{
  "type": "article",
  "title": "दिल्ली में 2.25 लाख घरों की छतों पर फ्री सोलर पैनल लगाएगी सरकार, रजिस्ट्रेशन पोर्टल की हुई शुरुआत",
  "summary": "पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत दिल्ली सरकार 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम का पूरा खर्च वहन करेगी, जिससे 2.25 लाख परिवारों को बिना कोई पैसा दिए मुफ्त बिजली की सुविधा मिलेगी।",
  "content": "राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निवासियों के लिए छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाना अब पूरी तरह मुफ्त होने जा रहा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार, 21 सितंबर को एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की घोषणा की, जिसके जरिए नागरिक पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपना पंजीकरण करा सकते हैं। राजधानी में लागू किए जा रहे इस विशेष प्रारूप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 3 किलोवाट (kW) तक की क्षमता वाले रूफटॉप सोलर पैनल लगाने का पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार वहन करेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि योजना के पात्र परिवारों को अपने घर की छत पर सौर प्रणाली स्थापित कराने के लिए अपनी जेब से एक भी रुपया खर्च नहीं करना होगा।\n\nपहले आओ, पहले पाओ के आधार पर चयन\nप्रशासन की इस पहल के तहत पूरी दिल्ली में 2.25 लाख घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाने का लक्ष्य तय किया गया है। योजना के अंतर्गत प्राप्त होने वाले आवेदनों का निपटारा 'पहले आओ, पहले पाओ' (फर्स्ट-कम, फर्स्ट-सर्व्ड) के आधार पर किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, जो उपभोक्ता समय रहते पोर्टल पर अपनी अर्जी दाखिल करेंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तकनीकी स्वीकृति और संयंत्र स्थापना की सुविधा दी जाएगी। सीमित लक्ष्य होने के कारण समयबद्ध पंजीकरण को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।\n\nदेशभर में 1 करोड़ घरों को जोड़ने का केंद्रीय लक्ष्य\nपीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना मूल रूप से केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2024 में शुरू किया था, जिसके लिए 75,021 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य समूचे भारत में 1 करोड़ घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करके उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मुहैया कराना है।\n\nआधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध ब्योरे के मुताबिक, केंद्र सरकार की सामान्य व्यवस्था के अंतर्गत पहले 2 किलोवाट क्षमता के लिए 30,000 रुपये प्रति किलोवाट की दर से सब्सिडी दी जाती है। इसके बाद अतिरिक्त क्षमता के लिए 3 किलोवाट तक 18,000 रुपये प्रति किलोवाट की दर से वित्तीय सहायता मिलती है। इस तरह 3 किलोवाट से बड़े सिस्टम पर कुल केंद्रीय सब्सिडी की अधिकतम सीमा 78,000 रुपये निर्धारित की गई है।\n\nमासिक बिजली खपत और सब्सिडी का गणित\nसामान्य बिजली खपत के आधार पर परिवारों की सौर ऊर्जा आवश्यकताओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। जिन घरों में महीने में औसतन 0 से 150 यूनिट बिजली खर्च होती है, उन्हें आमतौर पर 1 से 2 किलोवाट क्षमता के संयंत्र की दरकार होती है। ऐसे संयंत्रों पर केंद्र सरकार 30,000 रुपये से 60,000 रुपये तक की सब्सिडी देती है। वहीं, जिन परिवारों की मासिक खपत 150 से 300 यूनिट के दायरे में आती है, उनके लिए 2 से 3 किलोवाट का सिस्टम उपयुक्त माना गया है, जिस पर 60,000 रुपये से 78,000 रुपये तक की वित्तीय राहत मिलती है। 300 यूनिट से अधिक मासिक खपत वाले घरों को 3 किलोवाट से बड़े सिस्टम की आवश्यकता होती है, लेकिन उन पर मिलने वाली केंद्रीय वित्तीय सहायता अधिकतम 78,000 रुपये पर ही सीमित रहती है।