डॉलर में मजबूती और ब्याज दर बढ़ने की आशंका से सोने-चांदी में गिरावट, क्रूड में भी हलचल मजबूत अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में तेजी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दबाव में आ गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने कमोडिटी बाजार की दिशा तय की है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में उछाल के चलते कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। मजबूत आर्थिक आंकड़ों के कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में और इजाफा किए जाने की आशंकाएं गहरी हो गई हैं। इसके अलावा, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उठापटक ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है, जिससे सर्राफा बाजारों में सुरक्षित निवेश की मांग सीमित हुई है। सोने और चांदी की कीमतों पर चौतरफा दबाव वैश्विक हाजिर बाजार में सोना तेजी हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष करता दिखा और यह 4,288 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। मजबूत होते डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड की वजह से सोने की कीमतों में अपेक्षित उछाल नहीं आ सका। दूसरी ओर, चांदी के बाजार में भी भारी कमजोरी देखी गई, जहां हाजिर चांदी करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 64 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी निजी क्षेत्र के उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़ों ने मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं दोबारा बढ़ा दी हैं। महंगाई का दबाव बने रहने की स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं या इनमें और इजाफा कर सकते हैं, जिससे गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने और चांदी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और ट्रेजरी यील्ड का स्तर मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101 के आंकड़े को छू चुका है, जो लगभग दो महीनों में इसका उच्चतम स्तर है। डॉलर में आई इस तेजी ने विदेशी खरीदारों के लिए सोने और चांदी को महंगा बना दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर मांग कमजोर हुई है। इसी तरह, अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड बढ़कर लगभग 5.11 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह स्तर जुलाई 2007 के बाद से देखे गए उच्चतम स्तरों के काफी करीब बना हुआ है। बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी निवेशकों को निश्चित आय वाले विकल्पों की ओर आकर्षित करती है, जिससे कीमती धातुओं में नया निवेश रुक जाता है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और दर वृद्धि की संभावनाएं फेडरल रिजर्व के कई प्रमुख अधिकारियों ने हाल ही में पिछली ब्याज दर वृद्धि का समर्थन दोहराया है और साथ ही यह चेतावनी दी है कि अर्थव्यवस्था में महंगाई का जोखिम अभी खत्म नहीं हुआ है। इन बयानों के बाद वित्तीय बाजारों में इस बात की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि मौद्रिक नीति में सख्ती का दौर आगे भी जारी रहेगा। मौजूदा समय में डेरिवेटिव बाजार अक्टूबर महीने में फेडरल रिजर्व द्वारा एक और ब्याज दर वृद्धि की करीब 70 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहा है, जबकि इससे ठीक एक दिन पहले यह अनुमान केवल 55 प्रतिशत था। ब्याज दरों में वृद्धि की यह तेज होती संभावना सर्राफा कीमतों पर लगातार भारी पड़ रही है। कच्चे तेल का रुख और ईरान का रुख ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग 1 प्रतिशत फिसलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास टिका रहा। हालांकि, कीमतों में इस गिरावट के बाद रिकवरी भी दर्ज की गई। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान धमकियों के आगे नहीं झुकेगा और आर्थिक विकास के लिए परमाणु तकनीक विकसित करने के अपने अधिकार को कभी नहीं छोड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जब तक ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध और नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की निर्बाध आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने और कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। महंगे तेल से महंगाई का दबाव बढ़ेगा, जो ब्याज दरों को ऊंचा रखने के दृष्टिकोण को और पुख्ता करता है। घरेलू बाजार में सोने का दायरा और विशेषज्ञ दृष्टिकोण एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने बाजार के आगे के रुख पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जतिन त्रिवेदी का कहना है, "आने वाले समय में अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, संयुक्त राष्ट्र बैठक से जुड़े अपडेट और शी जिनपिंग का अमेरिकी दौरा सोने में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं।" विशेषज्ञों के अनुसार, एमसीएक्स पर