नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापारिक बाधाएं हटाने का दिया नया फार्मूला भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने व्यापार को सुगम बनाने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस त्रि-आयामी रोडमैप पेश किया है। अपनी चौथी अध्यक्षता के तहत, भारत 12 से 13 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में ऐतिहासिक 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का यह महत्वपूर्ण जमावड़ा वैश्विक व्यापार और कूटनीति के लिए एक बेहद नाजुक समय पर हो रहा है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शिखर सम्मेलन के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी दिशा तय की है, जिसमें सदस्य देशों के बीच कहीं अधिक मजबूत और व्यापक आर्थिक एकीकरण की वकालत की गई है। वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में इस समूह के विशाल सामूहिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए, भारतीय नेता ने सदस्य देशों की प्रगति की वार्षिक समीक्षा करने के लिए एक त्रि-आयामी ढांचा पेश किया है, ताकि केवल बयानों तक सीमित न रहकर धरातल पर ठोस कार्रवाई की जा सके। समुद्री सुरक्षा और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार के विस्तार, निरंतर आर्थिक विकास और सुरक्षित समुद्री मार्गों की अत्यधिक आवश्यकता के बीच सीधा संबंध स्थापित किया। यह चेतावनी विशेष रूप से प्रासंगिक है क्योंकि फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग बाधित हो रहे हैं। इस क्षेत्रीय संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा और माल परिवहन बाजारों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे यह साबित होता है कि आर्थिक विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को समुद्री मार्गों की सुरक्षा से अलग नहीं किया जा सकता। इन समुद्री खतरों पर बात करते हुए, भारतीय प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उभरते हुए देशों को अपने व्यापारिक नेटवर्क को बाहरी भू-राजनीतिक झटकों से बचाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। पीएम मोदी की तीन सूत्रीय ठोस कार्ययोजना इस ब्लॉक की भविष्य की वृद्धि को सही दिशा देने के लिए, पीएम मोदी ने ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के सामने एक स्पष्ट और ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने परिषद से तीन मुख्य प्रस्तावों पर काम करने का आग्रह किया। पहला, उन्होंने सदस्य देशों के बीच व्यापार को बाधित करने वाली शीर्ष 10 व्यापारिक बाधाओं की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा। दूसरा, उन्होंने प्रतिवर्ष 100 ब्रिक्स स्टार्टअप्स को एक-दूसरे के देशों के बाजारों में अपने पैर जमाने और विस्तार करने के लिए समर्थन देने का सुझाव दिया। तीसरा, उन्होंने सदस्य देशों के व्यवसायों के बीच 1,000 नई साझेदारियां स्थापित करने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने प्रस्ताव दिया कि इन तीनों पैमानों पर प्रगति की हर साल समीक्षा की जानी चाहिए ताकि सदस्य देश अपने लक्ष्यों के प्रति गंभीर रहें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि यह समूह दुनिया की 50 प्रतिशत मानवता और 40 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे इसकी महत्ता स्वतः सिद्ध हो जाती है। ब्रिक्स बिजनेस फोरम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा से 'मेक इन इंडिया, इनोवेट विद इंडिया, स्केल फॉर द वर्ल्ड' का रहा है। उन्होंने अगले दशक को पूरी तरह से काम और धरातल पर परिणाम लाने का समय बनाने का संदेश दिया। वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ता आर्थिक कद और जी7 से तुलना इस गठबंधन के भू-राजनीतिक और आर्थिक महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस समूह की बढ़ती ताकत की पुष्टि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयानों से भी होती है। शिखर सम्मेलन में शामिल रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों की तीखी आलोचना की और इसे जबरन आर्थिक दबाव करार दिया। पुतिन ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया के कुल GDP का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ब्रिक्स देशों द्वारा उत्पादित किया गया है, जबकि तथाकथित जी7 (G7) देशों का योगदान केवल 29 प्रतिशत पर सिमट गया है। आर्थिक शक्ति का यह बदलता संतुलन वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में उभरते बाजारों के बढ़ते दबदबे को दर्शाता है, जो पुरानी आर्थिक प्रणालियों को चुनौती दे रहा है। भारत-रूस और भारत-ईरान के बीच द्विपक्षीय विमर्श बहुपक्षीय चर्चाओं से परे, इस शिखर सम्मेलन ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का भी एक बेहतरीन अवसर प्रदान किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी लगातार नई गति पकड़ रही है। उन्होंने नई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ औद्योगिक प्रदर्शनी इनोप्रोम में दोनों देशों की कंपनियों की भागीदारी का उल्लेख किया। मोदी के अनुसार, यह संयुक्त प्रयास नई दिल्ली और मॉस्को के बीच तकनीकी, विनिर्माण और औद्योगिक व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़ते भरोसे और गहराते व्यापारिक संबंधों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसी तरह, शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने नई दिल्ली में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने और दीर्घकालिक व दोनों देशों के लिए फायदेमंद रणनीति के साथ आगे बढ़ने पर चर्चा की। ईरान की भौगोलिक स्थिति और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे क्षेत्रीय मार्गों में उसकी भूमिका को देखते हुए यह बातचीत बेहद महत्वपूर्ण है। मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और अस्थिर वैश्विक माहौल के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और व्यापारिक सुगमता का भविष्य विकासशील देशों जैसे भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में तकनीकी उद्यमिता रोजगार सृजन और आर्थिक परिवर्तन का एक बड़ा जरिया है। हालांकि, अलग-अलग विनियामक बाधाओं और स्थानीय नेटवर्क की कमी