जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी रिपोर्ट पर डोनाल्ड ट्रंप का मानहानि केस खारिज, मियामी कोर्ट ने दोबारा याचिका दाखिल करने पर लगाई रोक मियामी की एक अमेरिकी फेडरल अदालत ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और रूपर्ट मर्डोक के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे को पूर्वाग्रह के साथ खारिज कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाया कि याचिका में वास्तविक द्वेष साबित नहीं किया जा सका। मियामी की एक अमेरिकी फेडरल अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह कानूनी विवाद द वॉल स्ट्रीट जर्नल और रूपर्ट मर्डोक के खिलाफ शुरू किया गया था, जो जेफ्री एपस्टीन से डोनाल्ड ट्रंप के कथित संबंधों पर आधारित एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट से जुड़ा था। यूएस डिस्ट्रिक्ट जज डारिन गेल्स ने शनिवार को इस याचिका को पूर्वाग्रह के साथ खारिज करने का आदेश जारी किया। इस कानूनी निर्णय का सीधा अर्थ यह है कि इस विशिष्ट मामले और दावों को लेकर अदालत में दोबारा कोई नई याचिका दाखिल नहीं की जा सकती है। मानहानि के कानूनी मानकों पर खरा नहीं उतरा मामला अदालत के आधिकारिक आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि यह मुकदमा मानहानि से जुड़े कानूनी मानकों को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ रहा। जज डारिन गेल्स ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि राष्ट्रपति यह साबित करने में विफल रहे कि प्रतिवादियों ने दुर्भावना या वास्तविक द्वेष के तहत काम किया था। न्यायिक व्यवस्था के अनुसार सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े मामलों में यह कानूनी कसौटी अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। अदालत की टिप्पणी में यह भी कहा गया कि यह याचिका केवल तिनके का सहारा लेने जैसी थी और इसके माध्यम से खोजी पत्रकारिता की पड़ताल में जबरन कमियां तलाशने का प्रयास किया जा रहा था। जन्मदिन एल्बम और विवादित पत्र की पृष्ठभूमि यह कानूनी तकरार पिछले वर्ष प्रकाशित हुए एक आलेख के बाद सामने आई थी। उस सामग्री में एक यौन रूप से विचारोत्तेजक पत्र का ब्योरा दिया गया था, जिस पर कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप का नाम दर्ज था। यह विवरण सामने आया था कि उक्त पत्र वर्ष 2003 के एक संकलन एल्बम में शामिल था, जिसे जेफ्री एपस्टीन के 50वें जन्मदिन के विशेष अवसर के लिए तैयार किया गया था। इस एल्बम में विभिन्न दस्तावेज और प्रस्तुतियां एकत्र की गई थीं। सामग्री में दर्ज विवरण के अनुसार, उस पत्र का पाठ्य भाग एक विशेष रूपरेखा के भीतर व्यवस्थित किया गया था। यह रूपरेखा हाथ से खींची गई एक नग्न महिला के रेखाचित्र जैसी प्रतीत हो रही थी। उस पत्र के समापन में शुभकामना देते हुए लिखा गया था, "Happy Birthday -- and may every day be another wonderful secret," जिसका अर्थ जन्मदिन की बधाई और हर दिन एक और अद्भुत रहस्य बने रहने की कामना से था। डोनाल्ड ट्रंप ने इस पत्र को लिखने के दावे का पूरी तरह खंडन किया था और इसे निराधार बताया था। दस्तावेज जुटाने का घटनाक्रम और दोनों पक्षों के संबंध विवरणों में यह भी उल्लेख किया गया था कि उक्त पत्र को घिसलीन मैक्सवेल द्वारा एकत्रित किया गया था। घिसलीन मैक्सवेल ने ही जेफ्री एपस्टीन के जन्मदिन के उस एल्बम के लिए विभिन्न वस्तुओं और पत्रों का संग्रह किया था। यह पूरा घटनाक्रम वर्ष 2006 में जेफ्री एपस्टीन की पहली गिरफ्तारी से कई साल पहले का था। इसके अतिरिक्त, इस आलेख में जेफ्री एपस्टीन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बाद के वर्षों में आए मनमुटाव तथा रिश्तों में आई दूरी का भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था। मुकदमे के आरोप और कानूनी निर्णय का प्रभाव डोनाल्ड ट्रंप ने इस सामग्री की तीखी आलोचना की थी और इसे असत्य, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक करार दिया था। इसके बाद मियामी की फेडरल अदालत में एक विस्तृत मुकदमा दायर किया गया। इस कानूनी शिकायत में संबंधित समाचार प्रकाशन, उसके पत्रकारों और रूपर्ट मर्डोक को प्रतिवादी बनाया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादियों ने जानबूझकर और लापरवाही बरतते हुए कई असत्य, मानहानिकारक और छवि खराब करने वाले बयान प्रकाशित किए। मियामी अदालत