कर्नाटक में नंदिनी दूध के दाम में 8 से 12 रुपये तक की बढ़ोतरी, 1 नवंबर से लागू होंगी नई दरें कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने फैट की मात्रा के आधार पर नंदिनी दूध की कीमतों में 8 से 12 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है। इस बढ़ोतरी में से 7 रुपये सीधे उत्पादक किसानों को मिलेंगे। कर्नाटक के आम परिवारों के घरेलू बजट पर 1 नवंबर से सीधा असर पड़ने जा रहा है, क्योंकि राज्य में लोकप्रिय नंदिनी दूध के खुदरा दामों में उल्लेखनीय वृद्धि प्रभावी हो रही है। कर्नाटक कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन ने विभिन्न प्रकार के पैकेटों पर फैट की गुणवत्ता और मात्रा के हिसाब से प्रति लीटर 8 रुपये से लेकर 12 रुपये तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस ताजा फेरबदल के बाद रसोई के मासिक खर्च के साथ-साथ चाय, कॉफी, दही, मक्खन, छाछ और देसी घी जैसे रोजमर्रा के उत्पादों की लागत भी सीधे तौर पर प्रभावित होगी। किसानों की आय में सुधार के लिए लिया गया कदम राज्य सरकार ने इस मूल्य संशोधन को डेयरी उत्पादकों के हित में उठाया गया कदम बताते हुए इसका बचाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि चालू वर्ष डेयरी किसानों के लिए काफी मुश्किलों भरा रहा है, इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति को सहारा देना आवश्यक हो गया था। बुनियादी स्तर पर की गई 8 रुपये की बढ़ोतरी में से 7 रुपये सीधे पशुपालक किसानों के पास जाएंगे। शेष 1 रुपये की राशि क्षेत्रीय दुग्ध यूनियनों को दी जाएगी ताकि वे अपने वितरण और परिचालन खर्चों को पूरा कर सकें। यह फैसला दुग्ध संघों, किसानों और फेडरेशन के बीच लंबी बातचीत के बाद लिया गया है। बेंगलुरु समेत प्रमुख शहरों में जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ इस फैसले का सबसे बड़ा प्रभाव उन परिवारों पर दिखाई देगा जो रोजाना ताजे दूध की खरीदारी करते हैं। विशेष रूप से बेंगलुरु जैसे घनी आबादी वाले महानगरीय केंद्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए सुबह का बजट अब पहले से ज्यादा भारी पड़ेगा। टोंड वेरिएंट की दर 46 रुपये प्रति लीटर से उछलकर अब 54 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। इसी तरह पाश्चुरीकृत और होमोजिनाइज्ड दूध की कीमत अब 47 रुपये से बढ़ाकर 56 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। फैट की मात्रा तय कर रही है नई खुदरा दरें प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह मूल्य वृद्धि केवल मात्रा के आधार पर नहीं, बल्कि दूध में मौजूद फैट के प्रतिशत को ध्यान में रखकर की गई है। प्रसंस्करण उद्योग में अधिक फैट वाले दूध से तैयार होने वाले उत्पादों का मूल्य अधिक होता है, जिसके चलते स्पेशल टोंड और शुभम जैसी श्रेणियों में यह बढ़ोतरी 12 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इन प्रीमियम किस्मों का दाम अब 52 रुपये से बढ़कर अधिकतम 64 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। क्षेत्रीय लागत के बावजूद सभी जगह एक समान दर फेडरेशन ने राज्यभर के उपभोक्ताओं के लिए एक समान मूल्य नीति बनाए रखने का निर्णय लिया है। चारे की उपलब्धता, स्थानीय उत्पादन की स्थिति और फैट के स्तर के कारण बेलगावी जैसे जिलों में खरीद लागत रामनगर की तुलना में अधिक बैठती है। सहकारी मॉडल की व्यवस्था के तहत इन क्षेत्रीय असमानताओं को आपस में संतुलित किया जाता है ताकि अंतिम खरीदार को हर इलाके में एक ही तय भाव पर उत्पाद मिल सके। इसका आप पर असर कर्नाटक के परिवारों के लिए दैनिक दूध खरीद पर प्रति लीटर 8 से 12 रुपये का सीधा अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। • कर्नाटक में: राज्यभर में 1 नवंबर से टोंड