# दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली: सेंसेक्स और निफ्टी में 1% से ज्यादा की गिरावट, निवेशकों के ₹4 लाख करोड़ डूबे

> वैश्विक बाजारों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/dalala-strita-para-bhari-bikavali-sensex-aura-nifty-men-1-se-jyada-ki-giravata-niveshakon-ke-4-lakha-karora-dube-37670 · **Language:** Hindi
**Tags:** शेयर बाजार, सेंसेक्स, निफ्टी 50, कच्चा तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, भारतीय रुपया, फेडरल रिजर्व, दलाल स्ट्रीट

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में 1 फीसदी से ज्यादा की तीव्र गिरावट दर्ज की गई। दोपहर के कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 850 अंक से अधिक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 फिसलकर 23,200 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की नई आशंकाएं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी ने मिलकर घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया।

 गुरुवार दोपहर 12:34 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 865.86 अंक यानी 1.16 प्रतिशत का भारी गोता लगाकर 73,962.39 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं दूसरी तरफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 272.35 अंक यानी 1.16 फीसदी की गिरावट के साथ 23,174.45 के स्तर पर आ गया। बाजार की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई थी, जहां निफ्टी 23,221.80 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 23,281.95 के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंचा। इसके बाद विदेशी निवेशकों और घरेलू ट्रेडर्स की ओर से तेज बिकवाली शुरू हुई, जिससे निफ्टी दिन के निचले स्तर 23,173.05 तक लुढ़क गया, जबकि इसका पिछला बंद स्तर 23,446.80 था।

 

## निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा

दलाल स्ट्रीट पर आई इस सुनामी का असर सिर्फ फ्रंटलाइन बेंचमार्क इंडेक्स तक सीमित नहीं रहा। लार्ज-कैप शेयरों के साथ-साथ मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में भी व्यापक बिकवाली देखी गई, जिससे व्यापक बाजार धारणा बेहद सतर्क हो गई। शेयरों में आई इस तेज गिरावट से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इस तीव्र नुकसान के बाद एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार मूल्यांकन गिरकर 480 लाख करोड़ रुपये के स्तर से नीचे पहुंच गया।

 

## अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में 2007 के बाद का सबसे बड़ा उछाल

घरेलू बाजार में बिकवाली का सबसे बड़ा वैश्विक कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आया जबरदस्त उछाल है। अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर लगभग 5.106 फीसदी के आसपास पहुंच गई, जो साल 2007 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। अमेरिका में हाल ही में जारी हुए मजबूत व्यावसायिक गतिविधि आंकड़ों के बाद निवेशकों में यह चिंता गहरा गई कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने में सक्षम है। इसके साथ ही अमेरिका की दो साल की ट्रेजरी यील्ड भी 4.9 फीसदी के आंकड़े को पार कर गई है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आती है, तो इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ता है और विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों की संपत्तियां तुलनात्मक रूप से कम आकर्षक हो जाती हैं।

 

## फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ने की आशंका

अमेरिकी यील्ड में आए इस तेज उछाल ने फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी मौद्रिक नीति में दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दे दी है। मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बाद बाजार में अक्टूबर महीने में ब्याज दर बढ़ाए जाने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। इस बदलाव ने वैश्विक स्तर पर उधारी लागत के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की चिंताओं को फिर से जिंदा कर दिया है। भारतीय इक्विटी बाजार के लिए अमेरिकी ब्याज दरों का यह चक्र बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि फेडरल रिजर्व का रुख अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक निवेश प्रवाह को सीधे तय करता है। इस पूरी स्थिति से उभरते बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता कमजोर पड़ रही है।

 

## ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर के पार और भू-राजनीतिक संकट

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बाजार पर दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड एक बार फिर उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जबकि हाल ही में यह फिसलकर 99 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आया था। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर देश के आयात बिल को बढ़ा देती है और महंगाई का दबाव उत्पन्न करती है। महंगा क्रूड कंपनियों के लिए इनपुट और परिवहन लागत को भी बढ़ा देता है, जिससे कॉरपोरेट मुनाफे पर असर पड़ता है।