के इस हालिया फैसले ने इस पूरी कानूनी कार्यवाही को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया है। कानूनी प्रक्रिया में पूर्वाग्रह के साथ मामले का खारिज होना यह सुनिश्चित करता है कि समान दावों के आधार पर भविष्य में कोई नई कानूनी चुनौती पेश नहीं की जा सकती। जज डारिन गेल्स के इस आदेश ने वास्तविक द्वेष के स्थापित मानक के आधार पर सभी दलीलों को अमान्य कर दिया, जिससे प्रकाशन की खोजी सामग्री और दस्तावेजों की प्रस्तुति कानूनी कसौटी पर बरकरार रही। इसका आप पर असर यह अदालती फैसला सार्वजनिक हस्तियों के खिलाफ मीडिया रिपोर्टिंग की कानूनी सुरक्षा और मानहानि मुकदमों की सीमा को स्पष्ट करता है। • प्रेस की स्वतंत्रता: अदालत का फैसला यह स्थापित करता है कि सार्वजनिक हस्तियों पर खोजी पत्रकारिता को चुनौती देने के लिए केवल असहमति पर्याप्त नहीं है। याचिकाकर्ताओं को यह ठोस रूप से साबित करना होता है कि रिपोर्टिंग जानबूझकर दुर्भावना या वास्तविक द्वेष के साथ की गई थी। • मुकदमेबाजी पर रोक: किसी मामले का पूर्वाग्रह के साथ खारिज होना यह सुनिश्चित करता है कि समान दावों को बार-बार अदालत में नहीं घसीटा जा सकता। इससे मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी की अनिश्चितता से स्थायी राहत मिलती है। • कानूनी मानकों की पुष्टि: यह आदेश सार्वजनिक मामलों में वास्तविक द्वेष की उच्च कानूनी कसौटी को दोहराता है। आम नागरिकों और कानूनी जानकारों के लिए यह स्पष्ट करता है कि बिना पुख्ता सुबूत के मानहानि के दावे अदालतों में टिक नहीं सकते। • दस्तावेजी पड़ताल की वैधता: अदालती फैसले ने पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों और एल्बमों की पत्रकारिता पड़ताल को कानूनी जांच के दायरे में वैध माना है। इससे अन्य मामलों में भी अभिलेखीय दस्तावेजों पर आधारित रिपोर्टिंग को कानूनी सहारा मिलता है। ऐसा क्यों हुआ यह मुकदमा इसलिए खारिज किया गया क्योंकि अदालत ने पाया कि याचिका मानहानि के आवश्यक कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करती थी। • वास्तविक द्वेष का अभाव: जज डारिन गेल्स ने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि प्रतिवादियों ने जानबूझकर झूठ प्रकाशित किया या सत्य की घोर उपेक्षा की। अमेरिकी मानहानि कानून में सार्वजनिक हस्तियों के लिए वास्तविक द्वेष साबित करना एक अनिवार्य शर्त है। • आरोपों में ठोस आधार की कमी: अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि यह मुकदमा खोजी पत्रकारिता में जबरन खामियां निकालने का एक कमजोर प्रयास था। कानूनी तौर पर इसे तिनके का सहारा लेने जैसा माना गया, जिसके पास पर्याप्त तथ्यात्मक समर्थन नहीं था। • पूर्वाग्रह सहित निपटारा: चूंकि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कानूनी दोषों को दूर करने की कोई गुंजाइश नहीं पाई गई, इसलिए जज ने मामले को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया। इस वजह से भविष्य में इस विषय पर कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकेगा। सवाल-जवाब 1. अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप का मानहानि मुकदमा क्यों खारिज किया? जज ने पाया कि याचिका यह साबित करने में विफल रही कि प्रतिवादियों ने वास्तविक द्वेष के तहत काम किया था। 2. मुकदमा पूर्वाग्रह के साथ खारिज होने का क्या मतलब है? इसका अर्थ है कि मामला स्थायी रूप से समाप्त हो गया है और इन्हीं दावों के साथ अदालत में दोबारा याचिका दायर नहीं की जा सकती। 3. यह विवाद किस विषय की रिपोर्टिंग से जुड़ा था? यह कानूनी विवाद जेफ्री एपस्टीन के 50वें जन्मदिन के एल्बम में कथित रूप से शामिल एक पत्र और डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े संबंधों की रिपोर्टिंग पर आधारित था। 4. इस मुकदमे में किन पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया था? इस याचिका में द वॉल स्ट्रीट जर्नल, उसके पत्रकारों और रूपर्ट मर्डोक को प्रतिवादी बनाया गया था। 5. विवादित पत्र पर डोनाल्ड ट्रंप का क्या रुख था? डोनाल्ड ट्रंप ने उस पत्र को लिखने की बात से पूरी तरह इनकार किया था और रिपोर्टिंग को असत्य बताया था। https://trendkia.com/money/jeffrey-epstein-se-juri-riporta-para-donald-trump-ka-manahani-kesa-kharija-miami-korta-ne-dobara-yachika-dakhila-karane-para-lagai-54112 TrendKia — Har trend, sabse pehle.