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  "type": "article",
  "title": "क्या सितंबर से पहले बिकवाली का पुराना फॉर्मूला सच है या मिथक",
  "summary": "सितंबर महीने की शुरुआत अमेरिकी शेयर बाजारों के लिए सुस्त रही है और इतिहास गवाही देता है कि यह महीना सूचकांकों के लिए सबसे कमजोर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमी रुझान और मैक्रोइकॉनॉमिक कारक इस अवधि में जोखिम को बढ़ा देते हैं।",
  "content": "अमेरिकी शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव सितंबर की पहली तारीख को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भी जारी रहा, जिससे नए महीने की शुरुआत मंदी के साथ हुई। डाउ जोंस 53,000 के स्तर से नीचे संघर्ष कर रहा है, जबकि तकनीकी शेयरों से जुड़ा नैस्डैक 26,250 के आसपास मंडरा रहा है। इसी तरह एसएंडपी 500 इंडेक्स भी 7,650 के जोन से ऊपर टिकने के लिए जोर लगा रहा है। ऐतिहासिक रूप से सितंबर का महीना इन तीनों प्रमुख सूचकांकों के लिए सबसे कमजोर साबित हुआ है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भू-राजनीतिक प्रभाव, जिद्दी महंगाई और सख्त मौद्रिक नीति के लंबे असर के कारण अमेरिकी बाजार ऊंचे Treasury yields और तेल की कीमतों का सामना कर रहे हैं।\n\n \n\nवॉल स्ट्रीट पर सितंबर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड\n बीते 25 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर का महीना अमेरिकी शेयर बाजार के लिए व्यापक रूप से मंदी वाला रहा है। इस अवधि में मासिक प्रदर्शन के लिहाज से सबसे खराब प्रदर्शन नैस्डैक का रहा है जिसमें औसतन 1.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद एसएंडपी 500 में 1.16 प्रतिशत और डाउ जोंस में 1.09 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। पिछले 25 वर्षों में डाउ जोंस ने 12 बार सकारात्मक और 13 बार नकारात्मक सितंबर देखे हैं। वहीं एसएंडपी 500 में इसके उलट 13 सकारात्मक और 12 नकारात्मक सितंबर रहे हैं। दूसरी ओर नैस्डैक में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों सितंबर 12-12 बार रहे हैं और बाकी समय सपाट रुझान रहा है।\n\n \n\nसबसे अच्छे और सबसे खराब सितंबर महीने\n वॉल स्ट्रीट के लिए सबसे बेहतरीन सितंबर 2010 में देखा गया था, यानी 15 साल पहले, जब डाउ जोंस में 7.7 प्रतिशत, एसएंडपी 500 में 8.8 प्रतिशत और नैस्डैक में 12 प्रतिशत की तेजी आई थी। हालांकि सबसे खराब सितंबर 2001 और 2002 में दर्ज किए गए थे। नैस्डैक के लिए सितंबर 2001 सबसे बुरा रहा था जब इसमें 17 प्रतिशत की भारी गिरावट आई थी और इसके बाद 2002 में 11 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज की गई। वहीं डाउ जोंस और एसएंडपी 500 के लिए सबसे खराब सितंबर 2002 था, जिसमें वे क्रमशः 12.4 प्रतिशत और 11 प्रतिशत टूट गए थे। कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 से 2023 के बीच भी इन सूचकांकों को लगातार मंदी वाले सितंबर का सामना करना पड़ा था।\n\n \n\nमैक्रोबॉन्ड के आंकड़ों का विश्लेषण\n मैक्रोबॉन्ड के आर्थिक विशेषज्ञ Denys Liutyi बताते हैं कि यदि S&P 500 के मासिक रिटर्न को अलग-अलग कैलेंडर महीनों में बांटा जाए और प्रत्येक महीने के लिए दीर्घकालिक औसत रिटर्न की गणना की जाए तो सितंबर एक अलग ही तस्वीर पेश करता है। उनका कहना है कि इसका औसत रिटर्न नकारात्मक है और पूरे ऐतिहासिक डेटा में यह औसतन -1 प्रतिशत से भी नीचे है। हालांकि एक साधारण अंकगणितीय औसत अपने आप में बहुत कुछ साबित नहीं करता क्योंकि कुछ असाधारण रूप से खराब सितंबर इस आंकड़े को नीचे खींच सकते हैं। यही वजह है कि उन्होंने माध्य रिटर्न का उपयोग करने का सुझाव दिया है जो चरम वर्षों से कम प्रभावित होता है। मैक्रोबॉन्ड के व्यापक आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि MSCI World, S&P 500, Russell 2000, DAX 40, FTSE 100 या Nikkei 225 जैसे वैश्विक बाजारों के लिए भी सितंबर सबसे खराब महीना साबित हुआ है।