लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे के भाव ने तोड़े सभी पुराने रिकॉर्ड, भारी कमी और अमेरिकी नीतियों ने बढ़ाई हलचल लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। वैश्विक स्तर पर मेटल की भारी कमी और अमेरिकी टैरिफ नीतियों की आशंका के चलते बाजार में यह तेजी देखी जा रही है। वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है और लंदन मेटल एक्सचेंज पर यह धातु अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिका के बाहर मेटल की उपलब्धता को लेकर निवेशकों और व्यापारियों की बढ़ती चिंता इस रिकॉर्ड तेजी की मुख्य वजह बन रही है। इसके साथ ही, कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी डॉलर में कारोबार होने वाली कमोडिटीज को मजबूत समर्थन दिया है, जबकि अमेरिकी व्यापार और टैरिफ नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण बाजार का पूरा ध्यान इसी धातु पर केंद्रित हो गया है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर नया रिकॉर्ड लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क तांबा उछलकर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के स्तर पर पहुंच गया, जिसने जनवरी महीने में बने 14,527.50 डॉलर के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि बाद में कारोबार के दौरान इस अनुबंध में थोड़ी नरमी आई और यह 1515 GMT पर 14,518 डॉलर पर कारोबार करता नजर आया, लेकिन इसके बावजूद यह दिनभर के मुकाबले 0.7 फीसदी की बढ़त के साथ बना रहा। अमेरिका में छुट्टी और वैश्विक सूची का असर अमेरिका में अवकाश होने के कारण व्यापारिक गतिविधियों के अपेक्षाकृत सुस्त रहने की उम्मीद थी, लेकिन इसके बावजूद बेस मेटल्स सेगमेंट में तांबा और जिंक सबसे बड़े मूवर्स के रूप में उभरे क्योंकि व्यापारियों ने वैश्विक स्तर पर असमान इन्वेंट्री के प्रभावों का आकलन किया। तांबे में आई इस ताजा तेजी की मुख्य वजह वैश्विक मांग में अचानक आया कोई बड़ा उछाल नहीं, बल्कि उपलब्ध मेटल की भौगोलिक स्थिति में हो रहा बदलाव है। अमेरिकी टैरिफ और वेयरहाउस में भंडारण जब डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल फरवरी में पहली बार आयात शुल्क की संभावना का संकेत दिया था, तभी से भारी मात्रा में तांबे को अमेरिका की ओर भेजा जाने लगा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि इस आवाजाही के परिणामस्वरूप अमेरिकी गोदामों में तांबे का भारी स्टॉक जमा हो चुका है। कॉमेक्स तांबा इन्वेंट्री अब बढ़कर रिकॉर्ड 766,795 शॉर्ट टन यानी लगभग 695,624 मीट्रिक टन पर पहुंच गई है। हालांकि अमेरिका में आपूर्ति का भारी ढेर लग गया है, लेकिन अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में स्टॉक कम हो गया है, जिससे भौतिक बाजार में असंतुलन गहराता जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में तांबे की अहमियत अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर बनी अनिश्चितता तांबे के बाजार के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण बन चुकी है क्योंकि यह धातु कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी है। विनिर्माण, निर्माण, बिजली के बुनियादी ढांचे, इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में तांबे का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। यही वजह है कि टैरिफ की उम्मीदों के कारण संभावित आयात प्रतिबंधों के प्रभावी होने से पहले व्यापारी मेटल को अमेरिका ले जाने की कोशिश करते हैं, जिसे एहतियाती स्टॉकपलिंग कहा जाता है। इस तरह के प्रवाह से अन्य बाजारों से मेटल अस्थायी रूप से खिंच सकता है, जिससे क्षेत्रीय उपलब्धता और तंग हो जाती है। भौतिक उपलब्धता और बाजार की संरचना तांबे के वायदा अनुबंधों की संरचना से यह संकेत मिल रहा है कि बाजार को निकट भविष्य में आपूर्ति की