यूरोपीय अदालतों और नियामकों के विरोध के बाद मेटा ने बिजनेस अकाउंट्स की नई शर्तें टालीं वेब स्क्रैपिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा उपयोग को लेकर यूरोप में कड़े कानूनी विरोध के बाद मेटा ने अपने बिजनेस अकाउंट्स की नई शर्तों को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यूरोप में मीडिया समूहों, प्रकाशकों और नियामक संस्थाओं के बढ़ते विरोध के चलते तकनीकी कंपनी मेटा ने अपने बिजनेस अकाउंट्स के लिए प्रस्तावित सेवा शर्तों को लागू करने की योजना फिलहाल टाल दी है। यह नई नीति 30 अक्टूबर से प्रभावी होने वाली थी, लेकिन व्यापक असंतोष और कई कानूनी चुनौतियों के सामने आने के बाद कंपनी ने घोषणा की है कि पुरानी शर्तें ही अभी लागू रहेंगी। विभिन्न समाचार संगठनों और ओपन-वेब कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई थी कि इन नए प्रावधानों का सहारा लेकर कंपनी भारी मात्रा में डिजिटल सामग्री का दोहन कर सकती है। इसके अलावा यह आशंका भी जताई गई कि इस तरह एकत्रित सामग्री का इस्तेमाल कंपनी अपने प्रतिद्वंद्वी उत्पादों और आधुनिक तकनीकी सेवाओं को तराशने में कर सकती है। प्रस्तावित नीति में छिपे स्क्रैपिंग प्रावधान और विवाद मेटा की इस नई योजना के तहत कंपनी को विशेष स्वचालित तकनीकी उपकरणों, स्क्रैपर्स और इंटरनेट बॉट्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की वैधानिक छूट मिल रही थी। इन उपकरणों के जरिए व्यावसायिक खातों से जुड़े सभी वेब डोमेन और यूआरएल को इंडेक्स, कैश, स्कैन, विश्लेषण, एकत्र, पुनर्प्राप्त या क्रॉल करने का अधिकार शामिल किया गया था। इस नीति की सबसे विवादास्पद बात यह थी कि यह नियम उन सभी व्यावसायिक ग्राहकों पर अनिवार्य रूप से लागू होते, भले ही उन्होंने इसके लिए अपनी सहमति न दी हो या वे इसका खुला विरोध करते हों। साथ ही, इन प्रावधानों में प्रकाशकों की वेबसाइटों से निकाली गई सामग्री के बदले किसी भी तरह के वित्तीय मुआवजे या भुगतान का कोई प्रावधान नहीं रखा गया था। स्वतंत्र विशेषज्ञों और समीक्षकों ने तुरंत इस व्यवस्था को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स के प्रशिक्षण और नए तकनीकी उत्पादों के विकास से जोड़ा। नॉर्वे में 180 मीडिया संस्थानों की कानूनी जीत इस पूरे मामले ने सबसे पहले स्कैंडिनेवियाई क्षेत्र में तूल पकड़ा, जहां मीडिया उद्योग ने इस नीति के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। नॉर्वे की एक अदालत ने 28 अक्टूबर को इन प्रस्तावित शर्तों के क्रियान्वयन पर एक अंतरिम रोक जारी कर दी। यह अदालती आदेश नॉर्वे की 180 मीडिया कंपनियों द्वारा दायर संयुक्त याचिका के बाद आया। इस कानूनी लड़ाई को नॉर्वेजियन मीडिया बिजनेसेस एसोसिएशन यानी एमबीएल का सीधा समर्थन प्राप्त था, जिसके सदस्य अखबार देश के लगभग 97 प्रतिशत सर्कुलेशन का प्रतिनिधित्व करते हैं। अदालत के इस फैसले पर एमबीएल के बोर्ड की अध्यक्ष लीन एल्तविक विंडफेल्ड ने स्पष्ट किया कि अदालत ने उनकी इस बात को स्वीकार किया है कि संबंधित बाजार में मेटा का एकाधिकार है और उसकी नई शर्तें पूरी तरह से अनुचित हैं। इस आदेश ने यूरोपीय स्तर पर इस नीति के खिलाफ एक मजबूत मिसाल कायम की, जिसके बाद अन्य देशों के नियामकों ने भी कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। ब्रिटेन में निष्पक्ष व्यापार शर्तों को लेकर जांच शुरू नॉर्वे में लगे कानूनी झटके के तुरंत बाद 30 अक्टूबर को यूनाइटेड किंगडम के प्रतिस्पर्धा नियामक, जिसे कॉम्पिटिशन एंड मार्केट्स अथॉरिटी या सीएमए कहा जाता है, ने भी सख्त कदम उठाया। सीएमए ने मेटा की इन व्यावसायिक शर्तों के खिलाफ एक औपचारिक जांच शुरू करने की सार्वजनिक घोषणा कर दी। ब्रिटेन के नियामक ने समाचार प्रकाशकों और अन्य डिजिटल सामग्री निर्माताओं पर इन शर्तों को थोपे जाने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई। नियामक संस्था सीएमए का स्पष्ट रुख रहा कि मेटा द्वारा समाचार प्रकाशकों और अन्य सामग्री उत्पादक व्यवसायों को इन शर्तों को स्वीकार करने के लिए बाध्य करना अवैध रूप से अनुचित व्यापारिक शर्तें थोपने के दायरे में आ सकता है। नियामक ने रेखांकित किया कि जब बाजार में बेहद मजबूत पकड़ रखने वाला कोई मंच प्रकाशकों को ऐसी शर्तें मानने पर विवश करता है, तो इससे प्रतिस्पर्धा और निष्पक्ष व्यापार को सीधा नुकसान पहुंचता है। कंपनी का आधिकारिक स्पष्टीकरण और दावों का खंडन इस चौतरफा आलोचना के बीच मेटा ने अपना बचाव करते हुए कहा कि इस नीतिगत बदलाव से उसके वेब क्रॉलर्स की कार्यप्रणाली में कोई मौलिक बदलाव नहीं आया है। इस विषय पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के नीमन जर्नलिज्म लैब की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद बहस और तेज हो गई थी। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने 16 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "यह अपडेट यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है कि हम प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन और कंटेंट सिफारिशें करते समय तीसरे पक्ष की वेबसाइटों पर बिक्री के लिए मौजूद उत्पादों की सटीक जानकारी हासिल कर सकें, न कि समाचार साइटों की स्क्रैपिंग के लिए।" हालांकि, नीमन जर्नलिज्म लैब के विश्लेषण में यह तथ्य उजागर हुआ था कि प्रस्तावित शर्तों की शब्दावली का दायरा इतना विस्तृत था कि उसके आधार पर समाचार सामग्री की स्क्रैपिंग को भी आसानी से वैध ठहराया जा सकता था। विश्लेषण के अनुसार इस सामग्री का सीधा उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्पादों को तैयार करने के लिए किया जा सकता था। नीमन लैब ने इस नीति की समीक्षा के लिए तीन स्वतंत्र कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली थी। इस आलोचनात्मक समीक्षा के सार्वजनिक होने के बाद मेटा ने प्रस्तावित नीति से 'ट्रेन' शब्द को हटा दिया, यद्यपि कंपनी लगातार यही दावा करती रही कि इस नीति का मकसद समाचार वेबसाइटों को लक्षित करना नहीं था। अमेरिकी प्रकाशकों का रुख और सार्वजनिक डेटा की स्क्रैपिंग संयुक्त राज्य अमेरिका में इस मामले को लेकर हालांकि किसी औपचारिक मुकदमे की जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन वहां के प्रमुख प्रकाशक संगठन एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन पब्लिशर्स यानी आप ने मेटा से इन नई शर्तों को पूरी तरह वापस लेने का आग्रह किया। आप की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मारिया ए. पलंते ने अपने