दूध 54 रुपये और प्रीमियम किस्में 64 रुपये प्रति लीटर तक मिलेंगी। रोज 2 लीटर दूध लेने वाले परिवारों का मासिक खर्च लगभग 480 से 720 रुपये बढ़ जाएगा। • डेयरी किसानों के लिए: प्रति लीटर होने वाली 8 रुपये की बुनियादी बढ़ोतरी में से 7 रुपये सीधे दुग्ध उत्पादकों को मिलेंगे। इससे कठिन आर्थिक दौर में मवेशी पालकों और ग्रामीण किसानों की नियमित आमदनी में सुधार होगा। • चाय-नाश्ता और होटल कारोबार पर: होटल और चाय की दुकानों पर दूध से बने पेय पदार्थों की लागत तुरंत बढ़ जाएगी। आने वाले दिनों में बाहर मिलने वाली चाय, कॉफी, लस्सी और मिठाइयों के दामों में वृद्धि संभव है। • डेयरी उत्पादों के खरीदारों के लिए: दही, छाछ, मक्खन और घी के उत्पादन में प्रयुक्त कच्चे माल की लागत बढ़ने से ये उत्पाद भी महंगे होंगे। पैकेट बंद डेयरी उत्पादों की खरीद योजना को दोबारा व्यवस्थित करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ कर्नाटक कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन ने डेयरी किसानों को राहत देने और विभिन्न दूध वेरिएंट्स में फैट की मात्रा के आधार पर लागत को संतुलित करने के लिए यह मूल्य वृद्धि की है। • किसानों की सहायता: चालू वर्ष में डेयरी उत्पादकों को भारी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। दूध उत्पादन की लागत बढ़ने के कारण किसानों को समर्थन देने के उद्देश्य से इस वृद्धि का बड़ा हिस्सा यानी 7 रुपये सीधे उन्हें देने का निर्णय लिया गया। • फैट का स्तर और प्रसंस्करण मूल्य: अधिक फैट वाले दूध से घी, मक्खन और अन्य प्रसंस्कृत वस्तुएं अधिक मात्रा में बनती हैं। इसी कारण विभिन्न किस्मों की दरों में फैट के अनुपात के अनुसार 8 से 12 रुपये प्रति लीटर का अंतर रखा गया है। • यूनियनों के परिचालन खर्च: वितरण, संकलन और प्रसंस्करण के खर्चों में हुई वृद्धि को पाटने के लिए प्रति लीटर 1 रुपये दुग्ध यूनियनों को आवंटित किया गया है। क्षेत्रीय दुग्ध संघों की वित्तीय स्थिति को स्थिर रखने के लिए यह आवश्यक माना गया। • क्षेत्रीय उत्पादन लागत में भिन्नता: बेलगावी और रामनगर जैसे जिलों के बीच चारे की उपलब्धता और उत्पादन परिस्थितियों के कारण खरीद खर्च में बड़ा अंतर था। इस लागत अंतर को पूरे राज्य में समान मूल्य बनाए रखकर सहकारी प्रणाली के जरिए संतुलित किया गया। सवाल-जवाब 1. नंदिनी दूध की बढ़ी हुई दरें कब से लागू हो रही हैं? नंदिनी दूध की नई दरें 1 नवंबर से पूरे कर्नाटक में लागू हो रही हैं। 2. प्रति लीटर दूध पर कुल कितनी कीमत बढ़ाई गई है? फैट की मात्रा के आधार पर दूध के विभिन्न पैकेटों पर 8 रुपये से 12 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। 3. इस मूल्य वृद्धि से किसानों को कितना हिस्सा मिलेगा? 8 रुपये की बुनियादी बढ़ोतरी में से 7 रुपये सीधे दूध उत्पादक किसानों को दिए जाएंगे, जबकि 1 रुपये दुग्ध संघों के परिचालन खर्च में जाएगा। 4. टोंड और होमोजिनाइज्ड दूध की नई कीमतें क्या हैं? टोंड दूध की कीमत 46 रुपये से बढ़कर 54 रुपये और होमोजिनाइज्ड दूध की कीमत 47 रुपये से बढ़कर 56 रुपये प्रति लीटर हो गई है। 5. स्पेशल टोंड और शुभम दूध के लिए उपभोक्ताओं को कितना भुगतान करना होगा? स्पेशल टोंड और शुभम दूध के दाम 52 रुपये से बढ़कर अब अधिकतम 64 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। 6. बेलगावी और रामनगर जैसे जिलों की खरीद लागत में क्या अंतर है? चारे की उपलब्धता और फैट सामग्री के कारण बेलगावी में दूध संकलन रामनगर की तुलना में अधिक खर्चीला है, जिसे सहकारी प्रणाली आपस में संतुलित करती है। https://trendkia.com/money/karnataka-men-nandini-dudha-ke-dama-men-8-se-12-rupaye-taka-ki-barhotari-1-navnbara-se-lagu-hongi-nai-daren-54615 TrendKia — Har trend, sabse pehle.