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  "type": "article",
  "title": "मिजोरम में नशे के खिलाफ ऑपरेशन जेरिको का दूसरा चरण शुरू, सीमावर्ती इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी",
  "summary": "मिजोरम पुलिस ने त्योहारी सीजन से पहले नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए ऑपरेशन जेरिको 2 लॉन्च किया है। राज्य में अब तक 843 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं।",
  "content": "मिजोरम में आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम कसने और अंतरराज्यीय तस्करी सिंडिकेट्स को ध्वस्त करने के लिए बड़े स्तर पर सुरक्षा अभियान शुरू किया गया है। राज्य प्रशासन ने सीमा सुरक्षा को कड़ा करने और अवैध ड्रग्स के फैलाव को रोकने के उद्देश्य से अपने प्रमुख नशा विरोधी अभियान, ऑपरेशन जेरिको के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य मकसद मिजोरम के जरिए होने वाली मादक पदार्थों की आवाजाही को पूरी तरह खत्म करना है।\n\nपुलिस महानिदेशक (DGP) शरद अग्रवाल ने आइजोल स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन जेरिको 2 का शुभारंभ किया। इस विशेष अभियान के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील रास्तों पर चौकसी बढ़ाई जाएगी ताकि अवैध नशीली दवाओं की खेप राज्य की सीमाओं में प्रवेश न कर सके।\n\nसशस्त्र पुलिस बटालियन और आईआरबी के जवान संभालेंगे कमान\nइस वृहद अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सुरक्षा बलों की कई टुकड़ियों को मैदान में उतारा गया है। इसमें मिजोरम आर्म्ड पुलिस की पहली, तीसरी और पांचवीं बटालियन के जवानों के साथ-साथ फर्स्ट इंडियन रिजर्व बटालियन (IRB) के कर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे अभियान की जमीनी कमान और निगरानी संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) के हाथों में सौंपी गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई का समन्वय करेंगे।\n\nविशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सीमाओं से सटे जिलों पर कड़ा पहरा रहेगा। इन सीमावर्ती इलाकों की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है, जिससे किसी भी तरह की तस्करी और अवैध गतिविधियों को शुरुआत में ही रोका जा सके।\n\nपहले चरण का असर और अब तक की उपलब्धियां\nऑपरेशन जेरिको की शुरुआत सबसे पहले 1 सितंबर 2025 को हुई थी। इस संयुक्त पहल में मिजोरम पुलिस, आबकारी और नारकोटिक्स विभाग तथा सेंट्रल यंग मिजो एसोसिएशन (CYMA) ने मिलकर काम किया था। उस दौरान म्यांमार सीमा से लगे चंफाई जिले के 22 गांवों में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस तैनाती के दौरान स्थानीय जिला पुलिस, नागरिक समाज संगठनों, विलेज डिफेंस पार्टीज (VDP) और स्थानीय वाईएमए शाखाओं के बीच निरंतर तालमेल कायम रखा गया।\n\nइस सघन संयुक्त प्रयास के कारण 31 मार्च तक 203 मामले दर्ज किए गए और 298 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस अवधि में करीब 391.95 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए गए थे। विशेष तैनाती वापस लिए जाने के बाद भी जिला पुलिस ने अपने नियमित संसाधनों के जरिए अभियान जारी रखा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 26 अक्टूबर तक दर्ज मामलों की संख्या 447 पहुंच गई, जबकि गिरफ्तार आरोपियों का आंकड़ा 663 हो गया। अब तक कुल 843.47 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं।\n\nखुफिया तंत्र और जनसहयोग पर टिकी रणनीति\nऑपरेशन जेरिको 2 को पूरी तरह खुफिया सूचनाओं पर आधारित कार्रवाई, विभिन्न विभागों के बीच मजबूत तालमेल और चौबीसों घंटे सीमा निगरानी के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय समुदायों की भागीदारी इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सतर्क रहें और नशीले पदार्थों की बिक्री, तस्करी या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें ताकि तस्करों के पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nमिजोरम में शुरू हुआ यह सघन अभियान सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा निगरानी को काफी सख्त बना देगा।\n\n• भारत में: पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते देश के अन्य हिस्सों में पहुंचने वाली अवैध नशीली दवाओं की खेप पर कड़ी रोक लगेगी। इससे राष्ट्रीय स्तर पर अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट्स की सप्लाई चेन बाधित होगी।\n• मिजोरम में: सीमावर्ती जिलों और गांवों में पुलिस जांच चौकियां तथा गश्त बढ़ाई जाएगी। स्थानीय निवासियों और यात्रियों को प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पहचान जांच से गुजरना पड़ सकता है।\n• सुरक्षा सहयोग: स्थानीय नागरिक समूहों और विलेज डिफेंस पार्टियों की भागीदारी से इलाकों में सुरक्षा सूचना तंत्र मजबूत होगा। लोग किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस को साझा कर सकेंगे।\n• त्योहारी माहौल: त्योहारी सीजन के दौरान अवैध तस्करी और असामाजिक गतिविधियों पर नकेल कसने से शांति व्यवस्था बनी रहेगी। बाजारों और संवेदनशील कस्बों में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रहेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआगामी त्योहारी सीजन के दौरान तस्करी की बढ़ती आशंका और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से नशीले पदार्थों के प्रवाह को रोकने के लिए इस दूसरे चरण को शुरू किया गया है।\n\n• सीमित निगरानी का फायदा: त्योहारों से पहले मादक पदार्थों की मांग और आवाजाही बढ़ने की आशंका रहती है। तस्कर अक्सर सीमावर्ती दुर्गम रास्तों का इस्तेमाल कर खेप पहुंचाने की फिराक में रहते हैं।\n• सीमावर्ती भूगोल की संवेदनशीलता: चंफाई और अन्य सीमावर्ती जिले म्यांमार सीमा से सटे होने के कारण तस्करी के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। पहले चरण की समर्पित तैनाती समाप्त होने के बाद संगठित नेटवर्क दोबारा सक्रिय न हों, इसलिए नई रणनीति अपनाई गई है।\n• पहले चरण की सफलता: पहले चरण में 391 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती और निरंतर अभियानों में 843 करोड़ रुपये का आंकड़ा छूने से इस मॉडल की प्रभावशीलता साबित हुई है। इसी निरंतरता को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बटालियनें मैदान में उतारी गई हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ऑपरेशन जेरिको 2 क्या है?\nयह मिजोरम पुलिस द्वारा नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, सीमा सुरक्षा मजबूत करने और ड्रग सिंडिकेट्स को खत्म करने के लिए शुरू किया गया विशेष अभियान है।\n\n2. इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किसने और कहां किया?\nपुलिस महानिदेशक शरद अग्रवाल ने आइजोल स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया।\n\n3. ऑपरेशन जेरिको का पहला चरण कब शुरू हुआ था?\nपहला चरण 1 सितंबर 2025 को मिजोरम पुलिस, आबकारी एवं नारकोटिक्स विभाग और सेंट्रल वाईएमए के संयुक्त सहयोग से शुरू किया गया था।\n\n4. अभियान के तहत 26 अक्टूबर तक कुल कितनी जब्ती और गिरफ्तारियां हुई हैं?\nकुल 447 मामले दर्ज किए गए, 663 लोग गिरफ्तार हुए और लगभग 843.47 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए।\n\n5. इस दूसरे चरण में किन सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है?\nमिजोरम आर्म्ड पुलिस की पहली, तीसरी और पांचवीं बटालियन तथा फर्स्ट इंडियन रिजर्व बटालियन के जवानों को तैनात किया गया है।",
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