सोने की कीमतें 1,50,000 रुपये से 1,53,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में घूमती दिख सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और भू-राजनीतिक गतिविधियों के चलते आने वाले दिनों में दोनों कीमती धातुओं में भारी उठापटक जारी रहने की पूरी संभावना है। इसका आप पर असर सोने, चांदी और कच्चे तेल के दामों में चल रही वैश्विक उथल-पुथल आम उपभोक्ताओं, आभूषण खरीदारों और निवेशकों की जेब पर सीधा प्रभाव डाल सकती है। • आभूषण खरीदारों पर असर: घरेलू बाजार में सोने के भाव ₹1,50,000 से ₹1,53,500 के ऊंचे दायरे में बने रहने का अनुमान है। यदि आप शादी या त्योहारी सीजन के लिए खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो कीमतों में किसी भी अस्थायी गिरावट का लाभ उठाने के लिए बाजार पर नजर बनाए रखें। • पेट्रोलियम और ईंधन की लागत: कच्चे तेल के 92 से 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने से ईंधन लागत पर दबाव बना रहेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है, तो परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। • कमोडिटी निवेशकों के लिए संकेत: डॉलर इंडेक्स के 101 पर पहुंचने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 70% संभावना के चलते सर्राफा में तेज रैली सीमित रह सकती है। सुरक्षित निवेश चाहने वाले खुदरा निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने के बजाय व्यवस्थित तरीके से खरीदारी करने की रणनीति अपनानी चाहिए। • बचत और ऋण दरें: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 5.11% पर टिके रहने से वैश्विक स्तर पर कर्ज की लागत ऊंची बनी रह सकती है। आने वाले समय में वित्तीय संस्थान जमा और बचत योजनाओं पर प्रतिफल की समीक्षा कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों और मध्य पूर्व में बढ़ते कूटनीतिक तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस दोहरे दबाव की स्थिति को जन्म दिया है। • अमेरिकी निजी क्षेत्र के मजबूत आंकड़े: हालिया आर्थिक आंकड़ों ने संकेत दिया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है, जिससे मुद्रास्फीति का खतरा बना हुआ है। इसी कारण फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की संभावना अचानक बढ़कर 70% हो गई है। • डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के 101 पर पहुंचने और 10 साल की ट्रेजरी यील्ड के 5.11% छूने से सोने-चांदी पर दबाव बना है। जब बॉन्ड और डॉलर बेहतर रिटर्न देते हैं, तो निवेशक सर्राफा जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों से पैसा निकालते हैं। • ईरान और अमेरिका में तनातनी: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी गई चेतावनी और परमाणु अधिकार पर अड़े रहने से ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहराया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को भड़काती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें सख्त रखने का दबाव बढ़ता है। सवाल-जवाब 1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने और चांदी का ताजा भाव क्या है? वैश्विक बाजार में हाजिर सोना 4,288 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि हाजिर चांदी 1 फीसदी गिरकर 64 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। 2. एमसीएक्स पर सोने के लिए विश्लेषकों ने क्या दायरा तय किया है? एलकेपी सिक्योरिटीज के अनुसार, आने वाले समय में एमसीएक्स पर सोने की कीमतें ₹1,50,000 से ₹1,53,500 के दायरे में रहने का अनुमान है। 3. फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की कितनी संभावना है? वित्तीय बाजारों में अक्टूबर महीने में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में वृद्धि की संभावना 70 प्रतिशत आंकी जा रही है, जो पिछले दिन 55 प्रतिशत थी। 4. अमेरिकी डॉलर और 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का मौजूदा स्तर क्या है? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101 के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.11 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। 5. ईरान के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र में क्या चेतावनी दी है? राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि जब तक प्रतिबंध और अमेरिकी नाकेबंदी रहेगी, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को अनुमति नहीं दी जाएगी। 6. कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर पर कारोबार कर रही हैं? अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 0.4 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत फिसलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के पास रहा। https://trendkia.com/money/dollar-men-majabuti-aura-byaja-dara-barhane-ki-ashnka-se-sone-chandi-men-giravata-crude-men-bhi-halachala-37547 TrendKia — Har trend, sabse pehle.