\n\n \n\nक्या सितंबर प्रभाव सिर्फ एक मिथक है\n दशकों के शोध के बाद भी इस बात का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है कि सितंबर प्रभाव वास्तव में क्यों मौजूद है। कोई आम सहमति नहीं होने के कारण यह एक ऐसा मिथक बन गया है जिसे बार-बार दोहराए जाने के कारण बाजार में वास्तविक प्रथा का रूप मिल गया है। एक आम सिद्धांत म्यूचुअल फंड के राजकोषीय वर्ष से जुड़ा है जो ऐतिहासिक रूप से कई अमेरिकी फंडों के लिए 31 अक्टूबर को समाप्त होता था। इस दृष्टिकोण के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर अपने ग्राहकों को रिपोर्ट करने से पहले पोर्टफोलियो को साफ-सुथरा करने के लिए सितंबर में घाटे वाली पोजीशन बेच सकते हैं। लेकिन समस्या यह है कि सितंबर प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पाया जाता है जिनका राजकोषीय कैलेंडर अमेरिका से मेल नहीं खाता है।\n\n \n\nस्कॉट रुबनर की रणनीति और बाजार का मौजूदा रुख\n Citadel Securities के इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स रणनीति प्रमुख Scott Rubner का कहना है कि वे अमेरिकी इक्विटी को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं, लेकिन वह सेटअप बदल रहा है जिसने अगस्त में बाजार को संभाला था। उन्होंने बताया कि जुलाई के रीसेट के बाद से S&P 500 में लगभग 22 प्रतिशत की रैली आई है और पांच महीनों में बाजार पूंजीकरण में लगभग 12 ट्रिलियन डॉलर जुड़े हैं। हालांकि सितंबर में आय का टेलविंड पीछे छूट जाता है और कैलेंडर फिर से मैक्रो कारकों की ओर मुड़ जाता है। खुदरा और कॉर्पोरेट मांग बनी हुई है, लेकिन इतिहास गवाही देता है कि सितंबर में दोनों में गिरावट आती है। अस्थििरता में भारी कमी आई है और डाउनसाइड प्रोटेक्शन सस्ता है, इसलिए वह सितंबर को व्यापक मंदी की शुरुआत के बजाय एक रणनीतिक गिरावट वाली खिड़की के रूप में देखते हैं।\n\n \n\nबाजार का हालिया प्रदर्शन\n मंगलवार को कारोबार के दौरान डाउ जोंस 427.36 अंक या 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 52,758.54 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स 236.82 अंक या 0.90 प्रतिशत लुढ़ककर 26,134.07 पर आ गया। इसके अलावा एसएंडपी 500 इंडेक्स 52.20 अंक या 0.7 प्रतिशत गिरकर 7,633.94 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि पूरे अगस्त 2026 के महीने में सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे, जिसमें नैस्डैक ने 456.99 अंक या 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था।\n\nइसका आप पर असर\nशेयर बाजार के इस मौसमी बदलाव और सितंबर के ऐतिहासिक दबाव का सीधा असर वैश्विक निवेशकों और म्युचुअल फंड धारकों के पोर्टफोलियो पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: वैश्विक बाजारों में कमजोरी और सितंबर के दौरान संभावित बिकवाली का असर भारतीय शेयर बाजारों के निवेशकों पर भी मनोवैज्ञानिक और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव भारतीय सूचकांकों को प्रभावित कर सकता है।