# चाय में कीटनाशक अवशेषों पर कड़े नियम तय करने की तैयारी, खाद्य सुरक्षा नियामक ने जारी किया नया मसौदा

> भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने चाय की पत्तियों में दो प्रमुख कीटनाशकों के लिए अधिकतम अवशेष सीमा तय करने का मसौदा जारी किया है। नए मानकों का मकसद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ चाय बागानों में कीट नियंत्रण की जरूरतों को संतुलित करना है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/chaya-men-kitanashaka-avasheshon-para-kare-niyama-taya-karane-ki-taiyari-fssai-ne-jari-kiya-naya-masauda-48784 · **Language:** Hindi
**Tags:** एफएसएसएआई, चाय कीटनाशक, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य मंत्रालय, एसिटामिप्रिड, इमिडाक्लोप्रिड

देश में बिकने वाली चाय की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सेहत को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा विनियामक कदम उठाया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने चाय की पत्तियों में पाए जाने वाले दो कीटनाशकों के लिए कानूनी तौर पर स्वीकार्य अधिकतम अवशेष सीमा यानी मैक्सिमम रेजिड्यू लिमिट तय करने का प्रस्ताव रखा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता के लिए सुरक्षित खाद्य सामग्री सुनिश्चित करने के साथ किसानों और बागान मालिकों की व्यावहारिक खेती की जरूरतों में संतुलन बनाना है। नए विनियामक मसौदे के तहत चाय में एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड रसायनों की मौजूदगी की अधिकतम सीमा तय की जा रही है, जिससे जांच एजेंसियों और उत्पादकों दोनों के लिए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शनिवार को दी गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया कि खाद्य सुरक्षा और मानक ढांचे के अंतर्गत यह संशोधन मसौदा अधिसूचित किया गया है। यह पूरा कदम विज्ञान आधारित खाद्य सुरक्षा नियमों को लागू करने और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में उठाया गया है। जब प्रयोगशालाओं और फील्ड अधिकारियों के पास स्पष्ट मानक मौजूद होंगे, तो बाजार में उपलब्ध चाय के नमूनों की जांच करना और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और सुगम हो जाएगा।

## नए मसौदे में तय की गई रासायनिक सीमा
नियामक संस्था द्वारा तैयार किए गए खाद्य सुरक्षा और मानक संदूषक, विषाक्त पदार्थ और अवशेष संशोधन विनियम 2026 के मसौदे में चाय के लिए स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की गई हैं। इस दस्तावेज में एसिटामिप्रिड नामक कीटनाशक के लिए अधिकतम 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम अथवा 20 पीपीएम की सीमा प्रस्तावित की गई है। वहीं दूसरी ओर, कीटों की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाले इमिडाक्लोप्रिड रसायन के लिए 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम यानी 50 पीपीएम की सीमा तय करने की सिफारिश की गई है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि ये प्रस्तावित आंकड़े इस मसौदे की कानूनी और आधिकारिक परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम रूप से प्रभावी होंगे।

मंत्रालय का कहना है कि इन निश्चित सीमाओं के निर्धारण से खाद्य सुरक्षा मानकों की निगरानी, अनुपालन और प्रवर्तन तंत्र को एक ठोस आधार मिलेगा। जब तक किसी रसायन के लिए स्पष्ट कानूनी सीमा तय नहीं होती, तब तक निगरानी एजेंसियों के लिए कार्रवाई करना और उत्पादकों के लिए मानकों का पालन करना चुनौतीपूर्ण बना रहता है। अब इस मसौदे पर सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम मंजूरी मिलने पर इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।

## चाय उद्योग और जांच प्रयोगशालाओं को मिलेगा स्पष्ट ढांचा
इस नीतिगत कदम से चाय से जुड़े समूचे तंत्र को स्पष्टता मिलने की उम्मीद जताई गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की सूची के अनुसार, इस नए नियम का सीधा असर चाय उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों, खाद्य कारोबार संचालकों, परीक्षण प्रयोगशालाओं और खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन अधिकारियों पर पड़ेगा। उत्पादन के स्तर से लेकर पैकेजिंग और खुदरा बिक्री तक सभी को यह भली-भांति ज्ञात होगा कि चाय में कीटनाशक के कितने अवशेष कानूनी दायरे में आते हैं।

