लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बीच सोमवार को इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर गांधी जयंती की छुट्टी के बाद 5 अक्टूबर को शेयर बाजार खुलने जा रहा है, जहां बजाज फाइनेंस, डीमार्ट, यस बैंक और ऑटो कंपनियों के तिमाही आंकड़ों पर निवेशकों का ध्यान रहेगा। गांधी जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अवकाश रहने के पश्चात भारतीय इक्विटी बाजार सोमवार, 5 अक्टूबर को दोबारा कारोबार के लिए खुलने जा रहे हैं। घरेलू शेयर बाजार के लिए यह कारोबारी सत्र बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले सप्ताह दोनों प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 और सेंसेक्स लगातार आठवें हफ्ते कमजोरी दर्ज कर चुके हैं। गुरुवार के सत्र में निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत टूटकर 71,909.70 पर आ गया था। पिछले आठ हफ्तों के दौरान निफ्टी में लगभग 8.7 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 8.4 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। वैश्विक दबाव और ब्याज दरों के असर से कमजोर हुआ माहौल मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह ने बाजार की स्थिति पर अपनी बात रखी। रवि सिंह ने कहा, "भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों को हफ्ते के दौरान भारी दबाव का सामना करना पड़ा और उनकी गिरावट का सिलसिला लगातार आठवें हफ्ते तक खिंच गया, जो 25 वर्षों में इस तरह का सबसे लंबा दौर है।" सिंह ने आगे समझाया कि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में आई जोरदार तेजी बाजार में बिकवाली का मुख्य कारण रही। जब अमेरिका में जोखिम-मुक्त रिटर्न कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, तो विदेशी निवेशकों ने अधिक अस्थिरता वाले उभरते बाजारों से अपनी पूंजी निकालनी शुरू कर दी। इसके साथ ही वैश्विक मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों, भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू चिंताओं ने मिलकर पूरे बाजार के रुख को कमजोर कर दिया। साप्ताहिक आधार पर एनएसई निफ्टी 50 में 3.1 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स में 2.7 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। इस चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच 5 अक्टूबर के सत्र में कई खास कंपनियों के शेयरों पर हलचल देखने को मिल सकती है। बजाज फाइनेंस और बजाज हाउसिंग फाइनेंस के बड़े ऐलान सोमवार के कारोबारी सत्र में बजाज फाइनेंस का शेयर निवेशकों के केंद्र में रहेगा। कंपनी के निदेशक मंडल ने 17,500 करोड़ रुपये तक की भारी पूंजी जुटाने की योजना को हरी झंडी दिखाई है। इस पूंजी में 11,700 करोड़ रुपये क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) के माध्यम से जुटाए जाएंगे, जबकि 5,800 करोड़ रुपये प्रमोटर बजाज फिनसर्व को परिवर्तनीय वारंट जारी करके जुटाने का निर्णय लिया गया है। कंपनी ने इसके साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही का बिजनेस अपडेट भी साझा किया है। गुरुवार, 1 अक्टूबर को बजाज फाइनेंस का शेयर 1.16 प्रतिशत गिरकर 948.30 रुपये पर बंद हुआ था। इसी समूह की इकाई बजाज हाउसिंग फाइनेंस ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के मजबूत परिचालन आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। कंपनी का ग्रॉस डिस्बर्समेंट सालाना आधार पर 25.2 प्रतिशत बढ़कर 19,930 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस अवधि में कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.58 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि कुल लोन एसेट्स 1.40 लाख करोड़ रुपये के करीब दर्ज की गई हैं। खुदरा और बैंकिंग क्षेत्र: डीमार्ट, यस बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा डीमार्ट रिटेल चेन का संचालन करने वाली कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स के शेयरों में भी अच्छी हलचल देखने को मिल सकती है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अपने स्टैंडअलोन रेवेन्यू में सालाना आधार पर 18.4 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का परिचालन राजस्व पिछले वर्ष की समान तिमाही के 16,218.79 करोड़ रुपये से बढ़कर 19,206.18 करोड़ रुपये हो गया। वहीं पहली तिमाही के 18,343.49 करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें क्रमिक आधार पर 4.