# भारतीय आईटी सेक्टर में दूसरी तिमाही के नतीजों की दस्तक: टीसीएस और इंफोसिस से सुस्त प्रदर्शन के आसार, टेक महिंद्रा ला सकती है बोनस शेयर

> वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में देश की दिग्गज आईटी कंपनियों के नतीजों में सुस्ती रहने का अनुमान है, जबकि मिड-कैप कंपनियां बेहतर बढ़त दर्ज कर सकती हैं। वहीं टेक महिंद्रा के निवेशक लाभांश के साथ बोनस शेयर की घोषणा पर नजरें टिकाए हुए हैं।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/it-sector-q2-preview-tcs-infosys-muted-growth-tech-mahindra-bonus-shares-43740 · **Language:** Hindi
**Tags:** आईटी सेक्टर, टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो, टेक महिंद्रा, बोनस शेयर

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय आंकड़े जारी करने के लिए देश की दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां पूरी तरह तैयार हैं। तिमाही वित्तीय नतीजों का सिलसिला इसी सप्ताह 8 अक्टूबर को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की घोषणा के साथ शुरू होने जा रहा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि इस बार लार्ज-कैप सॉफ्टवेयर कंपनियों के नतीजे काफी हद तक सुस्त रह सकते हैं। वित्तीय प्रदर्शन के साथ-साथ निवेशकों की नजरें कंपनियों द्वारा घोषित किए जाने वाले डिविडेंड और बोनस शेयरों पर भी टिकी हुई हैं।

## कंपनियों के नतीजे घोषित होने का पूरा कार्यक्रम
नतीजों के घोषित होने की समय-सारणी के अनुसार, 8 अक्टूबर को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज सबसे पहले अपने वित्तीय आंकड़ों की घोषणा करेगी। इसके बाद 12 अक्टूबर को एचसीएल टेक्नोलॉजीज अपने वित्तीय विवरण पेश करेगी। टाटा समूह की सहयोगी कंपनी टाटा टेक्नोलॉजीज अपने वित्तीय आंकड़े 14 अक्टूबर को सामने रखेगी। इसके ठीक अगले दिन, यानी 15 अक्टूबर को विप्रो और टेक महिंद्रा अपने वित्तीय परिणाम साझा करेंगी।

अक्टूबर के उत्तरार्ध में अन्य प्रमुख कंपनियों के नतीजे भी सामने आएंगे। एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज 19 अक्टूबर को अपनी दूसरी तिमाही के आंकड़े साझा करेगी। इसके बाद 23 अक्टूबर को कोफोर्ज और इंफोसिस दोनों के वित्तीय परिणाम घोषित किए जाएंगे। वहीं केफिन टेक की ओर से 26 अक्टूबर को अपने वित्तीय नतीजे पेश किए जाने का कार्यक्रम तय है। अन्य कई सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाताओं ने अभी अपनी तारीखें सार्वजनिक नहीं की हैं।

## लार्ज-कैप आईटी कंपनियों में नरमी और मिड-कैप का तेज रुझान
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का आकलन है कि मौसमी रूप से मजबूत मानी जाने वाली इस तिमाही में पहली श्रेणी की दिग्गज तकनीकी कंपनियों की वृद्धि दर मंद रहेगी। इसके पीछे मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिफ्लेशन और कमजोर मैक्रोइकोनॉमिक परिस्थितियां हैं। टियर-1 कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज 2% तिमाही जैविक वृद्धि और 2.4% सालाना बढ़त के साथ सबसे आगे रह सकती है। दूसरी तरफ, इंफोसिस 1.1% तिमाही जैविक और 0.2% सालाना वृद्धि तथा टीसीएस 0.5% तिमाही जैविक व 2.8% सालाना विस्तार के साथ पीछे रह सकती हैं। हाइब्रिड मॉडल वाली कंपनियों में टेक महिंद्रा 1.6% तिमाही और 6.6% सालाना वृद्धि के साथ मजबूत दिख रही है, जबकि एलटीआईमाइंडट्री 1.0% तिमाही और 5% की धीमी सालाना बढ़त के साथ पिछड़ सकती है।

मिड-कैप स्तर की कंपनियां इस बार भी शीर्ष दिग्गजों को पीछे छोड़ती नजर आ रही हैं। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स बड़े सौदों के अमल में आने से 7% तिमाही वृद्धि दर्ज कर सकती है। इसके अलावा कोफोर्ज से 4.5% और एमपीएचएल से 3.5% तिमाही विस्तार की उम्मीद जताई गई है। इसके उलट इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनियों में सुस्ती बनी रह सकती है, जबकि बीपीओ क्षेत्र में सैजिलिटी अपने प्रतिस्पर्धियों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