अधिकतम अवशेष सीमा किसी भी खाद्य उत्पाद में किसी कीटनाशक की वह उच्चतम सांद्रता होती है, जिसे कानूनन स्वीकार किया जाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने समझाया कि यह सीमा मनमाने ढंग से तय नहीं की जाती, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। इसमें फसलों पर किए गए परीक्षणों के आंकड़े, खान-पान के जरिए आम लोगों द्वारा इन रसायनों के शरीर में जाने की अनुमानित मात्रा और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े सभी कारकों का गहन विश्लेषण किया जाता है। इन सभी वैज्ञानिक चरणों के बाद ही ऐसा स्तर चुना जाता है जो जनस्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो।

## वैश्विक मानकों से तुलना और अंतरराष्ट्रीय तालमेल
प्रस्तावित नियमों का विश्लेषण करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि भारत में चाय के लिए तय की जा रही एसिटामिप्रिड की 20 पीपीएम की सीमा कई विकसित देशों की तुलना में काफी सख्त है। उदाहरण के लिए, जापान में इस रसायन के लिए चाय में 30 पीपीएम की छूट दी गई है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में यह सीमा 50 पीपीएम तक स्वीकार्य है। इस प्रकार भारत में प्रस्तावित स्तर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मुकाबले उपभोक्ताओं की सुरक्षा को अधिक प्राथमिकता देता है।

वहीं दूसरी तरफ, इमिडाक्लोप्रिड के लिए प्रस्तावित 50 पीपीएम की सीमा को कोडेक्स मानकों के संदर्भ में तैयार किया गया है। कोडेक्स वह वैश्विक खाद्य मानक प्रणाली है जिसका उपयोग दुनिया भर के कई देश अपनी खाद्य सुरक्षा नीतियों के लिए संदर्भ बिंदु के रूप में करते हैं। इस वैश्विक व्यवस्था के साथ तालमेल बैठाने से न केवल घरेलू उपभोक्ताओं को भरोसा मिलेगा, बल्कि भारतीय चाय के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी मदद मिलेगी।

## रासायनिक समीक्षा और भारत में कीटनाशकों का वास्तविक उपयोग
यह नया प्रस्ताव कीटनाशक मानकों की निरंतर समीक्षा करने की नियामक की व्यापक योजना का हिस्सा है। इससे पहले खाद्य सुरक्षा और मानक संदूषक, विषाक्त पदार्थ और अवशेष संशोधन विनियम 2024 के तहत वैज्ञानिक प्रमाणों और अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के आधार पर व्यापक समीक्षा की गई थी। उस दौरान जनस्वास्थ्य और उच्च विषाक्तता की चिंताओं को देखते हुए विनियामक सूचियों से 13 कीटनाशकों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया था।

मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि चाय बागानों में कीटों के प्रकोप से फसलों को बचाने के लिए कीटनाशकों की एक सीमित और नियंत्रित भूमिका आवश्यक होती है। यदि इन रसायनों का सही मात्रा में और दिशा-निर्देशों के अनुरूप उपयोग किया जाए, तो यह फसलों को होने वाले भारी नुकसान से बचाते हैं। इसके साथ ही सरकार ने वैश्विक स्तर पर रासायनिक उपयोग के आंकड़े भी साझा किए। आंकड़ों के मुताबिक भारत में कीटनाशकों की औसत खपत 0.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से भी कम है, जबकि वैश्विक औसत 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज है। यह मसौदा अब अपनी अंतिम विनियामक प्रक्रिया से गुजर रहा है, जिसके बाद इसे औपचारिक कानून का रूप दे दिया जाएगा।

## इसका आप पर असर
इस नए नियम के अंतिम रूप लेने के बाद रोजमर्रा की चाय पीने वाले उपभोक्ताओं को रासायनिक अवशेषों से सुरक्षा मिलेगी और गुणवत्ता संबंधी मानक मजबूत होंगे।

