# आईटीआर में भूल होने पर भी टैक्स रिफंड पर ब्याज नहीं रोक सकता आयकर विभाग, ट्रिब्यूनल का अहम फैसला

> आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि रिटर्न दाखिल करते समय हुई त्रुटि के आधार पर विभाग टैक्सपेयर का रिफंड ब्याज नहीं रोक सकता। ट्रिब्यूनल ने 5.39 करोड़ रुपये के रिफंड पर ब्याज देने का आदेश दिया।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/itr-men-bhula-hone-para-bhi-tax-refund-para-byaja-nahin-roka-sakata-ayakara-vibhaga-tribunal-ka-ahama-phaisala-41996 · **Language:** Hindi
**Tags:** टैक्स रिफंड, इनकम टैक्स, आईटीआर, आईटीएटी, सेक्शन 244ए, कैपिटल गेन टैक्स

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय यदि कोई तकनीकी या गणना संबंधी चूक हो जाती है, तो उसके आधार पर करदाता को उसके वैध रिफंड पर मिलने वाले ब्याज से वंचित नहीं किया जा सकता। आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि फाइलिंग में किसी गलती के चलते आयकर विभाग रिफंड पर देय ब्याज रोकने का हकदार नहीं है। यदि किसी करदाता का रिफंड अब तक अटका हुआ है अथवा विभाग ने चूक का हवाला देकर ब्याज की राशि रोक ली है, तो इस न्यायिक निर्णय के आधार पर विभाग की कार्रवाई को चुनौती दी जा सकती है।

## फ्लैट बिक्री और कैपिटल गेन वर्गीकरण से जुड़ा विवाद
यह कानूनी मामला आकलन वर्ष 2013-14 की फाइलिंग से संबंधित है। एक करदाता ने आवासीय अपार्टमेंट की बिक्री की थी, जिससे प्राप्त मुनाफे को शुरुआत में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के रूप में दिखाया गया था। इसके बाद करदाता ने स्थिति में सुधार करते हुए संशोधित रिटर्न पेश किया, जिसमें उक्त लाभ को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के तौर पर दर्ज किया गया। साथ ही आयकर कानून के सेक्शन 112 के प्रावधानों के अंतर्गत इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20 फीसदी की दर से कर अदायगी की स्वीकृति दी गई। ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के दौरान करदाता द्वारा जमा किए गए इस रिवाइज्ड आईटीआर को पूरी तरह वैध ठहराया और उसे रिफंड का पात्र माना।

## विभाग की आपत्तियों को ट्रिब्यूनल ने किया खारिज
आयकर विभाग ने संशोधित आईटीआर में किए गए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के दावे को अस्वीकार कर दिया था। विभाग का तर्क था कि मूल रिटर्न भरते समय करदाता ने स्वयं उच्च कर स्लैब चुना था और बाद में संशोधित रिटर्न दाखिल करते वक्त इस बदलाव का पर्याप्त व उचित कारण स्पष्ट नहीं कर पाया। इसी आधार पर विभाग ने सेक्शन 244ए के तहत बनने वाले टैक्स रिफंड ब्याज का भुगतान करने से इनकार कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने विभाग की इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यदि मूल फाइलिंग में कोई मानवीय अथवा तकनीकी गलती हुई भी थी, तब भी वैध रूप से देय ब्याज को रोका नहीं जा सकता।

## 5.39 करोड़ के रिफंड पर ब्याज भुगतान का स्पष्ट आदेश
अपने विस्तृत आदेश में ट्रिब्यूनल ने दर्ज किया कि करदाता ने किसी भी स्तर पर कानून की अनदेखी नहीं की और न ही तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया। करदाता ने विभाग के सभी नोटिसों का समय पर जवाब दिया और अपीलीय प्रक्रिया के किसी भी बिंदु की उपेक्षा नहीं की। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि आयकर विभाग मानक वेरिफिकेशन नियमों का पालन करते हुए करदाता को 5.39 करोड़ रुपये के रिफंड पर निर्धारित ब्याज का भुगतान करे।

## सेक्शन 244ए के तहत ब्याज कटौती की शर्तें
ट्रिब्यूनल ने सेक्शन 244ए के कानूनी पहलुओं को समझाते हुए स्पष्ट किया कि कानून में एक विशिष्ट स्थिति में ब्याज रोकने का प्रावधान है। यदि अंतिम टैक्स गणना के पश्चात स्वीकृत रिफंड की रकम कुल निर्धारित राशि के 10 फीसदी से अधिक घट जाती है, तो ब्याज का लाभ नहीं मिलता। हालांकि, इस विचाराधीन मामले में ऐसी कोई परिस्थिति मौजूद नहीं थी, इसलिए करदाता ब्याज पाने का पूर्ण अधिकारी बना रहता है।