\n• वैश्विक स्तर पर: अमेरिकी सूचकांकों में गिरावट और बढ़ती Treasury yields के कारण दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में जोखिम बढ़ सकता है। निवेशकों को अपनी निवेश रणनीतियों की समीक्षा करने की आवश्यकता हो सकती है।\n• पोर्टफोलियो प्रबंधन: अल्पावधि के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला सकते हैं। बाजार की मजबूती के समय जोखिम को कम करना एक विकल्प हो सकता है।\n• अस्थिरता और सुरक्षा: सितंबर के दौरान बाजार में अस्थिरता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे सस्ते डाउनसाइड प्रोटेक्शन की मांग बढ़ सकती है। दीर्घकालिक निवेशकों को अल्पकालिक बिकवाली से घबराने के बजाय मैक्रो कारकों पर नजर रखनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसितंबर के महीने में अमेरिकी शेयर बाजारों के कमजोर प्रदर्शन के पीछे ऐतिहासिक मौसमी रुझान, कॉर्पोरेट आय के चक्र और मैक्रोइकॉनॉमिक कारक जिम्मेदार हैं।\n\n• ऐतिहासिक मौसमी रुझान: पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर सभी प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों के लिए सबसे नकारात्मक महीना रहा है। इस दौरान औसत और माध्य रिटर्न लगातार नकारात्मक क्षेत्र में रहते हैं।\n• राजकोषीय वर्ष और पोर्टफोलियो रीसेट: ऐतिहासिक रूप से कई अमेरिकी म्यूचुअल फंडों का वित्तीय वर्ष 31 अक्टूबर को समाप्त होता था, जिससे फंड मैनेजर सितंबर में घाटे की पोजीशन बेचकर पोर्टफोलियो को साफ-सुथरा करते हैं।\n• मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव: भू-राजनीतिक तनाव, जिद्दी महंगाई और सख्त मौद्रिक नीतियों के लंबे असर के कारण बाजार ऊंचे Treasury yields और तेल की कीमतों का सामना कर रहा है।\n• कमाई और तरलता चक्र: जुलाई के रीसेट के बाद कॉर्पोरेट आय का सकारात्मक असर कम हो जाता है और खुदरा तथा कॉर्पोरेट मांग में ऐतिहासिक रूप से गिरावट आती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या सितंबर का महीना वास्तव में शेयर बाजार के लिए सबसे खराब होता है?\nहाँ, पिछले 25 वर्षों के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार सितंबर सभी प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों के लिए सबसे कमजोर महीना रहा है।\n\n2. पिछले 25 वर्षों में किस सूचकांक ने सितंबर में सबसे खराब प्रदर्शन किया है?\nनैस्डैक का औसत रिटर्न इस अवधि में सबसे कमजोर (-1.33%) रहा है।\n\n3. वॉल स्ट्रीट के इतिहास में सबसे अच्छा सितंबर किस वर्ष दर्ज किया गया था?\nवर्ष 2010 में सबसे अच्छा सितंबर देखा गया था जब डाउ जोंस में 7.7% और नैस्डैक में 12% की तेजी आई थी।\n\n4. मैक्रोबॉन्ड के आंकड़ों के अनुसार सितंबर के रिटर्न का क्या हाल है?\nमैक्रोबॉन्ड के आंकड़ों के अनुसार सितंबर का औसत रिटर्न नकारात्मक है और यह -1% से भी नीचे रहता है।\n\n5. सिताडेल सिक्योरिटीज के स्कॉट रुबनर सितंबर को किस रूप में देखते हैं?\nवे सितंबर को एक रणनीतिक गिरावट वाली खिड़की (tactical downside window) के रूप में देखते हैं।\n\n6. अगस्त 2026 में अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन कैसा रहा था?\nअगस्त 2026 में सभी प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे, जिसमें नैस्डैक ने 1.8% की बढ़त दर्ज की थी।",
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  "category": "मनी",
  "publishedAt": "2026-09-01",
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