सोने चांदी के अनुपात में 72 तक उछाल, जानें 24 से 18 कैरेट के ताजा भाव और अगले हफ्ते का तकनीकी रुझान अक्टूबर के महीने में सोने और चांदी की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। जहां घरेलू बाजार में रुपया मजबूत होने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसलों की आशंका से बिकवाली बढ़ी है, वहीं तकनीकी चार्ट्स पर प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर सामने आए हैं। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सराफा बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव का दौर बना हुआ है। अक्टूबर महीने के दौरान सोने और चांदी दोनों ही संपत्तियों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों और खुदरा खरीदारों की नजरें आने वाले कारोबारी सत्रों पर टिक गई हैं। बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में यह नरमी ऐसे समय में देखने को मिल रही है जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और स्थानीय स्तर पर मुद्रा की चाल कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में ऊंची ब्याज दरों की संभावना ने बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों के आकर्षण को सीमित कर दिया है, जिसके चलते दोनों प्रमुख धातुओं में सतर्कता का माहौल है। घरेलू खुदरा बाजार में सोने और चांदी के वर्तमान भाव स्थानीय खुदरा आभूषण बाजार में विभिन्न शुद्धता वाले सोने की कीमतों में अलग अलग स्तर दर्ज किए गए हैं। शुद्धतम श्रेणी यानी 24 कैरेट सोने की बात करें तो इसका भाव 1,47,660 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। बड़े पैमाने पर खरीदारी करने वालों के लिए 100 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 14,76,600 रुपये दर्ज की गई है। इसके अलावा 8 ग्राम सोने का भाव 1,18,128 रुपये और प्रति 1 ग्राम सोने की दर 14,766 रुपये पर पहुंच चुकी है। आमतौर पर आभूषण निर्माण में सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की दरें भी इस सुस्ती के दौर में स्थिर बनी हुई हैं। बाजार में 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 1,35,350 रुपये चल रही है, जबकि 100 ग्राम के लिए खरीदारों को 13,53,500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। खुदरा स्तर पर 8 ग्राम 22 कैरेट सोना 1,08,280 रुपये में उपलब्ध है और 1 ग्राम की दर 13,535 रुपये दर्ज की गई है। हल्के वजन और किफायती आभूषणों के लिए लोकप्रिय 18 कैरेट श्रेणी में भी कीमतों का ढांचा स्पष्ट है। वर्तमान में 18 कैरेट शुद्धता वाले सोने की 10 ग्राम की कीमत 1,10,740 रुपये है। 100 ग्राम 18 कैरेट सोने के लिए यह आंकड़ा 11,07,400 रुपये पर पहुंचता है। वहीं 8 ग्राम के भाव 88,592 रुपये और प्रति ग्राम कीमत 11,074 रुपये के स्तर पर टिकी हुई है। सफेद धातु यानी चांदी के खुदरा भाव भी इस दौरान काफी अहम स्तरों पर बने हुए हैं। खुदरा बाजार में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत 2.30 लाख रुपये दर्ज की गई है। छोटी मात्रा में खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए 100 ग्राम चांदी का भाव 23,000 रुपये और 10 ग्राम चांदी की दर 2,300 रुपये पर स्थित है। इसके साथ ही 8 ग्राम चांदी 1,840 रुपये तथा 1 ग्राम चांदी 230 रुपये पर बेची जा रही है। सोने और चांदी के अनुपात में क्यों आई बढ़त चालू महीने के दौरान प्रदर्शन के लिहाज से दोनों धातुओं को झटका लगा है। अक्टूबर में अब तक सोना 1 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है, जबकि चांदी में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर के अनुसार मजबूत मुद्रास्फीति के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की आशंकाओं ने बिना ब्याज वाली संपत्तियों के प्रति निवेशकों का उत्साह कम कर दिया है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर मजबूती का भरोसा जताया, लेकिन भविष्य के नीतिगत कदमों पर बहुत सीमित मार्गदर्शन प्रदान किया। बाजार इस समय दिसंबर महीने में संभावित ब्याज दर वृद्धि