# नई कर व्यवस्था में डेट म्यूचुअल फंड की कमाई पर 12 लाख रुपये की टैक्स छूट का गणित समझें

> नई कर व्यवस्था चुनने वाले निवेशकों के लिए डेट फंड का मुनाफा कुल आय में जुड़ता है, जिससे 12 लाख रुपये की सीमा पार होने पर भारी टैक्स देनदारी बन सकती है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/nai-kara-vyavastha-men-debt-mutual-fund-ki-kamai-para-12-lakha-rupaye-ki-tax-chhuta-ka-ganita-samajhen-36310 · **Language:** Hindi
**Tags:** डेट म्यूचुअल फंड, नई कर व्यवस्था, टैक्स रिबेट, धारा 87A, आयकर रिटर्न, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन

नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर मिलने वाली कर छूट को लेकर निवेशकों के बीच काफी उत्सुकता है। कई ऐसे करदाता जो बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी के सुरक्षित विकल्प के तौर पर डेट म्यूचुअल फंड का रुख करते हैं, वे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उनकी निवेश कमाई पर भी धारा 87A का यह लाभ मिल पाएगा। आयकर रिटर्न दाखिल करने से ठीक पहले इस नियम की बारीकियों को समझना बहुत आवश्यक है, ताकि किसी अनचाही वित्तीय देनदारी से बचा जा सके।

## डेट म्यूचुअल फंड पर कैसे तय होता है कर का नियम
नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए ऐसे सभी डेट म्यूचुअल फंड, जिनमें घरेलू इक्विटी की हिस्सेदारी 35% से कम रखी गई है, उनके कराधान में बड़ा बदलाव किया जा चुका है। इन फंड्स से होने वाले समस्त मुनाफे को अब शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स मानकर सीधे करदाता की सामान्य सालाना कमाई में जोड़ दिया जाता है। इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि इस मुनाफे पर कोई अलग से निर्धारित या रियायती टैक्स दर लागू नहीं होती, बल्कि यह रकम निवेशक के लागू टैक्स स्लैब के हिसाब से ही कर के दायरे में आती है।

## धारा 87A का लाभ कब और कैसे मिलेगा
चूंकि डेट फंड का पूंजीगत लाभ आपकी ग्रॉस टोटल इनकम यानी सकल कुल आय का ही एक हिस्सा बन जाता है, इसलिए कर छूट का आकलन पूरी कमाई को मिलाकर किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति की वेतन, व्यावसायिक कारोबार और डेट फंड से अर्जित पूंजीगत लाभ को जोड़कर कुल वार्षिक आय 12,00,000 रुपये या उससे कम रहती है, तो नई कर व्यवस्था के प्रावधानों के अनुसार धारा 87A के तहत पूरी छूट मिल जाती है। जब तक कुल आय इस 12 लाख रुपये के आंकड़े के भीतर सीमित है, तब तक डेट फंड के मुनाफे पर भी निवेशक को कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं भरना पड़ता।

## टैक्स ट्रैप से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
डेट फंड के निवेशकों को यहां एक विशेष कर जाल से सावधान रहने की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी व्यक्ति का वार्षिक वेतन 11,50,000 रुपये है और उसे चालू वित्त वर्ष के दौरान डेट फंड में किए गए निवेश से 60,000 रुपये का पूंजीगत मुनाफा प्राप्त हुआ। इन दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर उसकी कुल वार्षिक आमदनी 12,10,000 रुपये पर पहुंच जाती है। मात्र 10,000 रुपये से 12 लाख रुपये की सीमा पार होते ही करदाता धारा 87A के तहत मिलने वाले संपूर्ण रिबेट से वंचित हो जाता है। ऐसी परिस्थिति में केवल 12 लाख रुपये से अधिक वाले 10,000 रुपये पर ही कर नहीं लगता, बल्कि नई व्यवस्था के संबंधित स्लैब के आधार पर पूरी 12,10,000 रुपये की आय पर गणना करके टैक्स चुकाना पड़ता है।

## इसका आप पर असर
डेट फंड में निवेश करने वाले आम करदाताओं की वार्षिक टैक्स देनदारी पर इस सीमा का सीधा असर पड़ता है।

- **वेतनभोगी निवेशकों पर:** यदि आपकी सैलरी 11.5 लाख रुपये के आसपास है, तो डेट फंड से अतिरिक्त कमाई पर सावधानी बरतें। सीमा से थोड़ा भी ऊपर जाने पर पूरी आमदनी पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है।
- **एफडी बनाम डेट फंड चयन:** 12 लाख रुपये की सीमा के भीतर दोनों विकल्पों पर टैक्स स्लैब का समान प्रभाव रहेगा। अपनी कुल आय की पहले से गणना करके ही रिडेम्पशन का फैसला लें।
- **आयकर रिटर्न दाखिल करते समय:** आईटीआर में डेट फंड मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के रूप में दिखाना अनिवार्य है। गलत जानकारी देने से टैक्स नोटिस का जोखिम बन सकता है।
- **मुनाफा निकालने की योजना:** बड़े मुनाफे को एक ही वित्त वर्ष में बुक करने के बजाय अलग-अलग वर्षों में बांट सकते हैं। इससे आपकी कुल सालाना आय 12 लाख रुपये के दायरे में सीमित रह सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति 1 अप्रैल 2023 से लागू किए गए संशोधित कर प्रावधानों और नई कर व्यवस्था के रिबेट नियमों के संयोजन के कारण उत्पन्न हुई है।

- **कराधान नियमों में बदलाव:** 1 अप्रैल 2023 से 35% से कम घरेलू इक्विटी वाले डेट फंड्स से इंडेक्सेशन का लाभ समाप्त कर दिया गया। इसके चलते इनका समस्त लाभ सामान्य अल्पकालिक पूंजीगत लाभ बन गया।
- **सकल आय का निर्धारण:** डेट फंड का मुनाफा निवेशक की नियमित आय में जुड़ने के कारण अलग श्रेणी में नहीं रहता। इस वजह से यह निवेशक की ग्रॉस टोटल इनकम को सीधे बढ़ा देता है।
- **धारा 87A की सीमा का प्रभाव:** नई व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये की सीमा पार होते ही रिबेट पूरी तरह शून्य हो जाता है। इसी कारण सीमा पार करने पर मामूली अतिरिक्त कमाई भारी टैक्स देनदारी में बदल जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या नई कर व्यवस्था में डेट फंड से हुई कमाई पर 12 लाख रुपये का रिबेट मिलता है?
हां, यदि वेतन और डेट फंड के लाभ सहित आपकी कुल सालाना आय 12,00,000 रुपये या उससे कम है, तो धारा 87A के तहत पूरा रिबेट मिलता है।

### 2. 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट फंड पर टैक्स कैसे लगता है?
जिन डेट फंड्स में घरेलू इक्विटी 35% से कम है, उनका मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन मानकर आपकी कुल आय में जोड़ दिया जाता है और स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।

### 3. यदि कुल कमाई 12 लाख रुपये से थोड़ी भी अधिक हो जाए तो क्या होगा?
यदि आपकी कुल आय 12 लाख रुपये की सीमा को पार कर जाती है, तो धारा 87A का रिबेट समाप्त हो जाएगा और पूरी आय पर स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ेगा।

### 4. क्या डेट फंड के मुनाफे पर कोई फिक्स टैक्स दर लागू होती है?
नहीं, 1 अप्रैल 2023 के बाद के निवेश पर कोई अलग या फिक्स दर नहीं है, यह सीधे आपके व्यक्तिगत टैक्स स्लैब पर आधारित होता है।

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