{
  "type": "article",
  "title": "कॉलेज की पढ़ाई और कंपनियों की जरूरत में बड़ा अंतर, युवाओं को एआई और आधुनिक कौशल से जोड़ेगी सरकार: निर्मला सीतारमण",
  "summary": "वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योगों की मांग के अनुसार युवाओं को तैयार करने के लिए पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्किलिंग को जोड़ने पर बल दिया है। उन्होंने छह महीने के लंबे प्रशिक्षण को कम करने और संसद में रचनात्मक बहस पर भी अपनी बात रखी।",
  "content": "देश के उद्योगों और उच्च शिक्षा हासिल करके निकलने वाले युवाओं के व्यावहारिक हुनर के बीच मौजूद फासले को पाटने के लिए सरकार अपने कौशल विकास अभियानों को नया विस्तार देने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों की सबसे बड़ी शिकायत यही रहती है कि डिग्री लेकर आ रहे नए कर्मचारियों को सीधे काम पर नहीं लगाया जा सकता। उन्हें तैयार करने के लिए कंपनियों को छह महीने से अधिक समय तक अलग से आंतरिक प्रशिक्षण देना पड़ता है। इस समय और संसाधन की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार स्कूली स्तर से लेकर तकनीकी और व्यावसायिक कॉलेजों तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और उद्योग-अनुकूल कौशल को अनिवार्य रूप से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।\n\nसोमवार को आयोजित एक नेतृत्व पुरस्कार समारोह में अपने विचार साझा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि रोजगार बाजार में कदम रख रहे युवाओं और उद्यमों की अपेक्षाओं के बीच एक स्पष्ट असंतुलन देखा गया है। उद्योग जगत के विभिन्न संगठन लंबे समय से यह चिंता जताते रहे हैं कि मौजूदा कॉलेज पाठ्यक्रम छात्रों को दफ्तरों और कारखानों की वास्तविक जरूरतों के हिसाब से तैयार नहीं कर पाते। जब तक यह खाई नहीं पटेगी, तब तक आर्थिक वृद्धि की गति को तेज करने और नई प्रतिभाओं को तुरंत उत्पादक बनाने में कठिनाई आएगी।\n\nकंपनियों की जरूरत और कॉलेज की डिग्री का अंतर\nव्यावसायिक दुनिया में कदम रखने वाले नए स्नातकों को लेकर उद्योग जगत का अनुभव यह रहा है कि सैद्धांतिक ज्ञान होने के बावजूद वे कार्यस्थल की व्यावहारिक तकनीकी चुनौतियों के लिए तुरंत तैयार नहीं होते। इसी वजह से कंपनियों को भर्ती के तुरंत बाद अपने स्तर पर छह महीने से भी ज्यादा लंबा बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना पड़ता है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इसी दूरी को खत्म करना चाहती है ताकि युवा अपनी औपचारिक पढ़ाई पूरी करते ही सीधे कार्यस्थल की जिम्मेदारियों को संभालने में सक्षम हो सकें।\n\nवित्त मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि पिछले दो केंद्रीय बजटों के माध्यम से कौशल विकास की कई नई योजनाएं और संरचनात्मक बदलाव शुरू किए जा चुके हैं। इन बजट प्रावधानों का मूल उद्देश्य यही रहा है कि प्रशिक्षण को सीधे तौर पर उन भूमिकाओं और मांगों से जोड़ा जाए जो आज के कार्यस्थलों में पैदा हो रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह पहल केवल पिछले दो बजटों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में सरकार इस मिशन को और अधिक व्यापक व आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने पर लगातार ध्यान केंद्रित करेगी।\n\nस्कूली शिक्षा और कॉलेजों में एआई को शामिल करने पर जोर\nवित्त मंत्री के अनुसार आधुनिक अर्थव्यवस्था में प्रौद्योगिकी का दखल तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शिक्षा व्यवस्था के हर स्तर पर शामिल किया जाना जरूरी हो गया है। आज केवल बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME इकाइयां भी अपनी उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए AI उपकरणों का सहारा ले रही हैं। जब छोटे और मंझोले कारोबार तकनीक की ओर बढ़ेंगे, तो उन्हें ऐसे कुशल कार्यबल की तत्काल आवश्यकता होगी जो इन उपकरणों को कुशलतापूर्वक संचालित कर सके।