मिजोरम सरकार ने एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता हॉकी खिलाड़ियों को 40-40 लाख रुपये देने का किया ऐलान भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य लालरेमसियामी और लालथान्तलुआंगी को मिजोरम सरकार सम्मानित करेगी और दोनों को कुल 40-40 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। भारतीय महिला हॉकी टीम के ऐतिहासिक प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाने वाली दो मिजो खिलाड़ियों, लालरेमसियामी और लालथान्तलुआंगी के सम्मान में मिजोरम सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने एशियाई खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली इन दोनों स्टार खिलाड़ियों को 40-40 लाख रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है। महाद्वीपीय प्रतियोगिता से लौटने पर आइजोल में दोनों एथलीटों का भव्य स्वागत किया गया, जिसके बाद एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित कर उनकी उपलब्धियों को सराहा गया। आर डेंगथुआमा हॉल में हुआ भव्य स्वागत समारोह मुआलपुई सलेम स्थित आर डेंगथुआमा हॉल में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने दोनों एथलीटों का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने भारतीय महिला हॉकी में उनके योगदान की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और कहा कि इन खिलाड़ियों ने मिजोरम का नाम पूरे देश और दुनिया में रोशन किया है। यह सम्मान केवल उनकी जीत का उत्सव नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य युवाओं को खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने का एक बड़ा कदम भी है। दो सरकारी योजनाओं से मिलेगी 40 लाख रुपये की राशि पुरस्कार राशि के विवरण को साझा करते हुए बताया गया कि खिलाड़ियों को यह सहायता दो अलग-अलग योजनाओं के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। मिजोरम स्टेट इंसेंटिव कैश अवॉर्ड स्कीम के तहत प्रत्येक खिलाड़ी को 25 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, बाना काईह (हैंडहोल्डिंग) योजना के माध्यम से 15-15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इस तरह प्रत्येक खिलाड़ी को मिलने वाली कुल सम्मान राशि 40 लाख रुपये होगी। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने स्पष्ट किया कि प्रोत्साहन नकद पुरस्कारों के पांचवें वितरण समारोह में अन्य सफल मिजो खिलाड़ियों के साथ इन दोनों को औपचारिक रूप से यह चेक सौंपे जाएंगे। मिजोरम के खेल इतिहास में रचा गया नया अध्याय मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक क्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि लालरेमसियामी और लालथान्तलुआंगी ने एशियाई खेलों में पदक जीतकर मिजोरम के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। वे एशियाई खेलों में पदक हासिल करने वाली राज्य की पहली खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मिजोरम ने एशियाई खेलों में अपनी पदक यात्रा की शुरुआत सीधे स्वर्ण पदक से की है, जो पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। यदि खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और संस्थागत समर्थन मिले, तो मिजोरम देश के एक मजबूत हॉकी केंद्र के रूप में उभरने की पूरी क्षमता रखता है। हॉकी मैदान का नामकरण और खेल को प्राथमिकता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने बाना काईह 'एम्पावरिंग मिजोरम स्पोर्ट्स' कार्यक्रम के तहत हॉकी को प्राथमिकता वाले खेलों में शामिल किया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि लालरेमसियामी की शानदार उपलब्धियों को चिरस्थायी बनाने के लिए कोलासिब डियाक्कौन जीएसए खेल के मैदान का नाम उनके नाम पर रखने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, खेल मंत्री लालघिंगलोवा हमार ने महिला हॉकी में भारत की इस जीत को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि देश को इस स्पर्धा में 44 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद स्वर्ण पदक मिला है, जो इस सफलता को ऐतिहासिक बनाता है। खेल मंत्री ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इसका आप पर असर मिजोरम सरकार की यह घोषणा राज्य में खेल संस्कृति, एथलीटों के आर्थिक प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। • भारत में: यह निर्णय अन्य राज्यों पर भी अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को सम्मानजनक वित्तीय सहायता देने के लिए सकारात्मक दबाव बनाता है। इससे ओलंपिक और एशियाई खेलों की तैयारी कर रहे महिला खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है। • मिजोरम