# EPFO पेंशनधारकों की 7,500 रुपये मासिक पेंशन की मांग पर संसद में क्या बोलीं श्रम राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे

> संसद में सरकार ने साफ किया है कि EPFO की न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने और महंगाई भत्ते को मूल वेतन में जोड़ने, दोनों मांगों पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/epfo-penshanadharakon-ki-7-500-rupaye-masika-penshana-ki-manga-para-snsada-men-kya-bolin-shrama-rajyamntri-shobha-karandlaje-9452 · **Language:** Hindi
**Tags:** EPFO पेंशन, न्यूनतम पेंशन, महंगाई भत्ता, डीए मूल वेतन विलय, आठवां वेतन आयोग, शोभा करंदलाजे, ईपीएस-2026, संसद

EPFO से पेंशन पाने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर का इंतजार अभी लंबा हो सकता है। संसद में सरकार ने साफ कर दिया है कि न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने और महंगाई भत्ते को मूल वेतन में जोड़ने, दोनों ही मांगों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

## क्या है पूरा मामला
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने कर्मचारी पेंशन योजना का पुराना ढांचा ईपीएस-95 बदलकर अब ईपीएस-2026 लागू कर दिया है। इसके साथ ही अंशधारकों की पेंशन बढ़ाने को लेकर विचार विमर्श भी तेज हो गया है। दरअसल कई कर्मचारी संगठन लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं कि मौजूदा न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये को बढ़ाकर 7,500 रुपये किया जाए। इसके साथ साथ यह मांग भी उठ रही है कि महंगाई भत्ते यानी डीए को मूल वेतन का हिस्सा बना दिया जाए, ताकि भविष्य में मिलने वाले लाभ और पेंशन की गणना ऊंचे आधार पर हो सके। इन्हीं दोनों सवालों को लेकर संसद में सरकार से जवाब मांगा गया।

## सरकार ने संसद में क्या जवाब दिया
श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने संसद में इन सवालों का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने बताया कि ट्रेड यूनियन, जनप्रतिनिधि और अन्य हितधारक लगातार सरकार से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने और डीए को मूल वेतन के साथ जोड़ने की मांग करते रहे हैं। पेंशन के सवाल पर उन्होंने साफ किया कि ईपीएस-95, जिसे अब ईपीएस-26 कहा जा रहा है, एक ऐसी योजना है जहां जितना योगदान होगा, लाभ भी उसी अनुपात में मिलेगा। यानी यह पूरी तरह से योगदान पर टिकी हुई सामाजिक सुरक्षा योजना है, न कि कोई तय राशि देने वाली गारंटीशुदा योजना।

## पेंशन फंड में योगदान का पूरा गणित
मौजूदा नियमों के तहत ईपीएस-95 या ईपीएस-26 से जुड़े अंशधारकों को न्यूनतम 1,000 रुपये की तय पेंशन मिलने का प्रावधान है। इस पेंशन फंड में नियोक्ता की तरफ से 8.33 फीसदी योगदान आता है, जो कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा होने वाले मूल वेतन के 12 फीसदी हिस्से में से ही निकाला जाता है। इसके अलावा केंद्र सरकार भी अपनी ओर से 1.16 फीसदी का योगदान जोड़ती है। हालांकि इस पूरी व्यवस्था की एक सीमा भी है, EPFO का योगदान अभी सिर्फ अधिकतम 15,000 रुपये की सैलरी पर ही तय किया जाता है, इससे ज्यादा सैलरी पर योगदान नहीं बढ़ता।

## 7,500 रुपये पेंशन पर फिलहाल फैसला क्यों नहीं
केंद्रीय राज्यमंत्री ने संसद में बताया कि सरकार खुद 1,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन का समर्थन करती है, यानी इसे जारी रखने के पक्ष में है। लेकिन इसे बढ़ाकर 7,500 रुपये करने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि EPFO से जुड़े कर्मचारियों की पेंशन बढ़ाने से जुड़े आवेदनों पर सरकार विचार जरूर कर रही है और इस पर मंथन चल रहा है। मगर ऐसा कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले पेंशन फंड में आने वाले योगदान और भविष्य में बनने वाली देनदारियों का भी पूरा आकलन करना जरूरी होगा। फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस विचार नहीं हुआ है और आने वाले समय में सभी हितधारकों से बातचीत के बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा।

## डीए को मूल वेतन से जोड़ने पर क्या स्थिति है
8वें वेतन आयोग की घोषणा के बाद से कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ चुकी है कि क्या मौजूदा महंगाई भत्ते को मूल वेतन के साथ जोड़ दिया जाएगा। कर्मचारी संगठनों ने वेतन आयोग के साथ हुई बैठकों में भी यही मांग रखी है। हालांकि अब तक सरकार की तरफ से डीए को मूल वेतन में जोड़ने को लेकर कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है। इस मामले में एक स्थापित नियम भी है, यह नियम कहता है कि अगर वेतन आयोग के गठन के समय महंगाई भत्ता 50 फीसदी से ज्यादा हो जाता है, तो उसे मूल वेतन में मिला दिया जाना चाहिए।

## आगे क्या हो सकता है
फिलहाल दोनों ही मुद्दों, न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपये करना और डीए को मूल वेतन में जोड़ना, पर सरकार ने ठोस भरोसा नहीं दिया है, लेकिन दोनों ही मामलों पर आंतरिक विचार विमर्श जारी होने की बात मानी गई है। कर्मचारी संगठनों की निगाहें अब आगे होने वाली बातचीत और वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हैं, जिनसे यह साफ हो सकेगा कि इन दोनों मांगों पर आखिरकार कोई फैसला कब और किस रूप में सामने आता है।

## इसका आप पर असर
- **EPFO पेंशनधारकों के लिए:** फिलहाल न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये ही बनी रहेगी, 7,500 रुपये होने का इंतजार अभी लंबा हो सकता है, इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग में मौजूदा पेंशन राशि को ही आधार मानें।
- **वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए:** महंगाई भत्ते को मूल वेतन में जोड़ने पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, इसलिए सैलरी स्लिप और पीएफ योगदान की मौजूदा गणना में तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या EPFO की न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़कर 7,500 रुपये हो गई है?
नहीं, सरकार ने संसद में साफ किया है कि इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।

### 2. सरकार ने डीए को मूल वेतन में जोड़ने पर क्या कहा?
सरकार ने बताया कि डीए को मूल वेतन में जोड़ने को लेकर अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

### 3. EPS-95 की जगह अब कौन सी योजना लागू है?
EPFO ने EPS-95 के स्थान पर अब EPS-2026 लागू कर दिया है।

### 4. पेंशन फंड में कितना योगदान होता है?
नियोक्ता 8.33 फीसदी और केंद्र सरकार 1.16 फीसदी का योगदान करती है, यह मूल वेतन के 12 फीसदी पीएफ योगदान का हिस्सा है।

### 5. EPFO का योगदान अधिकतम कितनी सैलरी पर तय होता है?
EPFO का योगदान अभी अधिकतम 15,000 रुपये की सैलरी पर ही तय किया जाता है।

### 6. डीए को मूल वेतन में जोड़ने का नियम क्या कहता है?
नियम कहता है कि अगर वेतन आयोग के गठन के समय महंगाई भत्ता 50 फीसदी से ज्यादा हो जाए तो उसे मूल वेतन में जोड़ दिया जाना चाहिए।

### 7. संसद में यह जवाब किसने दिया?
श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने संसद में यह जवाब दिया।

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