नशा मुक्त मिजोरम के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना शुरू, त्लांगमावी बना राज्य का पहला नशा मुक्त गांव मिजोरम प्रशासन ने मादक पदार्थों की तस्करी और लत पर अंकुश लगाने के लिए तीन साल की व्यापक कार्ययोजना शुरू की है, साथ ही खौजॉल जिले के त्लांगमावी को पहला नशा मुक्त गांव घोषित किया गया। मिजोरम में मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से युवाओं को सुरक्षित रखने के मकसद से एक व्यापक तीन वर्षीय कार्ययोजना का औपचारिक आगाज किया गया है। आइजोल स्थित विधानसभा एनेक्सी में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान इस नई रणनीति को जमीन पर उतारने की घोषणा की गई। इस खास अवसर पर खौजॉल जिले में स्थित त्लांगमावी गांव को राज्य के पहले नशा मुक्त गांव के खिताब से नवाजा गया और गांव के प्रतिनिधियों को इसका आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा गया। समुदाय और प्रशासन के साझा प्रयासों पर विशेष जोर इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मंत्रियों, शीर्ष सरकारी एवं पुलिस अधिकारियों, सामाजिक संगठनों (एनजीओ), चर्च के प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से हिस्सा लिया। सभी पक्षों ने एक स्वर में माना कि मादक पदार्थों के संकट से निपटने के लिए समाज के प्रत्येक तबके की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह ने कार्यक्रम में शिरकत करते हुए इस तीन साल की विस्तृत योजना का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ यह लड़ाई केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए पूरे समाज के निरंतर और संगठित सहयोग की दरकार है। राज्यपाल ने केंद्र सरकार द्वारा 2 अगस्त 2026 को शुरू किए गए 100 सप्ताह के नशा मुक्त भारत संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य की यह नई पहल युवाओं को नशे की चपेट में आने से बचाने, समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने और निवारक कदम उठाने पर पूरी तरह केंद्रित रहेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक शुरुआत है और आने वाले तीन वर्षों में इसके ठोस परिणाम नजर आने लगेंगे। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को सकारात्मक रुख अपनाते हुए साथ लेकर चलना बेहद जरूरी होगा। सीमावर्ती इलाकों में चौकसी और त्लांगमावी का अनुकरणीय कदम राज्यपाल ने त्लांगमावी गांव को नशा मुक्त घोषित किए जाने की सराहना की और इसे ग्रामीण समुदाय के अनुकरणीय तालमेल का परिणाम बताया। उन्होंने प्रदेश के अन्य गांवों और शहरों से भी इसी तर्ज पर संगठित प्रयास करने का आह्वान किया। मिजोरम की भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सीमा का हवाला देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि देश के भीतर नशीले पदार्थों के अवैध प्रवेश को रोकने में राज्य की भूमिका बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारियों से भरी है। उन्होंने सीमा पार तस्करी से मुकाबला करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन जेरिको और अल्पकालिक नशामुक्ति व पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने वाले हुलह्लियाप शॉर्ट स्टे सेंटर जैसी मौजूदा पहलों का भी उल्लेख किया। गृह मंत्री के. सपडांगा ने त्लांगमावी ग्राम परिषद के अध्यक्ष ललतलानछुआहा और ग्रामीणों को नशा मुक्त गांव का प्रमाण पत्र सौंपा। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने नागरिकों को नशे के अभिशाप से बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पुलिस और जांच एजेंसियों का ध्यान केवल दवाइयां या नशा पहुंचाने वाले कूरियर व छोटे तस्करों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करने वाले मुख्य सिंडिकेट की तह तक जाकर पड़ताल की जानी चाहिए। करोड़ों के मादक पदार्थ जब्त और सख्त कानूनी कार्रवाई नशे के कारोबार के खिलाफ राज्य में जारी कार्रवाइयों का लेखा-जोखा पेश करते हुए गृह मंत्री के. सपडांगा ने बताया कि जनवरी से अगस्त 2026 के बीच नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) कानून के तहत 635 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 111 विदेशी नागरिकों सहित कुल 930 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 846 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नशीले पदार्थों की जब्ती की गई। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तलाशी अभियान और निगरानी तंत्र को और ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा ताकि सीमा पार से होने वाली तस्करी को पूरी तरह विफल किया जा सके। सख्त कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता जताने के साथ ही गृह मंत्री ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग नशे की लत से जूझ रहे हैं, उन्हें सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए समुचित चिकित्सा, देखभाल और भावनात्मक समर्थन दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान को और अधिक तेज करने का आग्रह किया ताकि छात्र जीवन में ही युवाओं को ऐसे खतरों के प्रति सचेत किया जा सके। जमीनी अनुभव और बहुपक्षीय समन्वय कार्यक्रम के दौरान जमीनी स्तर पर नशामुक्ति और कानून व्यवस्था से जुड़े लोगों ने अपने निजी और पेशेवर अनुभव साझा किए। मिजोरम ड्रग यूजर्स फोरम के डेविड ललरिनावमा ने नशा छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपनी प्रेरक यात्रा प्रस्तुत की। भारत-म्यांमार सीमा पर नशीले पदार्थों की रोकथाम की चुनौतियों को सामने रखते हुए जोखावथर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी जिरथांगा पाचुआउ ने अपने अनुभव बताए। त्लांगमावी ग्राम परिषद के अध्यक्ष ललतलानछुआहा ने उन सामुदायिक कदमों की जानकारी दी जिनकी मदद से गांव को पूरी तरह नशा मुक्त बनाया जा सका। समारोह की शुरुआत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के पुलिस महानिरीक्षक सेजु पी. कुरुविल्ला के स्वागत भाषण और राज्य की कार्ययोजना पर प्रस्तुति के साथ हुई। पुलिस महानिदेशक शरद अग्रवाल ने सरकारी महकमों, पुलिस बल और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल की अहमियत को रेखांकित किया। इस मौके पर समाज कल्याण मंत्री ललरिनपुई सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इसका आप पर असर मिजोरम की तीन वर्षीय कार्ययोजना और सीमावर्ती सुरक्षा अभियानों से नशीले पदार्थों के प्रसार को रोकने और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय सीमा से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी रुकने से देश के अन्य राज्यों में अवैध दवाओं की खेप पहुंचना बंद होगी। इससे राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिलेगी। • मिजोरम में: शैक्षणिक संस्थानों में चलाए जा रहे सघन अभियानों से युवाओं को नशे के खतरे से बचाया जा सकेगा। त्लांगमावी मॉडल को अपनाकर राज्य के अन्य गांव और कस्बे भी सामुदायिक निगरानी के जरिए नशा मुक्त बनने का प्रयास कर सकते हैं। • रोगियों और परिवारों के लिए: हुलह्लियाप शॉर्ट स्टे सेंटर जैसी सुविधाओं से नशे की लत से जूझ रहे लोगों को तुरंत डिटॉक्सिफिकेशन और पुनर्वास की सुविधा मिल सकेगी। इससे प्रभावित लोगों को बिना किसी सामाजिक कलंक के सामान्य जीवन में लौटने का मौका मिलेगा। • सीमावर्ती सुरक्षा के लिए: भारत-म्यांमार सीमा पर जोखावथर जैसे संवेदनशील इलाकों में ऑपरेशन जेरिको के तहत पुलिस निगरानी कड़ी होगी। इससे सीमा पार से अवैध वस्तुओं और मादक पदार्थों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगेगी। ऐसा क्यों हुआ मिजोरम की संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा और युवाओं में नशीले पदार्थों के बढ़ते उपयोग ने प्रशासन को एक सुनियोजित तीन वर्षीय कार्ययोजना तैयार करने के लिए प्रेरित किया। • सीमा पार से तस्करी: मिजोरम म्यांमार के साथ एक लंबी खुली सीमा साझा करता है, जो लंबे समय से नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के लिए इस्तेमाल की जाती रही है। इसी के चलते राज्य में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 846 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थ पकड़े गए। • सिंडिकेट का बढ़ता जाल: नशा तस्करों ने युवाओं और स्थानीय लोगों को कूरियर के रूप में इस्तेमाल कर अपना नेटवर्क फैलाया है। इस स्थिति से निपटने के लिए केवल पेडलर्स को नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करने की सख्त जरूरत महसूस हुई। • सामुदायिक पहल की सफलता: खौजॉल जिले के त्लांगमावी गांव में स्थानीय स्तर पर नागरिकों ने एकजुट होकर नशे का पूरी तरह खात्मा किया। इस सफल मॉडल ने साबित किया कि सरकारी सहयोग के साथ ग्रामीण समाज मिलकर नशे को पूरी तरह हरा सकता है। सवाल-जवाब 1. मिजोरम का पहला नशा मुक्त गांव किसे घोषित किया गया है? खौजॉल जिले में स्थित त्लांगमावी गांव को मिजोरम का पहला नशा मुक्त गांव घोषित किया गया है। 2. तीन वर्षीय नशा विरोधी कार्ययोजना का शुभारंभ किसने किया? इस कार्ययोजना का शुभारंभ राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह ने आइजोल स्थित विधानसभा एनेक्सी में किया। 3. जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान राज्य में कितने मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए? इस आठ महीने की अवधि में 846 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए गए। 4. एनडीपीएस कानून के तहत इस दौरान कितने मामले और गिरफ्तारियां हुईं? इस अवधि में एनडीपीएस कानून के तहत 635 मामले दर्ज किए गए और 111 विदेशी नागरिकों सहित कुल 930 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 5. सीमा पार तस्करी को रोकने के लिए मिजोरम में कौन सा ऑपरेशन चलाया जा रहा है? सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए ऑपरेशन जेरिको चलाया जा रहा है। 6. हुलह्लियाप शॉर्ट स्टे सेंटर किस कार्य के लिए जाना जाता है? यह केंद्र नशीले पदार्थों की लत से जूझ रहे लोगों को अल्पकालिक डिटॉक्सिफिकेशन और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करता है। https://trendkia.com/mizoram/mizoram-men-tina-varshiya-nasha-virodhi-karyayojana-shuru-tlangmawi-bana-pahala-nasha-mukta-ganva-40045 TrendKia — Har trend, sabse pehle.