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  "type": "article",
  "title": "आयकर रिटर्न की 31 जुलाई की सीमा समाप्त: 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का तरीका, जुर्माना और नियम समझें",
  "summary": "वेतनभोगी करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न की 31 जुलाई की समय सीमा बीतने के बाद अब धारा 139(4) के तहत 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न भरा जा सकता है, जिसके लिए नियमानुसार लेट फीस और ब्याज लागू होगा।",
  "content": "वेतनभोगी करदाताओं, पेंशनभोगियों और गैर-व्यावसायिक संस्थाओं के लिए वित्त वर्ष के आयकर रिटर्न दाखिल करने की 31 जुलाई की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा में कोई विस्तार नहीं किया जाएगा। पिछले वर्ष के विपरीत, जब तकनीकी गड़बड़ियों और आईटीआर फॉर्म में देरी के कारण समय सीमा को 15 सितंबर तक बढ़ाना पड़ा था, इस वर्ष ई-फाइलिंग पोर्टल 31 जुलाई तक पूरी तरह बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से कार्य करता रहा। इस मजबूत तकनीकी प्रदर्शन के कारण सीबीडीटी के पास स्वचालित विस्तार देने का कोई आधार नहीं बना। आधिकारिक विंडो के दौरान 5.5 करोड़ से अधिक करदाताओं ने सफलतापूर्वक अपने रिटर्न जमा किए हैं, लेकिन जो लोग इस सीमा को चूक गए हैं, उनके लिए प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है।\n\nधारा 139(4) के तहत बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का विकल्प\nनियत तिथि तक अपना रिटर्न जमा न कर पाने वाले करदाताओं के लिए आयकर अधिनियम की धारा 139(4) के तहत राहत का प्रावधान है। इस प्रावधान के अंतर्गत करदाता बिलेटेड रिटर्न यानी विलंबित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। यह बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की विंडो 31 दिसंबर तक खुली रहती है, जिससे पात्र व्यक्तियों को अपने कर रिकॉर्ड अद्यतन करने के लिए अतिरिक्त पांच महीने का समय मिल जाता है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए करदाताओं को निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा\n\n• पोर्टल लॉगिन: अपने वैध क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें।\n• असेसमेंट ईयर का चयन: आयकर रिटर्न अनुभाग में जाएं और असेसमेंट ईयर 2026-27 का चयन करें।\n• फॉर्म और श्रेणी का चुनाव: अपनी आय के अनुसार उपयुक्त आईटीआर फॉर्म चुनें और फाइलिंग श्रेणी के अंतर्गत धारा 139(4) बिलेटेड रिटर्न का विकल्प चुनें।\n\nफॉर्म 26एएस और एआईएस से डेटा का मिलान आवश्यक\nबिलेटेड रिटर्न को अंतिम रूप से सबमिट करने से पहले कर सलाहकारों द्वारा पूर्व-भरे गए वित्तीय आंकड़ों का गहन सत्यापन करने का सुझाव दिया जाता है। ई-फाइलिंग पोर्टल पर आय, स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और वित्तीय लेनदेन के विवरण स्वतः प्रदर्शित होते हैं। करदाताओं को इन आंकड़ों का मिलान अपने फॉर्म 26एएस और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) से अवश्य करना चाहिए। स्व-घोषित आय और एआईएस या फॉर्म 26एएस में दर्ज डेटा के बीच अंतर होना कर नोटिस और विभागीय समीक्षा का मुख्य कारण बनता है। बैंक ब्याज, लाभांश आय, पूंजीगत लाभ और टैक्स क्रेडिट का सही मिलान करने से भविष्य की परेशानियों से बचा जा सकता है।