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  "type": "article",
  "title": "मिजोरम दौरे पर पहुंचीं रक्षा खडसे, खेल बुनियादी ढांचे और खिलाड़ियों से की मुलाकात",
  "summary": "केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने मिजोरम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के खेल ढांचे की समीक्षा की और खिलाड़ियों तथा अधिकारियों से बातचीत की।",
  "content": "युवा मामले और खेल मंत्रालय की केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने अपने मिजोरम दौरे के दौरान आइजोल में खेल से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया और वहां के खिलाड़ियों के साथ संवाद किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र और विशेष रूप से मिजोरम में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्थन प्रणाली को और अधिक मजबूत करना था।\n\nमंत्रियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक\n\nदौरे के शुरुआती चरण में, रक्षा खडसे ने मिजोरम के खेल और युवा सेवा राज्य मंत्री लालघिंगलोवा हमार से मुलाकात की। इस बैठक में राज्य के भीतर खेल पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक उन्नत बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि खेल के क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल होना कितना जरूरी है।\n\nचर्चा के दौरान इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया गया कि कैसे मिजोरम और पूरे पूर्वोत्तर के युवा एथलीटों के लिए अधिक से अधिक नए अवसर पैदा किए जाएं, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकें।\n\nभारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र का निरीक्षण\n\nअपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने आइजोल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्र का दौरा किया। वहां उन्होंने उपलब्ध खेल सुविधाओं का गहराई से निरीक्षण किया और अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों और सहायता स्टाफ से भी सीधी बातचीत की। इस पूरे निरीक्षण के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण के सहायक निदेशक शिवम यादव भी उनके साथ मौजूद रहे।\n\nखिलाड़ियों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनके कड़े प्रशिक्षण, विभिन्न प्रतियोगिताओं के अनुभवों और उनके भविष्य के सपनों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने खेल के प्रति इन युवाओं की कड़ी मेहनत और लगन की सराहना की।\n\nवैज्ञानिक और पोषण संबंधी सहायता पर जोर\n\nकेंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वोत्तर के उभरते हुए खिलाड़ियों को उच्च स्तर की कोचिंग, वैज्ञानिक सहायता, चोट के बाद रिकवरी, सही पोषण और पर्याप्त प्रतियोगिता के अवसर मिलना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के बिना खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं।\n\nरक्षा खडसे ने खेल मंत्रालय के भारतीय खेल प्राधिकरण और खेलो इंडिया कार्यक्रम की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये पहल जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को चुनकर उन्हें पेशेवर खेल तक पहुंचाने में एक मजबूत मार्ग तैयार कर रही हैं।\n\nमिजोरम में बुनियादी ढांचे का विस्तार\n\nकेंद्र सरकार मिजोरम में खेल के बुनियादी ढांचे को लगातार वित्तीय और तकनीकी सहायता दे रही है। आइजोल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्र में सिंथेटिक हॉकी टर्फ और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था स्थापित करने के लिए एक खेलो इंडिया परियोजना पर काम चल रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य में खेल सुविधाओं के स्तर को ऊपर उठाना है।\n\nकेंद्रीय मंत्री ने फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में मिजोरम की गहरी प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के घरों और प्रशिक्षण केंद्रों के पास ही विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।\n\nभविष्य की नीतियां और समन्वय\n\nरक्षा खडसे ने स्पष्ट किया कि सरकार का दृष्टिकोण एक ऐसा पूर्ण एथलीट विकास मॉडल तैयार करने का है, जहां केवल कंक्रीट का ढांचा ही नहीं बल्कि उसके साथ गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, खेल विज्ञान, पुनर्वास, संतुलित आहार और नियमित प्रतियोगिता का एक्सपोजर भी साथ-साथ चले।\n\nउन्होंने अंत में कहा कि निरंतर और संस्थागत सहयोग, बेहतर बुनियादी ढांचा और केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय ही वह कुंजी है जिसके दम पर मिजोरम और पूरे पूर्वोत्तर के अधिक से अधिक खिलाड़ी देश और दुनिया में चमक सकेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nमिजोरम और पूर्वोत्तर में खेल के बुनियादी ढांचे के विकास से क्षेत्रीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलने का सीधा लाभ मिलेगा।\n\n• भारत में: केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से पूर्वोत्तर के दूरदराज इलाकों के एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर मिलेंगे।\n\n• मिजोरम में: आइजोल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में सिंथेटिक हॉकी टर्फ और बेहतर रोशनी जैसी सुविधाओं के विकास से स्थानीय खिलाड़ियों को अपने गृह राज्य में ही उच्च स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त होगा।\n\n• प्रशिक्षण में सुधार: खेल विज्ञान, पोषण और पेशेवर कोचिंग मिलने से खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार होगा और चोट लगने पर रिकवरी तेज होगी।\n\n• वित्तीय सहायता: केंद्र और राज्य सरकार के आपसी समन्वय से जमीनी स्तर के खेल आयोजनों और एथलीटों को मिलने वाली आर्थिक मदद में पारदर्शिता और तेजी आएगी।\n\n• करियर के अवसर: बेहतर प्रतियोगिता एक्सपोजर मिलने से युवा खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय टीमों और पेशेवर लीगों तक पहुंचने का मार्ग सुगम होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह दौरा केंद्र सरकार की उस नीति के तहत हुआ है जिसके जरिए देश के दूरदराज और पूर्वोत्तर राज्यों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।\n\n• खेल प्रतिभा का दोहन: मिजोरम में फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में स्वाभाविक प्रतिभा मौजूद है, जिसे पेशेवर मार्गदर्शन की आवश्यकता है।\n\n• संस्थागत समन्वय: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी को दूर करने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह उच्चस्तरीय बैठक आवश्यक थी।\n\n• बुनियादी ढांचे की कमी: पूर्वोत्तर के कई प्रशिक्षण केंद्रों में आधुनिक उपकरणों, सिंथेटिक टर्फ और वैज्ञानिक सहायता की लंबे समय से मांग की जा रही थी।\n\n• खेलो इंडिया का विस्तार: सरकार देश भर के खेल केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत निरंतर निवेश कर रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रक्षा खडसे ने मिजोरम दौरे के दौरान किस केंद्र का दौरा किया?\nउन्होंने आइजोल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्र का दौरा किया।\n\n2. रक्षा खडसे ने आइजोल में किस राज्य मंत्री के साथ बैठक की?\nउन्होंने मिजोरम के खेल और युवा सेवा राज्य मंत्री लालघिंगलोवा हमार के साथ बैठक की।\n\n3. आइजोल के प्रशिक्षण केंद्र में कौन सी नई सुविधा स्थापित की जा रही है?\nखेलो इंडिया परियोजना के तहत सिंथेटिक हॉकी टर्फ और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था स्थापित की जा रही है।\n\n4. दौरे के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण के कौन से अधिकारी मौजूद थे?\nभारतीय खेल प्राधिकरण के सहायक निदेशक शिवम यादव इस दौरे के दौरान मौजूद रहे।\n\n5. मिजोरम में किन दो खेलों में सबसे अधिक क्षमता देखी गई है?\nफुटबॉल और हॉकी में मिजोरम की विशेष खेल क्षमता को रेखांकित किया गया है।",
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  "category": "मिजोरम",
  "publishedAt": "2026-09-15",
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    "मिजोरम खेल",
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