एलपीजी ई-केवाईसी की अंतिम तिथि 14 सितंबर तय, इंडेन, एचपी और भारत गैस उपभोक्ता तुरंत करें यह काम सरकार ने एलपीजी ग्राहकों के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी पूरा करने की डेडलाइन को 14 सितंबर तक बढ़ा दिया है। समय पर सत्यापन न होने पर गैस कनेक्शन पर असर पड़ सकता है। देशभर में इंडेन गैस, एचपी गैस और भारत गैस का उपयोग करने वाले घरेलू एलपीजी ग्राहकों के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए ई-केवाईसी जमा करने की अंतिम समय-सीमा को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। नई घोषणा के अनुसार, अब उपभोक्ता 14 सितंबर तक अपनी संबंधित गैस एजेंसियों के पास जाकर या निर्धारित माध्यमों से अपनी बायोमेट्रिक व आधार जांच प्रक्रिया पूरी करा सकते हैं। यदि ग्राहक तय समय के भीतर सत्यापन नहीं कराते हैं, तो उनकी गैस आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है या उन्हें गैर-सब्सिडी वाली कमर्शियल दरों पर सिलिंडर लेना पड़ सकता है। ई-केवाईसी की समय-सीमा में पांचवीं बार बढ़ोतरी घरेलू गैस कनेक्शनों में फर्जीवाड़े को रोकने और सही लाभार्थियों तक सब्सिडी पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान में सरकार ने बीते दो महीनों के दौरान पांचवीं बार ई-केवाईसी की अंतिम तिथि बढ़ाई है। इससे पहले 7 सितंबर की डेडलाइन तय की गई थी, जिसे अब 7 दिनों के लिए और विस्तार देकर 14 सितंबर कर दिया गया है। सितंबर महीने की शुरुआत से पहले भी इस समय-सीमा में कई बार बदलाव किए गए थे। सबसे पहले 16 अगस्त को डेडलाइन खत्म हो रही थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 23 अगस्त और फिर 31 अगस्त किया गया था। लगातार तिथियां बढ़ाए जाने का मुख्य कारण यह है कि बड़ी संख्या में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के उपभोक्ता अभी भी अपना आधार सत्यापन नहीं करा सके हैं। ई-केवाईसी न कराने पर क्या होगा असर? पेट्रोलियम उद्योग से जुड़ी रिपोर्ट्स और बाजार में जारी चर्चाओं के अनुसार, यदि कोई ग्राहक 14 सितंबर की अंतिम तिथि तक अपना आधार आधारित ई-केवाईसी पूरा नहीं करता है, तो उसके गैस कनेक्शन को अस्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है। इसके अलावा ऐसे उपभोक्ताओं को घरेलू सब्सिडी का लाभ मिलना बंद हो सकता है और उन्हें अगली बुकिंग पर कमर्शियल दरों का भुगतान करना पड़ सकता है। यद्यपि आधिकारिक तौर पर कनेक्शन काटने के नियमों पर विस्तृत स्थिति स्पष्ट होना बाकी है, लेकिन तेल कंपनियों ने यह साफ कर दिया है कि जब तक इंडेन गैस, एचपी गैस और भारत गैस के ग्राहक ई-केवाईसी पूरा नहीं कर लेते, तब तक उनकी सेवाएं प्रभावित रहेंगी। ग्रामीण इलाकों के लिए एलपीजी बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव ई-केवाईसी अभियान के बीच तेल मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को रिफिल बुकिंग नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करने के निर्देश भी जारी किए हैं। नए नियम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के एलपीजी ग्राहकों के लिए दो सिलिंडरों की बुकिंग के बीच का न्यूनतम अंतर 45 दिनों से घटाकर 25 दिन कर दिया गया है। इससे पहले ग्रामीण इलाकों में एक सिलिंडर बुक करने के बाद दूसरा सिलिंडर बुक करने के लिए उपभोक्ताओं को 45 दिनों का इंतजार करना पड़ता था। वहीं दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों के ग्राहकों के लिए 25 दिनों का बुकिंग नियम पहले की तरह ही लागू रहेगा और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। ई-केवाईसी फॉर्म भरने की चरणबद्ध प्रक्रिया गैस एजेंसी पर जमा किए जाने वाले ई-केवाईसी फॉर्म को तीन प्रमुख भागों में बांटा गया है। फॉर्म के पहले हिस्से में ग्राहक को अपना व्यक्तिगत विवरण दर्ज करना होता है। इसमें पहला नाम, मध्य नाम, अंतिम नाम, गैस उपभोक्ता संख्या, जन्म तिथि और माता-पिता का नाम शामिल है। इसके साथ ही फॉर्म पर एक नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो भी चिपकाना आवश्यक है। फॉर्म के दूसरे हिस्से में एलपीजी कनेक्शन और निवास से संबंधित पूरी जानकारी मांगी जाती है। इसमें फ्लैट नंबर, मंजिल संख्या, हाउसिंग कॉम्प्लेक्स या भवन का नाम, सड़क या मार्ग का नाम, शहर या गांव, जिला, लैंडमार्क, राज्य का नाम और पिन कोड दर्ज करना होता है। इसके अलावा ग्राहक को अपना चालू मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और लैंडलाइन नंबर भी स्पष्ट रूप से