बयान में कहा, "सेवा की ये कठोर शर्तें पेश करके मेटा अप्रत्यक्ष रूप से यह स्वीकार कर रहा है कि अपने उत्पादों को विकसित और बेहतर बनाने के लिए रचनात्मक कार्यों का उपयोग करने हेतु अनुमति आवश्यक है।" उन्होंने आगे कहा कि इसके साथ ही यह विशाल निगम अपने किसी भी प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले प्रत्येक व्यावसायिक उपयोगकर्ता से ऐसी सहमति की अनिवार्यता करके अपनी बाजार में स्थापित प्रभावशाली स्थिति का दुरुपयोग कर रहा है। दबाव बढ़ने पर मेटा ने 29 अक्टूबर को यह संकेत दिया कि वह उद्योग जगत से मिली प्रतिक्रियाओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है। कंपनी के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने एक्स पर स्पष्ट किया कि कंपनी अपने साझेदारों को काफी महत्व देती है और उद्योग समूहों तथा वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किए बिना नीतिगत बदलावों को आगे नहीं बढ़ाएगी। गौरतलब है कि यह प्रस्तावित बदलाव केवल व्यावसायिक खातों के लिए था। कंपनी की मौजूदा अलग नीतियां पहले से ही इंस्टाग्राम और फेसबुक पर सार्वजनिक रूप से पोस्ट की गई सामग्री की स्क्रैपिंग की अनुमति देती हैं, जिनका उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई मॉडल्स के प्रशिक्षण के लिए किया जाता है। नॉर्वेजियन मीडिया की तीन प्रमुख मांगें शर्तों के क्रियान्वयन को टाले जाने के बावजूद यूरोपीय मीडिया संगठन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। नॉर्वेजियन एमबीएल ने कहा कि केवल स्थगन करने से नीति की मूल समस्याएं समाप्त नहीं होतीं। नॉर्वेजियन एमबीएल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रैंडी एस. ओग्रे ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "यह विश्वसनीय और आलोचनात्मक पत्रकारिता तक लोगों की पहुंच का मामला है।" उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि जब स्वतंत्र समाचार मीडिया की वित्तीय नींव कमजोर होती है, तो मीडिया की विविधता और लोकतांत्रिक सार्वजनिक क्षेत्र दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। संगठन ने साफ किया कि इस संदर्भ में कंपनी के मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। ओग्रे ने नॉर्वेजियन मीडिया की ओर से तीन स्पष्ट मांगें रखीं • स्क्रैपिंग पर विरोध का सम्मान: सेवा की शर्तों में प्रकाशकों को अपनी सामग्री की स्क्रैपिंग पर औपचारिक आपत्ति जताने का अधिकार दिया जाए और कंपनी उसका पूरी तरह सम्मान करे। • एआई उपयोग पर स्वतंत्र समझौता: पत्रकारिता से जुड़ी सामग्री का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्पादों में उपयोग करने के लिए पूरी तरह अलग और स्वैच्छिक समझौता होना चाहिए। • उचित वित्तीय मुआवजा: इस तरह के किसी भी स्वैच्छिक समझौते के तहत सामग्री उपयोग के बदले पारदर्शी भुगतान और मुआवजे की व्यवस्था अनिवार्य रूप से शामिल की जाए। इसके अतिरिक्त, समूह ने यह भी स्पष्ट किया कि जो प्रकाशक इन कठोर शर्तों को स्वीकार करने से इनकार करते हैं, उन्हें मेटा के किसी भी प्लेटफॉर्म पर हाशिए पर नहीं धकेला जाना चाहिए और न ही उनकी पहुंच को सीमित किया जाना चाहिए। ओपन-वेब समूहों और यूरोपीय आयोग की सतर्कता सीएमए