अमेरिका पर बढ़ा वित्तीय दबाव, राष्ट्रीय कर्ज पहली बार $40 ट्रिलियन के ऐतिहासिक आंकड़े के पार यूएस ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज $40 ट्रिलियन के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है, जिससे बढ़ती ब्याज लागत और वैश्विक आर्थिक दबावों को लेकर चिंता गहरा गई है। अमेरिका के वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी) द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल राष्ट्रीय सकल कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। कर्ज में यह भारी बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका बढ़ते बजटीय दबावों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में ईरान के साथ चल रहे सैन्य तनावों समेत कई वैश्विक चुनौतियों से जूझ रहा है। वित्तीय बाजारों और आम अमेरिकी नागरिकों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस विशाल आंकड़े के देश की अर्थव्यवस्था और आम जीवन के लिए क्या मायने हैं। कर्ज की तेज रफ्तार और प्रति व्यक्ति उधारी का बोझ राष्ट्रीय कर्ज का 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचना हाल के महीनों में हुई तेज बढ़ोतरी को दर्शाता है। मार्च 2026 में अमेरिका का कुल कर्ज 39 ट्रिलियन डॉलर था, यानी महज पांच महीनों के भीतर सरकार ने लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त कर्ज लिया है। अगर पिछले आंकड़ों से तुलना करें तो साल 2017 में अमेरिका का कुल कर्ज लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर के पास था। इसका मतलब है कि पिछले दस वर्षों में अमेरिकी कर्ज दोगुना हो चुका है और बीते बीस सालों से भी कम समय में यह चार गुना बढ़ा है। कर्ज की यह रफ्तार देश की बजटीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर 40 ट्रिलियन डॉलर के इस विशाल आंकड़े को प्रति व्यक्ति के हिसाब से देखें, तो अमेरिका की लगभग 340 मिलियन (34 करोड़) आबादी में से हर नागरिक के हिस्से में लगभग 1,20,000 डॉलर का कर्ज आता है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यह राशि अमेरिका में एक साधारण परिवार के सिंगल-फैमिली मकान की औसत कीमत से भी अधिक है। यही कारण है कि इस आंकड़े के सामने आने के बाद वित्तीय विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। ऐतिहासिक संदर्भ और बढ़ता ब्याज का बोझ कर्ज की वर्तमान रफ्तार को समझने के लिए अमेरिकी इतिहास के पन्नों को देखना जरूरी है। 1776 में देश की स्थापना के बाद से 1 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज आंकड़े तक पहुंचने में अमेरिका को लगभग 200 साल का समय लगा था, जो 1981 में पूरा हुआ था। उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने राष्ट्र के नाम संबोधन में आगाह करते हुए कहा था कि अगर देश को किसी चेतावनी की जरूरत थी, तो यह वही चेतावनी है। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है और अब कुछ ही महीनों में 1 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज जुड़ जाता है। कर्ज के इस तेजी से बढ़ने का सीधा असर ब्याज भुगतान पर पड़ रहा है। अमेरिका अपनी आजादी का 250वां साल मनाने की ओर बढ़ रहा है, और आज देश सिर्फ पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में ही इतना पैसा खर्च कर रहा है जो बीते दशकों के कुल बजट से भी ज्यादा है। वर्तमान में ब्याज का खर्च देश के राष्ट्रीय रक्षा बजट से भी अधिक हो चुका है। इससे नई नीतियों और विकास योजनाओं के लिए सरकार के पास वित्तीय गुंजाइश लगातार कम होती जा रही है। 