# निचले स्तरों के पास सुजलॉन एनर्जी में बड़ा मौका, ब्रोकरेज ने दिया 65 रुपये का नया लक्ष्य

> सालाना आधार पर 26 प्रतिशत तक फिसलने के बाद सुजलॉन एनर्जी पर ब्रोकरेज हाउस ने भरोसा जताया है। मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ती मांग के दम पर शेयर में 73 प्रतिशत तक की संभावित उछाल का अनुमान लगाया गया है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/nichale-staron-ke-pasa-suzlon-energy-men-bara-mauka-brokareja-ne-diya-65-rupaye-ka-naya-lakshya-47420 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुजलॉन एनर्जी, शेयर बाजार, मोतीलाल ओसवाल, विंड एनर्जी, अक्षय ऊर्जा, स्टॉक मार्केट

घरेलू शेयर बाजारों में लंबी गिरावट से जूझ रहे शेयरों में अक्सर खुदरा निवेशकों का रुझान कम होने लगता है, मगर स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड के मामले में बाजार विश्लेषक बिल्कुल उलट राय रख रहे हैं। पूरे एक साल के दौरान इस काउंटर में 26 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की जा चुकी है, जिसके बाद यह अपने 52 हफ्तों के सबसे निचले स्तर 36.31 रुपये के काफी करीब पहुंच गया। हालिया सत्र में स्टॉक लगभग डेढ़ प्रतिशत सुधरकर 40.19 रुपये के भाव पर दर्ज किया गया। इस तेज गिरावट के बावजूद ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी की विकास संभावनाओं को बेहद मजबूत माना है और मौजूदा भाव से इसमें 73 प्रतिशत तक की भारी बढ़त आने का अनुमान पेश किया है।

## ब्रोकरेज की खरीदारी राय और 65 रुपये का भाव
मोतीलाल ओसवाल ने इस रिन्यूएबल ऊर्जा शेयर पर अपना सकारात्मक रुख कायम रखा है। ब्रोकरेज हाउस ने स्टॉक के लिए 'Buy' रेटिंग को बरकरार रखते हुए 65 रुपये का नया मूल्य लक्ष्य निर्धारित किया है। सिर्फ एक फर्म ही इस कंपनी पर आशावादी नहीं है, बल्कि बाजार के व्यापक आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं। इस शेयर पर लगातार नजर रखने वाले 12 बड़े विश्लेषकों में से 10 विशेषज्ञों ने इसे खरीदने यानी 'Buy' की सलाह दी है, जबकि शेष 2 जानकारों ने 'Hold' रुख अपनाने को कहा है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस काउंटर को ट्रैक करने वाले किसी भी विश्लेषक ने निवेशकों को बिकवाली यानी 'Sell' की संस्तुति नहीं दी है।

## हालिया करेक्शन के बाद आकर्षक मूल्यांकन
विगत तीन महीनों की अवधि में इस ऊर्जा शेयर की कीमतों में करीब 31 प्रतिशत की तीखी गिरावट देखी गई है। वहीं कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक का हिसाब लगाएं तो स्टॉक लगभग 24 प्रतिशत कमजोर पड़ चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बिकवाली के दबाव ने शेयर के वैल्यूएशन को काफी आकर्षक स्तर पर ला खड़ा किया है। मौजूदा दौर में यह कंपनी वित्त वर्ष 2028 की संभावित प्रति शेयर आय (EPS) के मात्र 17.5 गुना पर ट्रेड कर रही है, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत लगभग 22 गुना रहा है। कंपनी के कारोबारी ढांचे को देखें तो उसकी कुल कमाई का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान बनता है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2027 के दूसरे छह महीनों में डिलीवरी 1.2 गीगावॉट से बढ़कर 2.1 गीगावॉट तक पहुंचने का आकलन किया गया है।

