मिजोरम में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए ब्लू मिजोरम मिशन की तैयारी, 2030 तक 20 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य मिजोरम सरकार ने राज्य में मछली उत्पादन 2030 तक 20,000 मीट्रिक टन पहुंचाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस संबंध में मत्स्य विभाग को एक समर्पित मिशन तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मिजोरम सरकार ने राज्य में जलीय कृषि को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों की आजीविका को सशक्त करने के उद्देश्य से एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। राज्य ने वर्ष 2030 तक कुल मछली उत्पादन को 20,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मत्स्य पालन विभाग को इस दिशा में तेजी से काम करने और एक समर्पित 'ब्लू मिजोरम मिशन' का मसौदा तैयार करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। समीक्षा बैठक में बनी कार्ययोजना मुख्यमंत्री लालदुहोमा की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री सम्मेलन कक्ष में मत्स्य विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक सोमवार को आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में मत्स्य पालन मंत्री लालथानसांगा के अलावा वित्त, मत्स्य विभाग और डीपीएंडएआर विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान विभाग की मौजूदा गतिविधियों, भविष्य की विकास योजनाओं और जमीनी चुनौतियों की गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने सभी योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए खुले और रचनात्मक विचार-विमर्श पर विशेष जोर दिया। उत्पादन और उत्पादकता में दर्ज हुई महत्वपूर्ण वृद्धि विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मिजोरम में मछली उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। वर्ष 2020-21 में राज्य का मछली उत्पादन 4,304.69 मीट्रिक टन दर्ज किया गया था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8,020 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। उत्पादन का यह वर्तमान स्तर राज्य की कुल मछली मांग का लगभग 58.28 प्रतिशत हिस्सा पूरा करने के लिए पर्याप्त आंका गया है। उत्पादन के साथ-साथ प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में भी निरंतर सुधार हुआ है। वर्ष 2020-21 में वार्षिक उत्पादकता 0.78 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर थी, जो 2025-26 में सुधरकर 1.21 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष हो गई। इसके अलावा जलीय कृषि से जुड़ने वाले किसानों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। मछली पालकों की संख्या 2020-21 में 16,486 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 22,661 हो गई। बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया गया कि केवल नए तालाब खोदने के बजाय मौजूदा जल क्षेत्रों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाकर भी कुल उत्पादन में व्यापक बढ़ोतरी हासिल की जा सकती है। जल संसाधन और अप्रयुक्त क्षमता का दोहन प्राकृतिक संसाधनों की बात करें तो मिजोरम में 16 प्रमुख नदियों समेत लगभग 6,000 हेक्टेयर में फैले जल निकाय मौजूद हैं, जबकि प्रमुख जलाशयों का कुल फैलाव 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र में है। राज्य में मछली पालन के लिए कुल संभावित क्षेत्र लगभग 24,000 हेक्टेयर आंका गया है। हालांकि वर्तमान समय में इस कुल क्षमता का केवल 26.3 प्रतिशत हिस्सा ही उपयोग में लाया जा रहा है। इसी कारण समीक्षा बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि राज्य में मत्स्य पालन की वास्तविक क्षमता का सटीक डेटा तैयार किया जाए, ताकि संसाधनों का समुचित इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके। हैचरी, नदी संरक्षण और वित्तीय सहयोग बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए विभाग के पास वर्तमान में 14 सक्रिय मछली हैचरी संचालित हैं। इसके साथ ही नदी संरक्षण के प्रयासों को गति देते हुए यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) के सहयोग से 95 अलग-अलग स्थानों पर नदी संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां चलाई जा रही हैं। स्थानीय परिवारों को आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के लिए बाना काइह योजना के तहत भी सहायता दी जा रही है। बाना काइह के पहले चरण में मुख्यमंत्री विशेष पैकेज के तहत 201 