# छुईखदान की महिलाओं ने पान के नवाचार से खड़ा किया नया कारोबार, महानगरों तक पहुंच रहे उत्पाद

> छत्तीसगढ़ के छुईखदान की 12 महिलाओं ने पारंपरिक पान से लड्डू, चाय और फ्रेश तैयार कर अपनी आजीविका संवारी है, जिससे उन्हें 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/chhuikhadan-ki-mahilaon-ne-pana-ke-navachara-se-khara-kiya-naya-karobara-mahanagaron-taka-pahuncha-rahe-utpada-35685 · **Language:** Hindi
**Tags:** छुईखदान, छत्तीसगढ़, मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह, आशा मोहबिया, पान उत्पाद, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका

छत्तीसगढ़ का छुईखदान इलाका किसी जमाने में अपनी खास महक और उम्दा पान के लिए पूरे प्रदेश में मशहूर था। स्थानीय बाजारों से लेकर आसपास के जिलों तक इसकी जबरदस्त मांग रहती थी। वक्त के साथ जैसे-जैसे बाजार ने मुंह मोड़ा, सरकारी प्रोत्साहन कम हुआ और लोगों की खानपान की आदतें बदलीं, छुईखदान के इस पारंपरिक पान का दायरा सिमटता चला गया। इस लुप्त होती पहचान को अब इलाके की ग्रामीण महिलाओं ने अपने अनूठे प्रयासों और कड़ी मेहनत से दोबारा जिंदा कर दिखाया है।

## महिला स्व-सहायता समूह का संगठित प्रयास
साल 2000 से सक्रिय मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह ने छुईखदान के इस ऐतिहासिक पान को नई जिंदगी देने की ठानी है। इस समूह में इस समय 12 महिलाएं एकजुट होकर काम कर रही हैं। समूह की सचिव आशा मोहबिया के अनुसार, छुईखदान के पान का स्वर्णिम दौर धीरे-धीरे खत्म होने लगा था क्योंकि किसानों और कारीगरों को न तो सही बाजार मिल रहा था और न ही जरूरी प्रोत्साहन। उत्पादन और बिक्री में भारी गिरावट आने से पान की पारंपरिक खेती और इससे जुड़े कारोबार पूरी तरह सिमटते चले गए थे।

## कृषि महाविद्यालय के सहयोग से वैल्यू एडिशन
इस मंदी से बाहर निकलने के लिए महिलाओं ने एक नई राह चुनी। छत्तीसगढ़ सरकार और कृषि महाविद्यालय के तकनीकी मार्गदर्शन में इस समूह ने पान के वैल्यू एडेड यानी मूल्य संवर्धित उत्पादों पर काम करना शुरू किया। पारंपरिक बीड़ा पान की जगह नए और आधुनिक उत्पाद तैयार करने की योजना बनाई गई। महिलाएं अब सीधे अपने घरों से पान फ्रेश, पारंपरिक बीड़ा पान, पान का लड्डू, पान की चाय और पान का सूखा पाउडर जैसे अनोखे उत्पाद बना रही हैं। इन सभी वस्तुओं को आकर्षक और आधुनिक पैकेजिंग में पेश किया जा रहा है, जिससे बाजार में इनकी अलग पहचान बन रही है।

## स्वास्थ्य लाभ और महानगरों से मिलते ऑर्डर
पान से बने ये नए उत्पाद न केवल खाने में स्वादिष्ट हैं बल्कि सेहत के लिहाज से भी गुणकारी माने जाते हैं। पारंपरिक रूप से पान पाचन शक्ति सुधारने, सांसों की ताजगी बनाए रखने, मुंह की दुर्गंध दूर करने और शरीर को ताजगी भरी ऊर्जा देने में मददगार माना जाता है। इसी खूबी के चलते ग्राहकों के बीच इन उत्पादों का आकर्षण बढ़ रहा है। महिला समूह की पहुंच अब सिर्फ राजधानी रायपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बॉम्बे और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों से भी विशेष मांग आ रही है। महिलाएं इन बड़े शहरों से आने वाले ऑर्डरों को समय पर पूरा कर रही हैं।

## छह महीने में 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा
बीते छह महीनों से यह महिला समूह लगातार इन उत्पादों का निर्माण और विपणन कर रहा है, जिससे उन्हें ठोस आर्थिक संबल मिला है। नवंबर महीने में आयोजित राज्योत्सव के दौरान समूह ने अपना स्टॉल लगाया था, जहां उन्होंने 32 हजार रुपये की सीधी बिक्री की। अब तक के पूरे काम से समूह को करीब 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो चुका है। उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों में विस्तार के साथ आने वाले दिनों में इस कमाई में और भी इजाफा होने की पूरी उम्मीद है।

## इसका आप पर असर
यह नवाचार पारंपरिक फसलों से जुड़े किसानों और महिला समूहों को नए व्यावसायिक मॉडल अपनाने का व्यावहारिक रास्ता दिखाता है।