## 5.9 गीगावॉट की ऑर्डर बुक और आय की स्थिरता
स्टॉक के फंडामेंटल्स को सहारा देने वाला सबसे अहम आधार कंपनी का मजबूत वर्क ऑर्डर पोर्टफोलियो है। जून में समाप्त हुई तिमाही तक कंपनी के पास 5.9 गीगावॉट क्षमता के ठोस और पक्के ऑर्डर मौजूद थे। ऑर्डर का यह विशाल आकार वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक की परियोजनाओं की आपूर्ति के लिए 100 प्रतिशत तक राजस्व की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से लेकर वित्त वर्ष 2028 के बीच कंपनी का परिचालन मुनाफा यानी EBITDA 22 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) की गति से विस्तार कर सकता है।

## बिजली की खपत में बदलाव और स्वच्छ ऊर्जा की रफ्तार
देशभर में पावर ग्रिड पर ऊर्जा खपत के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। शाम के समय जब बिजली की मांग अपने चरम पर होती है, तब हाजिर बाजार में ऊंची कीमतों के कारण पवन व सौर हाइब्रिड मॉडल और स्थिर व निरंतर आपूर्ति देने वाले अक्षय ऊर्जा संयंत्रों की उपयोगिता बढ़ गई है। चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में देश के भीतर 3 गीगावॉट पवन ऊर्जा क्षमता ग्रिड से जोड़ी जा चुकी है। उम्मीद जताई गई है कि बाकी बचे छह महीनों में 4.5 गीगावॉट अतिरिक्त क्षमता का विस्तार होगा। पवन टर्बाइन बनाने वाली अग्रणी घरेलू इकाई होने के नाते इस पूरी नई क्षमता स्थापना का सीधा फायदा कंपनी की ऑर्डर बुक में जुड़ना तय माना जा रहा है।

## विकास को गति देने वाले तीन प्रमुख कारक
आने वाले समय में कंपनी के कारोबार को विस्तार देने के लिए तीन बड़े माध्यम चिन्हित किए गए हैं। पहला इंजन कंपनी का नया 'डेवकॉ' ढांचा है, जिसके माध्यम से केवल चार महीनों के अल्प समय में ही 600 मेगावाट से अधिक क्षमता के अनुबंध हासिल किए जा चुके हैं। दूसरा अवसर विदेशी बाजारों से जुड़ा है, जहां ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे विकसित क्षेत्रों में टर्बाइन निर्यात के नए रास्ते खुल रहे हैं। तीसरा सबसे व्यापक बदलाव 'रीपावरिंग' के मोर्चे पर आना है। देश भर में लगभग 10 से 20 साल पुरानी पड़ चुकी पुरानी टर्बाइनों को आधुनिक और अधिक क्षमता वाले उपकरणों से बदला जाना है। इस रीपावरिंग प्रक्रिया से चालू वित्त वर्ष की समाप्ति तक कंपनी को बड़े पैमाने पर नए कार्य आदेश मिलने की संभावना जताई गई है।

## इसका आप पर असर
सुजलॉन एनर्जी के शेयर में आई हालिया गिरावट और विश्लेषकों के सकारात्मक रुख से निवेशकों के लिए नए अवसर और जोखिम के पहलू सामने आए हैं।

