झारखंड के मोटे अनाज की दिल्ली में धूम, गुमला की ग्रामीण महिलाओं के रागी उत्पादों ने बनाया नया बाजार गुमला जिले में शुरू हुए रागी मिशन से जुड़ी महिलाएं अब राजधानी में अपने पारंपरिक पौष्टिक उत्पाद बेच रही हैं, जहां दिल्ली हाट में रोजाना हजारों रुपये की बिक्री दर्ज हो रही है। पारंपरिक मोटे अनाज की खेती अब केवल खेतों तक सीमित न रहकर बड़े राष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही है। झारखंड के गुमला जिले में ग्रामीण स्तर पर तैयार किए जा रहे रागी के व्यंजन देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास वित्त निगम की ओर से दिल्ली हाट में 31 जुलाई तक एक विशेष हाट का आयोजन किया गया है। इस मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगरों और उत्पादकों के बीच गुमला के रागी उत्पादों की भारी मांग देखने को मिल रही है, जिससे दूरदराज के आदिवासी और ग्रामीण अंचलों में काम करने वाली महिलाओं को बड़ा आर्थिक संबल मिल रहा है। प्रशासनिक पहल से शुरू हुआ था रागी मिशन गुमला में मोटे अनाज को बढ़ावा देने की मजबूत नींव वर्ष 2022 में रखी गई थी। उस समय निवर्तमान उपायुक्त सुशांत गौरव की दूरगामी पहल पर जिले में रागी मिशन की औपचारिक शुरुआत की गई थी। इस मिशन का मुख्य लक्ष्य किसानों को कम लागत में बेहतर आमदनी देना और जमीन की उर्वरा शक्ति के अनुकूल पारंपरिक फसलों की ओर लौटाना था। शुरुआत में सीमित क्षेत्र में शुरू हुआ यह अभियान देखते ही देखते हजारों किसानों के जुड़ाव का जरिया बन गया। स्थानीय स्तर पर उपज की खपत और मूल्य संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए जिले में एक आधुनिक रागी प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की गई, जिसने फसल को सीधे बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। मुफ्त बीज वितरण और महिलाओं की भागीदारी जिले में उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने के लिए किसानों को निःशुल्क रागी के उन्नत बीज वितरित किए जाते रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक किसान इस खेती को अपनाने के लिए प्रेरित हुए। उत्पादन बढ़ने के साथ ही मूल्य संवर्धन पर जोर दिया गया, जिससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिले। रागी प्रोसेसिंग यूनिट जिला मुख्यालय के जशपुर रोड पर स्थित रामनगर अथवा करौंदी बाजार समिति परिसर में संचालित की जा रही है। इस केंद्र के माध्यम से लगभग 120 ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर काम कर रही हैं। वे न केवल अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही हैं। पौष्टिक व्यंजनों की विस्तृत श्रृंखला और राष्ट्रीय मंच मौजूदा उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने गुमला के इन स्थानीय उत्पादों को अखिल भारतीय स्तर पर स्थापित करने और रागी की लोकप्रियता का दायरा बढ़ाने के लिए दिल्ली हाट में विशेष स्टॉल लगवाने की पहल की। एमवीएम बाघिमा पालकोट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड गुमला की अध्यक्ष भगवती देवी ने बताया कि वे सभी लगभग डेढ़ साल से कंपनी से जुड़कर इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। प्रसंस्करण इकाई में महिलाएं रागी से कई तरह के खाद्य उत्पाद तैयार करती हैं। इनमें रागी का शुद्ध आटा, लड्डू, भुजिया, ठेकुआ, बिस्कुट, नमकीन, निमकी, कुकीज, मिक्सचर और चिप्स शामिल हैं। दिल्ली हाट में प्रतिदिन लगभग 5 से 6 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की जा रही है, जिसमें रागी के लड्डू को खरीदार सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसका आप पर असर गुमला के रागी उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मांग स्थानीय अर्थव्यवस्था और शहरी उपभोक्ताओं के खानपान दोनों को प्रभावित करती है। • भारत में उपभोक्ताओं के लिए: दिल्ली हाट जैसी राष्ट्रीय प्रदर्शनियों के जरिए शहरों में रहने वाले लोगों को बिना मिलावट वाले पारंपरिक मोटे अनाज के ताजे और पौष्टिक उत्पाद सीधे उत्पादकों से खरीदने का मौका मिल रहा है। यह शहरी परिवारों को पैकेज्ड जंक फूड की जगह रागी के पौष्टिक लड्डू, बिस्कुट और नमकीन को अपनी दैनिक डाइट में शामिल करने का व्यावहारिक विकल्प देता है। • गुमला जिले में किसानों और महिलाओं के लिए: जिले की 120 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्थायी स्व-रोजगार मिला है और हजारों स्थानीय किसानों को अपनी फसल का सुनिश्चित बाजार मिल रहा है। मुफ्त बीज और प्रोसेसिंग यूनिट की सुविधा मिलने से छोटे किसान बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के अपनी सालाना आय में नियमित बढ़ोतरी कर पा