- **भारत में:** पारंपरिक फसलों के मूल्य संवर्धन से जुड़े छोटे उद्यमों को देश भर के बड़े शहरों में नए ग्राहक मिल रहे हैं। उपभोक्ता अब सीधे घर बैठे ग्रामीण कारीगरों और समूहों के नवाचार उत्पाद खरीद सकते हैं।
- **छत्तीसगढ़ में:** छुईखदान और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पान की खेती करने वाले परिवारों को नए बाजार की उम्मीद मिली है। स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं घर बैठे 70 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
- **ग्राहकों के लिए:** महानगरों में रहने वाले लोगों को पारंपरिक पान के स्थान पर पैकेटबंद लड्डू, चाय और फ्रेश जैसे स्वास्थ्यवर्धक विकल्प मिल रहे हैं। यह उत्पादों की स्वच्छता और लंबी शेल्फ लाइफ को भी सुनिश्चित करता है।
- **रोजगार के अवसर:** ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण और पैकेजिंग के क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। इससे महिलाओं को अपनी आजीविका के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ता।

## ऐसा क्यों हुआ
बाजार की उपेक्षा और बदलती आदतों के चलते पारंपरिक पान का कारोबार दम तोड़ रहा था, जिसे संस्थागत सहयोग से पुनर्जीवित किया गया।

- **पारंपरिक मांग में कमी:** आधुनिक दौर में बदलती उपभोक्ता आदतों और बाजार से उचित समर्थन न मिलने के कारण छुईखदान के पान का दायरा सिकुड़ गया था। प्रोत्साहन की कमी की वजह से किसानों ने इसकी खेती से दूरी बनानी शुरू कर दी थी।
- **संस्थागत मार्गदर्शन का मिलना:** छत्तीसगढ़ सरकार और कृषि महाविद्यालय ने आगे आकर महिलाओं को पान के मूल्य संवर्धन का तकनीकी प्रशिक्षण दिया। इस सहयोग ने महिलाओं को कच्चे पान की जगह तैयार उत्पाद बनाने के लिए प्रेरित किया।
- **आधुनिक पैकेजिंग की रणनीति:** खराब होने वाली कच्ची पत्तियों के बजाय लड्डू, पाउडर और चाय जैसे टिकाऊ उत्पाद तैयार किए गए। बेहतर पैकेजिंग ने इन उत्पादों को रायपुर से बाहर बॉम्बे और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों तक पहुंचाने में मदद की।

## सवाल-जवाब

### 1. छुईखदान की महिलाओं ने पान से कौन-कौन से उत्पाद बनाए हैं?
महिलाओं ने पान फ्रेश, बीड़ा पान, पान का लड्डू, पान की चाय और पान का पाउडर जैसे उत्पाद तैयार किए हैं।

### 2. इस महिला स्व-सहायता समूह का क्या नाम है और इसमें कितनी महिलाएं जुड़ी हैं?
इस समूह का नाम मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह है, जिसमें वर्तमान में 12 महिलाएं काम कर रही हैं।

### 3. समूह को अब तक कुल कितना शुद्ध मुनाफा हुआ है?
महिला समूह को अब तक इस कारोबार से लगभग 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हो चुका है।

### 4. राज्योत्सव के दौरान समूह ने कितने रुपये के उत्पाद बेचे थे?
नवंबर में राज्योत्सव के दौरान लगाए गए स्टॉल से समूह ने 32 हजार रुपये की सीधी बिक्री की थी।

### 5. उत्पाद तैयार करने में महिलाओं को किसका सहयोग मिला?
महिलाओं को छत्तीसगढ़ सरकार और कृषि महाविद्यालय से तकनीकी और रणनीतिक सहयोग प्राप्त हुआ।

### 6. इन उत्पादों की आपूर्ति छत्तीसगढ़ के अलावा किन शहरों में हो रही है?
रायपुर के अलावा इन उत्पादों की मांग बॉम्बे और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों से भी आ रही है।

## प्रेरणा और सबक
मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह का सफर साबित करता है कि परंपरागत कौशल और सही मार्गदर्शन से किसी भी डूबते काम को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।

- **स्थानीय धरोहर को अवसर में बदलना:** जो फसल बाजार की अनदेखी से खत्म हो रही थी, महिलाओं ने उसी में अपने लिए स्वरोजगार की नई संभावना तलाश ली।
- **संगठन की ताकत:** 12 महिलाओं ने मिलकर काम किया और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच संगठित होकर एक साझा कारोबार खड़ा किया।
- **नवाचार को अपनाना:** पारंपरिक बीड़ा पान तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने पान की चाय, लड्डू और फ्रेश जैसे आधुनिक उत्पाद तैयार किए।
- **बाजार की समझ:** महिलाओं ने सिर्फ स्थानीय मेलों तक सीमित न रहकर आधुनिक पैकेजिंग के जरिए बड़े शहरों के खरीदारों तक सीधी पहुंच बनाई।

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