- **शेयरधारकों के लिए:** पिछले तीन महीनों में 31 प्रतिशत तक नुकसान झेल चुके मौजूदा निवेशकों को रिकवरी की उम्मीद बंधती दिख रही है। ब्रोकरेज का 65 रुपये का लक्ष्य मौजूदा 40.19 रुपये के भाव से लगभग 73 प्रतिशत की संभावित बढ़त का संकेत देता है।
- **नए खरीदारों के लिए:** ऐतिहासिक स्तरों के मुकाबले शेयर 17.5 गुना के पीई मल्टीपल पर उपलब्ध है, जो इसके औसत 22 गुना से सस्ता है। 52-वीक लो 36.31 रुपये के करीब होने से जोखिम और लाभ का अनुपात अनुकूल प्रतीत होता है।
- **अक्षय ऊर्जा क्षेत्र पर प्रभाव:** देश में पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार से उपकरण निर्माताओं को लगातार काम मिल रहा है। दूसरी छमाही में 4.5 गीगावॉट अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की संभावना से सप्लाई चेन की अन्य कंपनियों को भी लाभ पहुंचेगा।
- **पुराने संयंत्रों का आधुनिकीकरण:** 10 से 20 साल पुरानी टर्बाइनों के रीपावरिंग अभियान से ऊर्जा उत्पादन की दक्षता में सुधार होगा। इससे ग्रिड को पीक आवर्स के दौरान अधिक स्थिर और स्वच्छ बिजली प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
सुजलॉन एनर्जी के शेयर में आई तीव्र गिरावट और उसके बाद ब्रोकरेज की ओर से आई मजबूत खरीदारी की सलाह के पीछे मूल्यांकन, ऑर्डर फ्लो और उद्योग के रुझान जुड़े हैं।

- **शेयर में तेज गिरावट की वजह:** मुनाफावसूली और बाजार के व्यापक उतार-चढ़ाव के कारण तीन महीनों में स्टॉक में 31 प्रतिशत और सालभर में 26 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। इस तीव्र बिकवाली के चलते शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर 36.31 रुपये के बेहद नजदीक आ गया।
- **ब्रोकरेज के बुलिश रुख का कारण:** कंपनी की 5.9 गीगावॉट की मजबूत ऑर्डर बुक ने वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक राजस्व की स्पष्टता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त वित्त वर्ष 2026 से 2028 के दौरान एबिटा में 22 प्रतिशत सीएजीआर की वृद्धि की संभावना ने मूल्यांकन को आकर्षक बना दिया है।
- **क्षेत्रीय मांग में वृद्धि:** शाम के पीक समय में बिजली की भारी खपत और मजबूत स्पॉट दरों के कारण हाइब्रिड और निरंतर चलने वाले अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ी है। पहले छह महीनों में 3 गीगावॉट क्षमता जोड़ी गई और बाकी छह महीनों में 4.5 गीगावॉट और जुड़ने का अनुमान है।
- **भविष्य के नए विकास इंजन:** कंपनी के नए डेवकॉ मॉडल के तहत 600 मेगावाट से अधिक के ऑर्डर मिले हैं और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के अवसर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा 10 से 20 वर्ष पुरानी टर्बाइनों को रीपावर करने के अभियान से नए ऑर्डर मिलने की संभावना है।

## सवाल-जवाब

### 1. मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन एनर्जी के लिए क्या टारगेट प्राइस दिया है?
ब्रोकरेज फर्म ने शेयर पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखते हुए 65 रुपये का नया लक्ष्य मूल्य तय किया है।

### 2. सुजलॉन का 52-वीक लो क्या है और यह शेयर किस भाव पर ट्रेड कर रहा है?
शेयर का 52-हफ्ते का निचला स्तर 36.31 रुपये है, जबकि हालिया सत्र में यह 40.19 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।

### 3. कंपनी के पास कुल कितनी क्षमता की ऑर्डर बुक है?
जून तिमाही की समाप्ति तक कंपनी के पास 5.9 गीगावॉट क्षमता के पुख्ता ऑर्डर मौजूद थे।

### 4. चालू वित्त वर्ष में देश में कितनी पवन ऊर्जा क्षमता जुड़ने की संभावना है?
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 3 गीगावॉट क्षमता जोड़ी गई है और दूसरी छमाही में 4.5 गीगावॉट और जुड़ने की उम्मीद है।

### 5. शेयर को ट्रैक करने वाले विश्लेषकों की क्या राय है?
कुल 12 प्रमुख विश्लेषकों में से 10 ने खरीदारी और 2 ने होल्ड करने की सलाह दी है, जबकि किसी ने भी बिकवाली की राय नहीं दी है।

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