\n\nउन्होंने कहा कि जब तक स्कूल, डिग्री कॉलेज और पेशेवर संस्थान अपने नियमित पाठ्यक्रम में आधुनिक तकनीकी बदलावों और अतिरिक्त इनपुट को जगह नहीं देंगे, तब तक नई पीढ़ी को भविष्य के रोजगारों के अनुकूल बनाना संभव नहीं होगा। वित्त मंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि वे अपने शिक्षण मॉड्यूल को इस तरह पुनर्गठित करें जिससे छात्र कार्यस्थल के वास्तविक माहौल को समझ सकें और AI से जुड़े नए उभरते पदों पर अपनी सेवाएं देने के लिए पूरी तरह आत्मविश्वास से लैस हों।\n\nसंसदीय बहसों की गरिमा और राजनीतिक आचरण पर टिप्पणी\nकौशल विकास और शिक्षा नीति के साथ-साथ वित्त मंत्री ने देश के राजनीतिक माहौल और संसद की कार्यप्रणाली पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि विपक्ष के कुछ दल संसदीय चर्चाओं और गंभीर बहसों की तुलना में सड़क पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि लोकतंत्र में कानून बनाने और नीतियों की समीक्षा करने का सबसे उपयुक्त मंच संसद है, न कि सड़क पर की जाने वाली नारेबाजी।\n\nहाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने के उद्देश्य से विपक्ष की ओर से आयोजित किए गए प्रतीकात्मक या मॉक संसद सत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को दिखावटी सत्रों के बजाय वास्तविक सदन के भीतर स्वस्थ और तर्कपूर्ण बहस की जरूरत होती है। इस तरह के प्रतीकात्मक आयोजन विधायी चर्चाओं से देश का ध्यान भटकाते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि देश की जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत हर पांच साल में मतदान के जरिए सरकार का फैसला करती है और सत्ता परिवर्तन का यही एकमात्र संवैधानिक रास्ता है।\n\nसदन से वॉकआउट और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती\nलोकसभा में लगभग 100 सदस्यों वाले प्रमुख विपक्षी दल का नाम लिए बिना वित्त मंत्री ने कहा कि उस दल का रवैया सदन में टिककर सुनने और सार्थक संवाद करने का नहीं दिखता। जब भी सरकार किसी मुद्दे पर विस्तृत जवाब देने के लिए खड़ी होती है, तो विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले जाते हैं या वक्ताओं को बाधित करने की कोशिश करते हैं। यहां तक कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान के दौरान भी उनकी अनुपस्थिति देखी जाती है।\n\nवित्त मंत्री ने कहा कि विपक्ष की इस तरह की असंगत और अतार्किक कार्यशैली पर देश की आम जनता सवाल उठा रही है। संसद के भीतर जिम्मेदारी से भाग न लेने और केवल गतिरोध पैदा करने से देश में अस्थिरता का संदेश जाता है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने दोहराया कि सरकार युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और देश को मजबूत आर्थिक दिशा देने के लिए अपने प्रयास लगातार जारी रखेगी।\n\nइसका आप पर असर\nकॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों और नौकरी तलाश रहे युवाओं को अब डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल और एआई टूल्स सीखने पर प्राथमिकता देनी होगी।\n\n• नौकरी के अवसरों पर: डिग्री पूरी करने के बाद छह महीने की ट्रेनिंग के बजाय कंपनियां सीधे काम करने वाले युवाओं को वरीयता देंगी। इससे नए स्नातकों को तुरंत नौकरी मिलने और शुरुआती वेतन बेहतर होने में मदद मिलेगी।\n• छात्रों की पढ़ाई पर: स्कूलों और तकनीकी संस्थानों के पाठ्यक्रम में आधुनिक तकनीकी विषयों और व्यावहारिक इनपुट को शामिल किया जाएगा। छात्रों को किताबी ज्ञान के अलावा दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर और तकनीकों की वास्तविक समझ मिलेगी।\n• छोटे उद्योगों (MSME) पर: छोटे और मझोले कारोबारों को अपनी कार्यप्रणाली बेहतर बनाने के लिए पहले से प्रशिक्षित स्टाफ आसानी से मिल सकेगा। इससे उन्हें नए कर्मचारियों पर अलग से महीनों तक प्रशिक्षण खर्च नहीं करना पड़ेगा।