तंगी का सामना करना पड़ रहा है। पास के तांबे के अनुबंध बाद की तारीख के अनुबंधों की तुलना में प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, जिसे बाजार की भाषा में बैकवर्डेशन कहा जाता है। यह स्थिति आम तौर पर यह दर्शाती है कि खरीदार भविष्य की डिलीवरी की तुलना में तत्काल आपूर्ति को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। रद्द वारंट और गोदामों का हाल प्रांप्ट प्रीमियम में बढ़ोतरी के कारण कुछ मेटल वापस लंदन मेटल एक्सचेंज के गोदामों में लौटने लगे हैं, लेकिन इस सामग्री का एक बड़ा हिस्सा वहां से बाहर निकाले जाने के लिए चिह्नित है। रद्द वारंट, जो यह दर्शाते हैं कि मेटल एक्सचेंज के गोदामों से बाहर जाने वाला है, लंदन मेटल एक्सचेंज के तांबे के स्टॉक का 51% हिस्सा थे। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले हफ्तों में 121,000 टन से अधिक तांबा गोदाम प्रणाली से बाहर जा सकता है। अगस्त का प्रीमियम और चीनी बाजारों का प्रभाव अगस्त के महीने में तात्कालिक आपूर्ति पर दबाव उस समय और अधिक स्पष्ट हो गया जब तीन महीने के अनुबंध पर कैश कॉपर का प्रीमियम 430 डॉलर प्रति टन से अधिक हो गया, जो 2021 के बाद से सबसे ऊंचा स्तर था। हालांकि शुक्रवार तक यह प्रीमियम घटकर करीब 74 डॉलर रह गया था, फिर भी बाजार गोदामों के स्टॉक और भौतिक उपलब्धता में होने वाले बदलावों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। इसके अलावा, शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज द्वारा निगरानी किए जाने वाले गोदामों में तांबे का स्टॉक लगभग 63,000 टन पर है, जो मार्च के मध्य के स्तर से 85% की भारी गिरावट को दर्शाता है और जनवरी 2024 के बाद से सबसे कम स्तर पर पहुंच गया है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तांबा उपभोक्ता है, इसलिए इसके गोदामों में होने वाले बदलाव वैश्विक व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक हैं। इसका आप पर असर तांबे की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का सीधा असर विनिर्माण, निर्माण और बिजली उपकरणों से जुड़े उद्योगों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। • भारत में: कच्चे माल के रूप में तांबे के महंगे होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, केबल और वाहन निर्माण लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंततः ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। • वैश्विक बाजार में: वैश्विक स्तर पर भौतिक उपलब्धता में असंतुलन के कारण निर्माताओं को आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों और उच्च लागत का सामना करना पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबा किस रिकॉर्ड कीमत पर पहुंचा? लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क तांबा उछلकर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 2. तांबे की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह क्या है? अमेरिका के बाहर मेटल की उपलब्धता को लेकर चिंता, अमेरिकी टैरिफ नीतियों की अनिश्चितता और घटती इन्वेंट्री इस तेजी की मुख्य वजह हैं। 3. कॉमेक्स गोदामों में तांबे का स्टॉक कितना पहुंच गया है? कॉमेक्स तांबा इन्वेंट्री बढ़कर रिकॉर्ड 766,795 शॉर्ट टन यानी लगभग 695,624 मीट्रिक टन हो गई है। 4. शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के गोदामों में स्टॉक की क्या स्थिति है? शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के गोदामों में तांबे का स्टॉक लगभग 63,000 टन है, जो मार्च के मध्य से 85% की गिरावट दर्शाता है। https://trendkia.com/money/lndana-metal-eksachenja-para-tanbe-ke-bhava-ne-tore-sabhi-purane-rikorda-bhari-kami-aura-ameriki-nitiyon-ne-barhai-halachala-29284 TrendKia — Har trend, sabse pehle.