अपनी मासिक आय के हिसाब से चुनें सही दोपहिया, अंकुर वारिकू का आसान फॉर्मूला वित्तीय सलाहकार अंकुर वारिकू ने वेतन के अनुसार दोपहिया खरीदने का 10-3-15 नियम सुझाया है। इससे विभिन्न आय वर्ग के लोग बिना वित्तीय दबाव के सही मॉडल और ईएमआई चुन सकते हैं। मध्यम वर्ग के अधिकांश लोगों के लिए अपनी पसंद की नई बाइक घर लाना जीवन की एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। उत्साह और जल्दबाजी में कई खरीदार अपनी वास्तविक क्रय क्षमता से अधिक महंगी मोटरसाइकिल चुन लेते हैं, जिसका सीधा असर उनकी मासिक बचत पर पड़ता है। लंबी अवधि के भारी कर्ज और हर महीने भारी ईएमआई का बोझ आगे चलकर घरेलू बजट को पूरी तरह बिगाड़ देता है। इसी वित्तीय तनाव से बचने और आय के अनुरूप सही दोपहिया चुनने के लिए एक व्यावहारिक व्यवस्था अपनाई जा सकती है। कर्ज पर दोपहिया खरीदने का 10-3-15 नियम उद्यमी, लेखक और पर्सनल फाइनेंस शिक्षक अंकुर वारिकू ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो के जरिए एक सरल नियम साझा किया है, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति अपने मासिक वेतन के आधार पर वाहन खरीद सकता है। इसे 10-3-15 का सिद्धांत कहा जाता है, जो वाहन ऋण लेने के दौरान वित्तीय संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। • 10 प्रतिशत डाउन पेमेंट: जब भी आप नई बाइक बुक करें, तो उसकी ऑन-रोड कीमत का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा अपनी जेब से नकद भुगतान करें। इससे लोन की मूल राशि नियंत्रित रहती है। • 3 वर्ष की अधिकतम अवधि: दोपहिया वाहन के लिए लिए जाने वाले कर्ज की अवधि किसी भी हाल में 3 साल यानी छत्तीस महीनों से अधिक नहीं होनी चाहिए। लंबी अवधि रखने से ब्याज की लागत बहुत अधिक बढ़ जाती है। • 15 प्रतिशत सैलरी की सीमा: हर महीने बैंक या वित्तीय संस्थान को दी जाने वाली मासिक किस्त आपकी कुल इन-हैंड सैलरी के 15 फीसदी हिस्से से ज्यादा कभी नहीं होनी चाहिए, ताकि अन्य आवश्यक खर्चे प्रभावित न हों। वेतन वर्ग के अनुसार उपयुक्त दोपहिया विकल्प इस वित्तीय पैमाने को विभिन्न मासिक आय स्तरों पर लागू करके समझा जा सकता है कि कौन सा मॉडल किस बजट के भीतर सुरक्षित बैठता है। 15,000 रुपये मासिक आय वर्ग जिन लोगों की महीने की कमाई 15,000 रुपये है, उन्हें अपने सीमित बजट और परिवार की दैनिक जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसे वेतन भोगियों के लिए ईंधन की बचत करने वाली किफायती बाइक सबसे मुफीद मानी जाती है। इस आय वर्ग में बजाज प्लेटिना जैसी टिकाऊ कम्यूटर बाइक चुनना बेहतर रहता है, जिसके लिए 3 साल की अवधि में लगभग 1,800 रुपये की मासिक किस्त का भुगतान करना पड़ता है। 25,000 रुपये मासिक आय वर्ग यदि आपकी इन-हैंड सैलरी 25,000 रुपये प्रति माह है, तो आप स्पोर्टी लुक और बेहतर पिकअप वाली आधुनिक कम्यूटर बाइक की तरफ जा सकते हैं। इस ब्रैकेट के युवाओं के लिए टीवीएस रेडर एक संतुलित विकल्प साबित होती है। इस मॉडल पर 3 वर्ष की अवधि के लिए प्रति माह करीब 3,000 रुपये की किस्त बनती है, जो तय बजट सीमा में आसानी से समा जाती है। 50,000 रुपये मासिक आय वर्ग हर महीने 50,000 रुपये कमाने वाले कामकाजी पेशेवर थोड़े प्रीमियम और क्रूजर सेगमेंट का रुख कर सकते हैं। इस आय स्तर पर रॉयल एनफील्ड हंटर एक आकर्षक विकल्प बनती है। 3 साल की भुगतान अवधि के साथ इसकी अनुमानित मासिक किस्त लगभग 5,500 रुपये के आसपास आती है, जिससे बजट पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। 