म्यांमार सीमा तक दौड़ेगी ट्रेन: मिजोरम में 230 किलोमीटर लंबे रेल कॉरिडोर पर सीएम लालदुहोमा ने की समीक्षा बैठक मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने आइजोल के पास सैरंग से म्यांमार सीमा तक प्रस्तावित 230.110 किलोमीटर लंबे रेलवे कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा की। इस प्रोजेक्ट में 20 स्टेशन बनाए जाएंगे और ट्रेनें 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। पूर्वोत्तर भारत में सीमावर्ती क्षेत्रों तक बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में एक अहम बैठक आयोजित की गई। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मंगलवार को अपने कार्यालय में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में राज्य की राजधानी आइजोल के पास स्थित सैरंग से म्यांमार सीमा पर लावंगत्लाई जिले के ह्मावंगबुछुआ तक प्रस्तावित 230.110 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के खाके और परिचालन रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। रेल परियोजना की तकनीकी और परिचालन विशेषताएं यह प्रस्तावित रेलवे कॉरिडोर पूर्वोत्तर क्षेत्र के परिवहन परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव लाएगा। अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत विवरण के अनुसार, 230.110 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग पर कुल 20 स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, इस ट्रैक को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि इस पर ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ सकेंगी, जिससे पहाड़ी इलाके में यात्रा समय में भारी कमी आएगी। यह नया रेल संपर्क मिजोरम के दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों को राज्य के मुख्य हिस्सों और देश के अन्य भागों से जोड़ेगा। लावंगत्लाई जिले को सीधे जोड़ने से व्यापार, आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय आवाजाही को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और पहचान को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने रेलवे अधिकारियों से आग्रह किया कि मार्ग में पड़ने वाले सभी स्टेशनों और स्थानों के नाम पूरी तरह से सटीक और पारंपरिक स्थानीय मिजो नामों के आधार पर ही रखे जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास के दौरान स्थानीय बस्तियों की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने मिजोरम में रेलवे विकास को प्राथमिकता देने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का धन्यवाद भी व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार रेलवे अधिकारियों को लगातार ऐसे सुझाव दे रही है, जिससे इस परियोजना का अधिकतम लाभ राज्य की जनता को मिल सके। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों की मौजूदगी मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन और प्रशासन के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री लालदुहोमा और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा बैठक में सत्ताधारी जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के विधायक क्लेमेंट ललह्रिमथंगा, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सुधीर कुमार, मुख्यमंत्री के आयुक्त एवं सचिव वनलालदीना फनाई तथा आइजोल के उपायुक्त ललह्रियातपुइया भी शामिल हुए। बैठक में रेलवे लाइन के अलाइनमेंट, स्टेशनों के चयन और भविष्य के परिचालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य सरकार और रेलवे अधिकारियों ने स्थानीय समुदायों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। इसका आप पर असर मिजोरम में सैरंग से म्यांमार सीमा तक नए रेल कॉरिडोर के निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। • भारत में: यह रेल लाइन पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारत की एक्ट ईस्ट नीति को मजबूती प्रदान करेगी और रणनीतिक सीमा सुरक्षा में सुधार करेगी। इससे भारत और म्यांमार के बीच व्यापार और माल परिवहन के नए रास्ते खुलेंगे। • मिजोरम में: मिजोरम के निवासियों को आइजोल और लॉंगत्लाई जिले के बीच सस्ती, सुरक्षित और तेज यात्रा का विकल्प मिलेगा। स्थानीय व्यापारियों को कृषि उत्पादों और दैनिक वस्तुओं के परिवहन में भारी बचत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ऐसा क्यों हुआ मिजोरम सरकार और रेलवे अधिकारियों के बीच यह उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में रेल नेटवर्क के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक कनेक्टिविटी बेहतर करने के उद्देश्य से की गई। • सीमावर्ती कनेक्टिविटी में सुधार: दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर परिवहन विकल्प उपलब्ध कराने और सीमावर्ती कस्बों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यह परियोजना बनाई गई है। • आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन: लॉंगत्लाई जिले को रेल नेटवर्क से जोड़ने पर भारत और म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। • रेल मंत्रालय की प्राथमिकता: केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढांचे के विकास को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे इस परियोजना के खाके को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। सवाल-जवाब 1. सैरंग से म्यांमार सीमा तक बनने वाली प्रस्तावित रेलवे लाइन की कुल लंबाई कितनी है? प्रस्तावित रेलवे लाइन की कुल लंबाई 230.110 किलोमीटर है। 2. इस नए रेलवे कॉरिडोर पर कुल कितने स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है? इस पूरे रेल मार्ग पर कुल 20 रेलवे स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। 3. इस नए रेल मार्ग पर ट्रेनों की अधिकतम गति क्या होगी? इस रेलवे कॉरिडोर पर चलने वाली ट्रेनें अधिकतम 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकेंगी। 4. मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने स्टेशन के नामों को लेकर क्या सुझाव दिया? मुख्यमंत्री ने रेलवे अधिकारियों से अनुरोध किया कि स्टेशनों और स्थानों के नाम सटीक स्थानीय मिजो परंपरा और भाषा के अनुसार ही रखे जाएं। https://trendkia.com/mizoram/myanmar-sima-taka-dauregi-trena-mizoram-men-230-kilomitara-lnbe-rela-koridora-para-cm-lalduhoma-ne-ki-samiksha-baithaka-52704 TrendKia — Har trend, sabse pehle.