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  "type": "article",
  "title": "मिजोरम विवाह कानून संशोधन के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने को कहा",
  "summary": "सुप्रीम कोर्ट ने मिजोरम के विवाह और संपत्ति उत्तराधिकार कानून संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया है।",
  "content": "सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक मिजोरम की महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि वह अपनी याचिका के साथ गुवाहाटी हाईकोर्ट में जाएं, क्योंकि इस राज्य पर उसी उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है। यह मामला मिजोरम के विवाह और संपत्ति से जुड़े कानूनों में किए गए संशोधनों को चुनौती देने से जुड़ा हुआ है।\n\nसंविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर हुई थी याचिका\n\nमेरियम एल हरंगचाल द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दाखिल की गई थी। इसमें मिजोरम विवाह और संपत्ति उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए वर्ष 2014 के मूल मिजोरम विवाह, तलाक और संपत्ति उत्तराधिकार अधिनियम में बदलाव किए गए थे। याचिका में नए प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।\n\nअदालत ने स्थानीय स्तर पर सुनवाई पर दिया जोर\n\nसुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि जब क्षेत्र में उच्च न्यायालय उपलब्ध है, तो उन्हें इसके लिए दिल्ली आने की कोई आवश्यकता नहीं है। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आप हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते हैं? आखिर उच्च न्यायालयों की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई थी। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की जा सकती है।\n\nगैर-मिजोरम पुरुषों से विवाह और अधिकारों का विवाद\n\nयाचिकाकर्ता का मुख्य आरोप है कि संशोधित कानून उन मिजोरम की महिलाओं के साथ भेदभाव करता है जो गैर-मिजोरम पुरुषों से विवाह करती हैं और इससे उनके बच्चों के अधिकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस कानूनी पेंच के कारण महिलाओं की सामुदायिक पहचान, उनकी अनुसूचित जनजाति की स्थिति और बच्चों की कानूनी स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।\n\nनए कानून के अन्य मुख्य प्रावधान\n\nवर्ष 2026 के संशोधित कानून में पारंपरिक प्रथाओं को शामिल करते हुए वर्ष 2014 के मूल कानून के प्रावधानों को और मजबूत किया गया है। इसमें बहुविवाह, अंतर-सामुदायिक विवाह और वैवाहिक संपत्ति पर महिलाओं के अधिकारों से जुड़े बदलाव शामिल हैं। नए नियमों के तहत बहुविवाह पर रोक लगाई गई है और महिलाओं को वैवाहिक संपत्ति में 50 प्रतिशत का समान हिस्सा दिया गया है, लेकिन अंतर-जातीय विवाहों से जुड़े नियम विवाद का विषय बने हुए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह मामला देश भर में पारंपरिक रीति-रिवाजों और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन पर कानूनी चर्चा को प्रभावित करता है।\n\nमिजोरम में: इस निर्णय से राज्य के विवाह, संपत्ति उत्तराधिकार और अंतर-समुदायिक विवाहों से जुड़े कानूनों पर स्थानीय अदालतों में सुनवाई का रास्ता साफ हुआ है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को क्या निर्देश दिया?\nसुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया।\n\n2. यह याचिका किसने दायर की थी?\nयह याचिका मेरियम एल हरंगचाल द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई थी।\n\n3. याचिका में किस कानून को चुनौती दी गई है?\nयाचिका में मिजोरम विवाह और संपत्ति उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधानों को चुनौती दी गई है।\n\n4. याचिका में मुख्य आपत्ति क्या है?\nयाचिका में आरोप लगाया गया है कि संशोधित कानून गैर-मिजोरम पुरुषों से विवाह करने वाली महिलाओं के साथ भेदभाव करता है।",
  "url": "https://trendkia.com/mizoram/mizoram-vivaha-kanuna-snshodhana-ke-khilapha-yachika-para-supreme-court-ka-nirdesha-gauhati-hc-jane-ko-kaha-21382",
  "category": "मिजोरम",
  "publishedAt": "2026-08-24",
  "tags": [
    "सुप्रीम कोर्ट",
    "मिजोरम",
    "गुवाहाटी हाईकोर्ट",
    "विवाह कानून",
    "संपत्ति अधिकार"
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  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
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