40.047 ट्रिलियन डॉलर के कुल कर्ज का ढांचा यूएस ट्रेजरी विभाग के सटीक आंकड़ों के अनुसार कुल राष्ट्रीय कर्ज 40.047 ट्रिलियन डॉलर है, जिसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है। इसका लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा (करीब 32.2 ट्रिलियन डॉलर) जनता और बाहरी संस्थाओं के पास मौजूद सार्वजनिक कर्ज (पब्लिक डेट) है। इसमें निजी निवेशक, कंपनियां, अमेरिकी राज्यों और स्थानीय नगर निगमों के अलावा विदेशी सरकारें शामिल हैं। यह सार्वजनिक कर्ज बाजार की मांग और ब्याज दरों के अनुसार बदलता रहता है। बाकी बचा 7.8 ट्रिलियन डॉलर का हिस्सा अंतर-सरकारी होल्डिंग्स (इंट्रा-गवर्नमेंटल होल्डिंग्स) के अंतर्गत आता है। यह वह राशि है जो अमेरिकी सरकार के एक विभाग को दूसरे विभाग या खातों को देनी होती है, जिसमें मुख्य रूप से सोशल सिक्योरिटी ट्रस्ट फंड जैसे सरकारी खाते शामिल हैं। सार्वजनिक कर्ज और अंतर-सरकारी देनदारियां मिलकर कुल 40.047 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा बनाती हैं, और दोनों मिलकर देश के कुल ब्याज बोझ को तय करते हैं। अमेरिकी बॉन्ड के सबसे बड़े विदेशी खरीदार अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों (बॉन्ड) की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग रही है। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, जापान 1.116 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी कर्ज के साथ सबसे बड़ा गैर-अमेरिकी होल्डर बना हुआ है। इसके बाद 939.9 बिलियन डॉलर की होल्डिंग के साथ यूनाइटेड किंगडम दूसरे स्थान पर है, जबकि 633.4 बिलियन डॉलर के साथ चीन तीसरे नंबर पर आता है। विदेशी सरकारों और केंद्रीय बैंकों द्वारा अमेरिकी बॉन्ड की खरीद को दुनिया भर में विदेशी मुद्रा भंडार के रुझान के रूप में देखा जाता है। इन देशों द्वारा की जाने वाली खरीद और बिक्री से अमेरिका के लिए उधारी की लागत तय होती है, जो वैश्विक वित्तीय प्रणाली की स्थिरता को भी प्रभावित करती है। कर्ज के रीफाइनेंसिंग और रोलओवर का तंत्र एक आम धारणा यह रहती है कि अमेरिका के पास अपने कर्ज को एक बार में चुकाने के लिए 40 ट्रिलियन डॉलर की नकद राशि होनी चाहिए। लेकिन वास्तव में सरकार इस तरह काम नहीं करती। जब विदेशी सरकारें या संस्थाएं अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड खरीदती हैं, तो कर्ज की परिपक्वता (मैच्योरिटी) पूरी होने पर उसे रीफाइनेंस या 'रोल ओवर' किया जाता है। यानी पुराने कर्ज की भरपाई के लिए नए बॉन्ड जारी किए जाते हैं। इसे एक चक्र के रूप में समझा जा सकता है: जब सरकार को 1 ट्रिलियन डॉलर की जरूरत होती है, तो वह बाजार में ट्रेजरी बॉन्ड बेचती है। निवेशक सरकार को पैसा देते हैं और सरकार उस पैसे को खर्च करती है। बदले में सरकार मूलधन के साथ ब्याज देने का वादा करती है। जब इन बॉन्ड की समय सीमा पूरी होती है, तो सरकार या तो करों के जरिए राजस्व जुटाती है या फिर नए बॉन्ड जारी करके प्राप्त राशि से पुराने निवेशकों को भुगतान कर देती है। जीडीपी से कर्ज का अनुपात और वैश्विक तुलना किसी देश की कर्ज चुकाने की क्षमता का आकलन करने के लिए अर्थशास्त्री 'डेट-टू-जीडीपी रेशियो' (जीडीपी के मुकाबले कर्ज का अनुपात) का इस्तेमाल करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका का डेट-टू-जीडीपी अनुपात 125.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक माना जाता है। आईएमएफ के अनुसार दुनिया के 19 देश ऐसे हैं जिनका कर्ज उनकी जीडीपी के 100 प्रतिशत से अधिक है, और इस सूची में अमेरिका 9वें स्थान पर है। इस मामले में जापान 204.4 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है, सिंगापुर 171.9 प्रतिशत के साथ दूसरे और सूडान 169.1 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि जापान का उच्च अनुपात यह दिखाता है कि अमेरिका भी इस स्थिति को संभाल सकता है, लेकिन दोनों देशों की वित्तीय संरचना में बड़ा अंतर है। जापान और अमेरिका के कर्ज मॉडल में मुख्य अंतर जापान और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना करते समय दोनों के कर्ज ढांचे के अंतर को समझना जरूरी है। जापान का लगभग 90 प्रतिशत राष्ट्रीय कर्ज उसके अपने देश के नागरिकों और घरेलू वित्तीय संस्थानों के पास है। इसका मतलब है कि संकट के समय विदेशी निवेशकों द्वारा अचानक बॉन्ड बेचने का जोखिम जापान के लिए बहुत कम रहता है। इसके अलावा जापान की निजी बचत दर उसकी जीडीपी का लगभग एक-तिहाई है, जो अमेरिका की बचत दर से करीब दोगुनी है। इसके विपरीत, अमेरिका अपने कर्ज के वित्तपोषण के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और वैश्विक बॉन्ड बाजारों पर बहुत अधिक निर्भर है। इस वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और विदेशी सरकारों