 कच्चे तेल में यह नई तेजी मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी अनिश्चितता की वजह से आई है। भू-राजनीतिक तनाव ने तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं को जन्म दिया है। यदि मध्य पूर्व में यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रह सकती हैं, जो भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुद्रास्फीति के मोर्चे पर बड़ा खतरा पैदा करेंगी।

 

## रुपये में कमजोरी से बढ़ा आयातित महंगाई का जोखिम

गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 14 पैसे कमजोर होकर 95.87 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया। घरेलू मुद्रा पर ऊंचे कच्चे तेल, चढ़ती अमेरिकी यील्ड और विदेशी निवेशकों के सतर्क रुख का तिहरा असर देखने को मिल रहा है। रुपये में आने वाली गिरावट देश के आयात को और महंगा बना देती है, जिससे मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण जटिल हो जाता है। हालांकि मुद्रा की कमजोरी से निर्यात आधारित कुछ कंपनियों को फायदा मिल सकता है, लेकिन रुपये का तीव्र अवमूल्यन व्यापक बाजार स्थिरता और आयातित महंगाई के लिहाज से नकारात्मक माना जाता है।

## इसका आप पर असर
शेयर बाजार में आई इस भारी गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो और आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ेगा।

- **इक्विटी निवेशकों पर असर:** बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के बाजार मूल्य में 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई है। अगर आपने म्यूचुअल फंड या सीधे शेयरों में निवेश किया है, तो अल्पकालिक रिटर्न में गिरावट देखने को मिल सकती है।
- **महंगाई और ईंधन खर्च:** ब्रेंट क्रूड के 102 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से तेल आयात बिल में बढ़ोतरी होगी। इससे आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
- **आयात और यात्रा लागत:** अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 95.87 प्रति डॉलर पर आ गया है। इसके कारण विदेश में पढ़ाई, यात्रा और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना अधिक खर्चीला हो जाएगा।
- **ऋण और ब्याज दरें:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.106 फीसदी तक पहुंचने से वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। इससे घरेलू स्तर पर भी कर्ज की दरों में राहत मिलने की उम्मीदें फिलहाल टल सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को आई तेज गिरावट के पीछे वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में आए बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव मुख्य वजह रहे।

- **अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल:** अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.106 फीसदी पर पहुंच गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। अमेरिकी कारोबारी आंकड़ों में मजबूती ने यह संकेत दिया कि अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
- **फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि का डर:** अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बाद बाजार में अक्टूबर में फेड द्वारा दर बढ़ाने की आशंकाएं तेज हो गईं। इससे वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ी और विदेशी निवेशकों ने उभरते बाजारों से पूंजी निकालना शुरू किया।
- **कच्चे तेल में तेजी और भू-राजनीति:** ब्रेंट क्रूड उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
- **रुपये में कमजोरी:** अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे गिरकर 95.87 के स्तर पर आ गया। तेल की ऊंची कीमतों और पूंजी निकासी के चलते मुद्रा पर दबाव बना, जिससे विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
दोपहर 12:34 बजे सेंसेक्स 865.86 अंक (1.16%) गिरकर 73,962.39 पर और निफ्टी 272.35 अंक (1.16%) फिसलकर 23,174.45 पर कारोबार कर रहा था।

### 2. इस गिरावट से शेयर बाजार के निवेशकों को कितना नुकसान हुआ?
बीएसई में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घटकर 480 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया।

### 3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड किस स्तर पर पहुंच गई है?
अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 5.106 प्रतिशत हो गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है, जबकि 2 साल की यील्ड 4.9 प्रतिशत के पार निकल गई।

### 4. कच्चे तेल की कीमतों में क्या बदलाव आया?
ब्रेंट क्रूड दोबारा बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो हाल ही में गिरकर 99 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आया था।

### 5. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का क्या स्तर रहा?
शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे कमजोर होकर 95.87 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।

### 6. बाजार में बिकवाली के मुख्य वैश्विक कारण क्या हैं?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की आशंका, ब्रेंट क्रूड का 102 डॉलर के पार जाना और ईरान-अमेरिका तनाव मुख्य कारण हैं।

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