1,00,000 रुपये मासिक आय वर्ग यदि आपकी मासिक इन-हैंड आमदनी 1 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो आप हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स और सुपरबाइक सेगमेंट की ओर बढ़ सकते हैं। इस श्रेणी के खरीदार कावासाकी वल्कन एस जैसी प्रीमियम क्रूजर बाइक खरीद सकते हैं। इस वाहन के लिए 3 वर्ष तक प्रति माह लगभग 12,000 रुपये की किस्त का भुगतान करना होता है। इसका आप पर असर यह वित्तीय नियम दोपहिया वाहन खरीदारों को कर्ज के अत्यधिक बोझ से बचाने और बजट के अनुसार सही मॉडल चुनने में सीधी मदद करता है। • मासिक बजट सुरक्षा: अपनी इन-हैंड सैलरी के 15 प्रतिशत तक ईएमआई सीमित रखने से रोजमर्रा के घरेलू खर्च और बचत पर बुरा असर नहीं पड़ता है। इससे वेतनभोगी लोग अनावश्यक वित्तीय संकट में फंसने से बच सकते हैं। • ऋण अवधि की सीमा: बाइक लोन की अवधि अधिकतम 3 साल रखने से बैंक को जाने वाले कुल ब्याज में भारी बचत होती है। लंबी अवधि का कर्ज लेने से बचने पर ग्राहक पर लंबे समय तक देनदारी नहीं रहती। • नकद अग्रिम भुगतान: ऑन-रोड कीमत का कम से कम 10 प्रतिशत डाउन पेमेंट देने से मासिक किस्त की राशि नियंत्रित रहती है। ग्राहक शोरूम जाने से पहले ही अपनी जेब के अनुसार नकद रकम का प्रबंध कर सकते हैं। • आय अनुसार सटीक चुनाव: 15 हजार से 1 लाख रुपये कमाने वाले लोग अपनी वास्तविक आय के आधार पर सही वाहन श्रेणी तय कर सकते हैं। इससे दिखावे में आकर महंगा मॉडल खरीदने की गलती नहीं होगी। ऐसा क्यों हुआ अक्सर लोग नई बाइक खरीदते समय अपनी मासिक आय और अनिवार्य खर्चों का सटीक विश्लेषण नहीं करते, जिससे बाद में भारी वित्तीय दबाव उत्पन्न होता है। इसी वित्तीय असंतुलन को रोकने के लिए विशेषज्ञ ने सरल अनुपात आधारित व्यवस्था साझा की है। • दिखावे और गलत अनुमान का प्रभाव: वाहन खरीदार अक्सर डाउन पेमेंट और ईएमआई के अनुपात का ध्यान रखे बिना महंगी गाड़ियां बुक कर लेते हैं। इसके चलते मासिक किस्त चुकाना परिवार के सामान्य जीवनयापन पर भारी पड़ने लगता है। • लंबी ऋण अवधि के नुकसान: डीलरशिप पर खरीदारों को कम ईएमआई का लालच देकर 4 से 5 साल तक का लंबा लोन थमा दिया जाता है। इससे ग्राहक अंततः वाहन की मूल कीमत से काफी ज्यादा ब्याज चुका बैठते हैं। • संतुलित वित्तीय फॉर्मूले की आवश्यकता: व्यक्तिगत आय के अनुरूप निश्चित सीमाएं तय होने से खरीदार को पहले से पता रहता है कि उसकी जेब कितना खर्च संभाल सकती है। इसी उद्देश्य से 10-3-15 नियम को एक व्यावहारिक थंब रूल के रूप में तैयार किया गया है। सवाल-जवाब 1. दोपहिया वाहन लोन के लिए 10-3-15 नियम क्या है? इस नियम के अनुसार वाहन की ऑन-रोड कीमत का 10% डाउन पेमेंट देना चाहिए, लोन की अवधि अधिकतम 3 साल होनी चाहिए और ईएमआई मासिक इन-हैंड सैलरी के 15% से अधिक नहीं होनी चाहिए। 2. 15,000 रुपये प्रति माह कमाने वाले व्यक्ति को कौन सी बाइक चुननी चाहिए? 15,000 रुपये की सैलरी पर बजाज प्लेटिना जैसी किफायती कम्यूटर बाइक उपयुक्त है, जिसकी 3 साल की अनुमानित मासिक ईएमआई करीब 1,800 रुपये बैठती है। 3. 25,000 रुपये की मासिक आय पर कितनी ईएमआई और कौन सी बाइक सही रहेगी? 25,000 रुपये वेतन पर टीवीएस रेडर जैसी स्पोर्टी कम्यूटर बाइक ली जा सकती है, जिसके लिए 3 साल तक लगभग 3,000 रुपये प्रति माह की किस्त चुकानी होगी। 4. 50,000 रुपये महीना कमाने वालों के लिए कौन सा विकल्प सुझाया गया है? 50,000 रुपये मासिक आय वाले खरीदार रॉयल एनफील्ड हंटर चुन सकते हैं, जिसकी 3 साल के लिए मासिक किस्त लगभग 5,500 रुपये आती है। 5. 1 लाख रुपये की सैलरी पर किस बाइक का सुझाव दिया गया है? 1 लाख रुपये या उससे अधिक वेतन पाने वाले लोग कावासाकी वल्कन एस जैसी प्रीमियम क्रूजर बाइक ले सकते हैं, जिसकी 3 साल के लिए मासिक ईएमआई करीब 12,000 रुपये होगी। https://trendkia.com/money/apani-masika-aya-ke-hisaba-se-chunen-sahi-dopahiya-ankur-warikoo-ka-asana-phormula-36029 TrendKia — Har trend, sabse pehle.