के कारण स्टार्टअप्स के लिए दूसरे देशों में विस्तार करना कठिन होता है। एक समर्पित ब्रिक्स स्टार्टअप कॉरिडोर स्थापित होने से युवा कंपनियों को सीधे मदद मिलेगी और भारतीय फिनटेक या ब्राजीलियाई एग्रीटेक कंपनियां दक्षिण अफ्रीका, रूस या चीन में आसानी से पैर पसार सकेंगी। इसी तरह, शीर्ष 10 व्यापारिक बाधाओं की पहचान करने से सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और एक साझा डिजिटल व्यापार पोर्टल बनाने में मदद मिलेगी, जिससे सदस्य देशों के बीच व्यापार की लागत काफी कम हो जाएगी। ग्लोबल साउथ के लिए भारत का दृष्टिकोण वर्ष 2026 में भारत चौथी बार ब्रिक्स फोरम की अध्यक्षता कर रहा है। "लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण" के मुख्य विषय के साथ, भारत की अध्यक्षता का ध्यान पहले से हासिल उपलब्धियों को मजबूत करने और समूह की संस्थागत प्रभावशीलता को बढ़ाने पर केंद्रित है। इस एजेंडे के तहत, भारत ग्लोबल साउथ की विकासपरक, तकनीकी और वित्तीय आकांक्षाओं को मुखरता से उठा रहा है। व्यावहारिक समाधानों और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देकर, भारत इस समूह को एक मजबूत और समाधान-उन्मुख मंच के रूप में स्थापित करना चाहता है जो विश्व मंच पर विकासशील देशों को नई पहचान दिला सके। इसका आप पर असर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के परिणाम सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार पैटर्न, प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र और भू-राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करेंगे, जिससे अंततः आम उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं की कीमतें और निवेश का माहौल प्रभावित होता है। - भारत में: स्टार्टअप्स के सीमा पार विस्तार पर जोर देने का मतलब है कि भारतीय तकनीकी उद्यमियों के लिए अपने व्यवसायों को रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बाजारों में फैलाना काफी आसान हो जाएगा। इस खुले कॉरिडोर से भारत के स्टार्टअप क्षेत्र में उच्च-मूल्य वाली नौकरियों के सृजन और विदेशी निवेश में वृद्धि होने की उम्मीद है। - नई दिल्ली में: इस हाई-प्रोफाइल शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने से देश की राजधानी वैश्विक कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक सम्मेलनों के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित होगी। दिल्ली के स्थानीय होटल, पर्यटन और परिवहन क्षेत्रों को वैश्विक प्रतिनिधिमंडलों के आगमन से तात्कालिक आर्थिक लाभ मिलेगा। - निवेशकों के लिए: व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन को बढ़ावा देने के प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए मुद्रा के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो सकता है। विनिर्माण और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में निवेश करने वाले लोगों को आने वाले समय में बेहतर मुनाफे की उम्मीद हो सकती है क्योंकि व्यापारिक मार्ग सुरक्षित होंगे और कागजी कार्रवाई आसान होगी। ऐसा क्यों हुआ ब्रिक्स देशों के भीतर मजबूत आर्थिक एकीकरण और व्यापारिक बाधाओं को कम करने का यह प्रयास बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों और बढ़ते भू-राजनीतिक संकटों का नतीजा है। - महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में भू-राजनीतिक तनाव: फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्षों ने समुद्री जहाजों के आवागमन को गंभीर रूप से असुरक्षित बना दिया है। इस अस्थिरता ने नेताओं को मजबूर किया कि वे सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को आपूर्ति श्रृंखला के संकट से बचाने के लिए व्यापार को सीधे समुद्री सुरक्षा से जोड़ें। - पश्चिमी देशों का आर्थिक दबाव और प्रतिबंध: रूस जैसे सदस्य देशों पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों ने इस ब्लॉक को वैकल्पिक वित्तीय प्रणाली विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। आंतरिक व्यापारिक बाधाओं को हटाकर और स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा देकर सदस्य देश खुद को बाहरी आर्थिक दबावों से सुरक्षित रखना चाहते हैं। - ग्लोबल साउथ का उभरता प्रभाव: वैश्विक GDP में ब्रिक्स देशों का योगदान 40% से अधिक हो गया है, जबकि G7 देशों का योगदान सिमटकर 29% रह गया है। इस आर्थिक बढ़त को देखते हुए यह ब्लॉक वैश्विक नीति-निर्माण में अपनी आवाज को और मजबूत करना चाहता है, जिसे भारत अपनी 2026 की अध्यक्षता के तहत व्यावहारिक लक्ष्यों में बदल रहा है। सवाल-जवाब 1. 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कब और कहां आयोजित किया जा रहा है? 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत द्वारा नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर 2026 तक की जा रही है। 2. पीएम मोदी ने ब्रिक्स के लिए कौन से तीन मुख्य लक्ष्य प्रस्तावित किए हैं? पीएम मोदी ने शीर्ष 10 व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की रिपोर्ट तैयार करने, हर साल 100 स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और 1,000 नई व्यावसायिक साझेदारियां बनाने का प्रस्ताव दिया है। 3. वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स समूह का कितना योगदान है? ब्रिक्स समूह दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और पिछले पांच वर्षों में वैश्विक GDP में इसकी हिस्सेदारी 40% से अधिक रही है। 4. शिखर सम्मेलन में फारस की खाड़ी की सुरक्षा को लेकर चिंता क्यों जताई गई? फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापारिक मार्ग बाधित हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और आर्थिक विकास को प्रभावित करता है। 5. वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय (थीम) क्या है? भारत की अध्यक्षता का मुख्य विषय 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण' (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) है। https://trendkia.com/money/new-delhi-men-18ven-brics-shikhara-sammelana-ka-agaza-pradhanamntri-narendra-modi-ne-vyaparika-badhaen-hatane-ka-diya-naya-pharmul-31355 TrendKia — Har trend, sabse pehle.