में: पूर्वोत्तर के युवाओं और विशेष रूप से लड़कियों को पेशेवर खेलों में करियर बनाने के लिए आर्थिक सुरक्षा और प्रोत्साहन मिलेगा। कोलासिब में खेल मैदान का नामकरण और हॉकी को प्राथमिकता सूची में शामिल करने से जमीनी स्तर पर सुविधाएं बढ़ेंगी। • खिलाड़ियों के लिए: 40 लाख रुपये की यह राशि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, पोषण और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं की तैयारियों में आर्थिक स्थिरता प्रदान करेगी। खिलाड़ी बिना वित्तीय तनाव के अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। • खेल नीति के स्तर पर: दोहरी योजनाओं के माध्यम से नकद पुरस्कार वितरण से राज्य की खेल प्रोत्साहन नीतियों की पारदर्शिता और प्रभावशीलता साबित होती है। आगामी पांचवें वितरण समारोह में अन्य स्थानीय एथलीटों को भी लाभ मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह सम्मान और नकद पुरस्कार भारतीय महिला हॉकी टीम की ऐतिहासिक जीत और उसमें मिजोरम की दो खिलाड़ियों की असाधारण भागीदारी के उपलक्ष्य में दिए गए हैं। • एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक: भारतीय महिला हॉकी टीम ने महाद्वीपीय चैंपियनशिप में शानदार खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस दल में मिजोरम की लालरेमसियामी और लालथान्तलुआंगी दोनों शामिल थीं। • 44 साल का लंबा इंतजार: खेल मंत्री के अनुसार, भारत ने इस स्पर्धा में 44 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। इस दुर्लभ ऐतिहासिक उपलब्धि ने खिलाड़ियों के योगदान को और अधिक विशिष्ट बना दिया। • राज्य के लिए पहला पदक: मिजोरम के खेल इतिहास में इससे पहले किसी भी एथलीट ने एशियाई खेलों में पदक नहीं जीता था। राज्य के पदक रिकॉर्ड की शुरुआत सीधे स्वर्ण से होने के कारण सरकार ने विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया। • सरकारी प्रोत्साहन नीति: मिजोरम सरकार अपनी नकद पुरस्कार योजना और बाना काईह कार्यक्रम के तहत राज्य को एक उभरता हुआ हॉकी केंद्र बनाना चाहती है, जिसके तहत यह कदम उठाया गया। सवाल-जवाब 1. मिजोरम सरकार ने खिलाड़ियों को कुल कितने रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है? सरकार ने दोनों हॉकी खिलाड़ियों को 40-40 लाख रुपये की कुल प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया है। 2. किन दो खिलाड़ियों को इस सम्मान के लिए चुना गया है? भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य लालरेमसियामी और लालथान्तलुआंगी को यह सम्मान दिया जा रहा है। 3. 40 लाख रुपये की इस राशि का वितरण किन योजनाओं के तहत होगा? प्रत्येक खिलाड़ी को मिजोरम स्टेट इंसेंटिव कैश अवॉर्ड स्कीम से 25 लाख रुपये और बाना काईह योजना से 15 लाख रुपये मिलेंगे। 4. समारोह का आयोजन किस स्थान पर किया गया था? यह सम्मान समारोह आइजोल के मुआलपुई सलेम स्थित आर डेंगथुआमा हॉल में आयोजित किया गया। 5. मिजोरम के खेल इतिहास में इन दोनों खिलाड़ियों की क्या उपलब्धि है? वे एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली मिजोरम की पहली एथलीट बन गई हैं। 6. किस खेल के मैदान का नाम लालरेमसियामी के नाम पर रखने पर विचार हो रहा है? कोलासिब डियाक्कौन जीएसए खेल मैदान का नामकरण लालरेमसियामी के नाम पर करने पर विचार किया जा रहा है। 7. भारत ने कितने वर्षों बाद एशियाई खेलों की महिला हॉकी में स्वर्ण पदक जीता है? खेल मंत्री के अनुसार, भारत ने इस प्रतियोगिता में 44 वर्षों के अंतराल के बाद स्वर्ण पदक हासिल किया है। प्रेरणा और सबक दूरदराज के पूर्वोत्तर राज्य से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रचने वाली दोनों खिलाड़ियों का सफर हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। • लगन और परिश्रम: सीमित संसाधनों वाले क्षेत्र से उठकर विश्वस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना यह सिखाता है कि दृढ़ संकल्प से हर बाधा पार की जा सकती है। • इतिहास रचने का साहस: अपने राज्य के लिए एशियाई खेलों का पहला पदक हासिल कर खिलाड़ियों ने साबित किया कि पहला कदम उठाने वाला ही नया रास्ता बनाता है। • सामूहिक सफलता: टीम वर्क और अनुशासन के बल पर 44 साल के सूखे को खत्म करते हुए दोनों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय गौरव हासिल किया। • युवाओं के लिए प्रेरणा: अपनी सफलता से उन्होंने यह संदेश दिया कि खेल केवल शौक नहीं, बल्कि एक सम्मानित और आत्मनिर्भर करियर का माध्यम बन सकता है। https://trendkia.com/mizoram/mizoram-sarakara-ne-asian-games-ki-svarna-padaka-vijeta-hoki-khilariyon-ko-40-40-lakha-rupaye-dene-ka-kiya-ailana-43848 TrendKia — Har trend, sabse pehle.