धनतेरस पर 15 सालों में 362% उछला सोना, अगले साल 1.71 लाख रुपये तक जाने का अनुमान लंबी अवधि में मल्टीबैगर रिटर्न देने के बाद सोने और चांदी की रफ्तार इस साल कुछ धीमी पड़ी है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें 1.71 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकती हैं। कीमती धातुओं के बाजार में धनतेरस का पर्व हमेशा से ही खरीदारी और निवेश का बड़ा केंद्र रहा है। संवत 2083 के तहत 6 नवंबर 2026 को मनाए गए धनतेरस पर सोने और चांदी की मांग में मिला-जुला असर देखने को मिला। हालांकि बीते एक साल के दौरान सर्राफा बाजार में पिछले चार वर्षों की तुलना में सबसे धीमी बढ़त दर्ज की गई है, लेकिन अगर लंबी अवधि के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने और चांदी दोनों ने ही निवेशकों की जेब भारी की है। हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार विश्लेषकों को उम्मीद है कि अगले धनतेरस तक 24 कैरेट सोने का भाव 1,71,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। धनतेरस पर सोने-चांदी के रिटर्न का लेखा-जोखा केडिया एडवाइजरी के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल के धनतेरस से लेकर इस साल के धनतेरस तक सोने की कीमतों में 15.04 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। सालाना आधार पर यह पिछले चार सालों का सबसे कम रिटर्न है। इससे पहले 2025 के धनतेरस पर सोने ने 60.30 प्रतिशत की शानदार तेजी दर्ज की थी, जबकि 2024 में 33 प्रतिशत और 2023 में 18 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली थी। वहीं दूसरी तरफ, इस एक साल की अवधि में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया और निवेशकों को लगभग 22 प्रतिशत का रिटर्न दिया। हालांकि चांदी के लिए भी यह 3 वर्षों में सबसे कम सालाना बढ़त है। इससे पहले 2024 में चांदी 41 प्रतिशत और 2025 में 59 प्रतिशत की जोरदार तेजी हासिल करने में कामयाब रही थी। 15 सालों की लंबी अवधि में सोने और चांदी की चमक यदि 15 साल के लंबे क्षितिज पर नजर डालें तो सोने ने चांदी के मुकाबले ज्यादा मजबूत और स्थिर रिटर्न दिया है। पिछले 15 धनतेरस में से सिर्फ 5 बार (2013 से 2015, 2017 और 2021) ऐसा मौका आया जब सोने ने नकारात्मक रिटर्न दिया। यानी 10 धनतेरस पर सोने के भाव में बढ़ोतरी ही दर्ज की गई, जिसमें सबसे बेहतरीन प्रदर्शन 2025 में रहा। वर्ष 2012 से 5 नवंबर 2026 के बीच सोने की कीमतों में 361.74 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। 2012 में 24 कैरेट सोने की कीमत 31,643 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो 5 नवंबर 2026 को बढ़कर 1,46,109 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई। चांदी के 15 साल के इतिहास को देखें तो इसमें सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव रहा और यह इस अवधि में छह बार फिसली। इसके बावजूद 15 सालों में 999 शुद्धता वाली चांदी ने 213 प्रतिशत से अधिक का कुल रिटर्न दिया है। वर्ष 2012 में एक किलोग्राम चांदी का भाव 60,920 रुपये था, जो 5 नवंबर 2026 तक बढ़कर 1,90,946 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। अगले धनतेरस तक 1.71 लाख रुपये का लक्ष्य अक्सिस डायरेक्ट के विश्लेषकों का आकलन है कि नवंबर 2021 से अक्टूबर 2026 के बीच सोने ने लगभग 200 प्रतिशत का एब्सोल्यूट रिटर्न दिया है। इस पांच साल की अवधि में घरेलू बाजार में सोना 47,600 रुपये प्रति 10 ग्राम से उछलकर धनतेरस से ठीक पहले अक्टूबर 2026 के अंत में लगभग 1,42,750 रुपये तक पहुंच गया, जो 24.53 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद वर्तमान कीमतें नए निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान कर रही हैं। अक्सिस डायरेक्ट के विशेषज्ञों के अनुसार, ब्याज दरों को लेकर कुछ समय अनिश्चितता बनी रह सकती है, लेकिन यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो अगले धनतेरस तक सोना 20 से 25 प्रतिशत का रिटर्न देकर 1,65,000 रुपये से 1,71,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में पहुंच सकता है। सोने के भाव तय करने वाले 4 बड़े वैश्विक कारक अक्सिस डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले एक साल में सोने की चाल मुख्य रूप से चार प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी • अमेरिका-ईरान शांति वार्ता: ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर शांति समझौता कायम करने की कोशिशें चल रही हैं। यदि कोई स्थायी युद्धविराम होता है तो वैश्विक बाजारों में आपूर्ति की चिंताएं कम होंगी और मुद्रास्फीति का दबाव घटेगा। इससे बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनेगा, जिससे सोने को मजबूती मिलेगी। • अमेरिकी फेड की मौद्रिक नीति: ब्याज दरों का सोने की कीमतों से सीधा संबंध होता है। उच्च ब्याज दरों के कारण बिना ब्याज देने वाली संपत्ति जैसे सोने को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। 