# डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी से सोने-चांदी में गिरावट, दो महीने के निचले स्तर के करीब पहुंचे दाम

> मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,150 डॉलर और चांदी 61 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है। वहीं अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के सामने ब्याज दरों को लेकर कड़ा फैसला लेने की चुनौती है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/dolara-aura-bonda-yilda-men-teji-se-sone-chandi-men-giravata-do-mahine-ke-nichale-stara-ke-kariba-pahunche-dama-43644 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, चांदी, कमोडिटी बाजार, भारतीय रिजर्व बैंक, फेडरल रिजर्व, अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड, कच्चा तेल

अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों पर भारी दबाव देखा जा रहा है, जिसके चलते हाजिर सोना और चांदी दोनों ही अपने दो महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल ने गैर-ब्याज वाली संपत्तियों की चमक फीकी कर दी है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्टूबर 2026 की अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में एक जटिल आर्थिक परिदृश्य का सामना कर रहा है, जहां उसे ब्याज दरों में बढ़ोतरी या यथास्थिति बनाए रखने के बीच बड़ा निर्णय लेना है।

## वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में नरमी
वैश्विक बाजार में हाजिर सोना फिसलकर 4,150 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। सोने के साथ-साथ चांदी में भी बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे हाजिर चांदी लुढ़ककर 61 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है। सोने और चांदी जैसी गैर-उपज परिसंपत्तियों पर डॉलर की मजबूती का सीधा असर पड़ा है। अमेरिकी डॉलर वर्तमान में अप्रैल 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा अमेरिका के 10-वर्षीय और 30-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 24 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे वित्तीय जोखिम और मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

## भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष नीतिगत दर को लेकर कड़ा विकल्प
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर 2026 की नीतिगत बैठक में एक कठिन परिस्थिति में है। चुनौतीपूर्ण व्यापक आर्थिक माहौल, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और चढ़ती ट्रेजरी यील्ड केंद्रीय बैंक के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने या वर्तमान दरों को जस का तस रखने का निर्णय वित्तीय बाजारों पर व्यापक प्रभाव डालेगा। इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की बचत, बैंक से लिए जाने वाले कर्ज की लागत और देश में महंगाई की स्थिति पर पड़ेगा। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख का अनुसरण करते हुए रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर सकता है।

## अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और फेडरल रिजर्व की संभावित दिशा
आईएसएम के ताजा आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि पिछले महीने अमेरिकी सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव चार साल से अधिक समय में सबसे तेज गति से बढ़ा है। दूसरी ओर, उम्मीद से कमजोर आए अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद वित्तीय बाजार लगभग 78 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और उन्हें स्थिर रखेगा। ब्याज दरों को लेकर बने इस मिले-जुले माहौल ने वित्तीय परिसंपत्तियों की दिशा को प्रभावित किया है।

## कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली कुछ राहत
कमोडिटी बाजार के दूसरे हिस्से में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। मध्य पूर्व से आपूर्ति बढ़ने के संकेतों के कारण कच्चे तेल के भाव गिरे हैं। तेल की कीमतों में आई इस नरमी से मुद्रास्फीति और आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंकाओं में कुछ कमी आई है। हालांकि, बॉन्ड यील्ड और डॉलर के ऊंचे स्तर बने रहने तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

## इसका आप पर असर
सोने-चांदी में आई गिरावट और आगामी मौद्रिक नीति बैठक का असर सीधे आपकी जेब और निवेश पर पड़ सकता है।

- **सोना और चांदी खरीदारों के लिए:** वैश्विक बाजार में भाव दो महीने के निचले स्तर पर आने से आभूषण और धातु खरीदारों को बेहतर कीमतें मिल सकती हैं। यदि डॉलर में तेजी जारी रही, तो आने वाले दिनों में कीमतें और स्थिर या सस्ती हो सकती हैं।
- **लोन और ईएमआई पर असर:** भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की संभावना से होम लोन और ऑटो लोन महंगे हो सकते हैं। यदि दरें बढ़ती हैं, तो आपकी मौजूदा फ्लोटिंग लोन ईएमआई में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
- **फिक्स्ड डिपॉजिट और बचतकर्ता:** केंद्रीय बैंक की ओर से संभावित ब्याज दर वृद्धि बचतकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए फायदेमंद हो सकती है। बैंकों द्वारा सावधि जमा योजनाओं पर ब्याज दरों में सुधार किया जा सकता है।
- **कच्चे तेल से राहत:** मध्य पूर्व से आपूर्ति बढ़ने के कारण तेल की कीमतों में नरमी से ईंधन की कीमतों में अचानक उछाल का जोखिम कम हुआ है। इससे परिवहन लागत और रोजमर्रा के सामानों पर महंगाई का दबाव सीमित रहने में मदद मिल सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
सोने और चांदी के भाव दो महीने के निचले स्तर पर आने और आर्थिक बाजारों में अनिश्चितता के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू व्यापक आर्थिक कारण मौजूद हैं।

- **डॉलर और बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल:** अमेरिकी डॉलर अप्रैल 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और अमेरिकी 10-वर्षीय तथा 30-वर्षीय यील्ड 24 महीने के उच्च स्तर पर हैं। जब सुरक्षित बॉन्ड पर ऊंचा रिटर्न मिलता है, तो बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने-चांदी की मांग घट जाती है।
- **सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव:** आईएसएम के आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी सेवा क्षेत्र में लागत दबाव चार वर्षों में सबसे तेज गति से बढ़ा है। इससे वित्तीय बाजारों में लगातार मुद्रास्फीति और वित्तीय जोखिमों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
- **आरबीआई के सामने कड़ा आर्थिक माहौल:** ऊंचे कच्चे तेल के दाम और वैश्विक ट्रेजरी यील्ड के कारण भारतीय रिजर्व बैंक पर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने का दबाव है। यही कारण है कि बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तर्ज पर 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की उम्मीद कर रहा है।
- **कच्चे तेल की आपूर्ति में बदलाव:** मध्य पूर्व से बढ़ी आपूर्ति के संकेतों से कच्चे तेल के भाव गिरे हैं। इससे ऊर्जा महंगाई की चिंताओं में मामूली कमी आई है, जिसने बॉन्ड और कमोडिटी बाजारों के समीकरण को प्रभावित किया है।

## सवाल-जवाब

### 1. हाजिर सोना और चांदी वर्तमान में किस भाव पर कारोबार कर रहे हैं?
हाजिर सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस से नीचे और हाजिर चांदी 61 डॉलर प्रति औंस से नीचे कारोबार कर रही है, जो कि दोनों के लिए दो महीने के निचले स्तर के करीब है।

### 2. सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी डॉलर का अप्रैल 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचना और 10 व 30 वर्ष की ट्रेजरी यील्ड का 24 महीने के उच्च स्तर पर जाना कीमती धातुओं में गिरावट की मुख्य वजह है।

### 3. भारतीय रिजर्व बैंक की अक्टूबर 2026 की नीतिगत बैठक को लेकर बाजार का क्या अनुमान है?
बाजार यह अनुमान लगा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरह नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की घोषणा कर सकता है।

### 4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें स्थिर रखने की कितनी संभावना जताई जा रही है?
कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद वित्तीय बाजार लगभग 78 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं कि फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

### 5. कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट क्यों देखी गई?
मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बढ़ने के संकेतों के चलते कच्चे तेल के भाव में गिरावट आई है, जिससे मुद्रास्फीति की चिंताएं कुछ हद तक कम हुई हैं।

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