एमसीएक्स पर सोने और चांदी में भारी गिरावट, कच्चे तेल में तेजी और ब्याज दरों की आशंका से फिसली कीमती धातुएं घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। कच्चे तेल में उछाल, बॉन्ड यील्ड और आगामी नीतिगत फैसलों के दबाव के बीच एमसीएक्स पर चांदी करीब 1,300 रुपये और सोना 492 रुपये टूटा। घरेलू और वैश्विक कमोडिटी बाजारों में बुधवार को कीमती धातुओं पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जिससे भारतीय वायदा बाजार में सोना और चांदी दोनों ही महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में लगभग 1,300 रुपये अथवा 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसका भाव 2,25,966 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ गया। कारोबार के दौरान चांदी गिरकर 2,25,651 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गई थी। इस तेज गिरावट के साथ चांदी अपने उस 2.28 लाख रुपये के स्तर से नीचे आ गई, जिसे उसने बॉन्ड यील्ड की तेजी थमने के बाद बीते दिन छुआ था। ठीक इसी तरह एमसीएक्स पर सोने के वायदा भाव में 492 रुपये या 0.33 प्रतिशत की नरमी आई और यह 1,49,628 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा। कारोबार के दौरान सोने का न्यूनतम स्तर 1,49,505 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इस गिरावट के बाद सोना भी बीते सत्र के 1.50 लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से नीचे लुढ़क गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचे भाव वैश्विक बुलियन बाजार का सीधा असर भारतीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुधवार के शुरुआती कारोबार में हाजिर सोना 0.50 प्रतिशत टूटकर 4,144 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि कुछ देर बाद यह 0.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,145 डॉलर प्रति औंस के आसपास संघर्ष करता नजर आया। इसी तरह हाजिर चांदी में 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 60.86 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क गई, जबकि दिन के कारोबार में यह 60.9 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर टिकी रही। दोनों ही कीमती धातुएं अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं। तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व से आपूर्ति जोखिमों के कारण महंगाई की चिंताएं दोबारा बढ़ रही हैं, जिससे सोने और चांदी की पिछली बढ़त पूरी तरह खत्म हो गई है। कच्चे तेल में उछाल और मध्य पूर्व का तनाव कमोडिटी बाजार में इस उथल-पुथल की एक बड़ी वजह ऊर्जा बाजार में आया उछाल है। कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत की तेजी आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने का डर बना हुआ है। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड का भाव 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर जोखिम पैदा कर दिए हैं। हाल के दिनों में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हमले तेज किए हैं, वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब की सेना और हूती विद्रोहियों के बीच लगातार सैन्य संघर्ष जारी है। तेल में इस तेजी ने मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व के मिनट्स पर नजर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगातार कई दशकों के उच्च स्तर के करीब बनी हुई है। लगातार बनी हुई महंगाई, बढ़ते वित्तीय जोखिम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े भारी कर्ज जारी होने के कारण ट्रेजरी यील्ड में दबाव बना हुआ है। हालांकि, अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड अपनी हालिया तेजी पर ब्रेक लगाते हुए 5.26 प्रतिशत के आसपास कारोबार कर रही है, जो अपने 24 साल के उच्चतम स्तर 5.33 प्रतिशत से थोड़ी नीचे आई है। इसके बावजूद, चालू वर्ष में अब तक अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 110 आधार अंक यानी बेसिस प्वाइंट्स बढ़ चुकी है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर नीतिगत दरों में आगे और बढ़ोतरी करने का दबाव बरकरार है। इस बीच अमेरिकी डॉलर 102 के स्तर के आसपास स्थिर बना हुआ है। बाजार इस समय इस बात की लगभग 80 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों को स्थिर रखेगा। इसके पीछे सितंबर में उम्मीद से कमजोर रोजगार वृद्धि और पिछले दो महीनों के पेरोल आंकड़ों में की गई नीचे की ओर समीक्षा मुख्य वजह है। हालांकि, निवेशक बुधवार को जारी होने वाले सितंबर मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मॉर्निंगस्टार के अनुसार, यह मिनट्स अत्यधिक महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि इनसे सितंबर में फेडरल फंड्स रेट में की गई 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के पीछे केंद्रीय बैंक की सोच और तर्क स्पष्ट होंगे। आरबीआई मौद्रिक नीति समिति का फैसला और दर वृद्धि की आशंका घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी बुधवार को अक्टूबर 2026 की नीतिगत घोषणाएं करने जा रही है। चुनौतीपूर्ण व्यापक आर्थिक माहौल, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड के कारण केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत फैसला लेना काफी पेचीदा साबित हो रहा है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी या यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय वित्तीय बाजारों, बचत, कर्ज और विशेष रूप से खुदरा महंगाई पर व्यापक असर डालेगा। बाजार का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की राह पर चलते हुए 