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 1 अक्टूबर को इस कंपनी का शेयर 3,830 रुपये पर बंद हुआ था। निजी क्षेत्र के ऋणदाता यस बैंक ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के प्रोविजनल बिजनेस आंकड़े जारी किए हैं। 30 सितंबर तक बैंक के अग्रिम (एडवांसेज) सालाना आधार पर 23.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 3.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए। इसी दौरान कुल जमा राशि (डिपॉजिट) 19.5 प्रतिशत बढ़कर 3.54 लाख करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, बैंक का कासा (CASA) अनुपात घटकर 30 प्रतिशत पर आ गया, जो जून तिमाही में 32.7 प्रतिशत और एक वर्ष पूर्व समान तिमाही में 33.7 प्रतिशत पर था। 1 अक्टूबर को यस बैंक का शेयर 20.70 रुपये पर बंद हुआ था। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी दूसरी तिमाही में अपने वैश्विक और घरेलू कारोबार में संतुलित प्रदर्शन की जानकारी दी है। 30 सितंबर तक बैंक का कुल ग्लोबल बिजनेस 17.45 प्रतिशत बढ़कर 32.64 लाख करोड़ रुपये रहा। बैंक के ग्लोबल एडवांसेज 18.27 प्रतिशत चढ़कर 15.12 लाख करोड़ रुपये और ग्लोबल डिपॉजिट 16.75 प्रतिशत बढ़कर 17.51 लाख करोड़ रुपये दर्ज किए गए। घरेलू मोर्चे पर बैंक की जमा राशि 17.01 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 14.88 लाख करोड़ रुपये और घरेलू अग्रिम 13.5 प्रतिशत बढ़कर 11.88 लाख करोड़ रुपये रहे। ऑटोमोबाइल और व्हीकल फाइनेंस कंपनियों की चाल वाहन निर्माता कंपनियों के शेयरों में सितंबर महीने के बिक्री आंकड़ों के बाद उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बजाज ऑटो पर कुछ दबाव नजर आ सकता है, क्योंकि सितंबर में कंपनी की कुल बिक्री 5,38,443 यूनिट रही, जिसमें सालाना आधार पर लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, घरेलू बाजार में बिक्री 9 प्रतिशत घटी, जबकि निर्यात में 32 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की गई। मारुति सुजुकी ने सितंबर में मजबूत बिक्री दर्ज की, जिसमें कुल बिक्री सालाना आधार पर 24 प्रतिशत और घरेलू पैसेंजर व्हीकल बिक्री 37 प्रतिशत बढ़ी। इसके बावजूद ऑटो सेक्टर के व्यापक दबाव के कारण गुरुवार को मारुति के शेयर में तेज गिरावट देखी गई थी। महिंद्रा एंड महिंद्रा के कुल ऑटोमोबाइल वॉल्यूम में सितंबर के दौरान 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 1,14,874 यूनिट रहा। लेकिन इसके उलट ट्रैक्टर की बिक्री 21 प्रतिशत घटकर 52,100 यूनिट पर सिमट गई, जो बाजार के अनुमान से काफी कमजोर रही। ट्रैक्टर बिक्री में कमजोरी के चलते गुरुवार को इस शेयर पर बिकवाली हावी रही थी। वहीं समूह की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज ने दूसरी तिमाही में बेहतर आंकड़े पेश किए हैं। कंपनी का डिस्बर्समेंट करीब 22 प्रतिशत बढ़कर लगभग 16,490 करोड़ रुपये और कुल बिजनेस एसेट्स 15 प्रतिशत चढ़कर लगभग 1.46 लाख करोड़ रुपये हो गईं। कंपनी की कलेक्शन एफिशिएंसी भी एक साल पहले के 96 प्रतिशत से सुधरकर 97 प्रतिशत दर्ज की गई। धातु क्षेत्र: हिंदुस्तान जिंक का उत्पादन अपडेट मेटल सेक्टर में हिंदुस्तान जिंक के शेयरों पर प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। कंपनी द्वारा घोषित दूसरी तिमाही के उत्पादन आंकड़ों के मुताबिक, माइन्ड मेटल का उत्पादन सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 271 किलोटन रहा। इसके अलावा बिक्री योग्य धातु का उत्पादन 7 प्रतिशत बढ़कर 264 किलोटन दर्ज किया गया। कंपनी का रिफाइंड जिंक उत्पादन 5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 212 किलोटन और रिफाइंड लेड उत्पादन 14 प्रतिशत की उछाल के साथ 51 किलोटन पर पहुंच गया। इस प्रकार सोमवार को विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों के तिमाही आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसका आप पर असर बाजार की लगातार आठ हफ्तों की गिरावट और कंपनियों के तिमाही आंकड़ों का सीधा असर खुदरा