अंकुर वारिकू के ये 6 मनी मैनेजमेंट नियम बदल देंगे आपकी वित्तीय स्थिति, हर महीने पैसे खत्म होने की समस्या से मिलेगा परमानेंट छुटकारा मशहूर कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू ने वेतनभोगियों और युवाओं के लिए पर्सनल फाइनेंस के छह बेहद असरदार तरीके साझा किए हैं जो वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। तेजी से अमीर बनने की चाहत आज के दौर में लगभग हर किसी के मन में होती है। बहुत से लोग यह मानकर बैठ जाते हैं कि बड़ा बैंक बैलेंस बनाने या आर्थिक रूप से मजबूत होने के लिए शेयर बाजार के जटिल समीकरणों को समझना जरूरी है, या फिर इसके लिए किस्मत का बहुत बड़ा सहारा होना चाहिए। सोशल मीडिया पर दूसरों की भव्य जीवनशैली और चकाचौंध को देखकर युवा वर्ग अक्सर अपनी वास्तविक वित्तीय स्थिति की अनदेखी कर देता है। कमाई करना एक कला है, लेकिन उस कमाई को संभालना, उसे सही जगह पर निवेश करना और अपने भविष्य को सुरक्षित करना उससे भी बड़ी कला है। खासकर वे लोग जो अपनी पहली नौकरी शुरू करते हैं, वे इस मामले में काफी पीछे रह जाते हैं और महीने के अंत में खाली हाथ बचते हैं। आर्थिक तंगी और वित्तीय कुप्रबंधन का अहसास तब होता है जब अचानक कोई बड़ी आपातकालीन स्थिति या नौकरी का संकट सामने आ खड़ा होता है। ऐसे में आर्थिक रूप से सुरक्षित जीवन जीने और बचत को अपना हथियार बनाने के लिए कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। मशहूर उद्यमी और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अंकुर वारिकू ने वित्तीय समझ को आसान बनाने वाले छह बेहद उपयोगी और व्यावहारिक नियम साझा किए हैं। ये नियम आपको कंजूस बनने की सलाह नहीं देते, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई का इस तरह इस्तेमाल करना सिखाते हैं जिससे आपका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो सके। 1. आय मिलते ही सबसे पहले करें बचत का फैसला आमतौर पर लोगों की आदत होती है कि जैसे ही उनके बैंक खाते में सैलरी आती है, वे सबसे पहले अपने सभी खर्चों को पूरा करने में जुट जाते हैं। महंगे रेस्तरां में जाना, शॉपिंग करना और अन्य शौक पूरे करने के बाद महीने के आखिरी दिनों में जो कुछ भी बचता है, उसे बचाने का प्रयास किया जाता है। अधिकांश मामलों में महीने के अंत तक कुछ भी नहीं बचता है। इस चक्र को तोड़ने के लिए अंकुर वारिकू का पहला मंत्र बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि सैलरी क्रेडिट होते ही सबसे पहले अपनी बचत का हिस्सा अलग कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे बढ़िया तरीका ऑटो-ट्रांसफर का इस्तेमाल करना है। आप अपने बैंक खाते में ऐसा सिस्टम सेट कर सकते हैं जिससे सैलरी आने के तुरंत बाद एक निश्चित राशि सीधे आपके सेविंग्स अकाउंट या म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट अकाउंट में ट्रांसफर हो जाए। जब खर्च करने के लिए आपके पास सीमित बजट बचेगा, तो आपके फालतू खर्च अपने आप नियंत्रित हो जाएंगे। यह छोटी सी आदत लंबे समय में एक बड़ा और मजबूत फंड तैयार करने में मदद करती है। 2. लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन के खतरनाक जाल से खुद को बचाएं जैसे ही किसी कर्मचारी की नौकरी में प्रमोशन होता है या उसकी सैलरी बढ़ती है, वैसे ही उसकी जीवनशैली में भी बदलाव आने लगता है। लोग तुरंत नया और महंगा स्मार्टफोन खरीदने, बड़ा अपार्टमेंट किराए पर लेने, महंगी गाड़ी की ईएमआई शुरू करने या फिर ब्रांडेड कपड़ों पर अत्यधिक खर्च करने लगते हैं। वित्तीय भाषा में इसे लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन यानी जीवनशैली की महंगाई कहा जाता है। इसका नुकसान यह होता है कि आपकी आय बढ़ने के बावजूद आपकी वास्तविक बचत का ग्राफ वहीं का वहीं रह जाता है। अंकुर वारिकू सलाह देते हैं कि जब भी आपकी आय में वृद्धि हो, तो सबसे पहले उस बढ़ी हुई अतिरिक्त राशि के बड़े हिस्से को सीधे निवेश में लगाने की योजना बनाएं। यदि आप अपनी बढ़ी हुई सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा निवेश के लिए सुरक्षित कर लेते हैं, तो आप इस ट्रैप से बच सकते हैं। अपनी सुख-सुविधाओं को बढ़ाना गलत नहीं है, लेकिन इसे अपनी वित्तीय स्थिरता की कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए। 