के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराने वाले संगठन मूवमेंट फॉर एन ओपन वेब ने अब तक उठाए गए नियामकीय कदमों का स्वागत किया है। संगठन ने नीति के स्थगन और शुरू हुई औपचारिक जांच को प्रकाशकों के लिए एक बड़ी जीत करार दिया। इसके बावजूद संस्था ने रेखांकित किया कि तकनीकी दिग्गजों पर लगाम लगाने के लिए और अधिक सख्त नियमों की आवश्यकता है। मूवमेंट फॉर एन ओपन वेब के प्रतिनिधि टिम कोवेन ने कहा, "जब तक सीएमए और अन्य नियामक यह पूरी तरह और तेजी से स्पष्ट नहीं करते कि प्रतिस्पर्धा-विरोधी इस प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है, तब तक हम तकनीकी दिग्गजों को इस तरह अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए देखते रहेंगे।" दूसरी ओर, यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा यूरोपीय आयोग ने पुष्टि की कि उसने मेटा के साथ इन मसौदा शर्तों पर विस्तृत चर्चा की थी। आयोग ने इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू न करने के फैसले का स्वागत किया है। यूरोपीय आयोग की प्रवक्ता सारा सिमोनिनी ने कहा कि आयोग यह पूरी तरह जांचेगा कि यह प्रस्तावित शर्तें यूरोपीय संघ के कानूनों के अनुरूप हैं या नहीं। उन्होंने इस जांच के संदर्भ में प्रमुख तकनीकी गेटकीपर्स के लिए अनुचित व्यापार प्रथाओं और प्रभावशाली बाजार स्थिति के दुरुपयोग से जुड़े नियमों का विशेष रूप से उल्लेख किया। सिमोनिनी ने यह भी बताया कि यूरोपीय संघ ने वर्ष 2024 के एआई अधिनियम के प्रावधानों के तहत कुछ प्रमुख एआई मॉडल प्रदाताओं से पहले ही उनके प्रशिक्षण डेटा के संदर्भ में विस्तृत पूछताछ की है। इस प्रकार व्यावसायिक खातों से सामग्री संग्रह और उसके पुन: उपयोग का यह विवाद यूरोप में बड़े कानूनी और विनियामक परीक्षण का रूप ले चुका है। इसका आप पर असर मेटा द्वारा बिजनेस अकाउंट्स की शर्तों को स्थगित करने से डिजिटल प्रकाशकों, वेबसाइट संचालकों और व्यावसायिक यूजर्स के बौद्धिक संपदा अधिकारों को अस्थायी सुरक्षा मिली है। • वेबसाइट और कंटेंट प्रकाशकों पर असर: मीडिया पोर्टल्स और स्वतंत्र वेबसाइट्स की सामग्री को बिना अनुमति स्वचालित टूल्स से स्क्रैप होने से फिलहाल राहत मिल गई है। इससे प्रकाशकों को अपनी डिजिटल संपदा और विज्ञापनों पर नियंत्रण बनाए रखने का कानूनी अवसर मिला है। • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स का प्रशिक्षण: टेक दिग्गज कंपनियों द्वारा बिना लाइसेंस और बिना भुगतान के ऑनलाइन सामग्री से एआई मॉडल ट्रेन करने की प्रक्रिया पर ब्रेक लगा है। अब कंपनियों को प्रकाशकों के साथ अलग समझौते और पारदर्शी भुगतान की दिशा में सोचना होगा। • वैश्विक तकनीकी नीतियों पर प्रभाव: यूरोपीय अदालतों और नियामकों के इस सख्त कदम से दुनिया भर में काम कर रहे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर एकतरफा शर्तें थोपने के बजाए प्रकाशकों के साथ बातचीत करने का दबाव बढ़ेगा। इससे अन्य देशों में भी डिजिटल प्रतिस्पर्धा और डेटा सुरक्षा कानूनों को नई मजबूती मिलेगी। • व्यावसायिक खाताधारकों के अधिकार: बिजनेस प्रोफाइल चलाने वाले छोटे-बड़े कारोबारियों को बिना विकल्प दिए उनकी वेबसाइट्स को क्रॉल करने की बाध्यता से अस्थायी राहत मिल गई है। आने वाले समय में वे अपनी