लिखना होता है। आवश्यक पहचान दस्तावेज और रसीद प्राप्त करना ई-केवाईसी फॉर्म के तीसरे और अंतिम हिस्से में पहचान और पते का प्रमाण प्रस्तुत करना होता है। इसके लिए उपभोक्ता आधार कार्ड, पैन कार्ड या राशन कार्ड के विवरण का उपयोग कर सकते हैं। पते या पहचान के प्रमाण के तौर पर किसी गजटेड ऑफिसर द्वारा सत्यापित स्व-घोषणा पत्र भी स्वीकार किया जाता है। पूरा फॉर्म भरने के बाद इसे अपने स्थानीय एलपीजी वितरक के पास जमा करना होगा। गैस एजेंसी के प्रतिनिधि प्रस्तुत किए गए फॉर्म और दस्तावेजों की मूल प्रतियों से जांच करेंगे। सत्यापन सफल होने के बाद वितरक फॉर्म पर हस्ताक्षर करेगा, तारीख डालेगा और अपनी आधिकारिक मोहर लगाएगा। फॉर्म जमा करते समय वितरक की ओर से निचले हिस्से को फाड़कर दी जाने वाली पावती रसीद लेना न भूलें। इस पावती रसीद पर गैस एजेंसी की मोहर और प्रतिनिधि के हस्ताक्षर होना बेहद जरूरी है, जो इस बात का सबूत होगा कि आपकी ई-केवाईसी प्रक्रिया सफलतापूर्वक जमा हो चुकी है। इसका आप पर असर एलपीजी उपभोक्ता ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करके अपनी गैस आपूर्ति और सब्सिडी में आने वाली संभावित रुकावटों से बच सकते हैं। • भारत में: इंडेन, एचपी और भारत गैस के सभी ग्राहकों को 14 सितंबर तक सत्यापन कराना अनिवार्य है। समय पर केवाईसी न होने से गैस सिलेंडर की डिलीवरी में अस्थायी रुकावट या कमर्शियल दरों पर भुगतान का जोखिम हो सकता है। • ग्रामीण क्षेत्रों में: ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर बुकिंग का न्यूनतम अंतर 45 दिनों से घटाकर 25 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीण परिवारों को अब शहरी ग्राहकों की तरह जल्दी नया सिलेंडर बुक करने की सुविधा मिलेगी। • शहरी क्षेत्रों में: शहरी ग्राहकों के लिए 25 दिनों का बुकिंग नियम पहले की तरह लागू रहेगा। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। • दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया: वितरक के पास आधार, पैन या राशन कार्ड की प्रतियों के साथ फॉर्म जमा करने के बाद मोहरयुक्त पावती रसीद लेना बेहद जरूरी है। ऐसा क्यों हुआ तेल मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों ने एलपीजी कनेक्शनों में पारदर्शिता लाने और फर्जी खातों की पहचान करने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य किया है। • फर्जी कनेक्शन पर रोक: ई-केवाईसी सत्यापन का प्राथमिक उद्देश्य बेनामी और डुप्लीकेट एलपीजी कनेक्शनों को समाप्त करना है। • सब्सिडी का सही वितरण: सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एलपीजी सब्सिडी केवल वास्तविक घरेलू उपयोगकर्ताओं के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में ही पहुंचे। • उपभोक्ताओं को अतिरिक्त समय: अगस्त और सितंबर के दौरान कई बार तिथियां बढ़ने के बाद, 14 सितंबर को अंतिम अवसर के रूप में 7 दिनों का विस्तार दिया गया है। • ग्रामीण रिफिल नियमों का सरलीकरण: ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन की बढ़ती खपत को देखते हुए 45 दिन की रिफिल समय-सीमा को घटाकर 25 दिन किया गया है। सवाल-जवाब 1. एलपीजी ई-केवाईसी कराने की नई अंतिम तिथि क्या है? सरकार ने एलपीजी ई-केवाईसी फॉर्म जमा करने की नई अंतिम तिथि 14 सितंबर तय की है। 2. समय-सीमा बीत जाने पर गैस कनेक्शन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? ई-केवाईसी न होने से इंडेन, एचपी और भारत गैस ग्राहकों का कनेक्शन अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकता है या उन्हें कमर्शियल दरें देनी पड़ सकती हैं। 3. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रिफिल बुकिंग के नियम में क्या बदलाव किया गया है? ग्रामीण इलाकों के लिए सिलेंडर बुकिंग के बीच का अनिवार्य अंतर 45 दिनों से घटाकर 25 दिन कर दिया गया है। 4. ई-केवाईसी फॉर्म के साथ कौन से दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं? उपभोक्ता आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड या गजटेड ऑफिसर द्वारा सत्यापित स्व-घोषणा पत्र जमा कर सकते हैं। 5. गैस वितरक के पास फॉर्म जमा करने के बाद क्या प्राप्त करना आवश्यक है? फॉर्म जमा करने के बाद गैस एजेंसी के हस्ताक्षर और मोहर वाली पावती रसीद प्राप्त करना अनिवार्य है। https://trendkia.com/money/elapiji-i-kevaisi-ki-antima-tithi-14-sitnbara-taya-indane-hp-aura-bharat-gas-upabhokta-turnta-karen-yaha-kama-31501 TrendKia — Har trend, sabse pehle.