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि की घोषणा कर सकता है, जिससे उसका पिछले 11 महीनों से चला आ रहा नरम रुख खत्म हो जाएगा। जीएसटी काउंसिल की बैठक में सोने-चांदी के आयात नियमों पर बड़ा प्रस्ताव कीमती धातुओं के आयात को लेकर घरेलू स्तर पर नीतिगत बदलाव की भी तैयारी चल रही है। जीएसटी काउंसिल 8 अक्टूबर को होने वाली अपनी बैठक में सरकारी नामित एजेंसियों को मिलने वाले तरजीही कर लाभ को समाप्त करने पर विचार कर रही है। इसमें एमएमटीसी और स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एसटीसी जैसी प्रमुख एजेंसियां शामिल हैं, जिन्हें सोने और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर विशेष छूट मिलती रही है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य बैंकों, नामित एजेंसियों और बुलियन एक्सचेंजों को एक समान कर ढांचे के दायरे में लाना है। वर्तमान व्यवस्था के तहत बैंक और कुछ नामित एजेंसियां कीमती धातुओं के आयात पर 3 प्रतिशत जीएसटी चुकाती हैं, जबकि कुछ एजेंसियों को 2017 से लागू विशेष छूटों का फायदा मिलता रहा है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो देश में सर्राफा आयात की लागत और व्यापार संरचना में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। इसका आप पर असर सोने-चांदी में आई गिरावट और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम खरीदारों, निवेशकों और कर्जदारों की जेब को प्रभावित करेगी। • खुदरा आभूषण खरीदारों के लिए: घरेलू वायदा बाजार में सोना 1.50 लाख रुपये और चांदी 2.28 लाख रुपये के स्तर से नीचे आ गए हैं। त्योहारी और शादी के सीजन में खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए आभूषणों के दाम थोड़े नरम हो सकते हैं। • आयात कर और आभूषणों की लागत: जीएसटी काउंसिल 8 अक्टूबर को सरकारी एजेंसियों की टैक्स छूट खत्म करने पर विचार कर रही है। यदि सभी आयातकों के लिए 3 प्रतिशत का समान कर लागू होता है, तो भविष्य में बुलियन आयात की लागत में बदलाव आ सकता है। • लोन और ईएमआई पर असर: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। यदि रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें महंगी हो जाएंगी। • निवेशकों के पोर्टफोलियो पर प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दो महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। उच्च बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर के चलते कीमती धातुओं में अल्पावधि के दौरान उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की बिकवाली के पीछे कच्चे तेल में उछाल, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के कड़े नीतिगत रुख का संयुक्त दबाव रहा है। • कच्चे तेल में तेजी और ऊर्जा संकट: ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। मध्य पूर्व में तनाव के चलते ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमले और सऊदी-हूती संघर्ष से तेल आपूर्ति पर खतरे गहरा गए हैं। • अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का दबाव: अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.26 प्रतिशत के करीब बनी हुई है और साल में अब तक 110 आधार अंक चढ़ चुकी है। ऊंची बॉन्ड यील्ड बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने और चांदी के आकर्षण को घटा देती है। • केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों की चिंता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सितंबर मिनट्स और आरबीआई द्वारा 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की संभावना से बाजार सतर्क है। ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका से निवेशकों ने कीमती धातुओं में मुनाफावसूली की है। सवाल-जवाब 1. बुधवार को एमसीएक्स पर चांदी और सोने के भाव क्या रहे? एमसीएक्स पर चांदी 1,300 रुपये टूटकर 2,25,966 रुपये प्रति किलोग्राम और सोना 492 रुपये गिरकर 1,49,628 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। 2. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी के क्या दाम चल रहे हैं? अंतरराष्ट्रीय हाजिर सोना 0.50 प्रतिशत गिरकर 4,144 डॉलर प्रति औंस और हाजिर चांदी 1 प्रतिशत फिसलकर 60.86 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही, जो दो महीने का निचला स्तर है। 3. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल क्यों देखने को मिला? ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमले और सऊदी सेना व हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष के चलते डब्ल्यूटीआई 90 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। 4. आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक से क्या उम्मीद की जा रही है? बाजार का अनुमान है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि की घोषणा कर सकती है। 5. जीएसटी काउंसिल की 8 अक्टूबर की बैठक में सोने के संबंध में क्या प्रस्ताव है? जीएसटी काउंसिल एमएमटीसी और एसटीसी जैसी सरकारी एजेंसियों को मिलने वाली कर छूट खत्म कर सभी बैंकों व एजेंसियों के लिए 3 प्रतिशत का समान आयात कर ढांचा लागू करने पर विचार कर रही है। 6. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का मौजूदा स्तर क्या है? अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.26 प्रतिशत के आसपास है, जो हाल के 24 साल के उच्चतम स्तर 5.33 प्रतिशत से थोड़ी नीचे है। https://trendkia.com/money/mcx-para-sone-aura-chandi-men-bhari-giravata-kachche-tela-men-teji-aura-byaja-daron-ki-ashnka-se-phisali-kimati-dhatuen-44351 TrendKia — Har trend, sabse pehle.