\n• संसदीय व्यवस्था पर: सरकार की प्राथमिकताओं में बजट योजनाओं को तेजी से लागू करने और विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। इससे युवाओं के प्रशिक्षण से जुड़ी सरकारी योजनाओं को बिना रुकावट विस्तार मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह बयान उद्योग संगठनों द्वारा लगातार उठाई जा रही उन शिकायतों के बाद आया है जिनमें डिग्री धारकों के पास व्यावहारिक हुनर की कमी का उल्लेख किया गया था। सरकार तकनीकी प्रगति और कार्यस्थल की वास्तविक जरूरतों के बीच तालमेल बिठाने के लिए शिक्षा में बदलाव करना चाहती है।\n\n• सीधा कारण: कंपनियों द्वारा भर्ती के बाद नए कर्मचारियों को छह महीने से अधिक समय तक खुद प्रशिक्षित करने की मजबूरी को समाप्त करना इसका मुख्य कारण है। उद्योग संगठनों ने लगातार यह मुद्दा उठाया है कि कॉलेज से निकलने वाले छात्रों में आवश्यक कार्यकुशलता नहीं होती।\n• पृष्ठभूमि और हालात: छोटे और मझोले उद्योगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिससे नई तकनीकी भूमिकाएं पैदा हुई हैं। दूसरी तरफ पारंपरिक स्कूल और कॉलेज पाठ्यक्रम इन आधुनिक तकनीकों को अपने मुख्य अध्ययन में शामिल नहीं कर पाए थे।\n• पिछली पहल: सरकार ने पिछले दो केंद्रीय बजटों में उद्योग-उन्मुख कौशल विकास की नींव रखी थी जिसे अब और आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं की अपेक्षाओं और कंपनियों की जरूरतों के बीच का फासला पूरी तरह मिट जाए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कंपनियों को नए स्नातकों को लेकर सबसे बड़ी समस्या क्या आ रही है?\nकंपनियों का कहना है कि कॉलेज से डिग्री लेकर आ रहे युवाओं के पास व्यावहारिक हुनर की कमी होती है, जिसके कारण उन्हें छह महीने से अधिक समय तक आंतरिक प्रशिक्षण देना पड़ता है।\n\n2. शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने की सलाह क्यों दी गई?\nछोटे और बड़े सभी उद्योग अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें ऐसे प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता है जो इन उपकरणों के साथ काम कर सकें।\n\n3. कौशल विकास को लेकर सरकार ने पहले क्या कदम उठाए हैं?\nसरकार ने पिछले दो केंद्रीय बजटों के माध्यम से कौशल विकास की कई नई पहल शुरू की हैं और भविष्य में भी इन्हें विस्तार देने की योजना है।\n\n4. विपक्ष के आचरण को लेकर वित्त मंत्री ने क्या कहा?\nउन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में स्वस्थ बहस करने के बजाय सड़क प्रदर्शनों और प्रतीकात्मक सत्रों को अधिक प्राथमिकता दे रहा है, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित होता है।\n\n5. सदन में वॉकआउट को लेकर क्या टिप्पणी की गई?\nलगभग 100 सांसदों वाले विपक्षी दल के बारे में कहा गया कि वह बहस के दौरान उपस्थित नहीं रहता, जवाब के समय वॉकआउट करता है और मतदान में भाग नहीं लेता।",
  "url": "https://trendkia.com/money/koleja-ki-parhai-aura-knpaniyon-ki-jarurata-men-bara-antara-yuvaon-ko-ai-aura-adhunika-kaushala-se-joregi-sarakara-nirmala-sithara-55254",
  "category": "मनी",
  "publishedAt": "2026-11-02",
  "tags": [
    "निर्मला सीतारमण",
    "कौशल विकास",
    "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस",
    "रोजगार",
    "शिक्षा",
    "संसद"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia",