रहे हैं। • सहकारी उत्पादक समूहों के लिए: किसान उत्पादक कंपनियों को राष्ट्रीय राजधानियों के बड़े हाट और व्यापार मेलों में सीधा मंच मिलने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है। इससे समूह के दैनिक कारोबार में 5 से 6 हजार रुपये की प्रत्यक्ष बिक्री दर्ज हो रही है, जिससे समूह की महिलाओं का वित्तीय मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है। • मोटे अनाज के उत्पादकों के लिए: पारंपरिक मोटे अनाजों के मूल्य संवर्धन से यह साबित हो गया है कि रागी को केवल आटे तक सीमित न रखकर भुजिया, ठेकुआ और चिप्स जैसे आधुनिक स्नैक्स में बदला जा सकता है। यह मॉडल देश भर के अन्य कृषि जिलों के लिए भी अपनी स्थानीय फसलों से आय बढ़ाने का एक व्यावहारिक खाका पेश करता है। ऐसा क्यों हुआ गुमला के रागी उत्पादों की इस सफलता के पीछे सुनियोजित प्रशासनिक पहल, मुफ्त कृषि इनपुट और महिला उत्पादक समूहों का मजबूत समन्वय रहा है। • रागी मिशन का सुनियोजित क्रियान्वयन: वर्ष 2022 में तत्कालीन उपायुक्त सुशांत गौरव ने जिले में रागी मिशन की नींव रखी, जिसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक मोटे अनाज की खेती से दोबारा जोड़ना था। किसानों को मुफ्त बीज देकर बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार किया गया, जिससे कच्चे माल की कमी दूर हो गई। • स्थानीय प्रसंस्करण इकाई की स्थापना: केवल फसल उगाने के बजाय उसके मूल्य संवर्धन पर ध्यान दिया गया, जिसके तहत रामनगर या करौंदी बाजार समिति परिसर में रागी प्रोसेसिंग यूनिट लगाई गई। इससे रागी को आटा, लड्डू, ठेकुआ, भुजिया और बिस्कुट जैसे तैयार उत्पादों में बदलना संभव हुआ। • राष्ट्रीय मंचों पर प्रशासनिक पहुंच: मौजूदा उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने इन ग्रामीण उत्पादों को स्थानीय सीमाओं से बाहर निकालकर राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए दिल्ली हाट में स्टॉल लगवाने की पहल की। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास वित्त निगम द्वारा आयोजित इस मेले ने गुमला के उत्पादों को देश भर के ग्राहकों तक सीधे पहुंचने का अवसर दिया। सवाल-जवाब 1. दिल्ली हाट में गुमला के रागी उत्पादों की प्रदर्शनी कब तक चलेगी? राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास वित्त निगम द्वारा आयोजित यह विशेष हाट नई दिल्ली के दिल्ली हाट में 31 जुलाई तक चलेगी। 2. गुमला में रागी मिशन की शुरुआत कब और किसके द्वारा की गई थी? गुमला में रागी मिशन की शुरुआत वर्ष 2022 में तत्कालीन उपायुक्त सुशांत गौरव की प्रशासनिक पहल पर की गई थी। 3. दिल्ली हाट में गुमला के स्टॉल पर कौन-कौन से उत्पाद उपलब्ध हैं? वहां रागी से तैयार शुद्ध आटा, लड्डू, ठेकुआ, भुजिया, बिस्कुट, नमकीन, निमकी, कुकीज, मिक्सचर और चिप्स उपलब्ध हैं, जिनमें रागी के लड्डू सबसे ज्यादा बिक रहे हैं। 4. दिल्ली हाट में इन उत्पादों की रोजाना कितनी बिक्री हो रही है? एमवीएम बाघिमा पालकोट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की अध्यक्ष भगवती देवी के अनुसार वहां प्रतिदिन लगभग 5 से 6 हजार रुपये की बिक्री हो रही है। 5. गुमला में रागी प्रोसेसिंग यूनिट कहां स्थित है और इससे कितनी महिलाएं जुड़ी हैं? यह यूनिट जशपुर रोड पर स्थित रामनगर/करौंदी बाजार समिति परिसर में संचालित है, जिससे लगभग 120 ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं। प्रेरणा और सबक गुमला की ग्रामीण महिलाओं और किसानों का यह सफर दिखाता है कि कैसे पारंपरिक खेती और संगठित प्रयास आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन सकते हैं। • पारंपरिक संसाधनों की ताकत पहचानें: जिन मोटे अनाजों को कभी पिछड़ा माना जाता था, आज वही सेहत और कारोबार का सबसे बड़ा जरिया बन चुके हैं। अपने पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों का सही इस्तेमाल करके बड़े अवसर बनाए जा सकते हैं। • कच्चे माल से आगे बढ़कर उत्पाद बनाएं: केवल फसल बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण करके लड्डू, नमकीन और बिस्कुट बनाने से उत्पाद की कीमत कई गुना बढ़ जाती है। मूल्य संवर्धन हमेशा आमदनी को सुरक्षित और टिकाऊ बनाता है। • सामूहिकता में बड़ी शक्ति होती है: एमवीएम कंपनी से जुड़ी 120 महिलाओं ने मिलकर एक ऐसा तंत्र खड़ा किया, जो आज राष्ट्रीय राजधानी में हजारों का कारोबार कर रहा है। आपसी सहयोग से छोटे कारीगर भी बड़े बाजारों में अपनी पहचान बना सकते हैं। https://trendkia.com/money/jharkhand-ke-mote-anaja-ki-delhi-men-dhuma-gumla-ki-gramina-mahilaon-ke-ragi-utpadon-ne-banaya-naya-bajara-51152 TrendKia — Har trend, sabse pehle.