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  "type": "article",
  "title": "लगातार आठ हफ्तों की गिरावट से शेयर बाजार बेहाल, जानिए इस दौर में अपनी एसआईपी चालू रखें या बढ़ाएं निवेश",
  "summary": "निफ्टी 50 में लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बीच निवेशकों के सामने एसआईपी जारी रखने या नई पूंजी लगाने को लेकर असमंजस बना हुआ है। बाजार के ताजा आंकड़ों और रणनीतियों पर समझिए पूरा विश्लेषण।",
  "content": "घरेलू शेयर बाजार में लगातार दबाव गहराता जा रहा है, जहां प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 ने लगातार आठवें हफ्ते कमजोरी दर्ज की है। वैश्विक स्तर पर विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली, कच्चे तेल के दामों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जुड़ी आशंकाओं ने दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली का माहौल बना दिया है। ऐसे मुश्किल दौर में अपनी पूंजी को घटते देख म्यूचुअल फंड निवेशक इस उधेड़बुन में हैं कि वे अपनी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी को रोक दें, यथावत चालू रखें या फिर गिरे हुए स्तरों पर निवेश को और बढ़ा दें।\n\nगुरुवार के कारोबारी सत्र में भारी गिरावट और बाजार पूंजीकरण को झटका\nसप्ताह के कारोबारी दिन गुरुवार, 1 अक्टूबर को निफ्टी 50 लगभग 198 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर बीएसई सेंसेक्स तकरीबन 570 अंकों के नुकसान के साथ 71,909.70 पर आ गया। सत्र के दौरान अस्थिरता का आलम यह रहा कि निफ्टी गिरकर 22,200 के करीब इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया था, जबकि सेंसेक्स में दिन के दौरान 1,200 से अधिक अंकों का गोता देखा गया था।\n\nइस जोरदार बिकवाली के चलते एक ही दिन में निवेशकों के लगभग 8.7 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण स्वाहा हो गया। बाजार में घबराहट और उतार-चढ़ाव को मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स भी इस दौरान 16 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया, जो साफ दर्शाता है कि कारोबारी हलकों में अनिश्चितता किस कदर हावी हो चुकी है।\n\nरिकॉर्ड स्तर से फिसलन और व्यक्तिगत शेयरों में गहरी मार\nताजा गिरावट के बाद निफ्टी 50 अब जनवरी 2026 के अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड उच्च स्तर 26,373.20 से करीब 15 प्रतिशत नीचे आ चुका है। तकनीकी परिभाषा के मुताबिक भले ही मुख्य सूचकांक अभी औपचारिक मंदी यानी बेयर मार्केट के दायरे में न पहुंचा हो, लेकिन व्यक्तिगत शेयरों के स्तर पर यह करेक्शन कहीं अधिक क्रूर रहा है। निफ्टी 500 बास्केट में शामिल 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर अपने-अपने रिकॉर्ड स्तरों से कम से कम 30 प्रतिशत नीचे फिसल चुके हैं, जिसके कारण अधिकांश खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो गहरे लाल निशान में तब्दील हो चुके हैं।\n\nएसआईपी और रुपये की औसत लागत का मूल गणित\nबाजार की चाल चाहे जो भी हो, एक अनुशासित एसआईपी निवेशकों को हर महीने या नियमित अंतराल पर एक तय रकम निवेश करने की सुविधा देती है। जब शेयर बाजार गिरता है और म्यूचुअल फंड योजनाओं की एनएवी नीचे आती है, तब उसी बंधी हुई रकम में निवेशकों को ज्यादा यूनिट्स अलॉट होती हैं। इस वित्तीय प्रक्रिया को रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है, जो समय के साथ निवेशक की कुल खरीद लागत को कम करने में मददगार साबित होती है।\n\nइंक्रेड मनी में म्यूचुअल फंड के सीईओ नितिन अग्रवाल के अनुसार, बाजार में गिरावट का यह दौर निवेशकों के धैर्य की परीक्षा लेता है और जो इस असहजता को झेलते हैं, बाजार अंततः उन्हें ही पुरस्कृत करता है। नितिन अग्रवाल ने कहा, \"You are not losing money on your SIP, you are buying more units at lower prices. That is not a problem; that is the mechanism working as intended.\"\n\nहालांकि निवेशकों को यह बात भी भली-भांति समझनी चाहिए कि रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग कभी भी गारंटीड रिटर्न का वादा नहीं करती और न ही नुकसान को पूरी तरह रोक सकती है। अगर बाजार में सुस्ती या मंदी लंबे समय तक खिंचती है, तो पोर्टफोलियो का मूल्य और भी घट सकता है। इसलिए निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर ही कोई कदम उठाना चाहिए।\n\nक्या चालू एसआईपी को बनाए रखना समझदारी है?\nजिन निवेशकों के पास नियमित आय का स्रोत है, जिन्होंने आपात स्थिति के लिए पर्याप्त इमरजेंसी फंड तैयार कर रखा है और जिनका निवेश क्षितिज दीर्घावधि का है, उनके लिए मौजूदा एसआईपी जारी रखना अनुशासन का सर्वोत्तम प्रमाण है। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव या गिरावट के डर से निवेश रोकना भविष्य के बड़े कॉर्पस को चोट पहुंचा सकता है। नियमित निवेश की बदौलत मुश्किल समय में खरीदी गई सस्ती यूनिट्स बाजार में सुधार आने पर सबसे तेज गति से मुनाफा बनाती हैं।\n\nक्या मौजूदा स्तरों पर निवेश की रकम बढ़ानी चाहिए?\nमौजूदा एसआईपी को जारी रखने के अलावा कई निवेशक यह भी सोच रहे हैं कि क्या अतिरिक्त पूंजी झोंकने का यह सही समय है। जानकारों का मानना है कि इसके लिए व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति का अलग से आकलन किया जाना चाहिए।\n\nनितिन अग्रवाल का कहना है कि जिनके पास अधिशेष पूंजी मौजूद है, पर्याप्त इमरजेंसी फंड सुरक्षित है और जिनका निवेश का नजरिया कम से कम पांच साल या उससे अधिक का है, उनके लिए आठ हफ्ते की गिरावट कोई संकट नहीं बल्कि एक शानदार प्रवेश अवसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार कभी भी दोनों दिशाओं में सीधी रेखा में नहीं चलते, इसलिए आठ हफ्ते की लगातार गिरावट का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि नौवां हफ्ता भी नकारात्मक ही रहेगा।\n\nबाजार में मचे घमासान के पीछे के प्रमुख कारण\nशेयर बाजार में पिछले दो महीनों से जारी इस तेज गिरावट के तार कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जुड़े हुए हैं\n\n• अमेरिका और ईरान का टकराव: अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव और अनिर्णायक राजनयिक बातचीत वैश्विक बाजारों में निरंतर अनिश्चितता और भारी अस्थिरता पैदा कर रही है।\n• विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय इक्विटी से लगातार धन निकाल रहे हैं। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों के दौरान एफपीआई ने भारतीय इक्विटी से लगभग 2.50 ट्रिलियन रुपये निकाले हैं, जबकि इसी अवधि में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 6.28 ट्रिलियन रुपये का निवेश किया। सितंबर के महीने में ही विदेशी निवेशकों ने एक्सचेंजों के जरिए 45,536 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिसमें से 20,128 करोड़ रुपये की निकासी केवल दो कारोबारी सत्रों में की गई। इस निकासी का सबसे गहरा असर लार्ज-कैप शेयरों पर देखा गया है।\n• अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 5.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अमेरिकी बॉन्ड पर आकर्षक प्रतिफल मिलने की वजह से विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों के शेयर कम आकर्षक हो गए हैं।\n• रुपये में कमजोरी और घरेलू यील्ड: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 96.50 रुपये के स्तर तक गिर गया है। इसके साथ ही भारत की 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड भी बढ़कर 7.1 प्रतिशत के पार निकल गई है।\n• सख्त मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का डर: महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच बाजार प्रतिभागी सख्त मौद्रिक नीति को लेकर चिंतित हैं। अक्टूबर की नीतिगत बैठक में संभावित ब्याज दर वृद्धि की आशंकाओं ने भी 1 अक्टूबर को बिकवाली के दबाव को तेज किया है।\n\nकरेक्शन के समय निवेशक अक्सर करते हैं ये तीन बड़ी गलतियां\nगिरावट के दौर में भावनात्मक दबाव में आकर निवेशक अक्सर ऐसे फैसले ले बैठते हैं जो उनके वित्तीय भविष्य को नुकसान पहुंचाते हैं। नितिन अग्रवाल ने निवेशकों की तीन सबसे आम गलतियों को रेखांकित किया है।\n\nउनके अनुसार, पहली सबसे बड़ी गलती एसआईपी को बीच में ही रोक देना है। एसआईपी की ताकत रुपये की औसत लागत से आती है और यह तंत्र तभी काम करता है जब आप मंदी के समय भी बाजार में बने रहें। दूसरी गलती पोर्टफोलियो को बार-बार और हर दिन जांचना है। गिरावट के दौरान रोजाना एनएवी देखना केवल घबराहट बढ़ाता है, जबकि मासिक आधार पर पोर्टफोलियो देखने वाला निवेशक कम भावुक निर्णय लेता है।\n\nतीसरी गलती का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार से बाहर निकलने के बाद दोबारा प्रवेश करने के लिए सही समय का इंतजार करना घातक साबित होता है। जो निवेशक करेक्शन के दौरान बिकवाली करके बाहर निकल जाते हैं, वे लगभग हमेशा वापसी करने में बहुत देर कर देते हैं। नितिन अग्रवाल के मुताबिक, सफल निवेशक वे नहीं होते जो बाजार के सबसे निचले स्तर का सटीक अनुमान लगाते हैं, बल्कि वे होते हैं जो घबराहट में महंगी गलतियां करने से बचते हैं।