की भारी संभावना को मानकर चल रहा है। इस रुख की वजह से सोना और चांदी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स की हर हलचल के प्रति बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। चांदी का प्रदर्शन सोने की तुलना में कहीं अधिक कमजोर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी फिसलकर लगभग 57 से 58 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आ गई, जो कि तकरीबन 6 प्रतिशत की सीधी गिरावट को दर्शाता है। विशेषज्ञ ने रेखांकित किया कि चांदी की इस तेज कमजोरी के कारण सोने और चांदी का अनुपात यानी गोल्ड सिल्वर रेशियो बढ़कर लगभग 72 के स्तर तक पहुंच गया है। चांदी की यह कमजोरी साफ तौर पर दर्शाती है कि बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक विकास के धीमे रहने की आशंकाओं के प्रति सफेद धातु कितनी अधिक संवेदनशील है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा औद्योगिक गतिविधियों में भी इस्तेमाल होता है। एमसीएक्स और हाजिर बाजार में पिछले हफ्ते की चाल वायदा बाजार की बात करें तो पिछले कारोबारी सप्ताह के समापन पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना 1.48 लाख रुपये के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर एमसीएक्स पर चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम 2,11,418 रुपये दर्ज की गई। घरेलू वायदा बाजार पर वैश्विक रुझानों और स्थानीय मांग की कमी का सीधा असर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में भी नरमी का रुख स्पष्ट दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर हाजिर सोना फिसलकर लगभग 4,166 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया। इसके साथ ही हाजिर चांदी 57 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण आंकड़े से नीचे फिसलकर कारोबार करती नजर आई। निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के हर पहलू का बारीक विश्लेषण कर रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं में बड़ी तेजी पर ब्रेक लगा हुआ है। फेडरल रिजर्व की नीति और डॉलर की मजबूती का असर बाजार के प्रतिभागी अमेरिकी केंद्रीय बैंक के भावी रुख का लगातार मूल्यांकन कर रहे हैं। अमेरिका से आए अपेक्षा से अधिक मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने नीतिगत दरों में बढ़ोतरी के सिलसिले के लंबे खिंचने की आशंका को बल दिया है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, बाजार फिलहाल इस महीने फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को अपरिवर्तित रखने की लगभग 72 प्रतिशत संभावना जता रहा है। हालांकि, दिसंबर की बैठक में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बढ़कर 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पोनमुडी आर का मानना है कि 19 से 23 अक्टूबर के आगामी कारोबारी सप्ताह में सोने की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि बॉन्ड की मांग अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को दबाव में रख पाती है या नहीं। यदि यील्ड और डॉलर में नरमी आती है तो इससे सराफा बाजार को सहारा मिलेगा। इसके विपरीत यदि लगातार बनी हुई महंगाई और दिसंबर में दर वृद्धि की आशंका हावी होती है, तो बिकवाली का नया दौर शुरू हो सकता है। इसके अतिरिक्त सप्ताह के अंतिम दिनों में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के बयानों पर बाजार की करीबी नजर रहेगी, जिससे भविष्य की ब्याज दरों के संकेत मिलेंगे। घरेलू मोर्चे पर रुपये की मजबूती और तकनीकी स्तर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार का ही असर नहीं पड़ा, बल्कि भारतीय रुपये की चाल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों से रुपये में लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक मजबूती देखी गई। इस मजबूती के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 95 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मजबूत रुपये के कारण आयातित सोना सस्ता हो जाता