3. छह महीने की जरूरतों के लिए बनाएं आपातकालीन फंड जीवन में अनिश्चितताएं कभी भी बताकर नहीं आती हैं। अचानक नौकरी चले जाना, परिवार में किसी गंभीर बीमारी का आ जाना या फिर कोई अन्य बड़ी समस्या आपके बने-बनाए बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकती है। ऐसे कठिन समय में खुद को कर्ज के दलदल से बचाने के लिए आपके पास एक मजबूत इमरजेंसी फंड होना चाहिए। अंकुर वारिकू का मानना है कि हर व्यक्ति के पास कम से कम छह महीने के नियमित खर्चों के बराबर की राशि सुरक्षित रूप से जमा होनी चाहिए। इस फंड का मुख्य उद्देश्य कोई बड़ा रिटर्न कमाना नहीं होता है, बल्कि इसका काम आपके बुरे समय में एक ढाल की तरह काम करना है। इसलिए इस पैसे को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां से जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत निकाला जा सके, जैसे कि लिक्विड फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट। जब आपके पास छह महीने का बैकअप रहेगा, तो आप किसी भी संकट का सामना बिना किसी मानसिक तनाव या महंगे पर्सनल लोन के कर पाएंगे। 4. सामान खरीदते वक्त कीमत नहीं, उसकी उपयोगिता और गुणवत्ता देखें कई बार लोग सस्ते के चक्कर में ऐसी चीजें खरीद लेते हैं जो देखने में किफायती लगती हैं, लेकिन असल में वे घाटे का सौदा साबित होती हैं। घटिया क्वालिटी का सामान बहुत जल्दी खराब हो जाता है, जिसके कारण उसे बार-बार ठीक करवाना पड़ता है या फिर नया खरीदना पड़ता है। अंततः इस प्रक्रिया में आपका अधिक पैसा खर्च हो जाता है। इसलिए खरीदारी करते समय केवल टैग पर लिखी कीमत को न देखें, बल्कि उस सामान की लंबी अवधि तक चलने की क्षमता और उसकी क्वॉलिटी को भी परखें। अगर आप किसी टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली वस्तु के लिए एक बार थोड़ा अधिक भुगतान करते हैं, तो वह लंबे समय तक आपका साथ निभाएगी। इससे न केवल आपके बार-बार होने वाले छोटे-छोटे खर्चे रुकेंगे, बल्कि आपकी जीवनशैली में भी सुधार आएगा। समझदारी इसी में है कि आप कम सामान खरीदें लेकिन जो भी खरीदें, वह बेहतरीन और टिकाऊ हो। 5. निवेश शुरू करने के लिए कभी भी सही मुहूर्त का इंतजार न करें अधिकतर लोगों को लगता है कि निवेश करने के लिए एक मोटी रकम का होना जरूरी है और वे अपनी बचत को बैंक खातों में ही पड़ा रहने देते हैं। यह एक बड़ी भूल है क्योंकि निवेश करने के लिए समय सबसे बड़ा कारक होता है। आप जितनी कम उम्र में और जितनी जल्दी निवेश की शुरुआत करते हैं, कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत आपके पैसे को उतनी ही तेजी से बढ़ाती है। शुरुआत भले ही बहुत छोटी राशि से हो, लेकिन नियमितता सबसे अधिक मायने रखती है। अगर आप हर महीने एक छोटी राशि भी अनुशासित तरीके से निवेश करते हैं, तो समय बीतने के साथ उस पर मिलने वाला ब्याज भी आगे चलकर आपके लिए पैसा बनाने लगता है। निवेश के बाजार में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आप कितने बड़े अमाउंट से शुरुआत कर रहे हैं, बल्कि यह ज्यादा अहम है कि आपका पैसा कितने लंबे समय तक बाजार में निवेशित रहता है। इसलिए शुरुआत करने के लिए कल का इंतजार करने के बजाय आज से ही कदम उठाएं। 6. दिखावे के दिखावटी सुख से बचें और वित्तीय स्वतंत्रता की ओर बढ़ें सोशल मीडिया और सामाजिक दबाव के कारण लोग अक्सर उन चीजों को खरीदने के लिए पैसे खर्च कर देते हैं जिनकी उन्हें वास्तव में कोई आवश्यकता नहीं होती है। केवल दूसरों को प्रभावित करने के लिए महंगी कारें, ब्रांडेड कपड़े और लग्जरी गैजेट्स खरीदना आपको कभी भी अमीर नहीं बनने देगा। पैसे का असली और सबसे बड़ा उपयोग समाज को अपनी हैसियत दिखाना नहीं, बल्कि अपने जीवन पर अपना नियंत्रण हासिल करना है। जब आपके पास पर्याप्त बचत और मजबूत निवेश पोर्टफोलियो होता है, तो आपके पास फैसलों को लेने की आजादी होती है। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी ऐसी नौकरी में फंसे हैं जहां का माहौल बहुत ही तनावपूर्ण या खराब है, तो आप बिना किसी संकोच के उस नौकरी को छोड़ सकते हैं क्योंकि आपके पास आर्थिक बैकअप मौजूद है। यही असली वित्तीय स्वतंत्रता है जो आपको मानसिक शांति और सुरक्षित जीवन का उपहार देती है। इसका आप पर असर यह समाचार सीधे तौर पर आपके बैंक बैलेंस, खर्च करने के तौर-तरीकों और आपके वित्तीय भविष्य को प्रभावित करता है। • बचत में सुधार: सैलरी आते ही बचत को अलग करने से आपका बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ेगा। इसके परिणामस्वरूप आपके पास निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। • ऋण से मुक्ति: 6 महीने का इमरजेंसी फंड होने से संकट के समय आपको लोन नहीं लेना पड़ेगा। इससे आप क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन के भारी ब्याज से बच जाएंगे। • जीवनशैली में अनुशासन: दिखावे और गैर-जरूरी खर्चों को सीमित करने से आप पर मानसिक तनाव कम होगा। आप अपनी वास्तविक वित्तीय स्थिति के अनुसार बेहतर निर्णय ले पाएंगे। • दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण: कम उम्र में और छोटी राशि से शुरू किए गए निवेश कंपाउंडिंग की वजह से भविष्य में एक बड़ा फंड तैयार करेंगे। ऐसा क्यों हुआ यह समाचार युवाओं और मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों में बढ़ती आर्थिक असुरक्षा और सोशल मीडिया के कारण बढ़े दिखावे के खर्चों के संदर्भ में आया है। • जीवनशैली का बढ़ता खर्च: युवाओं में सैलरी बढ़ते ही महंगे ब्रांड और गाड़ियों पर खर्च करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। इसी को लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है जो लोगों को अमीर बनने से रोकता है। • वित्तीय जागरूकता की कमी: पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में मनी मैनेजमेंट और निवेश के बारे में व्यावहारिक शिक्षा नहीं दी जाती है। इस वजह से पहली नौकरी पाने वाले युवा अक्सर सैलरी मिलते ही उसे उड़ा देते हैं। • आपातकालीन तैयारियों का अभाव: अधिकांश लोग अपने मासिक खर्चों की योजना तो बनाते हैं लेकिन अचानक आने वाली मंदी या बीमारियों के लिए फंड नहीं रखते। इससे संकट के समय उनकी पूरी वित्तीय योजना ध्वस्त हो जाती है। सवाल-जवाब 1. लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन क्या है? सैलरी या आय बढ़ने के साथ ही अपनी जीवनशैली और खर्चों को बढ़ा लेना लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहलाता है, जिससे बचत नहीं बढ़ पाती। 2. इमरजेंसी फंड में कितने पैसे होने चाहिए? अंकुर वारिकू के अनुसार, आपके पास हमेशा कम से कम छह महीने के खर्चों के बराबर की राशि का इमरजेंसी फंड सुरक्षित होना चाहिए। 3. बचत करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? सैलरी आते ही सबसे पहले एक निश्चित राशि को ऑटो-ट्रांसफर के जरिए निवेश या सेविंग्स अकाउंट में भेज देना चाहिए और बचे हुए पैसे से खर्च चलाना चाहिए। 4. क्या निवेश करने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है? बिल्कुल नहीं, आप बहुत छोटी राशि से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि आप कितनी जल्दी शुरू करते हैं ताकि कंपाउंडिंग का फायदा मिल सके। 5. सस्ते सामान खरीदने के क्या नुकसान हैं? सस्ता सामान अक्सर टिकाऊ नहीं होता है और जल्दी खराब हो जाता है, जिससे उसे बार-बार ठीक कराने या बदलने में अंततः ज्यादा पैसा खर्च हो जाता है। https://trendkia.com/money/ankur-warikoo-ke-yeh-6-money-management-niyam-badal-denge-aapki-vittiya-sthiti-har-mahine-paise-khatam-hone-ki-samasya-se-milega-p-39321 TrendKia — Har trend, sabse pehle.