मुरादाबाद में मोटे अनाज से बना पेरी-पेरी बिस्कुट हुआ लोकप्रिय, स्वाद के साथ सेहत का ख्याल उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित कृषि प्रशिक्षण केंद्र ने शत-प्रतिशत मिलेट्स और ज्वार से स्वादिष्ट पेरी-पेरी बिस्कुट तैयार किया है, जिसकी मांग दिल्ली और हरियाणा तक फैल चुकी है। पारंपरिक खान-पान और मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में एक नया प्रयोग सामने आया है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सौ फीसदी मिलेट्स से तैयार पेरी-पेरी बिस्कुट लोगों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है। मुंह में जाते ही घुल जाने वाला यह नमकीन स्नैक न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। मुरादाबाद मंडल के साथ-साथ अब दिल्ली, गुड़गांव और हरियाणा के तमाम इलाकों से भी इसकी लगातार मांग आ रही है। मसालेदार स्वाद और मोटे अनाज का अनोखा संगम मनोहरपुर में स्थित कृषि प्रशिक्षण केंद्र की पहल पर इस खास बिस्कुट को बाजार में उतारा गया है। संस्थान के सीईओ विकास कुमार के अनुसार, पेरी-पेरी मसाले का उपयोग ज्यादातर पोटैटो चिप्स और कुरकुरे जैसे तली-भुनी चीजों में किया जाता है। गहन शोध और कई परीक्षणों के बाद इस चटपटे मसाले को मिलेट्स के आटे में शामिल करने का फैसला किया गया। इस बिस्कुट के निर्माण में ज्वार का भी उचित मिश्रण किया गया है, जो इसके पोषण मूल्य को कई गुना बढ़ा देता है। बच्चों के खान-पान की आदतों को ध्यान में रखते हुए इसे कुरकुरे के एक पौष्टिक विकल्प के तौर पर भी ढाला गया है। इस वजह से अभिभावक इसे अपने बच्चों को नाश्ते के रूप में बिना किसी चिंता के दे पा रहे हैं। स्वाद के मामले में यह बड़ों की शाम की चाय के साथ भी पूरी तरह फिट बैठता है। कीमत, विभिन्न फ्लेवर और बाजार में पहुंच बाजार में मिलेट्स से बने यह बिस्कुट आलू के स्वाद समेत कई अन्य फ्लेवर में उतारे गए हैं, लेकिन ग्राहकों के बीच सबसे ज्यादा दीवानगी पेरी-पेरी फ्लेवर को लेकर देखी जा रही है। अगर कीमत की बात करें तो 200 ग्राम का एक डिब्बा 130 रुपये में उपलब्ध कराया गया है। किफायती दाम और गुणवत्ता के चलते दिल्ली-एनसीआर से लेकर हरियाणा के खुदरा बाजारों में इसकी नियमित खपत शुरू हो गई है। पाचन के लिए मुफीद और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा विकास कुमार ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक फाइबर होने की वजह से यह बिस्कुट पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। मैदे से बने पारंपरिक बिस्कुटों की तुलना में यह शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिलेट्स आधारित ऐसे उत्पादों की बढ़ती बिक्री से न केवल उपभोक्ताओं को स्वस्थ विकल्प मिल रहा है, बल्कि क्षेत्र के किसानों और नए उद्यमियों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। इसका आप पर असर इस उत्पाद की बढ़ती उपलब्धता उपभोक्ताओं को मैदे वाले स्नैक्स से हटाकर पौष्टिक मोटे अनाज की ओर लौटने का एक आसान रास्ता देती है। • भारत में: उपभोक्ता अपनी रोजमर्रा की चाय के साथ अत्यधिक तले-भुने स्नैक्स की जगह 100 प्रतिशत मिलेट्स युक्त विकल्पों को अपना सकते हैं। इससे पाचन संबंधी विकारों और जंक फूड पर निर्भरता को कम करने में व्यावहारिक मदद मिलती है। • मुरादाबाद में: मुरादाबाद मंडल और आसपास के किसान अब मोटे अनाज की खेती करके स्थानीय प्रसंस्करण केंद्रों से सीधे बेहतर दाम पा सकते हैं। नए फूड प्रोसेसिंग कारोबारियों के लिए भी क्षेत्रीय स्तर पर रोजगार और उत्पाद निर्माण के नए रास्ते खुल रहे हैं। • बजट पर असर: 200 ग्राम का पैकेट 130 रुपये में उपलब्ध होने से यह आम परिवार के मासिक नाश्ता बजट पर भारी पड़े बिना