निवेशकों और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो पर पड़ेगा। • खुदरा निवेशकों पर असर: बाजार में जारी लगातार कमजोरी से इक्विटी पोर्टफोलियो के वैल्यूएशन में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में नए फैसले लेने के बजाय चुनिंदा कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन पर नजर रखनी चाहिए। • फंड जुटाने का असर: बजाज फाइनेंस द्वारा 17,500 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की योजना से कंपनी के पूंजी आधार को मजबूती मिलेगी। इसका असर भविष्य में कंपनी की ऋण वितरण क्षमता और शेयर प्रदर्शन पर देखने को मिल सकता है। • बैंकिंग ग्राहकों और जमाकर्ताओं पर असर: यस बैंक में कासा अनुपात घटकर 30 प्रतिशत पर आना बैंकिंग मार्जिन पर दबाव का संकेत देता है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा राशि 17.01 प्रतिशत बढ़ना ग्राहकों के स्थिर रुझान को दर्शाता है। • ऑटो खरीदारों और वाहन बाजार पर असर: सितंबर के आंकड़ों में पैसेंजर वाहनों की मजबूत मांग दिख रही है, जबकि ग्रामीण मांग को दर्शाने वाली ट्रैक्टर बिक्री कमजोर रही है। इससे आने वाले त्योहारी सीजन में डीलर डिस्काउंट और फाइनेंसिंग स्कीमों की दिशा तय होगी। ऐसा क्यों हुआ घरेलू इक्विटी बाजारों में लगातार आठ हफ्तों की गिरावट वैश्विक और घरेलू आर्थिक दबावों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। विदेशी पूंजी की निकासी और बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल ने बाजार के रुख को कमजोर किया है। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड कई वर्षों के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई। अमेरिका में जोखिम-मुक्त रिटर्न बढ़ने के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों ने उभरते बाजारों से अपनी पूंजी वापस खींच ली। • भू-राजनीतिक और मैक्रोइकॉनॉमिक तनाव: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक टकराव और व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता को घटा दिया। इसके चलते बेंचमार्क सूचकांकों में 25 वर्षों की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट दर्ज हुई। • कंपनियों के मिले-जुले तिमाही आंकड़े: दूसरी तिमाही के शुरुआती बिजनेस अपडेट्स में कुछ क्षेत्रों में अच्छी वृद्धि दिखी, लेकिन ट्रैक्टर बिक्री में गिरावट और बैंकों के कासा अनुपात में कमजोरी ने बाजार की चिंताओं को बनाए रखा। आने वाले दिनों में बाजार की चाल इन्हीं वित्तीय परिणामों और ब्याज दरों के रुख पर निर्भर करेगी। सवाल-जवाब 1. सोमवार, 5 अक्टूबर को बाजार पर दबाव क्यों रह सकता है? निफ्टी और सेंसेक्स लगातार आठ हफ्तों से गिरावट दर्ज कर रहे हैं, जो 25 वर्षों में सबसे लंबा दौर है। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में तेजी के कारण विदेशी पूंजी निकासी से बाजार दबाव में है। 2. बजाज फाइनेंस कितनी पूंजी जुटाने की योजना बना रहा है? बजाज फाइनेंस के बोर्ड ने कुल 17,500 करोड़ रुपये जुटाने को मंजूरी दी है, जिसमें 11,700 करोड़ रुपये QIP से और 5,800 करोड़ रुपये प्रमोटर को वारंट जारी कर जुटाए जाएंगे। 3. डीमार्ट की मूल कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स का राजस्व कितना बढ़ा? एवेन्यू सुपरमार्ट्स का स्टैंडअलोन रेवेन्यू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 18.4 प्रतिशत बढ़कर 19,206.18 करोड़ रुपये रहा। 4. यस बैंक के तिमाही अपडेट में क्या मुख्य बातें सामने आईं? यस बैंक के एडवांसेज 23.8 प्रतिशत बढ़कर 3.10 लाख करोड़ रुपये और डिपॉजिट 19.5 प्रतिशत बढ़कर 3.54 लाख करोड़ रुपये हो गए, लेकिन कासा अनुपात घटकर 30 प्रतिशत पर आ गया। 5. सितंबर महीने में ऑटो कंपनियों का प्रदर्शन कैसा रहा? मारुति सुजुकी की कुल बिक्री 24 प्रतिशत बढ़ी और महिंद्रा की कुल ऑटो बिक्री में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन महिंद्रा की ट्रैक्टर बिक्री 21 प्रतिशत घट गई और बजाज ऑटो की घरेलू बिक्री में 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। https://trendkia.com/money/lagatara-atha-haphton-ki-giravata-ke-bicha-somavara-ko-ina-sheyaron-para-rahegi-bajara-ki-najara-42889 TrendKia — Har trend, sabse pehle.