  "whatItMeansForYou": "कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों और नौकरी तलाश रहे युवाओं को अब डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल और एआई टूल्स सीखने पर प्राथमिकता देनी होगी।\n\n• नौकरी के अवसरों पर: डिग्री पूरी करने के बाद छह महीने की ट्रेनिंग के बजाय कंपनियां सीधे काम करने वाले युवाओं को वरीयता देंगी। इससे नए स्नातकों को तुरंत नौकरी मिलने और शुरुआती वेतन बेहतर होने में मदद मिलेगी।\n• छात्रों की पढ़ाई पर: स्कूलों और तकनीकी संस्थानों के पाठ्यक्रम में आधुनिक तकनीकी विषयों और व्यावहारिक इनपुट को शामिल किया जाएगा। छात्रों को किताबी ज्ञान के अलावा दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर और तकनीकों की वास्तविक समझ मिलेगी।\n• छोटे उद्योगों (MSME) पर: छोटे और मझोले कारोबारों को अपनी कार्यप्रणाली बेहतर बनाने के लिए पहले से प्रशिक्षित स्टाफ आसानी से मिल सकेगा। इससे उन्हें नए कर्मचारियों पर अलग से महीनों तक प्रशिक्षण खर्च नहीं करना पड़ेगा।\n• संसदीय व्यवस्था पर: सरकार की प्राथमिकताओं में बजट योजनाओं को तेजी से लागू करने और विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। इससे युवाओं के प्रशिक्षण से जुड़ी सरकारी योजनाओं को बिना रुकावट विस्तार मिलेगा।",
  "whyItHappened": "यह बयान उद्योग संगठनों द्वारा लगातार उठाई जा रही उन शिकायतों के बाद आया है जिनमें डिग्री धारकों के पास व्यावहारिक हुनर की कमी का उल्लेख किया गया था। सरकार तकनीकी प्रगति और कार्यस्थल की वास्तविक जरूरतों के बीच तालमेल बिठाने के लिए शिक्षा में बदलाव करना चाहती है।\n\n• सीधा कारण: कंपनियों द्वारा भर्ती के बाद नए कर्मचारियों को छह महीने से अधिक समय तक खुद प्रशिक्षित करने की मजबूरी को समाप्त करना इसका मुख्य कारण है। उद्योग संगठनों ने लगातार यह मुद्दा उठाया है कि कॉलेज से निकलने वाले छात्रों में आवश्यक कार्यकुशलता नहीं होती।\n• पृष्ठभूमि और हालात: छोटे और मझोले उद्योगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिससे नई तकनीकी भूमिकाएं पैदा हुई हैं। दूसरी तरफ पारंपरिक स्कूल और कॉलेज पाठ्यक्रम इन आधुनिक तकनीकों को अपने मुख्य अध्ययन में शामिल नहीं कर पाए थे।\n• पिछली पहल: सरकार ने पिछले दो केंद्रीय बजटों में उद्योग-उन्मुख कौशल विकास की नींव रखी थी जिसे अब और आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं की अपेक्षाओं और कंपनियों की जरूरतों के बीच का फासला पूरी तरह मिट जाए।",
  "questionsAndAnswers": [
    {
      "question": "कंपनियों को नए स्नातकों को लेकर सबसे बड़ी समस्या क्या आ रही है?",
      "answer": "कंपनियों का कहना है कि कॉलेज से डिग्री लेकर आ रहे युवाओं के पास व्यावहारिक हुनर की कमी होती है, जिसके कारण उन्हें छह महीने से अधिक समय तक आंतरिक प्रशिक्षण देना पड़ता है।"
    },
    {
      "question": "शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने की सलाह क्यों दी गई?",
      "answer": "छोटे और बड़े सभी उद्योग अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें ऐसे प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता है जो इन उपकरणों के साथ काम कर सकें।"
    },
    {
      "question": "कौशल विकास को लेकर सरकार ने पहले क्या कदम उठाए हैं?",
      "answer": "सरकार ने पिछले दो केंद्रीय बजटों के माध्यम से कौशल विकास की कई नई पहल शुरू की हैं और भविष्य में भी इन्हें विस्तार देने की योजना है।"
    },
    {
      "question": "विपक्ष के आचरण को लेकर वित्त मंत्री ने क्या कहा?",
      "answer": "उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में स्वस्थ बहस करने के बजाय सड़क प्रदर्शनों और प्रतीकात्मक सत्रों को अधिक प्राथमिकता दे रहा है, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित होता है।"
    },
    {
      "question": "सदन में वॉकआउट को लेकर क्या टिप्पणी की गई?",
      "answer": "लगभग 100 सांसदों वाले विपक्षी दल के बारे में कहा गया कि वह बहस के दौरान उपस्थित नहीं रहता, जवाब के समय वॉकआउट करता है और मतदान में भाग नहीं लेता।"
    }
  ]
}