एक संतुलित स्नैक विकल्प देता है। इसे दिल्ली, गुड़गांव और हरियाणा के बाजारों से आसानी से खरीदा जा सकता है। • बच्चों की डाइट: माता-पिता बाजार में मिलने वाले अत्यधिक मसालेदार और तले हुए कुरकुरे के स्थान पर इस सुरक्षित स्नैक को बच्चों के टिफिन में शामिल कर सकते हैं। ज्वार और फाइबर से भरपूर होने के कारण यह बच्चों की ऊर्जा और सेहत दोनों को बनाए रखता है। ऐसा क्यों हुआ इस नए स्नैक का विकास पारंपरिक मोटे अनाज को आधुनिक स्वाद के साथ जोड़ने और बाजार में पौष्टिक विकल्पों की कमी को दूर करने के लिए किया गया है। • स्वाद और सेहत का संतुलन: आम तौर पर युवा और बच्चे पारंपरिक मोटे अनाज के सादे स्वाद को नापसंद करते हैं, इसलिए कृषि केंद्र ने लोकप्रिय पेरी-पेरी मसाले का प्रयोग किया। इस मसालेदार कोटिंग ने ज्वार और मिलेट्स को युवाओं के बीच तुरंत स्वीकार्य बना दिया। • मैदा और जंक फूड के विकल्प की खोज: आधुनिक जीवनशैली में तले-भुने चिप्स और पफ्स के अत्यधिक सेवन से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही थीं। केंद्र के शोध दल ने इन अस्वास्थ्यकर पैक्ड स्नैक्स का घरेलू और पोषण-युक्त विकल्प तैयार करने का लक्ष्य तय किया। • स्थानीय फसलों का मूल्य संवर्धन: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मोटे अनाज की पैदावार को उचित बाजार और खरीदार दिलाने के लिए प्रसंस्कृत उत्पादों की सख्त जरूरत थी। बिस्कुट निर्माण के जरिए किसानों की ज्वार की फसल को सीधे उच्च मूल्य वाले उपभोक्ता सामान में बदला गया। सवाल-जवाब 1. मुरादाबाद में बना यह मिलेट्स बिस्कुट किस सामग्री से तैयार किया गया है? यह बिस्कुट 100 प्रतिशत मिलेट्स और ज्वार के मिश्रण से तैयार किया गया है, जिसमें पेरी-पेरी मसाले का उपयोग हुआ है। 2. इस बिस्कुट के 200 ग्राम पैकेट की कीमत क्या है? इसके 200 ग्राम के डिब्बे की कीमत 130 रुपये तय की गई है। 3. पेरी-पेरी के अलावा यह और किन स्वादों में उपलब्ध है? यह बिस्कुट आलू के फ्लेवर सहित विभिन्न स्वादों में उपलब्ध है, हालांकि सबसे अधिक मांग पेरी-पेरी की ही है। 4. यह बिस्कुट स्वास्थ्य के लिए क्यों फायदेमंद माना जाता है? इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा मौजूद है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। 5. मुरादाबाद के अलावा यह बिस्कुट किन क्षेत्रों में लोकप्रिय हो रहा है? इस बिस्कुट की मांग दिल्ली, गुड़गांव, हरियाणा और मुरादाबाद मंडल के विभिन्न इलाकों में तेजी से बढ़ रही है। प्रेरणा और सबक मुरादाबाद कृषि प्रशिक्षण केंद्र की यह पहल दर्शाती है कि नवाचार और सही बाजार समझ के जरिए पारंपरिक खेती को आकर्षक व्यवसाय बनाया जा सकता है। • स्वाद को प्राथमिकता देना: केवल सेहत के नाम पर उत्पाद बेचने के बजाय उसमें आधुनिक स्वाद जोड़ना ग्राहकों को आकर्षित करने का सबसे कारगर तरीका है। पारंपरिक अनाजों को लोकप्रिय बनाने के लिए स्वाद की पसंद के अनुसार ढालना जरूरी है। • समस्या से समाधान निकालना: जंक फूड के आदी बच्चों को स्वस्थ विकल्प देना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे इस केंद्र ने उत्पाद के स्वरूप में बदलाव करके हल किया। किसी भी व्यापारिक सफलता की नींव उपभोक्ताओं की वास्तविक समस्या को सुलझाने में होती है। • स्थानीय संसाधनों का उपयोग: स्थानीय किसानों की ज्वार जैसी फसलों को सीधे प्रसंस्करण से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। क्षेत्रीय कच्चा माल सही दिशा में इस्तेमाल हो तो राष्ट्रीय स्तर का उत्पाद बन सकता है। https://trendkia.com/money/moradabad-men-mote-anaja-se-bana-peri-peri-biskuta-hua-lokapriya-svada-ke-satha-sehata-ka-khyala-49312 TrendKia — Har trend, sabse pehle.