\n\nविलंब शुल्क और ब्याज: धारा 234F तथा 234A का प्रभाव\nनियत तिथि के बाद रिटर्न दाखिल करने पर वैधानिक नियमों के तहत वित्तीय देनदारी उत्पन्न होती है। आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस यानी विलंब शुल्क लागू होती है, जो करदाता की कुल आय के स्तर के आधार पर अधिकतम 5,000 रुपये तक हो सकती है। धारा 234F के तहत लगने वाली लेट फीस के अलावा, यदि करदाता पर कोई बकाया कर देनदारी है, तो धारा 234A के तहत दंडात्मक ब्याज भी देय होता है। धारा 234A के अंतर्गत बकाया कर राशि पर 1 प्रतिशत प्रति माह या महीने के भाग की दर से ब्याज वसूला जाता है। इस ब्याज की गणना 1 अगस्त से शुरू होकर उस तारीख तक की जाती है जब तक कि कर राशि का पूरा भुगतान नहीं कर दिया जाता। इसलिए, बिलेटेड रिटर्न विंडो के भीतर भी जितना अधिक विलंब किया जाएगा, ब्याज की राशि उतनी ही बढ़ती जाएगी।\n\n31 अगस्त की अफवाह का सच और अन्य करदाताओं की समय सीमा\nकर समय सीमा को 31 अगस्त तक बढ़ाए जाने को लेकर फैली भ्रांतियों पर कर अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है। 31 अगस्त की समय सीमा केवल व्यावसायिक या पेशेवर आय वाले उन करदाताओं पर लागू होती है जो आईटीआर-3 या आईटीआर-4 फॉर्म भरते हैं और जिनके खातों का टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य नहीं है। यह तिथि वेतनभोगी वर्ग या आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए लागू नहीं है, जिनकी अंतिम तिथि 31 जुलाई ही थी और रहेगी। जिन करदाताओं या व्यावसायिक संस्थाओं के खातों का ऑडिट होना आवश्यक है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित है। इसके अलावा ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में शामिल कंपनियों के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर है।\n\nइसका आप पर असर\nपूरे भारत में:\n\n• वेतनभोगी करदाता: यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा चूक गए हैं, तो बकाया कर पर धारा 234A का ब्याज बढ़ने से रोकने के लिए 31 दिसंबर से पहले अपना बिलेटेड रिटर्न दाखिल करें।\n• व्यावसायिक करदाता: गैर-ऑडिट वाले व्यावसायिक करदाता जो आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का उपयोग करते हैं, उन्हें 31 अगस्त तक फाइलिंग पूरी करनी होगी, जबकि ऑडिट वाले खातों की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिलेटेड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि क्या है?\nधारा 139(4) के तहत करदाता 31 दिसंबर तक अपना बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।\n\n2. 31 जुलाई की समय सीमा चूकने पर धारा 234F के तहत कितना लेट फीस लगता है?\nधारा 234F के तहत करदाता के आय स्तर के आधार पर अधिकतम 5,000 रुपये तक का विलंब शुल्क यानी लेट फीस लागू होता है।\n\n3. देर से रिटर्न भरने पर धारा 234A के तहत ब्याज की गणना कैसे होती है?\nधारा 234A के तहत बकाया कर राशि पर 1 प्रतिशत प्रति माह या महीने के भाग की दर से ब्याज 1 अगस्त से भुगतान तिथि तक लगाया जाता है।\n\n4. क्या 31 अगस्त तक की टैक्स राहत वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए लागू है?\nनहीं, 31 अगस्त की समय सीमा केवल बिना ऑडिट वाले व्यावसायिक या पेशेवर करदाताओं (आईटीआर-3 और आईटीआर-4) के लिए है। वेतनभोगी कर्मचारियों की अंतिम तिथि 31 जुलाई ही थी।\n\n5. बिलेटेड रिटर्न जमा करने से पहले किन दस्तावेजों से डेटा का मिलान करना चाहिए?\nरिटर्न जमा करने से पहले पूर्व-भरी जानकारी का मिलान फॉर्म 26एएस और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) से करना चाहिए ताकि कोई गड़बड़ी न हो।",
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  "category": "मनी",
  "publishedAt": "2026-08-01",
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    "इनकम टैक्स रिटर्न",
    "आईटीआर बिलेटेड रिटर्न",
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    "धारा 234F लेट फीस",
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