- **उपभोक्ताओं की सेहत:** चाय की पत्तियों में दो प्रमुख कीटनाशकों के लिए स्पष्ट सीमा तय होने से कप तक पहुंचने वाली चाय पहले से अधिक सुरक्षित होगी। रासायनिक अवशेषों पर कानूनी लगाम लगने से लोगों को लंबे समय में होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से बचाव मिलेगा।
- **चाय की खुदरा कीमतें:** बागानों और प्रसंस्करण इकाइयों को नए मानकों के पालन के लिए अपनी जांच व्यवस्था में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे उत्पादन और परीक्षण की लागत में मामूली बदलाव आ सकता है, हालांकि आम बाजार में खुदरा कीमतों पर तत्काल बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।
- **किसानों और बागान मालिकों के लिए:** उत्पादकों को अब छिड़काव के दौरान तय मानकों और अनुशंसित मात्रा का विशेष ध्यान रखना होगा। यदि पत्तियों में अवशेष सीमा 20 पीपीएम या 50 पीपीएम से ऊपर पाई गई, तो उनकी फसल की खेप अस्वीकृत हो सकती है।
- **जांच और गुणवत्ता प्रमाणन:** खाद्य सुरक्षा प्रयोगशालाओं को अब नमूनों की जांच के लिए स्पष्ट और निश्चित आंकड़े मिल जाएंगे। इससे मिलावटी या अत्यधिक रसायनों वाली चाय को बाजार से जब्त करना आसान हो जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विनियामक कदम भारतीय चाय में कीटनाशकों की अनियंत्रित मौजूदगी रोकने और पुरानी विनियामक अनिश्चितता को दूर करने के लिए उठाया गया है।

- **मानकों में स्पष्टता का अभाव:** चाय में कई रसायनों के लिए पहले स्पष्ट और एकीकृत कानूनी सीमाएं मौजूद नहीं थीं। इस अस्पष्टता के कारण न तो प्रवर्तन अधिकारी ठोस कार्रवाई कर पाते थे और न ही बागान मालिक सुरक्षित सीमा का सही आकलन कर पाते थे।
- **उपभोक्ता स्वास्थ्य और कीट नियंत्रण में संतुलन:** चाय बागानों में कीटों के हमले से भारी नुकसान होता है, जिससे बचने के लिए कीटनाशक जरूरी माने जाते हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि फसल की सुरक्षा भी हो और पेय पदार्थ जनस्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित रहे।
- **वैश्विक नियमों के साथ तालमेल:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोडेक्स और प्रमुख आयातक देशों के कड़े मानकों को देखते हुए भारतीय नियमों को आधुनिक बनाना आवश्यक था। जापान और अमेरिका जैसे देशों के मानकों को ध्यान में रखकर यह मसौदा तैयार किया गया है।
- **निरंतर विनियामक समीक्षा:** वर्ष 2024 में 13 अत्यधिक विषैले कीटनाशकों को सूची से हटाने के बाद अन्य रसायनों की सीमाओं का वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन करना जरूरी हो गया था। यह संशोधन उसी सतत वैज्ञानिक प्रक्रिया की अगली कड़ी है।

## सवाल-जवाब

### 1. नियामक ने चाय के लिए किन दो कीटनाशकों के मानक प्रस्तावित किए हैं?
नए मसौदे में चाय के लिए एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड नामक दो कीटनाशकों की अधिकतम अवशेष सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया गया है।

### 2. एसिटामिप्रिड के लिए चाय में कितनी सीमा तय करने की सिफारिश की गई है?
मसौदे के तहत एसिटामिप्रिड के लिए 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम यानी 20 पीपीएम की सीमा प्रस्तावित की गई है।

### 3. इमिडाक्लोप्रिड के लिए क्या कानूनी सीमा सुझाई गई है?
इमिडाक्लोप्रिड के लिए मसौदे में 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम यानी 50 पीपीएम की अधिकतम सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव है।

### 4. एसिटामिप्रिड की प्रस्तावित सीमा की तुलना अन्य देशों से कैसे की गई है?
भारत की प्रस्तावित 20 पीपीएम की सीमा जापान के 30 पीपीएम और संयुक्त राज्य अमेरिका के 50 पीपीएम के मानकों से अधिक सख्त है।

### 5. इमिडाक्लोप्रिड की सीमा किस अंतरराष्ट्रीय मानक के आधार पर बनाई गई है?
इमिडाक्लोप्रिड की सीमा को कोडेक्स मानकों के संदर्भ में तैयार किया गया है, जो दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा का मानक माना जाता है।

### 6. भारत में कीटनाशकों की औसत खपत विश्व स्तर की तुलना में कितनी है?
भारत में कीटनाशकों का औसत उपयोग 0.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से कम है, जबकि वैश्विक औसत 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है।

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