करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का इंतजार, चक्रवात अर्णव के असर से आसमान में बादलों का पहरा देशभर में 29 अक्टूबर को करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी का निर्जला व्रत रखा जा रहा है, जहां शाम को अर्घ्य देने के लिए चांद के दीदार की प्रतीक्षा की जा रही है। चक्रवात अर्णव के तटीय हिस्से से टकराने के बाद कई शहरों में बादलों के कारण चांद दिखने में देरी की आशंका बनी हुई है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को समूचे भारत में दो प्रमुख धार्मिक पर्व करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी श्रद्धाभाव से मनाए जा रहे हैं। सुहागिन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना के साथ पूरे दिन का निर्जला उपवास रख रही हैं। इसके साथ ही संकष्टी चतुर्थी पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश के उपासक भी दिनभर व्रत रखकर संध्याकालीन पूजा और चंद्र दर्शन की तैयारियों में जुटे हैं। इन दोनों ही पावन अनुष्ठानों का समापन रात को चंद्रमा के दर्शन और उन्हें विधिवत अर्घ्य समर्पित करने के बाद ही संपन्न होता है, जिसके चलते श्रद्धालु अपने-अपने शहरों में चंद्रोदय की घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग शहरों में चंद्र दर्शन पारंपरिक पंचांग की गणनाओं के आधार पर भारतीय भूभाग के विभिन्न अंचलों में चंद्रमा के आकाश पर प्रकट होने का समय अलग-अलग निर्धारित है। देश के पूर्वी छोर पर बसे महानगरों, जैसे कोलकाता और पटना में चंद्रमा अपेक्षाकृत काफी पहले दिखाई देगा। इसके विपरीत, पश्चिमी एवं दक्षिणी भारत के प्रमुख केंद्रों में शामिल मुंबई, पुणे और बेंगलुरु के निवासियों को अपनी पूजा संपन्न करने के लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। स्थानीय क्षितिज और भौगोलिक विस्तार के कारण विभिन्न इलाकों में चंद्रोदय की वास्तविक घड़ी में कुछ मिनटों का मामूली अंतर दर्ज हो सकता है। व्रत का पारण करने से पहले सभी श्रद्धालुओं को अपने विशिष्ट शहर और स्थानीय परिवेश के सटीक समय को ध्यान में रखकर ही अर्घ्य और पूजन की अंतिम व्यवस्थाएं बनानी चाहिए। पारंपरिक अनुष्ठान और दोनों व्रतों का धार्मिक महत्व करवा चौथ का पर्व मुख्य रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति के कल्याण और सुदीर्घ जीवन की मंगलकामना के निमित्त मनाया जाता है। इस कठोर साधना में अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। शाम ढलने के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए छलनी से चंद्रमा और फिर पति का मुख देखकर अर्घ्य अर्पित किया जाता है, जिसके पश्चात ही महिलाएं जल ग्रहण करके अपने उपवास का पारण करती हैं। दूसरी ओर, संकष्टी चतुर्थी का पावन दिन भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए समर्पित माना गया है। भक्तजन जीवन के संकटों के निवारण हेतु व्रत धारण करते हैं और विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। इस अनुष्ठान में भी चंद्र दर्शन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि चंद्रमा को विधिपूर्वक अर्घ्य दिए बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता। हर नगर में चांद के निकलने का समय भिन्न होने के कारण स्थानीय समय-सारिणी इस पूजा के लिए बेहद अहम बन जाती है। चक्रवात अर्णव के प्रभाव से दृश्यता पर संकट इस वर्ष कई क्षेत्रों में चंद्रमा का दीदार करना उतना सहज नहीं रहने वाला है। 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तटीय इलाकों को पार करने वाले चक्रवात अर्णव के चलते मौसम का मिजाज काफी बदल गया है। इस मौसमी उथल-पुथल की वजह से दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई अन्य हिस्सों में घने बादलों की आवाजाही और हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना पैदा हो गई है, जिसने व्रतियों की चिंता बढ़ा दी है। खगोलीय नियमों के मुताबिक किसी चक्रवाती तंत्र के बनने से चंद्रमा के वास्तविक उदय होने के समय में कोई बदलाव नहीं आता है। चंद्रोदय एक पूर्व निर्धारित खगोलीय परिघटना है, जो प्रत्येक स्थान के अक्षांश और देशांतर के आधार पर तय समय पर ही घटित होती है। हालांकि, चक्रवात के असर से उपजी धुंध, सघन बादल, वर्षा और कम दृश्यता के चलते चांद के क्षितिज पर आते ही तुरंत दिखाई देने में रुकावट पैदा हो सकती