मिजोरम में सरकारी खजाने की निगरानी सख्त, सीएम लालदुहोमा ने शुरू किए चार नए डिजिटल पोर्टल मिजोरम सरकार ने बजट और खर्च में वित्तीय पारदर्शिता लाने के मकसद से चार नए डिजिटल सिस्टम लॉन्च किए हैं। इसके तहत कल्याणकारी योजनाओं का पूरा पैसा अब सीधे बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जाएगा। मिजोरम प्रशासन ने राज्य के सार्वजनिक वित्त प्रबंधन में सख्त निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने सरकारी खजाने के कामकाज को डिजिटल रूप देने और जनता के पैसों की बर्बादी रोकने के उद्देश्य से चार प्रमुख तकनीकी पहलों की शुरुआत की है। वित्त विभाग के अधीन तैयार किए गए इन नए डिजिटल साधनों का लक्ष्य सरकारी दफ्तरों के बीच कागजी प्रक्रियाओं को खत्म करना, बजट आवंटन की निगरानी रखना और जनहित की योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिये के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाना है। निर्माण और विकास कार्यों के खर्च पर रहेगी नजर इस नई तकनीकी व्यवस्था का पहला अहम हिस्सा मिजोरम इंटीग्रेटेड वर्क्स एकाउंट्स सिस्टम यानी एमआईडब्ल्यूएएस है। यह प्रणाली राज्य के छह बड़े तकनीकी और विकास विभागों के लेखा-जोखा में एकरूपता लाने के लिए बनाई गई है। इनमें लोक निर्माण विभाग, जन स्वास्थ्य इंजीनियरिंग, बिजली विभाग, सिंचाई एवं जल संसाधन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ-साथ भूमि संसाधन, मृदा एवं जल संरक्षण विभाग शामिल हैं। इन विभागों में विकास परियोजनाओं पर होने वाले भारी-भरकम खर्च का हिसाब-किताब अब एक ही डिजिटल व्यवस्था से दर्ज होगा। इससे महालेखाकार को भेजे जाने वाले खर्च के आंकड़ों का मिलान बेहद आसान हो जाएगा और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सभी खर्च वाउचर विधिवत ट्रेजरी के माध्यम से ही पारित हों। बजट प्रस्ताव और वित्तीय मंजूरियां हुईं पूरी तरह पेपरलेस प्रशासनिक स्तर पर तेजी लाने के लिए ई-बजट और ई-सेंशन मॉड्यूल भी लागू किए गए हैं। ई-बजट प्रणाली के माध्यम से सभी विभाग अपने सालाना वित्तीय प्रस्ताव इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी आईएफएमआईएस पर ऑनलाइन तैयार कर जमा कर सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के ऑनलाइन होने से मानवीय भूलों की गुंजाइश खत्म होगी, गणना से जुड़ी गलतियां रुकेंगी और फाइलों के टेबल-दर-टेबल घूमने में होने वाली लंबी देरी से राहत मिलेगी। वहीं ई-सेंशन मॉड्यूल के जरिए आहरण एवं संवितरण अधिकारी तथा विभागाध्यक्ष अपने खर्च प्रस्तावों को सीधे प्रशासनिक विभागों और वित्त विभाग को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेज सकेंगे। इस प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कोई भी विभाग तय बजट सीमा से एक रुपया भी अधिक खर्च नहीं कर सकेगा, जिससे वित्तीय अनुशासन बना रहेगा। सीधे बैंक खातों में पहुंचेगा सरकारी योजनाओं का लाभ कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने सौ फीसदी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी व्यवस्था को अनिवार्य बना दिया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद थलाई थार लीना, बाना काइह और बिजली सब्सिडी योजना जैसी प्रमुख राज्य योजनाओं के लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता राशि ट्रेजरी से बिल पास होते ही सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो जाएगी। योजना के लाभार्थी और प्रशासनिक अधिकारी दोनों आईएफएमआईएस पोर्टल के माध्यम से भुगतान की स्थिति को रियल टाइम में ट्रैक कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह खुली और जवाबदेह बनेगी। केंद्र से मिलने वाले विकास कोष पर जोर योजनाओं की शुरुआत के मौके पर मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने जोर देकर कहा कि संसाधनों का कुशल उपयोग तभी संभव है जब वित्तीय प्रणालियां आधुनिक और पारदर्शी हों। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले वित्तीय वर्ष में मिजोरम को एसएएससीआई भाग 9 के अंतर्गत 350 करोड़ रुपये की धनराशि हासिल हुई थी। इसके साथ ही राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान एसएएससीआई भाग 4 और भाग 9 के तहत लगभग 650 करोड़ रुपये जुटाने की ठोस तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस डिजिटल ढांचे को मजबूती प्रदान करने के लिए राज्य के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी विभाग, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग यानी सी-डैक और इंटरलेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के योगदान की भी सराहना की। इसका आप पर असर मिजोरम सरकार द्वारा शुरू की गई इन डिजिटल प्रणालियों का सीधा असर राज्य के खजाने के कुशल प्रबंधन और आम नागरिकों को मिलने वाली कल्याणकारी सहायता पर पड़ेगा। • मिजोरम में: राज्य की योजनाओं के लाभार्थियों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। थलाई थार लीना, बाना काइह और बिजली सब्सिडी का पैसा सीधे बैंक खाते में आएगा और वे अपने मोबाइल से ही भुगतान की स्थिति देख सकेंगे। • भारत में: पूर्वोत्तर राज्यों में सार्वजनिक धन के सटीक उपयोग और पेपरलेस शासन का एक नया मॉडल तैयार होगा। अन्य छोटे राज्य भी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के खर्च और ट्रेजरी मिलान के लिए इस व्यवस्था को अपना सकते हैं। • करदाताओं के लिए: विभागों द्वारा तय बजट से अधिक खर्च करने पर पूरी तरह तकनीकी रोक लग जाएगी। जनता के टैक्स के पैसे का उपयोग बिना वित्तीय अनियमितताओं और गणना त्रुटियों के सुनिश्चित होगा। • प्रशासनिक कार्यों के लिए: फाइलों को मंजूर कराने और बजट प्रस्ताव भेजने में हफ्तों लगने वाला समय अब घंटों में सिमट जाएगा। अधिकारी और कर्मचारी बिना कागजी उलझनों के विकास योजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन पर ध्यान दे सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ मिजोरam में सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को आधुनिक बनाने और विभिन्न विभागों में होने वाले खर्च की निगरानी में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए यह फैसला लिया गया है। • लेखा-जोखा में विसंगतियों को दूर करना: पूर्व में अलग-अलग इंजीनियरिंग विभागों में खर्च के वाउचर और ट्रेजरी रिकॉर्ड्स के बीच मिलान में समय लगता था। एमआईडब्ल्यूएएस के माध्यम से महालेखाकार को भेजे जाने वाले आंकड़ों में एकरूपता और शुद्धता सुनिश्चित की गई है। • बजट सीमा से अधिक खर्च पर रोक: कागजी मंजूरियों के दौर में कई बार स्वीकृत बजट से अधिक दायित्व बन जाते थे। ई-सेंशन पोर्टल को इस तरह तैयार किया गया है कि फंड खत्म होने पर सिस्टम आगे का खर्च स्वतः ही रोक देगा। • कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता: सरकारी योजनाओं के तहत नकद या चेकों के वितरण में देरी और विसंगतियों की संभावना बनी रहती थी। इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए सौ फीसदी ऑनलाइन डीबीटी व्यवस्था को अनिवार्य बनाया गया है। • केंद्रीय योजनाओं के लिए तैयारी: राज्य सरकार एसएएससीआई के तहत आगामी वित्तीय वर्ष में भारी केंद्रीय पूंजी जुटाने की योजना बना रही है। इसके लिए राज्य की वित्तीय प्रणाली का आधुनिक, पारदर्शी और केंद्रीय मानकों के अनुकूल होना अनिवार्य था। सवाल-जवाब 1. मिजोरम सरकार ने कौन से चार डिजिटल सिस्टम शुरू किए हैं? सरकार ने एमआईडब्ल्यूएएस (वर्क्स एकाउंट्स सिस्टम), ई-सेंशन, ई-बजट और 100 प्रतिशत डीबीटी व्यवस्था की शुरुआत की है। 2. एमआईडब्ल्यूएएस पोर्टल किन विभागों पर लागू किया गया है? यह लोक निर्माण, जन स्वास्थ्य इंजीनियरिंग, बिजली, सिंचाई, वन एवं पर्यावरण और भूमि संसाधन जैसे छह बड़े विभागों में लागू हुआ है। 3. ई-सेंशन और ई-बजट से सरकारी कामकाज में क्या बदलाव आएगा? बजट प्रस्ताव ऑनलाइन जमा होंगे और वित्तीय मंजूरियों के दौरान तय बजट से अधिक खर्च करने पर तकनीकी रूप से रोक लग जाएगी। 4. डीबीटी व्यवस्था के तहत किन प्रमुख योजनाओं का पैसा सीधे खाते में भेजा जाएगा? इसके जरिए थलाई थार लीना, बाना काइह और बिजली सब्सिडी योजना का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में किया जाएगा। 5. मिजोरम को एसएएससीआई योजना के तहत कितनी धनराशि मिलने की उम्मीद है? राज्य को पिछले वर्ष 350 करोड़ रुपये मिले थे और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 650 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी है। https://trendkia.com/mizoram/mizoram-men-sarakari-khajane-ki-nigarani-sakhta-siema-lalduhoma-ne-shuru-kie-chara-nae-dijitala-portala-48131 TrendKia — Har trend, sabse pehle.