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  "type": "article",
  "title": "बेंगलुरु में किरायेदार के 1 लाख रुपये के डिपॉजिट से कटे 80 हजार से ज्यादा, कर्नाटक रेंट एक्ट के तहत जानिए क्या हैं आपके अधिकार",
  "summary": "बेंगलुरु में 2BHK फ्लैट खाली करने पर मकान मालिक ने 1 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट में से 80,396 रुपये काट लिए और केवल 19,604 रुपये वापस किए, जिस पर कानूनी प्रावधानों को लेकर बहस छिड़ गई है।",
  "content": "बेंगलुरु शहर में बेहतर करियर, आईटी सेक्टर की नौकरियों और कारोबार के सिलसिले में देश भर से आने वाले लोगों के चलते मकानों की मांग लगातार बनी रहती है। भारी मांग और सीमित रिहायशी विकल्पों के कारण यहां रहने वालों को अत्यधिक मासिक किराये के साथ-साथ भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट की दोहरी मार झेलनी पड़ती है। इस तंग रेंटल मार्केट के बीच एक किरायेदार के साथ हुए सिक्योरिटी डिपॉजिट विवाद ने शहर के किरायेदारों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है। फ्लैट खाली करने के बाद किरायेदार को उसकी मूल जमा पूंजी का बेहद मामूली हिस्सा लौटाया गया, जबकि बाकी रकम रख-रखाव और मरम्मत के नाम पर काट ली गई।\n\n1 लाख की अमानत में से हाथ आए केवल 19,604 रुपये\nएक किरायेदार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट के r/bangalorerentals फोरम पर अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसने रहने के लिए एक 2BHK अपार्टमेंट किराये पर लिया था। घर लेते समय मकान मालिक के पास 1 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि जमा कराई गई थी। किरायेदार के अनुसार उसने पूरे किराये के दौरान परिसर का पूरी सावधानी से ध्यान रखा था और उसमें कोई गंभीर तोड़-फोड़ नहीं की थी।\n\nजब किरायेदार ने वह 2BHK फ्लैट खाली किया, तो मकान मालिक की तरफ से उसे एक कटौती विवरण सौंपा गया। इस बिल में मरम्मत और रख-रखाव के मद में कुल 80,396 रुपये के खर्च दिखाए गए थे। नतीजतन, 1 लाख रुपये की मूल डिपॉजिट राशि में से किरायेदार को महज 19,604 रुपये ही वापस किए गए। यानी उसकी जमा पूंजी का 80 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा मकान मालिक ने विभिन्न खर्चों के नाम पर अपने पास रख लिया।\n\nकटौती की फेहरिस्त और नए किरायेदार के लिए तैयारी\nमकान मालिक द्वारा सौंपे गए कटौती बिल में खर्चों की एक लंबी सूची शामिल थी। इसमें दीवार की पुताई, सतहों की पॉलिशिंग, छोटी-मोटी मरम्मत, इलेक्ट्रिकल कार्य, बढ़ईगीरी या कारपेंट्री, प्लंबिंग का काम, पूरी गहरी सफाई और अन्य सामान्य मेंटेनेंस के मद दर्ज थे।\n\nकिरायेदार ने इस भारी कटौती पर गंभीर ऐतराज जताते हुए सवाल उठाया कि वह उन खर्चों का भुगतान क्यों करे जिनका सीधा फायदा मकान में आने वाले अगले किरायेदार को मिलने वाला है। किरायेदार का तर्क था कि फ्लैट की साधारण स्थिति को चमकाने और उसे नए किरायेदार के लिए पूरी तरह तैयार करने का वित्तीय बोझ पिछले किरायेदार के सिर नहीं मढ़ा जाना चाहिए, खासकर तब जब उसने संपत्ति को कोई गैर-मामूली नुकसान न पहुंचाया हो।