परिवारों को शामिल किया गया, जिनमें से 13 परिवारों को ऋण सहायता प्रदान की गई। वहीं योजना के दूसरे चरण में 84 परिवारों को कवर किया गया है, जिनमें से पांच परिवारों को ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इसका आप पर असर इस नीतिगत पहल से राज्य के ग्रामीण परिवारों और स्थानीय मछली उपभोक्ताओं के लिए नए अवसर और बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। • भारत में: पूर्वोत्तर राज्यों में मीठे पानी की मछली के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलने से अंतरराज्यीय आपूर्ति पर दबाव कम होगा। इससे क्षेत्रीय स्तर पर जलीय कृषि क्षेत्र में स्थानीय आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। • मिजोरम में: राज्य में 2030 तक 20,000 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य पूरा होने से स्थानीय बाजारों में ताजी मछली की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतें स्थिर हो सकेंगी। वर्तमान में राज्य अपनी जरूरत का 58.28 प्रतिशत उत्पादन ही कर पाता है, इसलिए उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता घटेगी। • मछली पालकों के लिए: प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1.21 मीट्रिक टन से अधिक बढ़ाने पर जोर देने से किसानों की शुद्ध आमदनी में सुधार होगा। किसानों को नए तालाब खोदे बिना मौजूदा जल संसाधनों से अधिक लाभ कमाने का सीधा अवसर मिलेगा। • ऋण और सरकारी मदद: बाना काइह पैकेज के तहत चयनित परिवारों को वित्तीय ऋण और तकनीकी सहायता मिलने से छोटे किसानों का जोखिम घटेगा। इससे नए ग्रामीण परिवारों को व्यावसायिक स्तर पर मछली पालन शुरू करने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ मिजोरम में बढ़ती घरेलू मांग और विशाल अप्रयुक्त जल संसाधनों के कारण इस नए मिशन की आवश्यकता महसूस की गई है। • मांग और आपूर्ति का अंतर: राज्य का मौजूदा मछली उत्पादन 8,020 मीट्रिक टन है, जो उसकी कुल जरूरत का सिर्फ 58.28 प्रतिशत ही पूरा करता है। स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए बाहरी राज्यों से आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसे दूर करने के लिए यह पहल शुरू की गई है। • अप्रयुक्त जल संसाधन: मिजोरम में मछली पालन के लिए उपयुक्त 24,000 हेक्टेयर संभावित क्षेत्र में से केवल 26.3 प्रतिशत क्षेत्र ही उपयोग में लाया जा रहा है। सरकार इस खाली पड़ी क्षमता का दोहन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना चाहती है। • उत्पादकता में सुधार की गुंजाइश: हाल के वर्षों में उत्पादकता 0.78 से बढ़कर 1.21 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हुई है, जिससे यह साबित हुआ कि बेहतर प्रबंधन से बिना नए तालाब बनाए उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इसी सकारात्मक परिणाम के आधार पर 'ब्लू मिजोरम मिशन' तैयार करने का निर्णय लिया गया। सवाल-जवाब 1. मिजोरम ने 2030 तक मछली उत्पादन का क्या लक्ष्य तय किया है? मिजोरम सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल मछली उत्पादन को 20,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 2. ब्लू मिजोरम मिशन शुरू करने का निर्देश किसने दिया? मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मत्स्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस मिशन को तैयार करने के निर्देश दिए। 3. मिजोरम में वर्तमान में कितना मछली उत्पादन हो रहा है? वर्ष 2025-26 में राज्य का मछली उत्पादन 8,020 मीट्रिक टन दर्ज किया गया, जो राज्य की आवश्यकता का 58.28 प्रतिशत पूरा करता है। 4. राज्य में प्रति हेक्टेयर मछली उत्पादकता कितनी है? मिजोरम में मछली उत्पादकता 2020-21 के 0.78 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 1.21 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष हो गई है। 5. मिजोरम में जलीय कृषि के लिए कितना संभावित क्षेत्र मौजूद है? राज्य में मछली पालन के लिए लगभग 24,000 हेक्टेयर संभावित क्षेत्र है, जिसमें से अभी केवल 26.3 प्रतिशत क्षेत्र ही उपयोग में लाया जा रहा है। 6. बाना काइह योजना के तहत कितने परिवारों को सहायता मिली है? पहले चरण में 201 परिवारों को शामिल कर 13 को ऋण दिया गया, जबकि दूसरे चरण में 84 परिवारों को शामिल कर पांच परिवारों को ऋण वितरित किया गया है। https://trendkia.com/mizoram/mizoram-men-matsya-utpadana-barhane-ke-lie-blue-mizoram-mission-ki-taiyari-2030-taka-20-hajara-mitrika-tana-ka-lakshya-40062 TrendKia — Har trend, sabse pehle.