# मिजोरम मानवाधिकार आयोग को राज्य सरकार मुहैया कराएगी बुनियादी ढांचा और स्टाफ, मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने दिया आश्वासन

> मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने नवगठित राज्य मानवाधिकार आयोग को बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की जरूरतें प्राथमिकता पर पूरी करने का भरोसा दिया है।

**Type:** article · **Category:** मिजोरम · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/mizoram/mizoram-manavadhikara-ayoga-ko-rajya-sarakara-muhaiya-karaegi-buniyadi-dhancha-aura-stapha-mukhyamntri-lalduhoma-ne-diya-ashvasana-37748 · **Language:** Hindi
**Tags:** मिजोरम, लालदुहोमा, मानवाधिकार आयोग, मार्ली वानकुंग, गौहाटी हाईकोर्ट, आइजोल

मिजोरम में हाल ही में गठित राज्य मानवाधिकार आयोग के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रशासन ने जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने नवगठित आयोग को पूरा प्रशासनिक सहयोग देने का वादा किया है, जिसमें आवश्यक जनशक्ति, मूलभूत ढांचा और अन्य जरूरी संसाधनों की तत्काल आपूर्ति शामिल है। इस संबंध में आइजोल स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी।

## प्रशासनिक जरूरतों और संसाधनों पर हुई अहम चर्चा
बैठक के दौरान आयोग की अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) मार्ली वानकुंग ने मुख्यमंत्री के समक्ष आयोग से जुड़ी प्राथमिक आवश्यकताओं का ब्योरा रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए निकाय को अपने वैधानिक दायित्वों का निष्पादन करने के लिए योग्य कर्मचारियों, कार्यालयीन व्यवस्था और मजबूत बुनियादी ढांचे की तत्काल दरकार है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने आयोग के शिष्टमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार इन तमाम मांगों को प्राथमिकता के आधार पर हल करेगी ताकि आयोग स्वतंत्र और प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर सके।

जस्टिस (रिटायर्ड) मार्ली वानकुंग ने आयोग के पहले अध्यक्ष और सदस्यों की औपचारिक नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नया मानवाधिकार आयोग नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करने के लिए संकल्पबद्ध है। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि कामकाज की शुरुआत होते ही आयोग को अब तक तीन औपचारिक शिकायतें भी प्राप्त हो चुकी हैं।

## गौहाटी हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुआ था आयोग का गठन
मिजोरम के पहले राज्य मानवाधिकार आयोग का औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह 29 जुलाई, 2026 को राजभवन में संपन्न हुआ था। गौहाटी हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) मार्ली वानकुंग ने इस वैधानिक निकाय के पहले अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके साथ मिजोरम न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी वनलालेन्माविया और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के लाल थिंगलोवा ने आयोग के सदस्य के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी।

इस आयोग की स्थापना जोफा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर गौहाटी हाईकोर्ट द्वारा दिए गए कड़े निर्देशों के आधार पर की गई है। इस याचिका में मिजोरम के भीतर एक स्वतंत्र राज्य स्तरीय मानवाधिकार निकाय गठित करने की मांग की गई थी, जिसके बाद सरकार ने इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए।

## इसका आप पर असर
मिजोरम में मानवाधिकार आयोग को सक्रिय संसाधन मिलने से नागरिकों को अपने अधिकारों के हनन की शिकायत के लिए एक सशक्त स्थानीय मंच उपलब्ध हो गया है।

- **मिजोरम में:** राज्य के निवासियों को अब मानवाधिकार उल्लंघनों के निवारण के लिए सुलभ संस्थागत तंत्र मिल गया है। आयोग पहले ही तीन औपचारिक शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर चुका है।
- **प्रशासनिक जवाबदेही:** पुलिस और सरकारी विभागों के कामकाज में मानवीय अधिकारों की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ेगी। सरकारी अमले को नागरिक शिकायतों पर आयोग के समक्ष जवाबदेह होना पड़ेगा।
- **बुनियादी ढांचे की मजबूती:** आयोग के लिए स्वतंत्र कार्यालय, पर्याप्त कर्मचारी और जांच मशीनरी जल्द बहाल की जाएगी। इससे मामलों की सुनवाई और जांच में अवांछित देरी नहीं होगी।
- **कानूनी सहायता का दायरा:** मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर आम जनता को त्वरित हस्तक्षेप की सुविधा मिलेगी। पीड़ित व्यक्ति सीधे आयोग के समक्ष अपनी याचिका दर्ज करा सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
मिजोरम में मानवाधिकार आयोग का गठन और इसे संसाधन उपलब्ध कराने की पहल कानूनी बाध्यता और संस्थागत जरूरतों के चलते हुई है। राज्य में लंबे समय से स्वतंत्र मानवाधिकार निकाय की मांग उठाई जा रही थी।

- **न्यायिक निर्देश:** गौहाटी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मानवाधिकार आयोग गठित करने का स्पष्ट आदेश दिया था। यह निर्देश जोफा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद जारी हुआ था।
- **शुरुआती परिचालन चुनौतियां:** 29 जुलाई, 2026 को शपथ लेने के बाद नए आयोग के पास कामकाज संभालने के लिए जरूरी स्टाफ और कार्यालयीन ढांचे की कमी थी। इसी अभाव को दूर करने के लिए अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
- **लंबित मामलों की शुरुआत:** आयोग के गठन के फौरन बाद तीन औपचारिक शिकायतें दर्ज की गईं। इन मामलों की निष्पक्ष जांच और नियमित कामकाज के लिए प्रशासनिक मशीनरी की तत्काल जरूरत महसूस हुई।

## सवाल-जवाब

### 1. मिजोरम राज्य मानवाधिकार आयोग की पहली अध्यक्ष कौन बनी हैं?
गौहाटी हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) मार्ली वानकुंग को आयोग की पहली अध्यक्ष बनाया गया है।

### 2. आयोग के अन्य सदस्य कौन-कौन हैं?
मिजोरम न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी वनलालेन्माविया और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के लाल थिंगलोवा इसके सदस्य हैं।

### 3. आयोग के सदस्यों का शपथ ग्रहण कब हुआ था?
आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों ने 29 जुलाई, 2026 को राजभवन में पद की शपथ ली थी।

### 4. आयोग की स्थापना किस अदालती आदेश के तहत हुई?
जोफा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की जनहित याचिका पर गौहाटी हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस आयोग का गठन किया गया।

### 5. कामकाज शुरू होने के बाद आयोग को अब तक कितनी शिकायतें मिली हैं?
आयोग की अध्यक्ष के अनुसार कामकाज शुरू होने के बाद से अब तक तीन औपचारिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

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