मिजोरम में सुपारी की खेती को कीटों से बचाने के लिए वैज्ञानिक उपाय और वित्तीय मदद की तैयारी मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 2021 से सुपारी की फसलों पर जारी कीट प्रकोप से निपटने के लिए वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचे के विकास और वैज्ञानिक तरीकों की घोषणा की है। मिजोरम में सुपारी के बागानों को साल 2021 से नुकसान पहुंचा रहे कीटों के प्रकोप से निपटने के लिए राज्य सरकार वैज्ञानिक समाधान और वित्तीय मदद देने पर विचार कर रही है। वैज्ञानिक सुपारी की खेती और कीट प्रबंधन पर आयोजित एक प्रशिक्षण सह सेमिनार के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस संकट से उबरने के लिए उठाए जा रहे कदमों की रूपरेखा रखी। राज्य में लगभग 67,380 हेक्टेयर क्षेत्र में सुपारी की खेती की जाती है और वर्ष 2025-26 के दौरान इसका उत्पादन करीब 5.12 लाख क्विंटल रहने का अनुमान लगाया गया है। इस उत्पादन के साथ मिजोरम देश भर में सुपारी उत्पादक राज्यों की सूची में पांचवें स्थान पर आता है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय को भेजी जाएगी संयुक्त जांच रिपोर्ट कीटों के लगातार हो रहे हमले की प्रकृति और उसके मूल कारणों को समझने के लिए राज्य के भूमि संसाधन, मृदा और जल संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सुपारी और मसाला विकास निदेशालय के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर मुआयना किया है। यह संयुक्त दल कीटों के फैलने के कारणों का विश्लेषण करते हुए रोकथाम के उपायों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपी जाएगी, जिससे केंद्र सरकार से आवश्यक सहायता प्राप्त कर कीट संक्रमण पर पूरी तरह काबू पाया जा सके। कोको के साथ मिश्रित खेती और आधुनिकीकरण पर जोर किसानों की आय में सुधार और जोखिम कम करने के लिए राज्य सरकार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीपीसीआरआई) के साथ मिलकर सुपारी के साथ कोको की मिश्रित खेती (इंटरक्रॉपिंग) की संभावनाओं का भी अध्ययन कर रही है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने किसानों से परंपरागत तौर-तरीकों के बजाय कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए नए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बागानों की उत्पादकता बढ़ाने और उनका बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही नए किसानों को राज्य सरकार की प्रमुख 'बाना काइह' (हैंडहोल्डिंग) योजना और मुख्यमंत्री विशेष पैकेज का लाभ उठाने की सलाह दी गई है। सड़क संपर्क और बुनियादी ढांचे के लिए 27.66 करोड़ रुपये सुपारी उत्पादकों की ओर से कीटनाशक दवाओं, खाद, सिंचाई की सुविधा और बागानों तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्गों की लगातार मांग की जा रही थी। सरकार ने इन मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का भरोसा दिया है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) तथा राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता (एसएएससीआई) योजना के तहत 27.66 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई है। इस पूंजी की मदद से सुपारी, रबर और ब्रूम ग्रास के बागानों को जोड़ने वाली 170 किलोमीटर लंबी संपर्क सड़कों का निर्माण विभिन्न स्थानों पर कराया जाएगा। कार्बन क्रेडिट और अतिरिक्त कमाई के अवसर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार कार्बन फाइनेंस के जरिए बागान मालिकों के लिए अतिरिक्त आय पैदा करने के विकल्पों की भी जांच कर रही है। सुपारी, रबर और कॉफी के पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने में मददगार साबित होते हैं। इसी वजह से राज्य प्रशासन कार्बन ट्रेडिंग एजेंसियों और एग्रीगेटर्स के साथ संभावित कार्बन क्रेडिट अवसरों को लेकर बातचीत कर रहा है। कार्यक्रम में शामिल भूमि संसाधन, मृदा और जल संरक्षण मंत्री लालथानसांगा ने किसानों को सरकार का वीआईपी बताते हुए कहा कि पूरी तरह पारंपरिक तौर-तरीकों