है। श्रद्धालुओं को अपनी संध्याकालीन पूजा की योजना बनाते वक्त स्थानीय मौसम और वायुमंडलीय दृश्यता की स्थितियों को जरूर ध्यान में रखना होगा। इसका आप पर असर देशभर में व्रत रखने वाले परिवारों को संध्याकालीन अर्घ्य और व्रत पारण के लिए अपने स्थानीय समय और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना होगा। • भारत में: पूर्वी शहरों में चंद्रमा पहले दिखेगा जबकि पश्चिमी और दक्षिणी भागों में थोड़ा विलंब होगा। व्रतियों को पंचांग के अनुसार अपने शहर के विशेष समय की पहले से पुष्टि कर लेनी चाहिए ताकि अनुष्ठान समय पर पूरे हो सकें। • दिल्ली-एनसीआर में: चक्रवात अर्णव के प्रभाव से आकाश में घने बादल और धुंध छाई रहने की आशंका है। इसके चलते चंद्रोदय के तय समय पर भी सीधा चांद देख पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं को क्षितिज की दृश्यता पर नजर रखनी होगी। • तटीय और बारिश प्रभावित इलाकों में: आंध्र प्रदेश और यानम तट के आसपास हालिया चक्रवात के कारण मौसम प्रतिकूल बना हुआ है। वहां रहने वाले परिवारों को खुले स्थानों की बजाय सुरक्षित या कवर्ड जगहों पर पूजा की वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखनी चाहिए। • समय योजना: चंद्रमा की वास्तविक स्थिति खगोलीय रूप से तय होती है, मगर मौसम दृश्यता घटा सकता है। व्रत खोलने वाली महिलाएं पूजा की थाली और अर्घ्य की तैयारी स्थानीय समय से पहले पूरी करके रख सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ 29 अक्टूबर को करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी का पर्व एक साथ पड़ने तथा चक्रवात अर्णव के चलते मौसम में अचानक बदलाव आने से यह स्थिति बनी है। • धार्मिक तिथियों का संयोग: हिंदू पंचांग की विशिष्ट खगोलीय गणनाओं के अनुसार 29 अक्टूबर को करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी दोनों की तिथियां एक साथ आई हैं। दोनों ही अनुष्ठानों में रात को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने का शास्त्रीय नियम अनिवार्य माना गया है। • भौगोलिक देशांतर का प्रभाव: भारत के विशाल भौगोलिक फैलाव के कारण पूर्व से पश्चिम तक सूर्योदय और चंद्रोदय के समय में क्रमिक अंतर रहता है। इसी वजह से कोलकाता और पटना जैसे पूर्वोत्तर नगरों में चंद्रमा मुंबई और बेंगलुरु जैसे पश्चिमी व दक्षिणी शहरों की तुलना में पहले उदित होता है। • चक्रवात अर्णव का असर: चक्रवात अर्णव ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तटीय क्षेत्रों को पार किया था। इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से उत्तरी और मध्य भारत के कई हिस्सों में नमी और घने बादलों का जमावड़ा हो गया, जिससे दृश्यता प्रभावित होने की संभावना बनी। सवाल-जवाब 1. 29 अक्टूबर 2026 को कौन से दो मुख्य व्रत रखे जा रहे हैं? इस दिन देशभर में करवा चौथ और भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। 2. करवा चौथ का व्रत किस प्रकार खोला जाता है? सुहागिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन कर और अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। 3. किन शहरों में चंद्रमा पहले दिखने की संभावना है? पूर्वी भारत के शहरों जैसे कोलकाता और पटना में चंद्रमा पश्चिमी और दक्षिणी शहरों की तुलना में पहले निकलेगा। 4. किन क्षेत्रों में चांद देखने के लिए अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है? मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे पश्चिमी एवं दक्षिणी शहरों के श्रद्धालुओं को चंद्र दर्शन के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। 5. चक्रवात अर्णव का प्रभाव किन क्षेत्रों के मौसम पर देखा गया है? 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम तट को पार करने वाले चक्रवात अर्णव के कारण दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बादल और बारिश के आसार बने हैं। 6. क्या चक्रवात के कारण चंद्रमा के निकलने का वास्तविक समय बदल जाता है? नहीं, चंद्रोदय एक खगोलीय घटना है जिसका वास्तविक समय नहीं बदलता, हालांकि बादलों और धुंध के कारण उसे सीधे देख पाना कठिन हो सकता है। https://trendkia.com/money/karwa-chauth-aura-sankashti-chaturthi-para-chndrodaya-ka-intajara-cyclone-arnab-ke-asara-se-asamana-men-badalon-ka-pahara-53114 TrendKia — Har trend, sabse pehle.