\n\nइसके अलावा, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) के लिए भी साझा सुविधाओं, जैसे कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन संस्थाओं को 500 किलोवाट क्षमता तक के लिए 18,000 रुपये प्रति किलोवाट की दर से सब्सिडी का लाभ दिया जाता है। देश के विशेष श्रेणी वाले राज्यों, जिनमें असम, मणिपुर, मेघालय, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं, के परिवारों को प्रति किलोवाट 10 प्रतिशत अतिरिक्त केंद्रीय सब्सिडी प्रदान की जाती है।\n\nदिल्ली में क्यों नहीं लगेगा एक भी पैसा?\nसामान्य राज्यों में केंद्रीय सब्सिडी के बाद बची हुई रकम का भुगतान उपभोक्ता को स्वयं करना पड़ता है, लेकिन दिल्ली में व्यवस्था पूरी तरह अलग रखी गई है। दिल्ली सरकार ने 3 किलोवाट तक की क्षमता वाले घरेलू संयंत्रों की पूरी स्थापना लागत उठाने का निर्णय लिया है। इसमें मिलने वाली केंद्रीय सब्सिडी और राज्य सरकार के अतिरिक्त बजट को आपस में जोड़ दिया गया है, जिससे स्थापना की समूची लागत सरकार के स्तर पर ही समायोजित हो जाती है। इस वित्तीय तालमेल के कारण दिल्ली के पात्र निवासियों को अपनी ओर से कोई शुरुआती पूंजी नहीं लगानी पड़ेगी।\n\nयोजना के लिए आवश्यक पात्रता शर्तें\nमुफ्त सोलर पैनल लगवाने के लिए आवेदकों को कुछ अनिवार्य दिशा-निर्देशों और शर्तों को पूरा करना होगा\n\n• आवेदक के पास उस आवासीय संपत्ति और छत का कानूनी मालिकाना हक होना चाहिए जहां सोलर पैनल स्थापित किए जाने हैं।\n• आवेदक के खुद के नाम पर एक वैध बिजली कनेक्शन पंजीकृत होना जरूरी है।\n• घर की छत पर सौर संयंत्र की सुरक्षित और तकनीकी स्थापना के लिए पर्याप्त व उपयुक्त स्थान उपलब्ध होना चाहिए।\n• आवेदक या उसके परिवार ने पूर्व में केंद्र अथवा राज्य सरकार की किसी अन्य सोलर सब्सिडी योजना का लाभ न लिया हो।\n• एक परिवार या घरेलू इकाई को केवल एक बार ही इस सब्सिडी कार्यक्रम का लाभ दिया जाएगा।\n\nपंजीकरण और स्थापना की छह-चरणीय प्रक्रिया\nयोजना का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को एक व्यवस्थित चरणबद्ध प्रक्रिया से गुजरना होगा\n\n• पोर्टल पर लॉगिन: सबसे पहले आधिकारिक पीएम सूर्य घर पोर्टल अथवा दिल्ली सरकार के नए समर्पित ऑनलाइन पोर्टल पर जाएं और अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त करके लॉगिन करें।\n• विवरण दर्ज करें: अपने बिजली कनेक्शन और व्यक्तिगत विवरण से संबंधित फॉर्म भरें। यह कार्य आवेदक स्वयं कर सकता है या फिर किसी पंजीकृत वेंडर की सहायता ले सकता है।\n• तकनीकी मंजूरी: आवेदन ऑनलाइन जमा करने के बाद संबंधित विद्युत वितरण कंपनी (DISCOM) की ओर से तकनीकी व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) की जांच और स्वीकृति का इंतजार करें।\n• वेंडर चयन और बैंक विवरण: मंजूरी मिलने पर पंजीकृत वेंडरों की सूची में से वेंडर का चयन करें और सब्सिडी राशि के हस्तांतरण के लिए अपने बैंक खाते का विवरण (पासबुक की प्रति अथवा कैंसिल्ड चेक) जमा करें।\n• निरीक्षण और जांच: वेंडर द्वारा छत पर सोलर पैनल लगाने का कार्य पूरा होने के बाद वितरण कंपनी (DISCOM) स्थल का भौतिक निरीक्षण करेगी और सेटअप को अंतिम स्वीकृति प्रदान करेगी।\n• सब्सिडी का भुगतान: संयंत्र की सफल स्थापना और आधिकारिक सत्यापन पूरा होने के 30 से 45 कार्य दिवसों के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nदिल्ली सरकार द्वारा 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम की पूरी लागत उठाने से 2.25 लाख परिवारों के बिजली बिल शून्य हो जाएंगे और उन्हें पैनल लगाने के लिए कोई शुरुआती खर्च नहीं करना पड़ेगा।\n\n• दिल्ली में: पात्र उपभोक्ताओं को 3 किलोवाट तक का सोलर पैनल पूरी तरह मुफ्त मिलेगा क्योंकि केंद्र और राज्य मिलकर पूरी लागत वहन कर रहे हैं। जिन परिवारों की अपनी छत है और बिजली कनेक्शन खुद के नाम पर है, वे नए पोर्टल पर तुरंत पंजीकरण कराकर 'पहले आओ, पहले पाओ' कोटे का लाभ उठा सकते हैं।\n• भारत में: देश के अन्य राज्यों में सामान्य उपभोक्ताओं को 3 किलोवाट तक के सिस्टम पर अधिकतम 78,000 रुपये की केंद्रीय सब्सिडी मिलती है, जबकि बाकी लागत उपभोक्ता को खुद देनी होती है। असम, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे विशेष राज्यों के निवासियों को प्रति किलोवाट 10% अतिरिक्त सब्सिडी का फायदा मिलता है।