भ्रष्टाचार के मामलों में तेजी लाएं अधिकारी, मिजोरम के मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने दिए सख्त निर्देश मिजोरम के मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लंबित मामलों के जल्द निपटारे का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और एसीबी तथा लोकायुक्त को मजबूत किया जा रहा है। मिजोरम सरकार ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने राज्य की जांच एजेंसियों को लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने और कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को न बख्शने का स्पष्ट निर्देश दिया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 पर आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जवाबदेह और स्वच्छ शासन सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार निरोधी संस्थाओं को पूरी स्वायत्तता और सख्ती के साथ काम करना होगा। जांच एजेंसियों को मिला इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय सहयोग सतर्कता विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में मिजोरम लोकायुक्त, भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) और राज्य पुलिस बल के अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने कहा कि उनकी सरकार एक पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त और एसीबी जैसी मुख्य भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जांच अधिकारियों की परिचालन क्षमता में सुधार के लिए सरकार ने एसीबी के लिए नए वाहनों को मंजूरी दी है। इसके साथ ही लोकायुक्त के जांच अधिकारियों के लिए वाहन पात्रता का विस्तार किया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान बंद किए गए एसीबी कर्मियों के विशेष प्रोत्साहन भत्ते को दोबारा बहाल कर दिया गया है। इसके अलावा लोकायुक्त के जांच अधिकारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए उनके लिए भी इसी तरह के प्रोत्साहन भत्ते लागू किए गए हैं। सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए अलग से फंड भी आवंटित किया है। मामलों के त्वरित निपटारे और बिना भेदभाव कार्रवाई के निर्देश कार्यशाला में मौजूद जांच अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने कहा कि कानून उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त अधिकार देता है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इन शक्तियों का उपयोग पूरी निष्पक्षता और बिना किसी भेदभाव के करें। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जांच के दौरान किसी भी प्रभावशाली या दोषी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाना चाहिए। ललदुहोमा ने सतर्कता विभाग और अन्य सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद कई जांच और मामले अभी भी लंबित पड़े हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि वे सभी लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने के लिए ठोस और त्वरित प्रयास करें। क्षमता निर्माण और प्रशासनिक तालमेल पर जोर इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य सचिव और मुख्य सतर्कता अधिकारी खिल्ली राम मीना, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शरद अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों और मामलों की प्रभावी पैरवी पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्य सचिव खिल्ली राम मीना ने कार्यशाला के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी कार्य में लगे कर्मियों के कौशल को निखारना बेहद जरूरी है। इससे अधिकारियों की कार्यक्षमता में सुधार होगा, जांच प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर टीमवर्क तथा प्रेरणा का माहौल तैयार होगा। इसका आप पर असर भ्रष्टाचार विरोधी निर्देशों और संस्थागत सुधारों से क्षेत्र में सरकारी सेवाओं की गति और प्रशासनिक जवाबदेही में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। • मिजोरम में: आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों में बिना किसी रिश्वत या अनावश्यक देरी के काम कराने में आसानी होगी। भ्रष्टाचार के लंबित मामलों का जल्द निपटारा होने से दोषी अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होगी। • भारत भर में: प्रोत्साहन भत्ते बहाल करने और परिवहन सुविधाओं के विस्तार का यह कदम राज्य स्तरीय भ्रष्टाचार निरोधी संस्थाओं के लिए एक मॉडल पेश करता है। अन्य राज्य भी जांच अधिकारियों के मनोबल और मामलों के निपटारे की दर को बढ़ाने के लिए ऐसे उपाय लागू कर सकते हैं। • सरकारी कर्मचारियों के लिए: विभागों में सतर्कता निगरानी काफी सख्त होगी क्योंकि जांच अधिकारियों को नए वाहन और वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं। ईमानदार कर्मचारियों को बेहतर संस्थागत समर्थन मिलेगा, जबकि भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मियों पर बिना किसी पक्षपात के गाज गिरना तय है। • जांच एजेंसियों के लिए: भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो और लोकायुक्त के अधिकारियों को बेहतर संसाधन और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त होगा। वित्तीय सहायता और वाहनों की उपलब्धता से मामलों की जांच तेजी से पूरी होगी और अदालतों में आरोप पत्र समय पर दाखिल हो सकेंगे। सवाल-जवाब 1. मिजोरम के मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने भ्रष्टाचार निरोधी अधिकारियों को क्या मुख्य निर्देश दिया? उन्होंने अधिकारियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और बिना किसी भेदभाव के सभी लंबित मामलों का नियमित निपटारा करने का निर्देश दिया। 2. भ्रष्टाचार निवारण कार्यशाला में किन संस्थाओं के अधिकारियों ने भाग लिया? सतर्कता विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में मिजोरम लोकायुक्त, भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) और राज्य पुलिस के अधिकारियों ने भाग लिया। 3. एसीबी और लोकायुक्त के लिए क्या नई सुविधाएं और प्रोत्साहन घोषित किए गए हैं? सरकार ने एसीबी के लिए नए वाहन मंजूर किए, लोकायुक्त जांच अधिकारियों को वाहन पात्रता दी और कोविड-19 के समय बंद हुए विशेष प्रोत्साहन भत्ते को बहाल किया। 4. भ्रष्टाचार निरोधी कार्यशाला में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे? कार्यशाला में मुख्य सचिव एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी खिल्ली राम मीना, राज्य के पुलिस महानिदेशक शरद अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 5. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 पर आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था? कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों के कौशल में सुधार करना, मामलों के तेजी से निपटारे की क्षमता बढ़ाना और विभागों के बीच टीमवर्क को मजबूत करना था। https://trendkia.com/mizoram/bhrashtachara-ke-mamalon-men-teji-laen-adhikari-mizoram-ke-mukhyamntri-lalduhoma-ne-die-sakhta-nirdesha-27191 TrendKia — Har trend, sabse pehle.