\n\nसोशल मीडिया पर फूटा किरायेदारों का गुस्सा\nसोशल मीडिया पर यह मामला सामने आने के बाद बेंगलुरु के अन्य किरायेदारों की सैकड़ों प्रतिक्रियाएं आईं। कई लोगों ने शहर में फ्लैट खाली करते समय सिक्योरिटी डिपॉजिट में से मनमाने पैसे काटे जाने के अपने कड़वे अनुभव साझा किए। शहर के कई निवासियों ने यह भी शिकायत की कि बेंगलुरु में कई महीनों का एडवांस डिपॉजिट लेने का चलन बहुत आम है। किरायेदारों का कहना था कि मकान मालिक अक्सर इस मोटी अमानत राशि का इस्तेमाल उन नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए करते हैं, जो वास्तव में प्रॉपर्टी के रूटीन मेंटेनेंस का हिस्सा होने चाहिए।\n\nकर्नाटक रेंट एक्ट 1999 के कानूनी प्रावधान\nइस तरह के विवादों के संबंध में कर्नाटक रेंट एक्ट, 1999 के नियम बेहद स्पष्ट सीमाएं तय करते हैं। कानून के मुताबिक, एक किरायेदार को परिसर उसी हालत में वापस सौंपना होता है जिसमें उसे वह सौंपा गया था, हालांकि इसमें सामान्य टूट-फूट यानी नॉर्मल वियर एंड टीयर को अपवाद माना गया है। यदि किरायेदार की लापरवाही से संपत्ति को कोई वास्तविक क्षति पहुंचाई गई है, तो कानूनन किरायेदार से उस नुकसान की भरपाई की मांग की जा सकती है।\n\nइसके अलावा, यह अधिनियम यह भी स्पष्ट करता है कि मरम्मत की जिम्मेदारी मकान मालिक और किरायेदार दोनों पर मरम्मत की प्रकृति के आधार पर बंटी होती है। कानून की धारा 47 के अनुसार, लिखित समझौते की शर्तों के अधीन रहते हुए, शेड्यूल V के तहत मकान मालिक को सौंपी गई जिम्मेदारियों के अनुसार परिसर को रहने योग्य और अच्छी स्थिति में बनाए रखना मकान मालिक का कर्तव्य है।\n\nपुताई और मेंटेनेंस पर क्या कहता है नियम\nकानूनी प्रावधानों का सीधा मतलब यह है कि फ्लैट खाली होने के बाद होने वाले हर खर्च को मकान मालिक अपने आप किरायेदार की देनदारी नहीं मान सकता। मकान मालिक को केवल किरायेदार द्वारा किए गए वास्तविक नुकसान की मरम्मत लागत वसूलने का वैध आधार प्राप्त है।\n\nहर किरायेदारी खत्म होने के बाद संपत्ति की साधारण पुताई या पॉलिशिंग कराने का मतलब यह कतई नहीं है कि मकान मालिक उस पूरे खर्च को पुराने किरायेदार पर थोप दे। इसलिए, यदि मकान मालिक यह साबित नहीं कर पाता कि यह खर्च सामान्य इस्तेमाल से परे किसी बड़े नुकसान से जुड़ा है, तो केवल पेंटिंग या नियमित सफाई के नाम पर की गई बड़ी कटौती पर कानूनी रूप से सवाल उठाया जा सकता है। हालांकि, विवादों से बचने के लिए आवश्यक है कि घर का कब्जा लेने से पहले ही रेंट एग्रीमेंट में इन सभी नियमों और शर्तों पर साफ-साफ सहमति बना ली जाए।\n\nइसका आप पर असर\nबेंगलुरु समेत देश भर में किराये के मकान में रहने वाले और मकान बदलने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह मामला सीधे तौर पर जेब और कानूनी अधिकारों से जुड़ा है।\n\n• भारत में: किराये का घर लेते समय रेंट एग्रीमेंट में वियर एंड टीयर और मेंटेनेंस से जुड़ी शर्तों को पहले ही स्पष्ट रूप से दर्ज करवाएं। ऐसा करने से फ्लैट खाली करते समय मकान मालिक द्वारा पेंटिंग और रूटीन मेंटेनेंस के नाम पर सिक्योरिटी डिपॉजिट में से मनमानी कटौती पर कानूनी रूप से रोक लगाई जा सकती है।\n• बेंगलुरु में: कर्नाटक रेंट एक्ट 1999 की धारा 47 के तहत सामान्य टूट-फूट का खर्च मकान मालिक जबरन किरायेदार पर नहीं डाल सकता। यदि आपका मकान मालिक 1 लाख रुपये जैसी भारी डिपॉजिट में से बिना वास्तविक नुकसान के बड़ी कटौती करता है, तो आप रेंट एग्रीमेंट और कानून के तहत उस कटौती को चुनौती दे सकते हैं।