सामग्री के उपयोग के लिए शर्तों को चुनने या अस्वीकार करने की मांग कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यूरोपीय प्रकाशकों की कानूनी आपत्तियों और एकाधिकार-रोधी नियामकों के सीधे हस्तक्षेप के कारण मेटा को अपने बिजनेस अकाउंट्स की शर्तों को पीछे खींचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। • अनिवार्य स्क्रैपिंग और मुआवजे का अभाव: प्रस्तावित शर्तों के तहत व्यावसायिक खातों के सभी वेब डोमेन को बिना किसी भुगतान या सहमति के क्रॉल करने की छूट मांगी गई थी। इस व्यवस्था से प्रकाशक अपनी ही सामग्री के अनधिकृत उपयोग को रोकने में पूरी तरह असमर्थ हो रहे थे। • एआई विकास में सामग्री के उपयोग का डर: स्वतंत्र कानूनी समीक्षाओं ने यह उजागर किया कि इस डेटा का इस्तेमाल कंपनी अपने खुद के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्पादों को बनाने में कर सकती थी। इसके विरोध में हार्वर्ड के नीमन लैब की रिपोर्ट के बाद कंपनी को मसौदे से 'ट्रेन' शब्द भी हटाना पड़ा था। • यूरोपीय अदालती आदेश और विनियामक जांच: नॉर्वे की अदालत द्वारा 28 अक्टूबर को जारी अंतरिम निषेधाज्ञा और 30 अक्टूबर को ब्रिटिश नियामक सीएमए द्वारा जांच शुरू किए जाने से कानूनी जोखिम काफी बढ़ गया था। इन चौतरफा दबावों के चलते कंपनी ने 30 अक्टूबर की समयसीमा से ठीक पहले इसे टालने की घोषणा की। सवाल-जवाब 1. मेटा ने अपनी नई बिजनेस अकाउंट शर्तों को क्यों स्थगित किया? यूरोपीय समाचार प्रकाशकों के विरोध, नॉर्वे की एक अदालत द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक और ब्रिटेन के प्रतिस्पर्धा नियामक की जांच के बाद कंपनी ने इसे टाला है। 2. प्रस्तावित सेवा शर्तों में प्रकाशकों को सबसे बड़ी आपत्ति क्या थी? प्रस्तावित शर्तों में कंपनी को बिना किसी भुगतान या अस्वीकृति के अधिकार के व्यावसायिक खातों की वेबसाइटों से डेटा स्क्रैप करने की खुली छूट दी जा रही थी। 3. नॉर्वे में कितने मीडिया संस्थानों ने इस नीति को अदालत में चुनौती दी थी? नॉर्वे के 180 मीडिया संस्थानों ने नॉर्वेजियन मीडिया बिजनेसेस एसोसिएशन के सहयोग से अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिन्हें अदालत से अंतरिम राहत मिली। 4. ब्रिटेन के नियामक सीएमए ने इस मामले में क्या चिंता व्यक्त की है? सीएमए ने कहा है कि प्रकाशकों पर इन शर्तों को थोपना गैरकानूनी तरीके से अनुचित व्यापारिक स्थितियां लागू करने के दायरे में आ सकता है। 5. आलोचना के बाद मेटा ने अपने प्रवक्ता के जरिए क्या स्पष्टीकरण दिया? मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा कि यह अपडेट समाचार साइटों की स्क्रैपिंग के लिए नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म पर उत्पाद अनुशंसाओं के लिए सटीक जानकारी जुटाने हेतु था। 6. नॉर्वेजियन मीडिया एसोसिएशन ने मेटा के सामने क्या तीन प्रमुख मांगें रखी हैं? उन्होंने स्क्रैपिंग पर प्रकाशक की आपत्ति का सम्मान करने, एआई उपयोग के लिए अलग स्वैच्छिक समझौता करने और उसमें भुगतान शामिल करने की मांग रखी है। https://trendkia.com/money/european-adalatein-aur-niyamakon-ke-virodh-ke-baad-meta-ne-business-accounts-ki-nayi-shartein-taaleen-55290 TrendKia — Har trend, sabse pehle.