# निफ्टी 50 में शामिल होते ही बीएसई के शेयरों में 3% की गिरावट, विप्रो की जगह लेने के बाद फिसला भाव

> निफ्टी 50 में विप्रो की जगह औपचारिक एंट्री लेते ही बुधवार को बीएसई के शेयरों में तीन फीसदी की गिरावट आई, जबकि ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने इसके टारगेट प्राइस में कटौती कर दी है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/bse-shares-slide-3-on-historic-nifty-50-entry-after-replacing-it-major-wipro-40487 · **Language:** Hindi
**Tags:** बीएसई, निफ्टी 50, विप्रो, शेयर बाजार, नुवामा, एक्सिस कैपिटल, निफ्टी 100

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 में बुधवार, 30 सितंबर को एक ऐतिहासिक बदलाव प्रभावी हो गया। देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज, बीएसई ने दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो की जगह लेते हुए पहली बार इस 50 शेयरों वाले प्रमुख बेंचमार्क में प्रवेश किया। इस बड़े मील के पत्थर के बावजूद बाजार में स्टॉक की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। एनएसई पर बीएसई के शेयर तीन प्रतिशत की कमजोरी के साथ 3,103 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर कारोबार करते दिखे। पिछले पांच कारोबारी सत्रों की बात करें तो इस शेयर में कुल 5.29% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। अर्धवार्षिक सूचकांक फेरबदल के औपचारिक अमल के बीच निवेशकों की मुनाफावसूली और ब्रोकरेज रिपोर्टों ने कारोबारी रुख को प्रभावित किया है।

## इंडेक्स में शामिल होने के लिए ऐसे तय हुई पात्रता
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई ने इस फेरबदल की घोषणा 10 अगस्त को की थी, जिसे 29 सितंबर को बाजार बंद होने के बाद प्रभावी बनाया गया। बीएसई की निफ्टी 50 में एंट्री के पीछे का मुख्य आधार उसका तेजी से बढ़ता फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन रहा है। पिछले एक साल के दौरान एक्सचेंज के मूल्यांकन में जबरदस्त उछाल देखा गया था। नवीनतम इंडेक्स समीक्षा आंकड़ों के अनुसार, बीएसई का छह महीने का औसत फ्री-फ्लोट मार्केट कैप करीब 1,40,879 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि इसकी तुलना में विप्रो का छह महीने का औसत आंकड़ा 55,930 करोड़ रुपये था। इंडेक्स चयन पद्धति के सख्त नियमों के तहत, किसी मौजूदा शेयर को बदलने के लिए नए पात्र शेयर का छह महीने का औसत फ्री-फ्लोट मार्केट कैप बाहर होने वाले शेयर से कम से कम 1.5 गुना अधिक होना अनिवार्य होता है। बीएसई इस पैमाने पर पूरी तरह खरा उतरा और उसने बेंचमार्क में अपनी जगह पक्की कर ली।

## विप्रो निफ्टी नेक्स्ट 50 में हुआ शिफ्ट, शेयरों में उछाल
एक तरफ जहां बीएसई ने मुख्य सूचकांक में कदम रखा, वहीं दूसरी तरफ आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विप्रो को मुख्य बेंचमार्क से बाहर होना पड़ा। विप्रो अब निफ्टी 50 से निकलकर निफ्टी नेक्स्ट 50 का हिस्सा बन गई है। बाजार के विश्लेषक पहले से ही विप्रो को निफ्टी 50 में बने रहने के लिहाज से कमजोर उम्मीदवारों में गिन रहे थे। मुख्य सूचकांक से हटने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि विप्रो व्यापक बाजार से बाहर हो गई है, वह अब भी निफ्टी 100 के दायरे में मजबूती से बनी हुई है। दिलचस्प बात यह रही कि जहां बीएसई के शेयर दबाव में दिखे, वहीं विप्रो के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। बुधवार की सुबह एनएसई पर विप्रो का शेयर 2.3% की तेजी के साथ 160.39 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था। इस फेरबदल की वजह से निफ्टी 50 को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर रहे हैं, जिससे विप्रो से पूंजी निकासी देखने को मिल सकती है।

