# नवरात्रि 2026 पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की उपासना: पीला रंग, पूजन विधान, मंत्र और विशेष शुभकामनाएं

> नवरात्रि के पांचवें दिन ममतामयी मां स्कंदमाता की पूजा पीले वस्त्र और पीले पुष्पों के साथ की जाती है। जानिए इस पावन तिथि का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, मंत्र और प्रियजनों को भेजने के लिए शुभकामना संदेश।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/navratri-2026-panchami-tithi-par-maa-skandamata-ki-upasana-peela-rang-pujan-vidhan-mantra-aur-vishesh-shubhkaamnayein-47683 · **Language:** Hindi
**Tags:** नवरात्रि 2026, मां स्कंदमाता, नवरात्रि पांचवां दिन, स्कंदमाता पूजा विधि, नवरात्रि पीला रंग, स्कंदमाता मंत्र, नवरात्रि शुभकामनाएं

शारदीय नवरात्र पर्व के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप देवी स्कंदमाता के पूजन की परंपरा निभाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की जननी होने के कारण जगदंबा को स्कंदमाता नाम से संबोधित किया जाता है। देवी का यह रूप मातृत्व, निष्काम स्नेह, रक्षा और ज्ञान का साक्षात प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर घरों और देवालयों में श्रद्धालु विशेष उत्साह के साथ उपासना में लीन रहते हैं, ताकि जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति हो सके।

## देवी स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप और आध्यात्मिक महत्व
मां स्कंदमाता के अलौकिक विग्रह की बात करें तो वे अपनी गोद में बाल रूप में भगवान स्कंद को धारण किए हुए दर्शन देती हैं। सिंह पर सवार होने के साथ ही देवी कमल के पुष्प पर भी विराजती हैं, इसी कारण उन्हें पद्मासना देवी अथवा पद्मासिनी नाम से भी पुकारा जाता है। देवी का यह ममतामयी स्वरूप सत्य, सजगता, संवाद, निष्काम प्रेम और मार्गदर्शन का संचार करता है। भक्त जब निष्कपट भाव से उनकी आराधना करते हैं, तब उन्हें मां की असीम अनुकंपा, बुद्धिबल, वैभव और आध्यात्मिक शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

## पंचमी का शुभ रंग: पीला और इसका धार्मिक भाव
नवरात्रि के पांचवें दिन के लिए पीला रंग निर्धारित है। भारतीय सनातन परंपरा में पीला रंग समृद्धि, उल्लास, आध्यात्मिक ज्ञान और प्रकाश का परिचायक माना गया है। पंचमी के दिन श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करके पूजा अर्चना करते हैं। इसके अतिरिक्त देवी के पूजा स्थल को पीले गेंदे के फूलों से सजाने और नैवेद्य के रूप में पीले रंग के मिष्ठान्न अर्पित करने का विधान है, जिससे वातावरण में सात्विक ऊर्जा का संचार होता है।

## पंचमी पूजन की चरणबद्ध विधि और अर्पण
नवरात्रि के पांचवें दिन की पूजा विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन किया जाता है

- **शुद्ध वस्त्र धारण:** पंचमी तिथि के शुभ रंग के अनुसार प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनें।
- **वेदी की स्वच्छता:** पूजा स्थल को भलीभांति स्वच्छ करें और ताजे फूलों से वेदी को अलंकृत करें।
- **प्रतिमा स्थापना एवं शृंगार:** मां स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र को चौकी पर स्थापित करें और उन्हें पीले अथवा अनुकूल वस्त्र अर्पित करें।
- **दीप एवं संकल्प:** शुद्ध गाय के घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें। इसके उपरांत अक्षत, पुष्प हाथ में लेकर पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की पूजा का सरल संकल्प लें।
- **भोग एवं नैवेद्य:** पंचामृत, ताजे फल और शुद्ध मिठाइयों का भोग अर्पित करें।
- **मंत्र जप एवं आरती:** श्रद्धापूर्वक मां स्कंदमाता के पवित्र मंत्र का जाप करें, आरती उतारें, भक्तिमय भजनों का गायन करें और अंत में परिजनों व उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरित करें।

## मां स्कंदमाता का सिद्ध मंत्र
पूजा के दौरान देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए इस बीज रूपी श्लोक का स्मरण किया जाता है

> ## ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

## पंचमी तिथि पर अपनों को भेजने के लिए पावन शुभकामनाएं
नवरात्रि के पांचवें दिन मित्रों और परिजनों को मंगलकामनाएं प्रेषित करने के लिए कुछ चुनिंदा संदेश इस प्रकार हैं