\n• हाउसिंग सोसायटियों के लिए: ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां और RWA साझा सुविधाओं व EV चार्जिंग के लिए 500 किलोवाट क्षमता तक 18,000 रुपये प्रति किलोवाट की रियायत पा सकती हैं। इससे सोसायटियों के साझा मेंटेनेंस बिलों और कॉमन एरिया की बिजली लागत में भारी कमी आएगी।\n• सब्सिडी भुगतान का समय: सिस्टम लगने और डिस्कॉम द्वारा सत्यापन पूरा होने के बाद 30 से 45 कार्य दिवसों में पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। इसके लिए आवेदकों को आवेदन के समय ही पासबुक कॉपी या कैंसिल्ड चेक पोर्टल पर तैयार रखना होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदिल्ली में रूफटॉप सोलर लगाने की गति को तेज करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने 100 प्रतिशत वित्तीय मदद देने का निर्णय लिया है। आम तौर पर शुरुआती लागत अधिक होने के कारण आम परिवार सोलर पैनल लगाने से कतराते हैं, जिसे दूर करने के लिए यह मॉडल लाया गया है।\n\n• शुरुआती लागत की बाधा: आम तौर पर केंद्रीय सब्सिडी के बावजूद उपभोक्ताओं को सिस्टम लगाने के लिए अपनी जेब से अतिरिक्त रकम लगानी पड़ती थी। दिल्ली सरकार ने अतिरिक्त फंडिंग देकर लागत को शून्य कर दिया ताकि मध्यम वर्गीय और सामान्य परिवार बिना वित्तीय बोझ के सौर ऊर्जा अपना सकें।\n• केंद्रीय मिशन को गति: केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में 1 करोड़ घरों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के लक्ष्य के साथ 75,021 करोड़ रुपये की पीएम सूर्य घर योजना शुरू की थी। दिल्ली प्रशासन ने इस केंद्रीय पहल के साथ राज्य के संसाधनों को जोड़कर 2.25 लाख स्थानीय घरों तक इसका सीधा लाभ पहुंचाने की योजना तैयार की है।\n• प्रक्रिया को सुगम बनाना: पहले उपभोक्ताओं को आवेदन और तकनीकी मंजूरी के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। समर्पित पोर्टल शुरू होने से पंजीकरण, वेंडर चयन, डिस्कॉम इंस्पेक्शन और सीधे खाते में सब्सिडी ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिल्ली में पीएम सूर्य घर योजना के तहत कितने घरों को सोलर पैनल दिए जाएंगे?\nइस पहल के अंतर्गत पूरी दिल्ली में कुल 2.25 लाख घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे।\n\n2. क्या दिल्ली के निवासियों को 3 किलोवाट के सोलर पैनल के लिए कोई पैसा देना होगा?\nनहीं, दिल्ली सरकार 3 किलोवाट तक के सिस्टम की पूरी लागत खुद वहन करेगी, इसलिए पात्र परिवारों को कोई खर्च नहीं करना होगा।\n\n3. पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का राष्ट्रीय बजट कितना है?\nकेंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में इस योजना को 75,021 करोड़ रुपये के कुल बजट परिव्यय के साथ शुरू किया था।\n\n4. इस योजना के तहत देश भर में कितने घरों को कवर करने का लक्ष्य है?\nयोजना का प्राथमिक लक्ष्य पूरे भारत में 1 करोड़ परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है।\n\n5. 3 किलोवाट से बड़े सोलर सिस्टम पर केंद्र सरकार कितनी अधिकतम सब्सिडी देती है?\n3 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले रूफटॉप सिस्टम पर केंद्र सरकार की अधिकतम सब्सिडी 78,000 रुपये तय की गई है।\n\n6. सोलर पैनल लग जाने और सत्यापन के बाद सब्सिडी कितने दिनों में बैंक खाते में आती है?\nस्थापना और डिस्कॉम सत्यापन पूरा होने के 30 से 45 कार्य दिवसों के भीतर सब्सिडी लाभार्थी के खाते में जमा हो जाती है।\n\n7. विशेष श्रेणी वाले राज्यों को कितनी अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है?\nअसम, मणिपुर, मेघालय, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के निवासियों को प्रति किलोवाट 10% अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है।",
  "url": "https://trendkia.com/money/delhi-men-2-25-lakha-gharon-ki-chhaton-para-phri-solara-painala-lagaegi-sarakara-rajistreshana-portala-ki-hui-shuruata-36527",
  "category": "मनी",
  "publishedAt": "2026-09-22",
  "tags": [
    "पीएम सूर्य घर योजना",
    "रूफटॉप सोलर दिल्ली",
    "मुफ्त बिजली",
    "दिल्ली सोलर पोर्टल",
    "रेखा गुप्ता",
    "सौर ऊर्जा सब्सिडी"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}