## पैसिव इनफ्लो का अनुमान और ब्रोकरेज की बंटी हुई राय
निफ्टी 50 का हिस्सा बनने से बीएसई के शेयरों की संस्थागत मांग में बड़ा इजाफा होने का अनुमान है। एक्सिस कैपिटल के आकलन के मुताबिक, निफ्टी 50 को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड करीब 1.57 करोड़ बीएसई शेयर खरीद सकते हैं, जिसका कुल मूल्य लगभग 657 मिलियन डॉलर बैठता है। हालांकि, शेयर में हालिया तेज रैली और इंडेक्स में आधिकारिक प्रवेश के बावजूद प्रमुख ब्रोकरेज हाउस निकट भविष्य के दृष्टिकोण पर एकमत नहीं हैं। मैक्वेरी ने बीएसई के आउटलुक पर भरोसा जताते हुए कहा है कि एक्सचेंज के सामने मौजूद व्यावसायिक अवसर वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2030 के बीच लगभग 16% राजस्व वृद्धि को सहारा दे सकते हैं। इसके विपरीत, जेफरीज और नुवामा ने नियामक बदलावों, सीएएस और ट्रेडिंग से जुड़े जोखिमों को रेखांकित किया है। नुवामा ने पिछले महीने ही बीएसई की रेटिंग 'बाय' से घटाकर 'होल्ड' कर दी थी और इसके टारगेट प्राइस को 4,090 रुपये से घटाकर 3,240 रुपये कर दिया था। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 की समीक्षा के दौरान नुवामा ने बीएसई के निफ्टी 50 में शामिल होने की संभावना को शून्य आंका था और यहां तक कहा था कि एक्सचेंज का निफ्टी नेक्स्ट 50 में भी आना लगभग असंभव है।

## निफ्टी 100 और निफ्टी नेक्स्ट 50 में भी बड़े बदलाव
इस अर्धवार्षिक फेरबदल का असर अन्य प्रमुख सूचकांकों पर भी व्यापक रूप से पड़ा है। बीएसई अब निफ्टी मिडकैप 150 से बाहर होकर निफ्टी 100 का हिस्सा बन चुका है। निफ्टी 100 इंडेक्स में बीएसई के साथ हिताची एनर्जी इंडिया, पॉलीकैब इंडिया, वेदांता एल्युमिनियम मेटल और वोडाफोन आइडिया को नए सदस्यों के रूप में जोड़ा गया है। वहीं, निफ्टी नेक्स्ट 50 के ढांचे में भी पांच बड़े परिवर्तन किए गए हैं। इस सूचकांक में विप्रो के अलावा हिताची एनर्जी इंडिया, पॉलीकैब इंडिया, वेदांता एल्युमिनियम मेटल और वोडाफोन आइडिया ने आधिकारिक तौर पर प्रवेश किया है। इन बदलावों के चलते पैसिव फंडों द्वारा संबंधित कंपनियों के शेयरों में बड़े पैमाने पर पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट किए जा रहे हैं।

## इसका आप पर असर
निफ्टी 50 इंडेक्स में हुए इस बड़े फेरबदल का सीधा असर म्यूचुअल फंड निवेशकों, इंडेक्स ईटीएफ धारकों और रिटेल ट्रेडर्स के पोर्टफोलियो पर पड़ेगा।

- **इंडेक्स फंड निवेशकों पर:** निफ्टी 50 इंडेक्स फंड और ईटीएफ में निवेश करने वालों के पोर्टफोलियो में अब विप्रो की जगह स्वतः ही बीएसई के शेयर शामिल हो जाएंगे। फंड मैनेजरों के पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के कारण आपको खुद से कोई अलग लेनदेन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
- **बीएसई के शेयरधारकों पर:** एक्सिस कैपिटल के अनुसार इंडेक्स फंडों से करीब 657 मिलियन डॉलर का पैसिव इनफ्लो आने की उम्मीद है। हालांकि, ब्रोकरेज द्वारा टारगेट प्राइस घटाकर 3,240 रुपये करने और हालिया 5.29% की गिरावट को देखते हुए अल्पावधि में अस्थिरता बनी रह सकती है।
- **विप्रो के निवेशकों पर:** बेंचमार्क से बाहर होने के कारण पैसिव फंडों से विप्रो में बिकवाली दबाव देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद शेयर बुधवार को 2.3% चढ़कर 160.39 रुपये पर रहा, क्योंकि कंपनी अभी भी निफ्टी 100 और नेक्स्ट 50 का हिस्सा बनी हुई है।
- **ट्रेडिंग और ब्रोकरेज रिस्क पर:** जेफरीज और नुवामा ने नियामक बदलावों, सीएएस और ट्रेडिंग से जुड़े जोखिमों को लेकर आगाह किया है। ऐसे में एक्सचेंज आधारित शेयरों में सीधे पोजीशन लेने वाले ट्रेडर्स को आगामी नियामक दिशानिर्देशों पर नजर रखनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
निफ्टी 50 में बीएसई के शामिल होने और विप्रो के बाहर होने का फैसला एनएसई की अर्द्धवार्षिक समीक्षा और कड़े इंडेक्स नियमों के आधार पर हुआ है। शेयर बाजार में दोनों कंपनियों के फ्री-फ्लोट मूल्यांकन में आए भारी अंतर ने इस बदलाव की जमीन तैयार की।

