी। ऐसा क्यों हुआ ब्रिटेन का यह ऐतिहासिक निर्णय वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा, अवैध बस्तियों के नए निर्माण और द्वि-राष्ट्र समाधान के खत्म होने के खतरे के कारण लिया गया है। • नस्लीय सफाई का आरोप: ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने आरोप लगाया कि इजरायली चरमपंथियों द्वारा फिलिस्तीनियों का हिंसक विस्थापन किया जा रहा है और इजरायल सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। • ई1 क्षेत्र में निर्माण टेंडर: इजरायल ने पूर्वी यरूशलेम के रणनीतिक ई1 क्षेत्र में 1,200 नए मकान बनाने के टेंडर खोले हैं, जो वेस्ट बैंक को दो हिस्सों में बांटकर फिलिस्तीन राज्य के निर्माण को असंभव बना देता है। • अंतरराष्ट्रीय जांच और युद्ध अपराध: संयुक्त राष्ट्र की जांच रिपोर्टों में गाजा और वेस्ट बैंक में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के बढ़ते सबूत सामने आए हैं। • इजरायल का पलटवार: इजरायल ने ब्रिटेन की लेबर सरकार के इस रुख को अपनी संप्रभुता में हस्तक्षेप और इजरायल विरोधी कदम मानते हुए दूतावास बंद करने और सांसदों को बैन करने का फैसला किया। सवाल-जवाब 1. ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक बस्तियों पर क्या प्रतिबंध लगाए हैं? ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों में निर्मित सामानों के आयात, बस्तियों का विस्तार करने वाली कंपनियों की सेवाओं और उनके विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। 2. ब्रिटिश कार्रवाई के जवाब में इजरायल ने क्या कदम उठाया है? इजरायल ने पूर्वी यरूशलेम में स्थित ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास को बंद कर दिया है, 11 ब्रिटिश सांसदों की एंट्री बैन की है और फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों को ब्रिटिश ट्रेनिंग रोक दी है। 3. किन ब्रिटिश नेताओं के इजरायल प्रवेश पर रोक लगाई गई है? पूर्व लेबर नेता जेरेमी कॉर्बिन, सांसद डियान एबॉट और ग्रीन पार्टी के सभी पांच वर्तमान सांसदों सहित कुल 11 सांसदों पर बैन लगाया गया है। 4. ई1 क्षेत्र का निर्माण विवादित क्यों है? ई1 क्षेत्र में 1,200 नए मकान बनने से वेस्ट बैंक दो हिस्सों में बंट जाएगा, जिससे एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य का बनना असंभव हो जाएगा। 5. प्रतिबंध लागू होने में कितना समय लगेगा? ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड के अनुसार, नया व्यापक प्रतिबंध ढांचा अगले 6 से 9 महीनों में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। 6. क्या अमेरिका ने भी ब्रिटेन की तरह प्रतिबंध लगाए हैं? नहीं, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह ब्रिटेन की तरह इजरायल पर प्रतिबंध लगाने की योजना नहीं बना रहा है। https://trendkia.com/middle-east/west-bank-ki-avaidha-bastiyon-para-uk-ne-lagae-sakhta-pratibndha-bharake-israel-ne-bnda-kiya-dutavasa-aura-11-british-sansadon-ki--29691 TrendKia — Har trend, sabse pehle.