## इसका आप पर असर
यह फैसला उन करदाताओं के लिए सीधी कानूनी राहत प्रदान करता है जिनका टैक्स रिफंड अथवा उस पर देय ब्याज गलतियों का हवाला देकर रोका गया है।

- **भारत में करदाताओं पर असर:** आईटीआर में गलती सुधरने के बाद विभाग रिफंड पर ब्याज देने से मनमाने तरीके से इनकार नहीं कर सकता। करदाता ट्रिब्यूनल के इस आदेश के जरिए सेक्शन 244ए के तहत ब्याज की मांग कर सकते हैं।
- **संशोधित रिटर्न दाखिल करने वालों के लिए:** रिवाइज्ड आईटीआर स्वीकार होने की स्थिति में ब्याज का दावा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। अगर विभाग मूल फाइलिंग की गलती का बहाना बनाता है, तो इस आदेश से जवाब दिया जा सकता है।
- **ब्याज पात्रता की 10 फीसदी सीमा:** रिफंड की रकम कुल टैक्स के 10 फीसदी से कम न घटने पर पूरा ब्याज पाना कानूनी अधिकार है। करदाता अपनी फाइनल गणना की जांच कर ब्याज का सही हिसाब मांग सकते हैं।
- **अटके रिफंड वाले करदाताओं के लिए कदम:** जिन लोगों का रिफंड महीनों से लंबित है, वे तत्काल आयकर विभाग से ऑनलाइन संपर्क साधें। आवश्यक सत्यापन पूरा होने के बाद ब्याज सहित भुगतान की मांग की जा सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी विवाद तब उत्पन्न हुआ जब आयकर विभाग ने एक करदाता के रिवाइज्ड आईटीआर में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के दावे को स्वीकार करने के बावजूद उस पर ब्याज देने से मना कर दिया था।

- **मूल फाइलिंग में श्रेणी का गलत चयन:** करदाता ने अपार्टमेंट बिक्री से मिले मुनाफे को अनजाने में शॉर्ट टर्म गेन बताकर ज्यादा टैक्स स्लैब का चयन कर लिया था। बाद में संशोधित रिटर्न भरकर सेक्शन 112 के तहत 20 फीसदी टैक्स और इंडेक्सेशन का सही दावा प्रस्तुत किया गया।
- **विभाग का मनमाना रवैया:** आयकर अधिकारियों का मानना था कि चूंकि मूल रिटर्न में करदाता ने खुद गलती की थी और रिवाइज्ड रिटर्न में इसका संतोषजनक कारण नहीं दिया, इसलिए ब्याज नहीं मिलना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
- **कानूनी अनुपालन और पारदर्शिता:** करदाता ने विभाग के सभी नोटिसों का समुचित उत्तर दिया और किसी भी तथ्य को छुपाया नहीं था। ट्रिब्यूनल ने पाया कि गलती दुर्भावनापूर्ण नहीं थी, जिससे ब्याज रोकने का कोई आधार नहीं बनता।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या आईटीआर में गलती होने पर आयकर विभाग रिफंड पर ब्याज रोक सकता है?
नहीं, आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि रिटर्न भरने में हुई मानवीय या प्रक्रियात्मक गलती की वजह से विभाग ब्याज का भुगतान नहीं रोक सकता।

### 2. ट्रिब्यूनल ने किस मामले में यह फैसला सुनाया?
यह फैसला आकलन वर्ष 2013-14 से जुड़े अपार्टमेंट बिक्री के कैपिटल गेन मामले में आया, जहां करदाता ने संशोधित रिटर्न भरा था।

### 3. ट्रिब्यूनल ने कितनी राशि के रिफंड पर ब्याज देने का आदेश दिया?
ट्रिब्यूनल ने आयकर विभाग को मानक वेरिफिकेशन के बाद 5.39 करोड़ रुपये के रिफंड पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया।

### 4. सेक्शन 244ए के तहत ब्याज कब रोका जा सकता है?
यदि अंतिम टैक्स गणना के बाद रिफंड की राशि कुल निर्धारित रकम के 10 फीसदी से अधिक कम हो जाती है, तभी उस पर ब्याज नहीं दिया जा सकता।

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