- **फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में बड़ा अंतर:** इंडेक्स नियमों के अनुसार शामिल होने वाले शेयर का छह महीने का औसत फ्री-फ्लोट मार्केट कैप बाहर होने वाले शेयर से कम से कम 1.5 गुना होना चाहिए। बीएसई का औसत फ्री-फ्लोट 1,40,879 करोड़ रुपये रहा, जो विप्रो के 55,930 करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुने से भी अधिक था।
- **बीएसई के शेयरों में जबरदस्त तेजी:** पिछले एक साल के दौरान एक्सचेंज के कारोबार और शेयर भाव में जोरदार उछाल आया। इसके चलते कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण उस स्तर पर पहुंच गया जहां ब्रोकरेज की पुरानी भविष्यवाणियां गलत साबित हुईं।
- **विप्रो के मूल्यांकन में ठहराव:** बेंचमार्क में अपनी जगह बचाने के लिए विप्रो का सापेक्षिक बाजार पूंजीकरण पर्याप्त नहीं रहा। विश्लेषक पहले से ही विप्रो को इंडेक्स में बने रहने के लिहाज से सबसे कमजोर दावेदार मान रहे थे।
- **एनएसई का औपचारिक नियम:** एनएसई ने 10 अगस्त को इस बदलाव की घोषणा की थी, जो 29 सितंबर के कारोबारी सत्र के समापन के साथ प्रभावी हुई। यह फैसला अर्द्धवार्षिक इंडेक्स समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा था।

## सवाल-जवाब

### 1. निफ्टी 50 में बीएसई के शेयरों में गिरावट क्यों दर्ज की गई?
इंडेक्स में शामिल होने के बावजूद मुनाफावसूली और ब्रोकरेज चिंताओं के कारण बीएसई का शेयर 3% गिरकर 3,103 रुपये पर आ गया।

### 2. बीएसई ने निफ्टी 50 में किस कंपनी की जगह ली है?
बीएसई ने आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विप्रो को हटाकर निफ्टी 50 सूचकांक में जगह बनाई है।

### 3. विप्रो अब किस सूचकांक का हिस्सा है?
निफ्टी 50 से हटने के बाद विप्रो अब निफ्टी नेक्स्ट 50 और निफ्टी 100 सूचकांकों का हिस्सा बनी हुई है।

### 4. एक्सिस कैपिटल के अनुसार बीएसई में कितना पैसिव इनफ्लो आ सकता है?
एक्सिस कैपिटल का अनुमान है कि इंडेक्स फंड करीब 1.57 करोड़ शेयर खरीद सकते हैं, जिनकी कीमत लगभग 657 मिलियन डॉलर होगी।

### 5. नुवामा ने बीएसई के लिए क्या टारगेट प्राइस दिया है?
नुवामा ने रेटिंग को होल्ड पर लाते हुए बीएसई का टारगेट प्राइस 4,090 रुपये से घटाकर 3,240 रुपये कर दिया है।

### 6. निफ्टी 100 में किन अन्य कंपनियों को शामिल किया गया है?
निफ्टी 100 में बीएसई के साथ हिताची एनर्जी इंडिया, पॉलीकैब इंडिया, वेदांता एल्युमिनियम मेटल और वोडाफोन आइडिया को जोड़ा गया है।

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