## वैश्विक आर्थिक दबाव, ब्याज दरें और क्लाइंट खर्च पर असर
पीएल कैपिटल के वाइस प्रेसिडेंट व रिसर्च एनालिस्ट प्रीतेश ठक्कर के अनुसार, दूसरी तिमाही में सुधार की रफ्तार सीमित रहेगी क्योंकि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताएं ग्राहकों के खर्च और निर्णय लेने की गति को प्रभावित कर रही हैं। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा जुलाई 2023 के बाद पहली बार की गई 25 बेसिस प्वाइंट्स की हालिया ब्याज दर बढ़ोतरी और कैलेंडर वर्ष 2026 के अंत में एक और संभावित वृद्धि ने आईटी बजट पर दबाव बढ़ा दिया है।

विश्लेषक का यह भी कहना है कि एआई परियोजनाओं में ग्राहक दिलचस्पी तो दिखा रहे हैं, लेकिन ये प्रोजेक्ट्स छोटे आकार और कम अवधि के हैं। इस वजह से वे पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं में आई कमी की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे कुल राजस्व में तेज उछाल नहीं आ पा रहा है। टियर-1 कंपनियों में कॉन्स्टेंट करेंसी आधार पर लगभग 0.9% की मीडियन तिमाही वृद्धि की संभावना है जिसे आंशिक रूप से अधिग्रहणों का सहारा मिलेगा, जबकि टियर-2 कंपनियां बेहतर सौदों और हालिया जीत के दम पर 2.7% की मीडियन तिमाही वृद्धि हासिल कर सकती हैं।

## कंपनी-वार विकास अनुमान और बीएफएसआई वर्टिकल
चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का मानना है कि टीसीएस और इंफोसिस क्रमशः 0.0% और 1.5% तिमाही वृद्धि के साथ लचीलापन बनाए रख सकती हैं, जबकि विप्रो में 0.7% की गिरावट आने का अनुमान है। एचसीएल टेक 0.7% के साथ अपने तय दायरे में बनी रहेगी। दूसरी तरफ टेक महिंद्रा 1.2% और एलटीएम 1.6% की वृद्धि दर्ज कर सकती हैं क्योंकि उन्हें मजबूत डील कन्वर्जन का सहारा मिल रहा है। दूसरी श्रेणी की कंपनियां 2.5% से 4.5% की तिमाही वृद्धि के साथ अपना दबदबा बनाए रख सकती हैं, जिसमें एनकोरा के अधिग्रहण के समन्वय से कोफोर्ज अग्रणी भूमिका में रह सकती है।

बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र यानी बीएफएसआई वर्टिकल को पूरे सेक्टर के लिए सबसे प्रमुख विकास चालक माना जा रहा है। पीएल कैपिटल के अनुसार, टियर-1 में एचसीएलटी 2.4% कॉन्स्टेंट करेंसी वृद्धि के साथ आगे रहेगी जिसे अधिग्रहणों से बल मिलेगा, जबकि विप्रो में 0.5% की गिरावट और टीसीएस में 0.4% की मामूली बढ़त देखी जा सकती है। टियर-2 में कोफोर्ज एनकोरा के एक महीने के योगदान के बल पर 11.3% कॉन्स्टेंट करेंसी बढ़त दिखा सकती है और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 7.6% वृद्धि संभव है। हालांकि ऑटो ईआरएंडडी खर्च में कमजोरी के कारण केपीआईटी लगातार दूसरी तिमाही में नकारात्मक प्रदर्शन दर्ज कर सकती है।

## मार्जिन की स्थिति, मुद्रा हेजिंग और गाइडेंस में बदलाव
रुपये के मूल्यह्रास की गति पिछले दो तिमाहियों की तुलना में धीमी पड़ने के कारण तिमाही आधार पर ईबीआईटी मार्जिन में मिला-जुला रुख देखने को मिल सकता है। ठक्कर के अनुसार, टियर-1 कंपनियों का मीडियन ईबीआईटी मार्जिन 40 बेसिस प्वाइंट्स सुधरकर 21.1% पर पहुंच सकता है, जबकि टियर-2 कंपनियों का मार्जिन 15.1% पर सपाट रहने की संभावना है। समीक्षा के दायरे वाली कंपनियों में यह मार्जिन -120 बेसिस प्वाइंट्स से लेकर +100 बेसिस प्वाइंट्स के बीच रह सकता है। कोटक के विश्लेषकों ने स्पष्ट किया कि कैश-फ्लो हेजिंग के चलते टेक महिंद्रा, एलटीएम, कोफोर्ज और हेक्सावेयर को फॉरेक्स नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिससे कमजोर रुपये का सीधा लाभ मुनाफे में तत्काल नहीं दिखेगा।