- शुभ नवरात्रि पंचमी! मां स्कंदमाता आपके समस्त जीवन को सुख, शांति, संपन्नता और अखंड वरदानों से परिपूर्ण करें। जय माता दी!
- मां स्कंदमाता आपके मार्ग की हर बाधा दूर करें और आपको सफलता, आत्मबल व सच्चा आनंद प्रदान करें। शुभ पंचमी!
- नवरात्रि के इस पावन पंचम दिवस पर देवी आपके संपूर्ण परिवार को उत्तम स्वास्थ्य, सद्भाव और प्रचुरता का आशीर्वाद दें।
- मां स्कंदमाता की दिव्य कृपा से आपके जीवन में नई आशाओं, सकारात्मक ऊर्जा और सुंदर आरंभ का आगमन हो।
- जगदंबा का मातृवत स्नेह आपको हर संकट से सुरक्षित रखे और आपके अंतःकरण में भक्ति व साहस का संचार करे।
- आपके सभी शुभ संकल्प साकार हों, परिश्रम फलदायी बने और मां स्कंदमाता की कृपा से जीवन प्रकाशित रहे।
- नवरात्रि के पांचवें दिन की हार्दिक बधाई! आपके गृह में आनंद, मन में दृढ़ आस्था और जीवन में समृद्धि का वास हो।
- मां स्कंदमाता आपको प्रज्ञा, धैर्य, आंतरिक शक्ति और जीवन की चुनौतियों पर विजय पाने का सामर्थ्य प्रदान करें।
- देवी का पावन अनुग्रह आपके चित्त में शांति, रिश्तों में मिठास और प्रत्येक क्षण में उल्लास भर दे।
- मां स्कंदमाता आपके बच्चों और समूचे परिवार पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और सभी को सदैव निरोगी व प्रसन्न रखें।
- हर प्रभात नई संभावनाएं लेकर आए, हर प्रार्थना में विश्वास हो और हर कदम मां के आशीष से प्रगति की ओर बढ़े।
- इस पुनीत अवसर पर मां स्कंदमाता आपके जीवन में आध्यात्मिक उत्थान, सकारात्मक विचार और असीम खुशियां भरें।
- आपके समस्त कष्ट तिरोहित हों और मां स्कंदमाता के वरदान से आपका जीवन कमल पुष्प की भांति प्रफुल्लित रहे।
- मां स्कंदमाता आपको धन, शांति, सौभाग्य और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए आध्यात्मिक शक्ति दें।
- जय मां स्कंदमाता! ममतामयी मां सदैव आपको अपनी वात्सल्यमयी छत्रछाया में रखें और भक्ति, सफलता व परमानंद से संपन्न जीवन दें। शुभ नवरात्रि!

## इसका आप पर असर
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना और पीले रंग का उपयोग श्रद्धालुओं के मानसिक संतुलन, पारिवारिक सद्भाव और आध्यात्मिक अनुशासन को सुदृढ़ करता है।

- **आध्यात्मिक अनुशासन:** पंचमी के दिन अनुशासित दिनचर्या का पालन करने से मानसिक तनाव दूर होता है। श्रद्धालु नियमित पूजा और सात्विक आहार के जरिए आंतरिक शांति का अनुभव कर सकते हैं।
- **पारिवारिक सामंजस्य:** मां स्कंदमाता मातृत्व और वात्सल्य की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। घर में सामूहिक रूप से पूजा करने और बच्चों के कल्याण की प्रार्थना करने से पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आती है।
- **सकारात्मक मनोभाव:** पीले वस्त्र और पीले पुष्पों का उपयोग वातावरण में ताजगी और उत्साह भरता है। रंग चिकित्सा और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पीला रंग मानसिक ऊर्जा और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
- **सामाजिक सौहार्द:** पंचमी तिथि पर शुभकामनाएं और प्रसाद बांटने की परंपरा सामाजिक संपर्क को मजबूत करती है। इससे मित्रों और रिश्तेदारों के बीच परस्पर प्रेम और सहयोग की भावना का विकास होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विधान पौराणिक आख्यानों और सनातन परंपरा के नवदुर्गा क्रम पर आधारित है।

- **पौराणिक पृष्ठभूमि:** भगवान कार्तिकेय (स्कंद) के तारकासुर वध हेतु जन्म लेने के उपरांत देवी ने उन्हें अपनी गोद में धारण कर वात्सल्य का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी मातृत्व स्वरूप का स्मरण करने के लिए पंचमी तिथि उनकी आराधना हेतु समर्पित की गई।
- **नवदुर्गा का क्रमबद्ध विधान:** शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा और कूष्मांडा की उपासना के बाद पंचमी तिथि को साधक का चित्त विशुद्ध चक्र में प्रवेश करता है। इस अवस्था में साधक को ज्ञान, विवेक और सत्य वाणी की आवश्यकता होती है, जो स्कंदमाता प्रदान करती हैं।
- **पीले रंग की तात्विक महत्ता:** पीला रंग ज्ञान, प्रकाश, बुद्धि और देवगुरु बृहस्पति का प्रतीक माना जाता है। देवी स्कंदमाता ज्ञान और ममता दोनों की दाता हैं, इसलिए उनकी पूजा में पीले रंग का प्रयोग विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. नवरात्रि के पांचवें दिन किस देवी की पूजा की जाती है?
नवरात्रि की पंचमी तिथि पर मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है।

### 2. नवरात्रि के 5वें दिन का शुभ रंग कौन सा है?
इस दिन का शुभ रंग पीला है, जो सुख, समृद्धि, प्रकाश और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

### 3. देवी को स्कंदमाता और पद्मासना क्यों कहा जाता है?
भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण वे स्कंदमाता कहलाती हैं और कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण उन्हें पद्मासना कहा जाता है।

### 4. मां स्कंदमाता की पूजा का प्रमुख मंत्र क्या है?
मां स्कंदमाता का सरल और प्रभावशाली मंत्र 'ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः' है।

### 5. पंचमी पूजा में देवी को क्या भोग लगाना चाहिए?
पंचमी तिथि पर देवी को पंचामृत, ताजे फल और विशेष रूप से पीले रंग की मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है।

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