है, जिससे घरेलू हाजिर और वायदा कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना। घरेलू बाजार में सोना लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिका के उम्मीद से अधिक गर्म मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट, घरेलू स्तर पर मजबूत रुपया और कमजोर भौतिक मांग इन तीनों कारकों ने मिलकर सोने के रुख को कमजोर बनाए रखा है। एमसीएक्स सोना और हाजिर सोने का तकनीकी विश्लेषण आगामी सप्ताह के लिए पोनमुडी आर द्वारा दिए गए तकनीकी विश्लेषण के अनुसार एमसीएक्स सोने के लिए तात्कालिक बाधा या रेजिस्टेंस 1,48,000 से 1,48,600 रुपये के बीच बना हुआ है। यदि कीमतें इससे ऊपर निकलती हैं, तो अगला मजबूत रेजिस्टेंस जोन 1,50,000 से 1,50,700 रुपये पर दिखाई देगा। इस ऊपरी दायरे से ऊपर लगातार टिके रहने पर ही बाजार में दोबारा तेजी की गति बन पाएगी। नीचे की ओर 1,45,300 से 1,46,000 रुपये का दायरा तुरंत सपोर्ट के रूप में काम करेगा। यदि यह स्तर नीचे की तरफ टूटता है, तो कीमतें फिसलकर 1,43,000 से 1,43,700 रुपये तक जा सकती हैं। तकनीकी चार्ट पर साप्ताहिक कैंडल में नीचे की तरफ लंबी विक नजर आ रही है, जो 1,45,500 रुपये के पास कुछ खरीदारी का संकेत देती है। हालांकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI का 50 से नीचे होना और नकारात्मक मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD कुल मिलाकर कमजोर रुझान की ओर इशारा कर रहे हैं। घरेलू सोने में किसी ठोस सुधार के लिए 1,50,700 रुपये से ऊपर का स्तर पार करना आवश्यक होगा। अंतरराष्ट्रीय हाजिर सोने के चार्ट पर 4,200 डॉलर का स्तर पहला रेजिस्टेंस है, जिसके बाद 4,270 से 4,300 डॉलर की रुकावट सामने आएगी। सुधार की रफ्तार पकड़ने के लिए इस दायरे से ऊपर निकलना जरूरी है। नीचे की तरफ 4,170 डॉलर पर तात्कालिक सहारा मौजूद है। इस स्तर के टूटने पर कीमतें 4,070 से 4,100 डॉलर तक गिर सकती हैं। हाजिर सोना पिछले कई हफ्तों से 4,100 से 4,240 डॉलर के सीमित दायरे में फंसा हुआ है। 43 के करीब बना आरएसआई और सपाट होता एमएसीडी किसी स्पष्ट दिशा के बजाय अनिर्णय की स्थिति दर्शा रहे हैं। एमसीएक्स चांदी और हाजिर चांदी का आउटलुक एमसीएक्स चांदी के लिए तकनीकी चार्ट्स पर तात्कालिक रेजिस्टेंस 2,14,000 से 2,15,000 रुपये के बीच है, जिसके बाद 2,19,000 से 2,20,000 रुपये का स्तर आता है। बाजार में निवेशकों का भरोसा वापस लाने के लिए इन स्तरों को पार करना अनिवार्य होगा। गिरावट की स्थिति में 2,07,000 से 2,08,000 रुपये का क्षेत्र प्राथमिक सपोर्ट बना हुआ है। यदि कीमतें इसके नीचे फिसलती हैं, तो बिकवाली 2,00,000 से 2,02,000 रुपये तक गहरा सकती है। दैनिक चार्ट पर बुधवार के दिन एक तेज ब्रेकडाउन देखने को मिला था। आरएसआई 32 के स्तर पर पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड यानी जरूरत से ज्यादा बिकवाली के करीब है, जबकि एमएसीडी नकारात्मक दायरे में और चौड़ा हो रहा है। कमजोर भौतिक मांग और मजबूत रुपये ने घरेलू कमजोरी को बढ़ाया है। समग्र रुख कमजोर बना हुआ है और सपोर्ट स्तरों के पास थोड़ा ठहराव तो आ सकता है, लेकिन अभी किसी ठोस ट्रेंड रिवर्सल की पुष्टि नहीं हुई है। वैश्विक हाजिर चांदी के लिए 57.50 डॉलर पर पहला रेजिस्टेंस और 59.50 से 60.00 डॉलर पर दूसरा रेजिस्टेंस जोन है। सुधार के लिए इन स्तरों के पार टिकना जरूरी होगा। नीचे की तरफ 57.00 डॉलर तात्कालिक सपोर्ट है। यदि यह सपोर्ट स्तर टूट जाता है, तो कीमतें पहले 55.00 से 55.50 डॉलर और फिर 53.50 से 54.00 डॉलर की ओर बढ़ सकती हैं। साप्ताहिक कैंडल लंबी मंदी की बार दर्शाती है जिसमें नीचे एक छोटी विक है। आरएसआई 36 से 40 के स्तर पर है जो ओवरसोल्ड जोन के काफी नजदीक है, इसलिए नकारात्मक रुझान के बावजूद एक मामूली राहत भरी उछाल संभव मानी जा रही है। इसका आप पर असर सोने और चांदी के भाव में जारी गिरावट से आभूषण खरीदारों और कमोडिटी निवेशकों पर सीधा असर पड़ रहा है। • खुदरा आभूषण खरीदार: शादी ब्याह और आगामी त्योहारों के लिए जेवर खरीदने वालों को घटी हुई कीमतों से राहत मिलेगी। 