गाइडेंस के मोर्चे पर, कोटक को उम्मीद है कि इंफोसिस अपना वार्षिक विकास अनुमान घटाकर 1.5-2.5% कर सकती है, जो पहले 1.5-3% था। इसमें अधिग्रहणों का 170 बेसिस प्वाइंट्स का योगदान भी शामिल है। एचसीएलटी का ऑर्गेनिक गाइडेंस 1-4% से बदलकर 2-3% हो सकता है, जबकि एचपीई टेल्को कारोबार और जैस्परसॉफ्ट अधिग्रहण के एकीकरण के बाद कुल राजस्व गाइडेंस 3-4% रहने का अनुमान है। विप्रो के लिए -2% से 0% तक के राजस्व गाइडेंस का अंदेशा जताया गया है। दूसरी ओर, चॉइस का अनुमान है कि कंपनियां लागत नियंत्रण के जरिए अपने मार्जिन गाइडेंस को बरकरार रखेंगी।

## डिविडेंड और टेक महिंद्रा के बोनस शेयर पर नजरें
शेयरधारकों को मिलने वाले वित्तीय लाभों की बात करें तो टीसीएस इस बैठक में अपने इक्विटी शेयरधारकों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के दूसरे अंतरिम लाभांश पर विचार करेगी। एचसीएल टेक ने बताया है कि वह 12 अक्टूबर को तीसरे अंतरिम लाभांश पर फैसला लेगी। इंफोसिस इस चालू वित्त वर्ष के अपने पहले अंतरिम लाभांश की घोषणा पर विचार करने जा रही है। एल&amp;टी टेक्नोलॉजी सर्विसेज 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई छमाही के लिए अंतरिम लाभांश पर विचार करेगी। विप्रो ने फिलहाल लाभांश से जुड़ा कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया है।

बाजार में सबसे ज्यादा उत्सुकता टेक महिंद्रा के बोर्ड फैसले को लेकर है। कंपनी द्वारा नियामक को दी गई जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर को आयोजित होने वाली बैठक में निदेशक मंडल अंतरिम लाभांश के साथ-साथ बोनस शेयर जारी करने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगा।

## निफ्टी आईटी इंडेक्स में तेज बिकवाली और वैल्यूएशन का रुख
वित्तीय आंकड़ों से पहले बाजार में आईटी शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है। 6 अक्टूबर 2026 तक निफ्टी आईटी इंडेक्स महीने-दर-महीने आधार पर करीब 9% टूटा है, जबकि बीते एक साल में इसमें 19% से अधिक की गिरावट आई है। पिछले 30 दिनों के दौरान इंफोसिस 11%, टीसीएस 9% से ज्यादा, कोफोर्ज करीब 8%, विप्रो लगभग 9%, टेक महिंद्रा 6% से अधिक और एचसीएल टेक 8% तक टूटी हैं। ओरेकल और एलटीआईमाइंडट्री में सबसे ज्यादा क्रमशः 14% और 13% की गिरावट दर्ज हुई है। इसके अलावा म्फैसिस में 6% और पर्सिस्टेंट में 3% की गिरावट आई है।

कैलेंडर वर्ष में अब तक निफ्टी आईटी में 27% का सुधार आने के बावजूद वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारतीय कंपनियों का मूल्यांकन अभी भी प्रीमियम पर बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रबंधन की टिप्पणियां मध्यम अवधि के अवसरों पर सकारात्मक लेकिन निकट अवधि की मांग पर सतर्क रह सकती हैं। जब तक क्लाइंट्स का विवेकाधीन खर्च नहीं सुधरता और एआई सेवाएं पारंपरिक सेवाओं की कमी की भरपाई नहीं करतीं, तब तक शेयरों में कोई भी बड़ी तेजी केवल सीमित समय के लिए ही टिक पाएगी।