पर निर्भर रहने से कई परेशानियां आ सकती हैं, इसलिए प्रशिक्षण से हासिल ज्ञान का उपयोग खेतों में करना चाहिए। इसका आप पर असर मिजोरम में सुपारी किसानों को कीट प्रकोप से सुरक्षा, बेहतर सड़क संपर्क और अतिरिक्त कमाई के नए साधन मिलने की राह आसान होगी। • मिजोरम में: सुपारी उत्पादकों को 170 किलोमीटर नई संपर्क सड़कों, कीटनाशकों और सिंचाई सहायता का चरणबद्ध लाभ मिलेगा। इसके अलावा किसान 'बाना काइह' योजना और विशेष पैकेज से वित्तीय संबल पा सकते हैं। • भारत में: देश के पांचवें सबसे बड़े उत्पादक राज्य में फसल सुरक्षा मजबूत होने से राष्ट्रीय सुपारी बाजार में आपूर्ति स्थिर रखने में मदद मिलेगी। दूसरे राज्यों के बागान मालिक भी मिश्रित खेती और कार्बन क्रेडिट जैसे प्रयोगों से सीख ले सकते हैं। • बागान मालिकों के लिए: कोको के साथ इंटरक्रॉपिंग और कार्बन ट्रेडिंग से किसानों के पास केवल एक फसल पर निर्भर रहने का जोखिम कम होगा। वैज्ञानिक सलाह और मिट्टी संरक्षण उपायों से पैदावार में सुधार की उम्मीद है। • उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए: 2025-26 में अनुमानित 5.12 लाख क्विंटल उत्पादन की सुरक्षा से कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव की आशंका कम होगी। आपूर्ति श्रृंखला बेहतर होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ मिजोरम में 2021 से लगातार फैल रहे कीट संक्रमण के कारण सुपारी के हजारों हेक्टेयर बागान प्रभावित हुए हैं, जिससे किसानों की उपज और आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। इस संकट के समाधान और भविष्य की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों का सहयोग लिया है। • कीट संक्रमण का संकट: साल 2021 से सुपारी के पेड़ों में अज्ञात या अनियंत्रित कीटों का प्रकोप बना हुआ है। पारंपरिक तरीकों से इस पर काबू न पाने के कारण अब केंद्रीय कृषि वैज्ञानिकों की मदद से वैज्ञानिक जांच कराई गई है। • उत्पादन का बड़ा पैमाना: राज्य में लगभग 67,380 हेक्टेयर में सुपारी की खेती होती है और यह देश का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इतने बड़े पैमाने पर हो रहे नुकसान को रोकने के लिए केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपकर वित्तीय व तकनीकी सहायता मांगी जा रही है। • बुनियादी ढांचे की कमी: सुदूर बागानों तक पहुंच मार्ग, दवाओं और सिंचाई साधनों की कमी से किसान कीटों से समय पर निपट नहीं पा रहे थे। इसके समाधान के लिए नाबार्ड और एसएएससीआई के जरिए 27.66 करोड़ रुपये जुटाकर सड़कें बनाने का फैसला लिया गया। सवाल-जवाब 1. मिजोरम में सुपारी की खेती कितने क्षेत्रफल में की जाती है? मिजोरम में लगभग 67,380 हेक्टेयर क्षेत्र में सुपारी की खेती होती है। 2. वर्ष 2025-26 के लिए मिजोरम में सुपारी उत्पादन का क्या अनुमान है? वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में लगभग 5.12 लाख क्विंटल सुपारी उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। 3. देश में सुपारी उत्पादन के मामले में मिजोरम का कौन सा स्थान है? मिजोरम पूरे देश में सुपारी उत्पादक राज्यों में पांचवें स्थान पर आता है। 4. बागान सड़कों के निर्माण के लिए कितनी धनराशि जुटाई गई है? नाबार्ड और एसएएससीआई योजना के जरिए 170 किलोमीटर संपर्क सड़कों के निर्माण के लिए 27.66 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई है। 5. सुपारी के साथ किस फसल की मिश्रित खेती करने पर विचार किया जा रहा है? आईसीएआर-सीपीसीआरआई के परामर्श से सुपारी के साथ कोको की मिश्रित खेती (इंटरक्रॉपिंग) करने की संभावना तलाशी जा रही है। 6. किसानों को वित्तीय सहायता के लिए कौन सी योजना उपलब्ध है? किसान राज्य सरकार की 'बाना काइह' (हैंडहोल्डिंग) योजना और मुख्यमंत्री विशेष पैकेज के तहत मदद ले सकते हैं। https://trendkia.com/mizoram/mizoram-men-supari-ki-kheti-ko-kiton-se-bachane-ke-lie-vaijnanika-upaya-aura-vittiya-madada-ki-taiyari-45943 TrendKia — Har trend, sabse pehle.