की आर्थिक नीतियों का सीधा असर पड़ता है। आम नागरिकों पर बढ़ता आर्थिक दबाव राष्ट्रीय कर्ज का बढ़ना सिर्फ सरकारी खातों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर पड़ता है। अत्यधिक सरकारी उधारी से अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (महंगाई) का दबाव बढ़ता है और ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है। इसका नतीजा यह होता है कि आम लोगों के लिए होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड का ब्याज महंगा हो जाता है, जिससे उनके मासिक खर्च बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही, कर्ज का ब्याज चुकाने में बजट का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाने से स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे जनकल्याणकारी कार्यों के लिए सरकारी फंड कम पड़ने लगता है। किसी भी आर्थिक मंदी या अंतरराष्ट्रीय संकट के समय सरकार के पास राहत पैकेज देने या जरूरी कदम उठाने की क्षमता भी सीमित हो जाती है। भविष्य के अनुमान, सुधार के सुझाव और ट्रेजरी का कदम विशेषज्ञों का चेतावनी भरा अनुमान है कि यदि बजटीय सुधार नहीं किए गए तो आबादी के बुजुर्ग होने और स्वास्थ्य देखभाल खर्चों के बढ़ने से कर्ज की रफ्तार और तेज होगी। मौजूदा रुझान जारी रहने पर अगले 6 सालों में अमेरिकी कर्ज 50 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंच सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए वित्तीय विशेषज्ञों ने तत्काल 'नो न्यू बोरोइंग' (कोई नया कर्ज नहीं) की नीति अपनाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा एक द्विपक्षीय वित्तीय आयोग का गठन करके घाटे को जीडीपी के 3 प्रतिशत तक सीमित करने और सोशल सिक्योरिटी ट्रस्ट फंड में सुधार की वकालत की जा रही है। इस बीच, चीन, रूस और ईरान से जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों के बीच यूएस ट्रेजरी विभाग ने बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए 10 से 30 साल की लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों के लिए बायबाइक परिचालन के आकार को 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 4 ट्रिलियन डॉलर कर दिया है। इसका आप पर असर भारत में असर: अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज बढ़ने से वैश्विक ब्याज दरें उच्च स्तर पर रह सकती हैं, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आयात महंगे हो सकते हैं। निवेशकों पर प्रभाव: यूएस ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी बाजार में उतार-चढ़ाव से भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। सवाल-जवाब 1. वर्तमान में अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज कितना है? यूएस ट्रेजरी विभाग के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका का कुल राष्ट्रीय सकल कर्ज $40 ट्रिलियन को पार करते हुए $40.047 ट्रिलियन पर पहुंच गया है। 2. $40 ट्रिलियन का कर्ज प्रति अमेरिकी नागरिक कितना बैठता है? अमेरिका की 340 मिलियन (34 करोड़) आबादी के हिसाब से यह कर्ज प्रति व्यक्ति लगभग $1,20,000 बैठता है। 3. अमेरिकी कर्ज का सबसे बड़ा विदेशी धारक कौन सा देश है? जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक जापान $1.116 ट्रिलियन के साथ सबसे बड़ा विदेशी धारक है, जिसके बाद यूनाइटेड किंगडम ($939.9 बिलियन) और चीन ($633.4 बिलियन) आते हैं। 4. जीडीपी के मुकाबले अमेरिकी कर्ज (डेट-टू-जीडीपी) का अनुपात कितना है? अमेरिका का डेट-टू-जीडीपी अनुपात 125.8% है, जो इसे दुनिया में 9वें स्थान पर रखता है, जबकि जापान 204.4% के साथ सबसे ऊपर है। 5. अगर अमेरिकी कर्ज इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आगे क्या होगा? वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर बजटीय सुधार नहीं किए गए तो अमेरिकी कर्ज अगले 6 वर्षों में $50 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। https://trendkia.com/money/america-para-barha-vittiya-dabava-rashtriya-karja-pahali-bara-40-trillion-ke-aitihasika-ankare-ke-para-19156 TrendKia — Har trend, sabse pehle.