\n\nछुट्टी का लंबा सप्ताहांत और रणनीतिक समीक्षा का मौका\nगांधी जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहेगा। इसके चलते निवेशकों को तीन दिन का लंबा सप्ताहांत मिलेगा, जिसमें वे बिना किसी कारोबारी हलचल के अपने पोर्टफोलियो की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण कर सकते हैं और अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं की जांच कर सकते हैं। शेयर बाजार में सामान्य ट्रेडिंग अब सोमवार, 5 अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी।\n\nइसका आप पर असर\nलगातार आठ हफ्तों की गिरावट और भारी बिकवाली का सीधा असर खुदरा म्यूचुअल फंड और इक्विटी निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ रहा है।\n\n• एसआईपी निवेशकों के लिए: मासिक एसआईपी रोकने की बजाय चालू रखने पर निवेशकों को घटी हुई एनएवी पर अधिक यूनिट्स मिलेंगी। लंबी अवधि में बाजार सुधरने पर यही सस्ती यूनिट्स पोर्टफोलियो की कुल लागत घटाकर बेहतर रिटर्न दिलाती हैं।\n• अतिरिक्त पूंजी वाले निवेशकों के लिए: यदि आपके पास पांच साल या उससे अधिक का नजरिया और आपातकालीन फंड है, तो यह चरण चरणबद्ध तरीके से निवेश बढ़ाने का मौका है। एकमुश्त बड़ी रकम लगाने की बजाय गिरावट के दौरान छोटी-छोटी किश्तों में खरीदारी करना फायदेमंद हो सकता है।\n• पोर्टफोलियो निगरानी पर: रोजाना अपने डीमैट या म्यूचुअल फंड बैलेंस की जांच करने से बचें क्योंकि यह केवल मानसिक तनाव बढ़ाता है। महीने में केवल एक बार समीक्षा करने से घबराहट में यूनिट्स बेचने जैसी महंगी गलतियों से बचा जा सकता है।\n• घरेलू अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों पर: 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 7.1 प्रतिशत पार जाने और रुपये के 96.50 प्रति डॉलर तक फिसलने से कर्ज महंगा होने की आशंका बढ़ गई है। आगामी मौद्रिक नीति बैठक में संभावित ब्याज दर वृद्धि आम लोगों के होम और ऑटो लोन की ईएमआई पर दबाव डाल सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nशेयर बाजार में लगातार आठ हफ्तों की कमजोरी किसी एक घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर वैश्विक और घरेलू दबावों का संयुक्त परिणाम है।\n\n• भू-राजनीतिक तनाव और कच्चा तेल: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व कूटनीतिक तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। इस अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे भारत जैसे आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।\n• विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली: 2026 के पहले नौ महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से लगभग 2.50 ट्रिलियन रुपये निकाल लिए हैं, जिसमें सितंबर के दौरान 45,536 करोड़ रुपये की बिकवाली शामिल है। अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड के बढ़कर 5.3 प्रतिशत पर पहुंचने से विदेशी पूंजी भारत जैसे उभरते बाजारों से निकलकर सुरक्षित अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर जा रही है।\n• मुद्रा अवमूल्यन और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 96.50 के कमजोर स्तर तक फिसल गया है और भारत की बॉन्ड यील्ड 7.1 प्रतिशत को पार कर गई है। लगातार बनी हुई महंगाई के कारण अक्टूबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं ने भी निवेशकों की घबराहट और बिकवाली को तेज कर दिया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. निफ्टी 50 अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से कितना गिर चुका है?\nनिफ्टी 50 जनवरी 2026 के अपने 26,373.20 के रिकॉर्ड इंट्राडे उच्च स्तर से लगभग 15 प्रतिशत नीचे आ चुका है।\n\n2. गुरुवार 1 अक्टूबर को बाजार पूंजीकरण को कितना नुकसान हुआ?\n1 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली के दौरान निवेशकों के लगभग 8.7 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण इंट्राडे स्वाहा हो गया।\n\n3. क्या बाजार गिरावट के समय एसआईपी बंद कर देनी चाहिए?\nविशेषज्ञों के अनुसार गिरावट के समय एसआईपी बंद करना सबसे नुकसानदेह फैसला है, क्योंकि इस दौर में रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग के जरिए कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।\n\n4. 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कितनी बिकवाली की है?\nसाल 2026 के पहले नौ महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.50 ट्रिलियन रुपये की निकासी की है।\n\n5. गांधी जयंती के बाद शेयर बाजार में कारोबार कब शुरू होगा?\nशुक्रवार 2 अक्टूबर को गांधी जयंती की छुट्टी के बाद शेयर बाजारों में सामान्य ट्रेडिंग सोमवार 5 अक्टूबर से शुरू होगी।",
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  "publishedAt": "2026-10-01",
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