\n• दस्तावेजीकरण: फ्लैट में प्रवेश करते समय और बाहर निकलते समय पूरे परिसर की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। यह रिकॉर्ड साबित करने में मदद करेगा कि मकान में कोई असामान्य टूट-फूट नहीं हुई है और कटौती केवल नियमित रख-रखाव के नाम पर की जा रही है।\n• आगामी किरायेदार: नया घर किराये पर लेते समय मकान मालिक से स्पष्ट करें कि क्या पेंटिंग का खर्च निकलने पर काटा जाएगा या नहीं। इस बिंदु को लिखित अनुबंध में शामिल कराने से अंतिम रिफंड के समय विवाद की गुंजाइश नहीं बचेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबेंगलुरु में 1 लाख रुपये के डिपॉजिट में से 80,396 रुपये की भारी कटौती और विवाद पैदा होने के पीछे कई बुनियादी कारण हैं।\n\n• सीधा कारण: मकान मालिक ने 2BHK फ्लैट खाली होने के बाद की गई पुताई, पॉलिशिंग, इलेक्ट्रिकल रिपेयर, प्लंबिंग, बढ़ईगीरी और गहरी सफाई का पूरा बिल किरायेदार के 1 लाख रुपये के डिपॉजिट से काट लिया। इसके चलते किरायेदार को महज 19,604 रुपये ही वापस मिले, जिससे यह विवाद खुलकर सामने आया।\n• अस्पष्ट अनुबंध और सामान्य परंपरा: किराये के समझौतों में अक्सर सामान्य टूट-फूट और वास्तविक नुकसान के बीच स्पष्ट सीमा तय नहीं की जाती। इसके अलावा, शहर में मकान मालिक अक्सर नए किरायेदार के स्वागत के लिए घर चमकाने का खर्च पुराने किरायेदार की अमानत से निकालने की आदत बना लेते हैं।\n• कानूनी प्रावधानों की अनदेखी: कर्नाटक रेंट एक्ट 1999 यह निर्धारित करता है कि शेड्यूल V के तहत नियमित रख-रखाव मकान मालिक का दायित्व है और सामान्य वियर एंड टीयर किरायेदार की देनदारी नहीं है। कानून की इस स्पष्ट व्यवस्था के बावजूद लिखित एग्रीमेंट में स्पष्टता की कमी का फायदा उठाकर ऐसी कटौतियां की जाती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बेंगलुरु के इस मामले में किरायेदार को 1 लाख रुपये के डिपॉजिट में से कितना रिफंड मिला?\nकिरायेदार को 1 लाख रुपये की मूल सिक्योरिटी डिपॉजिट में से केवल 19,604 रुपये वापस मिले, जबकि 80,396 रुपये मेंटेनेंस के नाम पर काट लिए गए।\n\n2. मकान मालिक ने किन-किन मदों में कटौती की थी?\nकटौती स्टेटमेंट में दीवार की पुताई, पॉलिशिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, कारपेंट्री, मरम्मत और गहरी सफाई के खर्च शामिल थे।\n\n3. कर्नाटक रेंट एक्ट 1999 सामान्य टूट-फूट के बारे में क्या कहता है?\nकानून के अनुसार किरायेदार को घर उसी स्थिति में वापस करना होता है जैसा मिला था, लेकिन इसमें सामान्य टूट-फूट यानी नॉर्मल वियर एंड टीयर शामिल नहीं होता।\n\n4. क्या मकान मालिक फ्लैट खाली होने पर पुताई का पूरा खर्च किरायेदार से वसूल सकता है?\nनहीं, जब तक कि किरायेदार द्वारा सामान्य इस्तेमाल से परे कोई वास्तविक नुकसान न पहुंचाया गया हो, मकान मालिक नियमित पुताई का पूरा खर्च अपने आप किरायेदार पर नहीं डाल सकता।\n\n5. कर्नाटक रेंट एक्ट की धारा 47 क्या जिम्मेदारी तय करती है?\nधारा 47 के तहत समझौते की शर्तों के अधीन मकान मालिक का यह दायित्व है कि वह परिसर को रहने योग्य और अच्छी मरम्मत की स्थिति में बनाए रखे।",
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  "publishedAt": "2026-09-19",
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