24 कैरेट सोना 1,47,660 रुपये और 22 कैरेट 1,35,350 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आने से बजट में बचत संभव है। • वायदा और कमोडिटी ट्रेडर: एमसीएक्स पर ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को दोनों धातुओं के तकनीकी सपोर्ट टूटने पर सतर्क रहना होगा। सोने में 1,45,300 रुपये और चांदी में 2,07,000 रुपये के अहम स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। • करेंसी और आयात लागत: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मजबूत होने से आयातित सोना सस्ता हो रहा है। इसके चलते घरेलू बाजार में वैश्विक तेजी का असर कुछ हद तक सीमित रह सकता है। • लंबी अवधि के निवेशक: गोल्ड सिल्वर अनुपात के 72 तक चौड़ा होने से चांदी में जोखिम और अवसर दोनों बढ़ गए हैं। लंबी अवधि के पोर्टफोलियो वाले निवेशक सपोर्ट लेवल्स पर चरणबद्ध तरीके से खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं के कारण बहुमूल्य धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना है। • अमेरिकी ब्याज दर नीति: मजबूत आर्थिक आंकड़ों के चलते फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऊंची ब्याज दरों की वजह से बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने और चांदी से निवेशक पैसा निकालने लगते हैं। • डॉलर और ट्रेजरी यील्ड का दबाव: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के ऊंचे स्तरों पर टिके रहने से बुलियन की मांग कमजोर हुई है। फेड चेयर के बयानों में नीतिगत नरमी के स्पष्ट संकेत न मिलने से भी बाजार का मूड बिगड़ा है। • रुपये की मजबूती का स्थानीय प्रभाव: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर मांग को नियंत्रित करने से रुपया लगातार पांच सत्रों में मजबूत हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपये के 95 के स्तर पर पहुंचने से भारत में आयातित धातुओं की कीमतें तेजी से घटी हैं। • औद्योगिक मांग में सुस्ती: चांदी का एक बड़ा हिस्सा उद्योगों में इस्तेमाल होता है, इसलिए वैश्विक आर्थिक सुस्ती के डर से चांदी पर सोने से ज्यादा मार पड़ी है। इसी वजह से चांदी 6 प्रतिशत टूटकर 57 से 58 डॉलर तक लुढ़क गई और अनुपात 72 तक फैल गया। सवाल-जवाब 1. वर्तमान में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की खुदरा कीमत क्या है? खुदरा बाजार में 24 कैरेट सोना 1,47,660 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,35,350 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। 2. 1 किलोग्राम चांदी का वर्तमान भाव क्या है? घरेलू खुदरा बाजार में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत 2.30 लाख रुपये पर बनी हुई है। 3. गोल्ड सिल्वर रेशियो बढ़कर 72 पर क्यों पहुंच गया? चांदी में करीब 6 प्रतिशत की तेज गिरावट आई और वह 57 से 58 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गई, जिससे सोने की तुलना में चांदी के ज्यादा कमजोर होने के कारण यह अनुपात 72 तक चौड़ा हो गया। 4. एमसीएक्स सोने के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं? एमसीएक्स सोने के लिए तात्कालिक रेजिस्टेंस 1,48,000 से 1,48,600 रुपये और सपोर्ट 1,45,300 से 1,46,000 रुपये के दायरे में स्थित है। 5. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसलों को लेकर क्या अनुमान हैं? ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार मौजूदा महीने में ब्याज दरें स्थिर रहने की 72 प्रतिशत संभावना है, जबकि दिसंबर में दर बढ़ोतरी की आशंका 92 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। 6. भारतीय रुपये की चाल का सोने की घरेलू कीमतों पर क्या असर पड़ा? आरबीआई के कदमों से रुपया मजबूत होकर 95 प्रति डॉलर के करीब आ गया, जिससे आयात लागत घटी और घरेलू बाजार में सोने के भाव लगातार चौथे सत्र में गिरे। https://trendkia.com/money/gold-silver-ke-anupata-men-72-taka-uchhala-janen-24-se-18-kaireta-ke-taja-bhava-aura-agale-haphte-ka-takaniki-rujhana-49294 TrendKia — Har trend, sabse pehle.