2026 में महंगाई की चिंताओं के कारण दिसंबर में एक और दर वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। लेकिन अगर 2027 में मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है और फेड दरों में कटौती शुरू करता है, तो डॉलर कमजोर होगा और सोने में निवेश की मांग फिर बढ़ेगी। • सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और ETF इनफ्लो: वैश्विक वित्तीय प्रतिबंधों के डर से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी घटाकर सोना जमा कर रहे हैं। वर्ष 2025 में गोल्ड ETF में 89 अरब डॉलर का भारी निवेश आया था, जो 2024 के 3.4 अरब डॉलर की तुलना में बहुत अधिक था। सितंबर 2026 तक भी लगभग 39 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया जा चुका है, जो निवेशकों के अटूट विश्वास को दिखाता है। • रुपये की कमजोरी और USD/INR दर: भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की दर का असर घरेलू कीमतों पर सीधा पड़ता है। 2026 की शुरुआत में रुपया 89.85 प्रति डॉलर पर था, जो मई 2026 में 96.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसलने के बाद फिलहाल 96.73 के आसपास है। सालाना आधार पर रुपया 3 से 4 प्रतिशत कमजोर होता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम गिरते भी हैं, तो कमजोर रुपया भारतीय बाजार में सोने की कीमतों को सहारा देगा। इसका आप पर असर सोने और चांदी की कीमतों में आए हालिया सुधार से रिटेल खरीदारों और लंबी अवधि के निवेशकों को धनतेरस के बाद बेहतर भाव पर खरीदारी का अवसर मिल सकता है। • भारत में: घरेलू सर्राफा बाजार में सोना अपने उच्च स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक गिरकर 1,46,109 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया है। ऐसे में जो निवेशक या परिवार आगामी शादियों के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, वे व्यवस्थित तरीके से किश्तों में सोने या गोल्ड ETF में निवेश शुरू कर सकते हैं। • निवेशकों के लिए: विश्लेषकों के अनुसार अगले एक साल में सोने से 20 से 25 प्रतिशत तक के रिटर्न की संभावना है, जिससे 10 ग्राम का भाव 1.71 लाख रुपये तक जा सकता है। अगर आप पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं तो गिरावट के दौरान चरणबद्ध खरीदारी करना एक व्यावहारिक रणनीति साबित होगी। ऐसा क्यों हुआ धनतेरस पर सोने-चांदी के रिटर्न में आई धीमी बढ़त और भविष्य में 1.71 लाख रुपये तक के ऊंचे लक्ष्य के पीछे कई वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। • उच्च ब्याज दरें और हालिया गिरावट: केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण सोने पर अल्पावधि में दबाव देखा गया, जिससे इसमें 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। • लंबी अवधि की मजबूत तेजी: पिछले 15 वर्षों में 361.74 प्रतिशत और पिछले 5 वर्षों में 200 प्रतिशत का रिटर्न इस बात का प्रमाण है कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोना सुरक्षित निवेश का सबसे पसंदीदा जरिया रहा है। • फेड कटौती और कमजोर रुपया: वर्ष 2027 में अमेरिकी फेड द्वारा संभावित दर कटौती और डॉलर के मुकाबले रुपये की 3-4 प्रतिशत सालाना गिरावट भारतीय बाजार में सोने की लैंडेड कॉस्ट बढ़ाएगी, जिससे कीमतें 1.71 लाख रुपये तक पहुंच सकती हैं। सवाल-जवाब 1. पिछले 15 वर्षों में सोने ने कितना रिटर्न दिया है? पिछले 15 वर्षों में सोने ने 361.74 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है। वर्ष 2012 में 10 ग्राम सोने का भाव 31,643 रुपये था जो 5 नवंबर 2026 तक 1,46,109 रुपये हो गया। 2. अगले धनतेरस तक सोने का नया टारगेट प्राइस क्या बताया गया है? अक्सिस डायरेक्ट के विश्लेषकों के अनुसार, सोना 20 से 25 प्रतिशत का रिटर्न देकर 1,65,000 रुपये से 1,71,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकता है। 3. इस साल धनतेरस पर सोने और चांदी का सालाना रिटर्न कितना रहा? इस धनतेरस पर सोने ने 15.04 प्रतिशत और चांदी ने लगभग 22 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया, जो पिछले 3-4 सालों में सबसे कम है। 4. चांदी ने पिछले 15 सालों में कैसा प्रदर्शन किया है? 999 शुद्धता वाली चांदी ने 15 सालों में 213 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है। 2012 में चांदी 60,920 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो 5 नवंबर 2026 तक बढ़कर 1,90,946 रुपये हो गई। https://trendkia.com/money/gold-delivers-362-percent-returns-in-15-years-projected-to-hit-1-71-lakh-by-next-dhanteras-57176 TrendKia — Har trend, sabse pehle.