## इसका आप पर असर
आईटी कंपनियों की आय में सुस्ती और शेयर बाजार में तेज गिरावट का सीधा असर खुदरा निवेशकों और तकनीक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा।

- **शेयरधारकों के लिए:** दिग्गज कंपनियों के शेयरों में जारी बिकवाली से निवेशकों के पोर्टफोलियो का मूल्य घटा है। हालांकि टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक से अंतरिम डिविडेंड और टेक महिंद्रा से बोनस शेयर मिलने पर कुछ राहत मिल सकती है।
- **तकनीक कर्मियों के लिए:** कंपनियों के राजस्व पर दबाव बने रहने से नई भर्तियों और वेतन वृद्धि की रफ्तार सुस्त रह सकती है। आईटी कंपनियां लागत कटौती पर ध्यान दे रही हैं, जिससे कर्मचारियों को नई योजनाओं के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।
- **म्युचुअल फंड निवेशकों के लिए:** निफ्टी आईटी इंडेक्स में आई तेज गिरावट से आईटी सेक्टर आधारित फंड्स के रिटर्न पर नकारात्मक असर पड़ा है। निवेशकों को अपने निवेश पोर्टफोलियो को संतुलित रखने के लिए सेक्टर के प्रदर्शन पर नजर रखनी चाहिए।
- **बाजार की दिशा पर:** सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के वित्तीय नतीजे व्यापक शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि कंपनियों के परिणाम और भविष्य का अनुमान उम्मीद से कमजोर रहता है तो प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय आईटी कंपनियों के नतीजों में सुस्ती और शेयरों में गिरावट के पीछे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी बदलाव मुख्य कारण हैं।

- **वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव:** मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के चलते विदेशी क्लाइंट्स अपने बड़े निवेश निर्णयों को टाल रहे हैं। इसके चलते सॉफ्टवेयर कंपनियों को नए सौदे मिलने और उनके क्रियान्वयन में देरी हो रही है।
- **फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति:** अमेरिकी फेड द्वारा जुलाई 2023 के बाद पहली बार 25 बेसिस प्वाइंट्स की ब्याज दर वृद्धि और आगे एक और बढ़ोतरी की संभावना ने कॉरपोरेट खर्च को सीमित कर दिया है। उधार की बढ़ती लागत से वैश्विक कंपनियों ने आईटी खर्च पर सावधानी बरतनी शुरू कर दी है।
- **एआई डिफ्लेशन का प्रभाव:** नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस परियोजनाएं मुख्य रूप से छोटे आकार और कम अवधि की हैं। ये नए प्रोजेक्ट्स पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं में आने वाली राजस्व कमी की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहे हैं।
- **मुद्रा हेजिंग और मार्जिन:** डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्यह्रास की रफ्तार धीमी हुई है और कैश-फ्लो हेजिंग के चलते कई कंपनियों को फॉरेक्स नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इससे कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. टीसीएस और इंफोसिस अपने वित्तीय नतीजे कब घोषित करेंगी?
टीसीएस 8 अक्टूबर को अपने वित्तीय आंकड़े जारी करेगी, जबकि इंफोसिस 23 अक्टूबर को अपने दूसरी तिमाही के परिणाम घोषित करेगी।

### 2. कौन सी आईटी कंपनी बोनस शेयर जारी करने पर विचार कर रही है?
टेक महिंद्रा का निदेशक मंडल 15 अक्टूबर को आयोजित होने वाली बैठक में अंतरिम लाभांश के साथ-साथ बोनस शेयर जारी करने पर विचार करेगा।

### 3. निफ्टी आईटी इंडेक्स में हाल के दिनों में कितनी गिरावट आई है?
6 अक्टूबर 2026 तक निफ्टी आईटी इंडेक्स में महीने-दर-महीने करीब 9% और बीते एक साल में 19% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

### 4. आईटी सेक्टर में किन कंपनियों की वृद्धि दर बेहतर रहने की उम्मीद है?
मिड-कैप स्तर की कंपनियों जैसे पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और कोफोर्ज के बड़े सौदों के दम पर शीर्ष दिग्गज कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

### 5. किन कंपनियों ने अंतरिम लाभांश देने का प्रस्ताव रखा है?
टीसीएस, एचसीएल टेक, इंफोसिस, एल&टी टेक्नोलॉजी सर्विसेज और टेक महिंद्रा अपने शेयरधारकों के लिए अंतरिम लाभांश पर विचार करने जा रही हैं।

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